बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 47

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

भजन की शुरुआत ही ताली और जयजयकार से होती है: "हे देश-देश के सब लोगों, तालियाँ बजाओ!" यह किसी मंदिर-कोने की धीमी प्रार्थना नहीं, बल्कि राज्याभिषेक का शोर है। कवि कहता है कि यहोवा केवल इस्राएल का नहीं, "सारी पृथ्वी के ऊपर महाराजा है"; उन्होंने ही अपने लोगों के लिये "उत्तम भाग" चुना और शत्रुओं को उनके पाँवों तले किया। फिर बीच में वह पंक्ति आती है जो पूरे भजन की धुरी है: "परमेश्वर जयजयकार सहित, यहोवा नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है।" राजा सिंहासन पर चढ़ते हैं, और उसके बाद केवल गीत बचता है, चार बार दोहराया हुआ: भजन गाओ। अंत में दृश्य और चौड़ा होता है, जब "राज्य-राज्य के रईस अब्राहम के परमेश्वर की प्रजा होने के लिये इकट्ठे" होते हैं।

मूल

इस भजन का धड़कता हुआ केंद्र यह है कि परमेश्वर का राजपद कोई सैद्धांतिक बात नहीं, एक घटना है। वे "ऊपर गया है", यानी चढ़े, आरोहण किया, सिंहासन ग्रहण किया। इब्रानी में यहाँ जो शब्द है, आलाह, वही शब्द है जो वेदी पर चढ़ाए जाने वाले होमबलि के "ऊपर उठने" के लिये प्रयोग होता है; चढ़ना और अर्पित होना एक ही जड़ से निकलते हैं। और ध्यान दीजिए कि राजा किन पर राज करते हैं: केवल याकूब पर नहीं, बल्कि "जाति-जाति पर"। यह भजन इस्राएल की सीमाओं को तोड़ता है। चुनाव यहाँ विशेषाधिकार नहीं, बल्कि रास्ता है; एक जाति को इसलिये चुना गया ताकि अंततः सब जातियों के रईस अब्राहम के परमेश्वर के सामने घुटने टेकें। पृथ्वी की सारी ढालें, यानी सारी सैन्य शक्ति, उन्हीं के वश में है।

सूत्र

पद 5 पर पुराने और नए नियम की सिलाई दिखाई देती है। इस्राएल ने जब गाया कि "यहोवा नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है", तब शायद उनकी आँखों के सामने वाचा का सन्दूक सिय्योन की चढ़ाई चढ़ रहा था। पर लूका जो लिखते हैं, वह इसी चित्र को पूरा कर देता है: "वह उनसे अलग हुआ और स्वर्ग पर उठा लिया गया" (लूका 24:51), और चेले लौटकर मंदिर में परमेश्वर की स्तुति करते रहे। वही क्रम: चढ़ना, फिर गीत। यह जोड़ ज़बरदस्ती का नहीं; आरोहण मसीह की कहानी का वह बिंदु है जहाँ क्रूस पर चढ़ा हुआ व्यक्ति सिंहासन पर बैठता है। और पद 9 का दृश्य, जहाँ पराई जातियों के रईस अब्राहम के परमेश्वर की प्रजा बनने आते हैं, वही है जो प्रेरितों के काम में फैलती कलीसिया के रूप में सच होने लगता है।

दर्पण

राजपद का यह गीत हमारी सबसे गहरी बेचैनी को छूता है: हम उन ताक़तों के बीच जीते हैं जिन पर हमारा कोई ज़ोर नहीं। दफ़्तर में वह निर्णय जो ऊपर से थोपा गया, वह बीमारी जिसकी रिपोर्ट अगले हफ़्ते आनी है, वह बेटा जो फ़ोन नहीं उठाता, वह क़र्ज़ जिसका ब्याज हर महीने बढ़ता है। इन सबके सामने भजन कहता है कि "पृथ्वी की ढालें परमेश्वर के वश में हैं"। ढाल यानी वह सब जो हमें सुरक्षा देने का दावा करता है, और वह सब जो हमें डराता है। दोनों उन्हीं के हाथ में हैं। पर ध्यान दीजिए, भजन आपको समझाने नहीं, गाने बुलाता है, और "समझ बूझकर", यानी होश में, दिमाग़ चलाकर।

