भजन संहिता 89
पाठ
गीत ऊँचे सुर में शुरू होता है: गायक परमेश्वर की करुणा और सच्चाई को पीढ़ी-पीढ़ी तक गाने की प्रतिज्ञा करता है, दाऊद से बाँधी गई उस वाचा को दोहराता है जिसमें परमेश्वर ने शपथ खाई थी कि उसका सिंहासन सूर्य और चन्द्रमा के समान बना रहेगा, और फिर स्वर्ग से लेकर समुद्र की लहरों तक परमेश्वर के अतुलनीय सामर्थ्य का वर्णन करता है। पद 38 पर गीत जैसे बीच में टूट जाता है: "तो भी तूने अपने अभिषिक्त को छोड़ा और उसे तज दिया।" मुकुट मिट्टी में, गढ़ उजाड़, बटोही लूटते हुए, शत्रु हँसते हुए। आख़िर में केवल एक सवाल बचता है, "कब तक?", और उसके बाद, बिना किसी उत्तर के, एक आमीन।
मर्म
इस भजन की धड़कन एक शब्द है: करुणा, इब्रानी में हेसेद, वह निष्ठापूर्ण प्रेम जो वाचा से बँधा होता है और भावना पर नहीं, वचन पर टिका होता है। गायक इसी शब्द से शुरू करता है और इसी शब्द से अपनी शिकायत गढ़ता है: "हे प्रभु, तेरी प्राचीनकाल की करुणा कहाँ रही?" यहाँ प्रार्थना परमेश्वर के विरुद्ध नहीं, परमेश्वर के अपने वचन के आधार पर की जा रही है। यही विश्वास का सबसे परिपक्व रूप है: परिस्थिति को झुठलाना नहीं, परन्तु परिस्थिति को उस शपथ के सामने रख देना जो परमेश्वर ने स्वयं खाई थी। भजन सिखाता है कि परमेश्वर की सच्चाई हमारे अनुभव से बड़ी है, और इसीलिए हम अपने अनुभव को छिपाए बिना उससे लिपट सकते हैं।
मुख्य सूत्र
पद 30 से 35 में परमेश्वर एक असाधारण बात कहते हैं: यदि दाऊद के वंशज व्यवस्था छोड़ दें, तो दण्ड सोंटें और कोड़ों से मिलेगा, "परन्तु मैं अपनी करुणा उस पर से न हटाऊँगा।" दण्ड हाँ, निरस्तीकरण नहीं। इतिहास में दण्ड आया: सिंहासन भूमि पर पटका गया, वंश बन्दी हुआ, और सदियों तक दाऊद का घराना एक बढ़ई के परिवार तक सिकुड़ गया। फिर नासरत में एक स्वर्गदूत कहता है कि परमेश्वर इस बालक को "उसके पिता दाऊद का सिंहासन" देंगे (लूका 1:32-33)। इस भजन का रोना वहाँ उत्तर पाता है, पर उस रूप में नहीं जिसकी गायक ने कल्पना की थी: अभिषिक्त राजा का मुकुट दुबारा मिट्टी में गिरता है, काँटों का बनकर, और वहीं से वह सदा के लिए उठता है।
दर्पण
आपने भी कभी इस भजन का पहला भाग गाया होगा, तब जब सब कुछ सही लग रहा था, और फिर पद 38 में जी लिया होगा: वह नौकरी जो आपने प्रार्थना के बाद ली और जो आपको तोड़ गई, वह बच्चा जिसके लिए आपने समर्पण की प्रार्थना की थी और जो अब फ़ोन नहीं उठाता, वह शरीर जिसने अचानक धोखा दे दिया। सबसे कड़वी बात बाहर की हानि नहीं, पद 41 की नामधराई होती है, पड़ोसियों की वह आधी मुस्कान: तो तुम्हारे परमेश्वर कहाँ थे? यह भजन आपसे यह नहीं कहता कि आप सकारात्मक सोचें। यह आपको शिकायत करने की भाषा देता है, और वह भाषा वाचा के भीतर से आती है। आज एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जो आपके हाथ से गिर गई है, और उसके नीचे ऊँची आवाज़ में पद 49 के शब्द बोलिए: "हे प्रभु, तेरी प्राचीनकाल की करुणा कहाँ रही?"
