बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 81

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

भजन की शुरुआत उत्सव से होती है: डफ बजाओ, वीणा उठाओ, नये चाँद और पूर्णमासी पर नरसिंगा फूँको, क्योंकि यह केवल परंपरा नहीं, "इस्राएल के लिये विधि" है। फिर बीच गीत में आवाज़ बदल जाती है और परमेश्वर स्वयं बोलने लगते हैं: मैंने तुम्हारे कंधों से बोझ उतारा, टोकरी ढोना छुड़ाया, संकट में तुम्हारी सुनी, और मरीबा में तुम्हें परखा। इसके बाद उलाहना आता है, "परन्तु मेरी प्रजा ने मेरी न सुनी; इस्राएल ने मुझ को न चाहा," और अंत में एक खुला हुआ "यदि": यदि वे सुनें, तो शत्रु दब जाएँ और वे उत्तम गेहूँ और चट्टान के मधु से तृप्त हों। उत्सव का गीत बीच में ही अदालत का कमरा बन जाता है।

मर्म

इस भजन का धड़कता हुआ केंद्र एक क्रिया है: सुनना। इब्रानी में शमा, जिसका अर्थ केवल कान में आवाज़ पड़ना नहीं, बल्कि सुनकर मुड़ना, मान लेना है। परमेश्वर शिकायत नहीं करते कि उनकी प्रजा ने उन्हें अनसुना किया; वे कहते हैं कि प्रजा ने उन्हें "न चाहा"। यानी अवज्ञा की जड़ सूचना की कमी नहीं, इच्छा की दिशा है। और परमेश्वर का उत्तर सबसे डरावना है: "मैंने उसको उसके मन के हठ पर छोड़ दिया।" दंड यह नहीं कि वे अपनी मनमानी से रोके गए, बल्कि यह कि उन्हें अपनी मनमानी सौंप दी गई। पौलुस रोमियों 1 में यही भाषा दोहराता है, जब वह तीन बार कहता है कि परमेश्वर ने उन्हें छोड़ दिया। नरक की पहली झलक यही है: माँगी हुई आज़ादी, पूरी मिल जाना।

सूत्र

ध्यान दीजिए कि आज्ञा से पहले क्या आता है। "तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूँ, जो तुझे मिस्र देश से निकाल लाया है" पहले कहा जाता है, "तेरे बीच में पराया ईश्वर न हो" बाद में। छुटकारा आज्ञा की शर्त नहीं, उसकी नींव है। यही अनुग्रह का व्याकरण है, और यही पूरे बाइबल का ढाँचा। मसीह में यह क्रम वही रहता है: पहले बोझ उतरता है, फिर चाल बदलती है। और गीत का अंत, "उत्तम से उत्तम गेहूँ" और "चट्टान के मधु" की तृप्ति, एक भूख की ओर इशारा करता है जिसे यीशु ने अपने ऊपर ले लिया जब उन्होंने कहा कि वे जीवन की रोटी हैं। टोकरी ढोने से छूटना केवल मिस्र की कहानी नहीं; वह हर उस आदमी की कहानी है जिसका जूआ उतारा गया है।

दर्पण

"मैंने उनके कंधों पर से बोझ को उतार दिया" सुनने में मीठा लगता है, जब तक आप यह न पूछें कि आपने किस बोझ को वापस कंधे पर रख लिया है। वह ईमेल जो रात ग्यारह बजे भी देखना ज़रूरी लगता है। वह हिसाब जो आप हर महीने दोबारा जोड़ते हैं, यह सोचकर कि सुरक्षा बस थोड़ी और बचत दूर है। वह रिश्ता जिसमें आप बोलना बंद कर चुके हैं और बस रणनीति बना रहे हैं। भजन इसे एक नाम देता है: "अपनी ही युक्तियों के अनुसार चले।" आपकी युक्तियाँ बुरी नहीं हैं, वे बस परमेश्वर की जगह ले चुकी हैं। और परमेश्वर की माँग यहाँ अजीब तरह से सरल है: "तू अपना मुँह पसार, मैं उसे भर दूँगा।" चूज़े की तरह मुँह खोलना, यानी माँगना, यानी मान लेना कि आप खाली हैं।

