यशायाह 49:15
पाठ
सिय्योन ने अभी-अभी शिकायत की है कि परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया, भुला दिया। उत्तर एक प्रश्न के रूप में आता है: क्या कोई माँ अपने दूध पीते बच्चे को भूल सकती है, अपने ही जन्माए हुए पर तरस खाना बंद कर सकती है? और फिर वह चौंकाने वाला मोड़: "हाँ, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।" परमेश्वर माँ की ममता को सबसे मज़बूत उपमा के रूप में उठाते हैं, फिर मानते हैं कि वह उपमा भी टूट सकती है, और अपने आप को उसके पार रखते हैं।
मर्म
ध्यान दीजिए कि परमेश्वर यहाँ सिय्योन की शिकायत को झूठा नहीं कहते। वे यह नहीं कहते, "तुम्हें ऐसा लगता है, पर असल में सब ठीक है।" वे तर्क नहीं देते, वे सौगंध जैसी बात कहते हैं। यह वाचा की भाषा है: परमेश्वर की निष्ठा उनके अपने स्वभाव पर टिकी है, इस्राएल के प्रदर्शन पर नहीं। और वह निष्ठा भावनाहीन नहीं है। परमेश्वर अपने लोगों के लिए वही आंतरिक खिंचाव महसूस करते हैं जो एक माँ रात में रोते बच्चे की आवाज़ सुनकर महसूस करती है, वह खिंचाव जो सोचने से पहले शरीर में उठता है। अनुग्रह यहाँ एक नीति नहीं, एक ममता है।
मुख्य सूत्र
यह वचन उस दास के गीत के ठीक बाद आता है जिसने कहा था, "मैंने तो व्यर्थ परिश्रम किया।" यानी परमेश्वर की न भूलने वाली स्मृति किसी सफल, चमकती हुई कहानी के बीच नहीं, बल्कि थकान और खंडहरों के बीच घोषित होती है। यही रेखा मसीह तक जाती है: वह दास जिसे "मनुष्यों से तुच्छ जाना जाता" है, वही "जाति-जाति के लिये ज्योति" ठहरता है। परमेश्वर अपने भूले-बिसरे लोगों को याद रखने का काम किसी दूर से किए गए फैसले से नहीं, बल्कि एक ऐसे दास को भेजकर करते हैं जो उनके परित्याग में उतरता है। क्रूस पर "मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया" की पुकार सिय्योन की पुकार को अपने ऊपर ले लेती है।
दर्पण
आप शायद सिय्योन की भाषा में प्रार्थना करना नहीं जानते, पर उसका अनुभव जानते हैं: वह नौकरी जो चली गई और कोई दरवाज़ा नहीं खुला; वह बच्चा जो अब फोन नहीं उठाता; वह बीमारी जिसमें आपने प्रार्थना की और आसमान चुप रहा। हम आमतौर पर यह कहने से डरते हैं, क्योंकि लगता है ऐसा कहना अविश्वास है। पर सिय्योन ने कहा, और परमेश्वर ने उसे डाँटा नहीं, उत्तर दिया। शिकायत यहाँ प्रार्थना का एक वैध रूप है। तो आज, कागज़ के एक टुकड़े पर वह एक वाक्य लिखिए जो आप परमेश्वर से कहने में हिचकते हैं, वही शिकायत जो सिय्योन ने कही, और फिर उसके नीचे लिखिए: "परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।" कागज़ को जेब में या बाइबल में रख दीजिए।
एक बारीकी
हिंदी में "दया न करे" पढ़कर हम आगे बढ़ जाते हैं, पर इब्रानी में यहाँ जो शब्द है, रख़मीम (दया, करुणा), वह उसी मूल से बना है जिससे रेख़ेम, यानी गर्भ। परमेश्वर की करुणा को भाषा ने माँ के गर्भ से उधार लिया है। यह कोई कवि की सजावट नहीं; इब्रानी में दया का अर्थ ही है वह पीड़ा भरा प्रेम जो एक शरीर अपने ही भीतर पले हुए जीवन के लिए महसूस करता है। बाबुल में बैठे निर्वासित, जिनके पास मंदिर नहीं था, बलिदान नहीं था, अपने नगर की राख की कहानियाँ थीं, उन्हें बताया जा रहा है कि परमेश्वर उनके बारे में इसी गहराई से सोचते हैं।
मुख्य पात्र
परमेश्वर यहाँ एक खतरनाक तुलना चुनते हैं। घेराबंदी के दिनों में यरूशलेम में माँओं ने सचमुच अपने बच्चों को खोया था, और भूख ने कुछ को वह करने पर मजबूर किया जिसका नाम लेना भी कठिन है। जो लोग यह सुन रहे थे, उनकी स्मृति में जली हुई दीवारें और खाली गलियाँ थीं। इसलिए परमेश्वर उपमा देकर उसे बचाते नहीं, वे उसे टूटने देते हैं: "हाँ, वह तो भूल सकती है।" यह ईमानदारी ही उनके वादे को भरोसेमंद बनाती है। जो परमेश्वर मानव प्रेम की सीमा को स्वीकार करते हैं, उन्हीं पर हम अपना भार रख सकते हैं, क्योंकि वे झूठी तसल्ली बेच नहीं रहे।
शास्त्र की गूँज
अगला ही वचन इस वादे को शरीर देता है: "देख, मैंने तेरा चित्र अपनी हथेलियों पर खोदकर बनाया है।" खोदना, गुदवाना, स्थायी निशान। पुनरुत्थान के बाद यीशु ने जब अपने चेलों को अपने हाथ दिखाए, तो उन हाथों में भी स्थायी निशान थे, और वे निशान किसी और के नाम के थे, हमारे। दूसरी गूँज विलापगीत में है, जहाँ घेराबंदी की भूख में माँओं की ममता टूट जाती है; यशायाह 49:15 उसी भयावह स्मृति को सीधे संबोधित करता है और कहता है, वहाँ भी परमेश्वर की स्मृति नहीं टूटी।
मनन के प्रश्न
आप किस बात को लेकर चुपचाप यह मान बैठे हैं कि परमेश्वर उसे भूल गए हैं, और आपने उसे कभी शब्दों में उनसे कहा क्यों नहीं?
यदि परमेश्वर की दया माँ की ममता जैसी है, तो आपकी प्रार्थना का लहजा कैसे बदलेगा, अगले सात दिनों में?
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Isaiah 49:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यशायाह 49:15 का क्या अर्थ है?
यशायाह 49:15 किस विषय में है?
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यशायाह 49:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यशायाह 49:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 49 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
क्या वीर से शिकार छीना जा सकता है? क्या बलवान के बंदी छुड़ाए जा सकते हैं?" यह सवाल निराश लोगों के मुँह से निकला था, जो बेबीलोन की पकड़ में थे। तर्क से जवाब है, नहीं। पर अगली आयत में परमेश्वर कहता है, हाँ, छुड़ाए जाएँगे। जिस जंजीर को तू आज नाम देकर स्वीकार कर चुका है, उसके सामने भी वह यही कहता है।
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