प्रश्न
पद 34 में परमेश्वर कहते हैं, "मैं अपनी वाचा न तोड़ूँगा", और पद 39 में गायक कहता है, "तूने अपने दास के साथ की वाचा को त्याग दिया।" दोनों वाक्य एक ही भजन में, एक ही साँस में खड़े हैं, और कवि उन्हें सुलझाने की कोशिश नहीं करता। क्या परमेश्वर ने अपना वचन तोड़ा? इसका ईमानदार उत्तर यह है कि इस भजन के भीतर कोई उत्तर नहीं है। पद 52 की स्तुति, "यहोवा सर्वदा धन्य रहेगा", कोई समाधान नहीं, एक निर्णय है: मैं तब भी उसी के सामने खड़ा रहूँगा जिसने मुझे यह घाव दिया है। हमें सिखाया गया है कि विश्वास प्रश्नों का उत्तर देता है; यह भजन दिखाता है कि कभी-कभी विश्वास केवल प्रश्न को पकड़े रहना है, बिना उस दरवाज़े से हटे।
एक बारीकी
"उसके मुकुट को भूमि पर गिराकर अशुद्ध किया है।" ध्यान दीजिए, मुकुट केवल टूटा नहीं, अशुद्ध हुआ। क्योंकि वह मुकुट पवित्र तेल से अभिषिक्त सिर पर था (पद 20), वह मन्दिर के पात्रों की तरह परमेश्वर के लिए अलग किया हुआ था। उसे धूल में फेंकना वैसा ही है जैसे किसी पवित्र वस्तु को कीचड़ में डाल देना। और शिकायत यह नहीं कि बाबुल ने ऐसा किया; शिकायत यह है कि "तूने" ऐसा किया। गायक जानता है कि शत्रुओं की तलवार परमेश्वर के हाथ से बड़ी नहीं हो सकती, इसलिए वह दोष किसी और पर नहीं डालता। इस कठोर स्पष्टता में एक अजीब आदर छिपा है: वह परमेश्वर को इतना बड़ा मानता है कि उसे ज़िम्मेदार ठहराता है।
श्रोतागण
इसे गाने वाले वे लोग थे जिन्होंने यरूशलेम को जलते देखा था, जिनके राजा सिदकिय्याह की आँखें फोड़ दी गई थीं, और जिनके लिए "दाऊद का सिंहासन" अब एक ख़ाली कुर्सी से ज़्यादा कुछ नहीं था। उनके कानों में पद 25 और 27 के वे शब्द, कि अभिषिक्त राजा पृथ्वी के राजाओं पर प्रधान होगा, किसी क्रूर मज़ाक जैसे लगते होंगे। फिर भी उन्होंने इस गीत को फेंका नहीं; उन्होंने इसे अपनी आराधना की पुस्तक में रखा और मण्डली में गाया। सोचिए इसका अर्थ: उन्होंने शिकायत को प्रार्थना-सभा के बीचोंबीच जगह दी। वे जानते थे जो हम अक्सर भूल जाते हैं, कि परमेश्वर के सामने रोना अविश्वास नहीं, बल्कि वाचा के भीतर बने रहने का सबसे साहसी रूप है।
चिंतन
आपके जीवन का कौन-सा "तो भी" (पद 38) अब तक आपने प्रार्थना में शब्द नहीं दिए हैं, और क्यों नहीं?
जब परमेश्वर की करुणा दिखाई नहीं देती, तब आपको किस बात पर टिकाए रखता है: आपका अनुभव, या उनकी खाई हुई शपथ?
Psalms में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
A year of daily devotions through every psalm, ideal alongside your reading.
The second half of the psalter with the same loved precision.
Lewis thinking out loud about praise, cursing psalms and joy.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Psalms 89 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 89 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 89 किस विषय में है?
भजन संहिता 89 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 89 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 89 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 89 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
अभिषेक का तेल सिर पर डाला गया, पर असली ताकत वहाँ नहीं थी। परमेश्वर कहते हैं, "मेरा हाथ उसके साथ बना रहेगा, और मेरी भुजा उसे दृढ़ रखेगी।" दाऊद को बुलावा ही काफ़ी नहीं था, उसे थामने वाला हाथ चाहिए था।
तुम्हें भी शायद किसी काम में खड़ा किया गया है, और तुम भीतर से काँप रहे हो। जो तुम्हें बुलाता है, वही तुम्हें सम्भालता भी है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