आज, दिन खत्म होने से पहले, अकेले बैठकर उस एक चीज़ का नाम ऊँची आवाज़ में बोलिए जिसे आप महीनों से अपनी युक्तियों से सँभाल रहे हैं, और उसी साँस में परमेश्वर से वह माँगिए जो आपने अब तक नहीं माँगा। बोलकर, मन में नहीं। मुँह पसारिए।

कठिन प्रश्न

पद 14 और 15 हमें असहज करते हैं: क्षण भर में शत्रुओं को दबाना, द्रोहियों का हमेशा के लिए अपमानित होना। क्या आज्ञाकारिता का इनाम दुश्मनों की हार है? और अगर हाँ, तो उन विश्वासियों का क्या जो आज्ञाकारी थे और फिर भी कुचले गए? भजन इस प्रश्न को हल नहीं करता। पर ध्यान दीजिए कि यहाँ "शत्रु" कौन हैं: वे जो मिस्र के बोझ और टोकरी के प्रतीक हैं, दासता की शक्तियाँ। भजन यह वादा नहीं करता कि आज्ञाकारी जीवन आरामदेह होगा; वह यह कहता है कि जब परमेश्वर की प्रजा सुनती है, तब दास बनानेवाली शक्तियों का अंतिम अधिकार टूटता है। कब और कैसे, यह भजन नहीं बताता। और शायद यह ईमानदारी ही है, झूठे आश्वासन से बेहतर।

मुख्य पात्र

इस भजन का मुख्य पात्र परमेश्वर हैं, और उनका भावनात्मक चेहरा चौंकाता है। वे न्यायाधीश की तरह शुरू करते हैं पर प्रेमी की तरह बोलते हैं। "इस्राएल ने मुझ को न चाहा" में क्रोध से ज़्यादा चोट है। पद 13 का "यदि" किसी शासक का अल्टीमेटम नहीं, एक खुला हुआ हाथ है; वाक्य अधूरा छोड़ा गया है जैसे कोई आशा करते हुए रुक जाता है। और उनका अंतिम शब्द दंड नहीं, भोजन है: उत्तम गेहूँ, चट्टान का मधु। जो परमेश्वर छोड़ देने की शक्ति रखते हैं, वे खिलाने की इच्छा भी रखते हैं। यह कोई उदासीन देवता नहीं जो नियम गिनता है; यह वह है जो अपनी प्रजा की भूख को अपनी खुशी बनाना चाहता है।

पहले सुननेवाले

जो लोग यह गीत पहली बार गा रहे थे, वे शायद झोपड़ियों के पर्व पर यरूशलेम में इकट्ठे थे, फसल कटने के बाद, नरसिंगे की आवाज़ के साथ। उनके लिए "टोकरी ढोना छूट गया" कोई रूपक नहीं था; उनके पुरखों की पीठ पर ईंटों की टोकरियाँ थीं, और "अनजानी भाषा" मिस्री मालिकों की चिल्लाहट थी। उत्सव के बीच में परमेश्वर का उलाहना सुनना उनके लिए सामान्य था, क्योंकि उनके पर्व केवल खुशी नहीं, स्मरण थे, और स्मरण में हमेशा पश्चात्ताप शामिल था। वे जानते थे कि मरीबा में क्या हुआ था: पानी माँगा गया, और माँग शिकायत बन गई। इसलिए "तू अपना मुँह पसार" उनके कानों में एक चुनौती थी: इस बार माँगो, पर भरोसे के साथ।

—

आपके जीवन में कौन-सा बोझ परमेश्वर ने उतार दिया था, और आपने किस तरह चुपचाप उसे वापस उठा लिया है?

"मैंने उसको उसके मन के हठ पर छोड़ दिया" आपको डराता है या राहत देता है, और यह प्रतिक्रिया आपके बारे में क्या बताती है?

Psalms में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Songs of Jesus

Timothy Keller

A year of daily devotions through every psalm, ideal alongside your reading.