आज एक काम कीजिए: जिस परिस्थिति में आपको लगता है कि परमेश्वर राजा नहीं हैं, उसे कागज़ पर एक वाक्य में लिखिए, और उसके नीचे ज़ोर से बोलकर लिखिए, "परमेश्वर सारी पृथ्वी का महाराजा है।" कागज़ फेंकिए मत; आज रात तक जेब में रखिए।

प्रश्न

पद 3 को चिकना करके पढ़ना बेईमानी होगी: "वह देश-देश के लोगों को हमारे सम्मुख नीचा करता, और जाति-जाति को हमारे पाँवों के नीचे कर देता है।" यह विजय का गीत है, और विजय के नीचे हमेशा कोई कुचला हुआ पड़ा होता है। क्या परमेश्वर पक्षपाती हैं? भजन खुद इसका तनाव उठाता है, क्योंकि छह पद बाद वही कुचली हुई जातियाँ शत्रु नहीं, प्रजा बनकर इकट्ठी होती हैं। पाँवों के नीचे से उपासना तक का यह सफ़र मसीह में एक नया मोड़ लेता है: वहाँ राजा खुद कुचले जाते हैं ताकि शत्रु प्रजा बन सकें। पर इससे न्याय मिट नहीं जाता। भजन यह नहीं कहता कि हर ताक़त को गले लगाया जाएगा; वह कहता है कि हर ताक़त झुकेगी। इस भेद को मैं पूरी तरह सुलझा नहीं सकता, और शायद सुलझाना भी नहीं चाहिए।

संदर्भ

यह कोरह के पुत्रों का भजन है, यानी मंदिर के गायकों का, और इसकी भाषा राज्याभिषेक की है। प्राचीन पूर्व में जब कोई राजा गद्दी पर बैठता, तो नरसिंगा फूँका जाता, भीड़ ताली बजाती और जयजयकार करती; ताली सिर्फ़ खुशी नहीं, राजनीतिक स्वीकृति थी, जैसे आज किसी शपथ ग्रहण में उठकर खड़ा होना। इस्राएल छोटा राष्ट्र था, मिस्र और अश्शूर जैसे साम्राज्यों के बीच पिसता हुआ, और उसके पड़ोसी अपने देवताओं के सिंहासनारोहण के उत्सव मनाते थे। इसी माहौल में यरूशलेम गाता है कि असली महाराजा न फ़िरौन है न मर्दूक, बल्कि यहोवा। यह उपासना भी थी और खुली चुनौती भी।

मुख्य पात्र

इस भजन में परमेश्वर का चेहरा दो रंगों में दिखता है, और दोनों साथ रहते हैं। एक ओर वे "परमप्रधान और भययोग्य" हैं, अपने "पवित्र सिंहासन पर विराजमान", जिनके सामने राष्ट्रों की सारी ढालें खिलौने हैं। दूसरी ओर वही राजा झुककर चुनते हैं: "वह हमारे लिये उत्तम भाग चुन लेगा, जो उसके प्रिय याकूब के घमण्ड का कारण है।" प्रिय, यह शब्द किसी सम्राट की शब्दावली नहीं, प्रेमी की है। जो परमेश्वर पूरी पृथ्वी पर राज करते हैं, वे एक टेढ़े-मेढ़े आदमी याकूब से लगाव रखते हैं और उसके वंश के लिये हिस्सा खुद चुनते हैं। यही स्वभाव आगे चलकर एक चरनी और एक क्रूस तक जाता है। ऊँचाई और झुकाव उनमें विरोधी नहीं हैं; वे एक ही व्यक्ति के दो हाथ हैं।

चिंतन

आपके जीवन की कौन-सी "ढाल" आपको लगता है कि आपके अपने हाथ में है, और उसे परमेश्वर के हाथ में मानने से आप किस बात से डरते हैं?

अगर मसीह का स्वर्गारोहण सचमुच एक राज्याभिषेक था, तो इस हफ़्ते आपका कौन-सा निर्णय बदलना चाहिए?

Psalms में और गहराई से जानें

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Psalms 47 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 47 का क्या अर्थ है?
भजन की शुरुआत ही ताली और जयजयकार से होती है: "हे देश-देश के सब लोगों, तालियाँ बजाओ!" यह किसी मंदिर-कोने की धीमी प्रार्थना नहीं, बल्कि राज्याभिषेक का शोर है। कवि कहता है कि यहोवा केवल इस्राएल का नहीं, "सारी पृथ्वी के ऊपर महाराजा है"; उन्होंने ही अपने लोगों के लिये "उत्तम भाग" चुना और शत्रुओं को उनके पाँवों तले किया। फिर बीच में वह पंक्ति आती है जो पूरे भजन की धुरी है: "परमेश्वर जयजयकार सहित, यहोवा नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है।" राजा सिंहासन पर चढ़ते हैं, और उसके बाद केवल गीत बचता है, चार बार दोहराया हुआ: भजन गाओ। अंत में दृश्य और चौड़ा होता है, जब "राज्य-राज्य के रईस अब्राहम के परमेश्वर की प्रजा होने के लिये इकट्ठे" होते हैं।
भजन संहिता 47 किस विषय में है?
पद 5 पर पुराने और नए नियम की सिलाई दिखाई देती है। इस्राएल ने जब गाया कि "यहोवा नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है", तब शायद उनकी आँखों के सामने वाचा का सन्दूक सिय्योन की चढ़ाई चढ़ रहा था। पर लूका जो लिखते हैं, वह इसी चित्र को पूरा कर देता है: "वह उनसे अलग हुआ और स्वर्ग पर उठा लिया गया" (लूका 24:51), और चेले लौटकर मंदिर में परमेश्वर की स्तुति करते रहे। वही क्रम: चढ़ना, फिर गीत। यह जोड़ ज़बरदस्ती का नहीं; आरोहण मसीह की कहानी का वह बिंदु है जहाँ क्रूस पर चढ़ा हुआ व्यक्ति सिंहासन पर बैठता है। और पद 9 का दृश्य, जहाँ पराई जातियों के रईस अब्राहम के परमेश्वर की प्रजा बनने आते हैं, वही है जो प्रेरितों के काम में फैलती कलीसिया के रूप में सच होने लगता है।
भजन संहिता 47 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काम कीजिए: जिस परिस्थिति में आपको लगता है कि परमेश्वर राजा नहीं हैं, उसे कागज़ पर एक वाक्य में लिखिए, और उसके नीचे ज़ोर से बोलकर लिखिए, "परमेश्वर सारी पृथ्वी का महाराजा है।" कागज़ फेंकिए मत; आज रात तक जेब में रखिए।
भजन संहिता 47 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह कोरह के पुत्रों का भजन है, यानी मंदिर के गायकों का, और इसकी भाषा राज्याभिषेक की है। प्राचीन पूर्व में जब कोई राजा गद्दी पर बैठता, तो नरसिंगा फूँका जाता, भीड़ ताली बजाती और जयजयकार करती; ताली सिर्फ़ खुशी नहीं, राजनीतिक स्वीकृति थी, जैसे आज किसी शपथ ग्रहण में उठकर खड़ा होना। इस्राएल छोटा राष्ट्र था, मिस्र और अश्शूर जैसे साम्राज्यों के बीच पिसता हुआ, और उसके पड़ोसी अपने देवताओं के सिंहासनारोहण के उत्सव मनाते थे। इसी माहौल में यरूशलेम गाता है कि असली महाराजा न फ़िरौन है न मर्दूक, बल्कि यहोवा। यह उपासना भी थी और खुली चुनौती भी।
भजन संहिता 47 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन की कौन-सी "ढाल" आपको लगता है कि आपके अपने हाथ में है, और उसे परमेश्वर के हाथ में मानने से आप किस बात से डरते हैं?
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Psalms 47 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

परमेश्वर जाति जाति पर राज्य करता है; परमेश्वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजमान है।" ध्यान दे, वह सिंहासन पर बैठा है, खड़ा होकर घबराया हुआ नहीं। जो खबरें तुझे रात में जगाए रखती हैं, वे उसे उसके आसन से नहीं हिला पातीं। तेरे घर का झगड़ा, तेरी नौकरी की अनिश्चितता, देश का हाल, सब उसी के राज्य के भीतर है। आज तू किसके सिंहासन पर भरोसा कर रहा है?

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