भजन संहिता 98
पाठ
भजन एक नया गीत माँगता है, क्योंकि परमेश्वर ने कुछ नया किया है: उनके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उद्धार किया, और यह उद्धार छिपा नहीं रहा, बल्कि अन्यजातियों की आँखों के सामने खोल दिया गया। फिर आवाज़ चौड़ी होती जाती है, पहले इस्राएल का घराना, फिर सारी पृथ्वी के लोग, फिर वीणा, तुरहियाँ और नरसिंगे, और अंत में समुद्र, नदियाँ और पहाड़ भी इस शोर में शामिल हो जाते हैं। और यह सब किसी बीते हुए उत्सव की याद नहीं, एक आगमन की तैयारी है: "वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है।"
मूल बात
ध्यान दीजिए कि उद्धार में किसी और का हाथ नहीं है। "उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है।" कोई सहायक नहीं, कोई सौदा नहीं, कोई शर्त नहीं। और फिर भी यह उद्धार निजी रहस्य नहीं बना रहा; परमेश्वर ने उसे "प्रकाशित" किया, अन्यजातियों की दृष्टि में अपना धर्म प्रगट किया। यहाँ करुणा और न्याय एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। इस्राएल के लिए जो करुणा और सच्चाई है, वही पूरी पृथ्वी के लिए न्याय बनकर आती है। और इसीलिए यह भजन न्याय की बात करते हुए डरता नहीं, गाता है। जो दुनिया टेढ़ी है, उसे कोई सीधा करने आ रहा है। जिसे कभी सचमुच अन्याय सहना पड़ा है, वही समझता है कि यह खबर बुरी नहीं, अच्छी है।
सूत्र
पद 3 का वाक्य, "उसने इस्राएल के घराने पर की अपनी करुणा और सच्चाई की सुधि ली," मरियम के मुँह में लौट आता है जब वह लूका 1:54 में गाती है कि परमेश्वर ने अपने दास इस्राएल की सुधि ली। यह संयोग नहीं। मरियम जानती है कि गर्भ में जो पल रहा है, वही वह भुजा है जिसके बारे में भजनकार गाता है। पुराने नियम में परमेश्वर की भुजा एक चित्र थी; अब वह एक शरीर बनकर आती है, और वह शरीर कमज़ोर, घायल, क्रूस पर फैला हुआ दिखाई देता है। यह भजन आधा पूरा हुआ है और आधा बाकी है। उद्धार आ चुका, न्याय आना बाकी है। हम उस दरार में खड़े होकर गाते हैं।
दर्पण
आप जानते हैं कि किस मोड़ पर आपकी आवाज़ बंद हो जाती है। वह सहकर्मी जिसने झूठ बोलकर आपकी जगह ले ली और आज भी आराम से है। वह पैसा जो लौटाया नहीं गया। वह बीमारी जो किसी न्याय के तर्क में फिट नहीं बैठती। इस भजन में नदियाँ ताली बजाती हैं, पर आपके हाथ अपनी जेब में हैं। और शायद एक और डर भी है, चुपचाप: अगर वह सचमुच "धर्म से जगत का" न्याय करेगा, तो मेरा क्या? यह भजन उस डर को झुठलाता नहीं; वह उसे उद्धार से पहले रखता है। पहले भुजा ने बचाया, फिर न्यायी आता है। आज दिन ढलने से पहले दो मिनट के लिए बाहर जाइए, चुप रहिए, और फिर ऊँची आवाज़ में एक वाक्य कहिए: "परमेश्वर, आपने मेरे लिए यह किया," और उस एक काम का नाम लीजिए।
प्रश्न
भजनकार भूतकाल में गाता है: उसने उद्धार किया, उसने प्रगट किया, "पृथ्वी के सब दूर-दूर देशों ने हमारे परमेश्वर का किया हुआ उद्धार देखा है।" पर क्या सचमुच देखा है? आज भी अधिकांश पृथ्वी ने कुछ नहीं देखा, या देखकर मुँह फेर लिया। तो क्या यह गीत सच बोल रहा है, या सच को पहले से बोल रहा है? मुझे लगता है दूसरा। यह विश्वास की भाषा है जो उस चीज़ का नाम लेती है जो अभी दिखाई नहीं देती। पर इससे प्रतीक्षा आसान नहीं होती। "वह आनेवाला है" वाक्य कितनी सदियों तक खिंच सकता है? भजन इसका उत्तर नहीं देता। वह बस साज़ उठा लेता है और बजाना शुरू कर देता है, जैसे राजा दरवाज़े पर हो।
श्रोता
तुरहियों और नरसिंगों की आवाज़ किसी संगीत कार्यक्रम की नहीं थी; वह राजा के राजतिलक की आवाज़ थी। जो लोग यह गाते थे, वे साम्राज्यों के बीच एक छोटा-सा, बार-बार हारा हुआ लोग थे, जिनका मंदिर एक बार जलाया जा चुका था। उनके लिए "यहोवा राजा" कहना केवल भक्ति नहीं, एक जोखिम भरा दावा था, क्योंकि असली सिंहासन कहीं और दिखता था, बाबेल में या फारस में। और फिर भी वे गाते हैं कि अन्यजातियाँ भी देखेंगी। यह बदले की चाह नहीं है। यह विश्वास है कि उनके छोटे इतिहास में जो करुणा दिखाई दी, वह पूरी दुनिया के लिए है। छोटे लोगों का बड़ा गीत।
मुख्य पात्र
इस भजन का केंद्र वह परमेश्वर है जो अपनी भुजा खोलकर काम करता है और फिर छिपाता नहीं। सबसे कोमल शब्द पद 3 में है: उसने "सुधि ली," याद किया। परमेश्वर का याद करना भूली हुई बात का लौट आना नहीं, बल्कि वादे पर हाथ रख देना है। यहाँ करुणा (इब्रानी में हेसेद, वह वफ़ादार प्रेम जो रिश्ता नहीं तोड़ता) और सच्चाई साथ चलती हैं। और यही परमेश्वर न्याय करने आता है। हम अक्सर इन दोनों को दो अलग चेहरों में बाँट देते हैं, एक कोमल और एक कठोर। यह भजन ऐसा नहीं करता। एक ही भुजा बचाती है और एक ही भुजा सीधा करती है। इसीलिए पहाड़ भी डरते नहीं, जयजयकार करते हैं।
चिंतन
आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा अभी "नया गीत" नहीं गा पा रहा, और आप उससे क्या छिपा रहे हैं?
अगर न्याय सचमुच अच्छी खबर है, तो आपके भीतर कौन-सी चीज़ है जो उसके आने से राहत नहीं, बेचैनी महसूस करती है?
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