Psalms 1-72

Derek Kidner

Kidner's crisp notes have helped generations pray the psalms.

Psalms 73-150

Derek Kidner

The second half of the psalter with the same loved precision.

Reflections on the Psalms

C.S. Lewis

Lewis thinking out loud about praise, cursing psalms and joy.

Psalms Volume 1

Gerald Wilson

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Psalms 81 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 81 का क्या अर्थ है?
भजन की शुरुआत उत्सव से होती है: डफ बजाओ, वीणा उठाओ, नये चाँद और पूर्णमासी पर नरसिंगा फूँको, क्योंकि यह केवल परंपरा नहीं, "इस्राएल के लिये विधि" है। फिर बीच गीत में आवाज़ बदल जाती है और परमेश्वर स्वयं बोलने लगते हैं: मैंने तुम्हारे कंधों से बोझ उतारा, टोकरी ढोना छुड़ाया, संकट में तुम्हारी सुनी, और मरीबा में तुम्हें परखा। इसके बाद उलाहना आता है, "परन्तु मेरी प्रजा ने मेरी न सुनी; इस्राएल ने मुझ को न चाहा," और अंत में एक खुला हुआ "यदि": यदि वे सुनें, तो शत्रु दब जाएँ और वे उत्तम गेहूँ और चट्टान के मधु से तृप्त हों। उत्सव का गीत बीच में ही अदालत का कमरा बन जाता है।
भजन संहिता 81 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि आज्ञा से पहले क्या आता है। "तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूँ, जो तुझे मिस्र देश से निकाल लाया है" पहले कहा जाता है, "तेरे बीच में पराया ईश्वर न हो" बाद में। छुटकारा आज्ञा की शर्त नहीं, उसकी नींव है। यही अनुग्रह का व्याकरण है, और यही पूरे बाइबल का ढाँचा। मसीह में यह क्रम वही रहता है: पहले बोझ उतरता है, फिर चाल बदलती है। और गीत का अंत, "उत्तम से उत्तम गेहूँ" और "चट्टान के मधु" की तृप्ति, एक भूख की ओर इशारा करता है जिसे यीशु ने अपने ऊपर ले लिया जब उन्होंने कहा कि वे जीवन की रोटी हैं। टोकरी ढोने से छूटना केवल मिस्र की कहानी नहीं; वह हर उस आदमी की कहानी है जिसका जूआ उतारा गया है।
भजन संहिता 81 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज, दिन खत्म होने से पहले, अकेले बैठकर उस एक चीज़ का नाम ऊँची आवाज़ में बोलिए जिसे आप महीनों से अपनी युक्तियों से सँभाल रहे हैं, और उसी साँस में परमेश्वर से वह माँगिए जो आपने अब तक नहीं माँगा। बोलकर, मन में नहीं। मुँह पसारिए।
भजन संहिता 81 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस भजन का मुख्य पात्र परमेश्वर हैं, और उनका भावनात्मक चेहरा चौंकाता है। वे न्यायाधीश की तरह शुरू करते हैं पर प्रेमी की तरह बोलते हैं। "इस्राएल ने मुझ को न चाहा" में क्रोध से ज़्यादा चोट है। पद 13 का "यदि" किसी शासक का अल्टीमेटम नहीं, एक खुला हुआ हाथ है; वाक्य अधूरा छोड़ा गया है जैसे कोई आशा करते हुए रुक जाता है। और उनका अंतिम शब्द दंड नहीं, भोजन है: उत्तम गेहूँ, चट्टान का मधु। जो परमेश्वर छोड़ देने की शक्ति रखते हैं, वे खिलाने की इच्छा भी रखते हैं। यह कोई उदासीन देवता नहीं जो नियम गिनता है; यह वह है जो अपनी प्रजा की भूख को अपनी खुशी बनाना चाहता है।
भजन संहिता 81 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में कौन-सा बोझ परमेश्वर ने उतार दिया था, और आपने किस तरह चुपचाप उसे वापस उठा लिया है?

Psalms 81 में आपको क्या स्पर्श करता है?

इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें