बाइबल व्याख्या

रूत 1:16

बाइबल
यह वचन OLIVE PRARTHANALAYAMU द्वारा समर्पित है

पाठ

सड़क के बीचोंबीच, मोआब की सीमा पर, नाओमी अपनी बहू को धकेल रही है: लौट जा, वापस चली जा, तेरी जिठानी तो जा चुकी। और रूत, जो अब तक चुप थी, बोल उठती है। वह विनती को ही रोक देती है: "तू मुझसे यह विनती न कर, कि मुझे त्याग या छोड़कर लौट जा।" फिर वह अपने जीवन का हर हिस्सा नाओमी के जीवन से बाँध देती है, एक-एक करके: रास्ता, ठिकाना, कुल, और अंत में परमेश्वर। "तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।" यह भावुक क्षण नहीं, यह शपथ है, और इसके बाद नाओमी के पास कहने को कुछ नहीं बचता।

मर्म

ध्यान दीजिए कि रूत किस क्रम में बोलती है। पहले पैर, फिर छत, फिर लोग, और तब जाकर परमेश्वर। आज हम उल्टा करते हैं: पहले विश्वास की घोषणा, फिर देखेंगे कि जीवन कहाँ तक बदलता है। रूत का समर्पण देह से शुरू होता है, उस बूढ़ी, कड़वाई हुई औरत के साथ चलने से, जिसने अभी-अभी कहा था कि "यहोवा का हाथ मेरे विरुद्ध उठा है।" यहीं इस वचन की चुभन है: रूत इस्राएल के परमेश्वर को किसी चमत्कार या समृद्धि के कारण नहीं चुनती। उसे तो केवल तीन कब्रें और एक टूटी सास दिखाई दी हैं। फिर भी वह कहती है, आपका परमेश्वर मेरा परमेश्वर। अनुग्रह ऐसे ही काम करता है, सबूत के बाद नहीं, सबूत के बावजूद।

सूत्र

रूत मोआबिन है, और यही इस वाक्य को विस्फोटक बनाता है। व्यवस्था में लिखा था कि मोआबी यहोवा की मण्डली में प्रवेश न करे; वह जाति इस्राएल के इतिहास में शत्रु के खाने में दर्ज थी। और अब एक मोआबी स्त्री, बिना किसी अनुष्ठान के, केवल एक विधवा का हाथ पकड़कर, वाचा की भाषा बोलती है: "तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।" परमेश्वर उसे दरवाज़े से नहीं, दुःख की सड़क से भीतर लाते हैं। और वहीं से कहानी आगे बढ़ती है: इसी स्त्री से ओबेद, फिर यिशै, फिर दाऊद। मत्ती अपनी वंशावली में उसका नाम लिखने से नहीं हिचकता। मसीह की देह में मोआब का लहू है। बाहर वाले को भीतर खींच लेने की जो आदत परमेश्वर की है, वह यहाँ सड़क के किनारे पहली बार साफ़ दिखती है।

दर्पण

हम सब जानते हैं कि किसी टूटे हुए व्यक्ति के पास रुकना कैसा लगता है। वह माँ जो अब आपको पहचानती नहीं, वह पति जिसकी नौकरी गए दो साल हो गए और जो अब चिड़चिड़ा हो चुका है, वह दोस्त जिसने कहा कि उसका विश्वास खत्म हो गया। ऐसे लोगों के पास रहना पुण्य जैसा नहीं लगता, बोझ जैसा लगता है। और सबसे ईमानदार बहाना यही होता है जो ओर्पा के पास था: यह समझदारी की बात है, मेरा अपना भविष्य भी तो है। नाओमी ने खुद रूत को जाने की इजाज़त दी थी। रूत के पास निकलने का पूरा नैतिक रास्ता खुला था, और उसने उसे ठुकरा दिया। आज दस मिनट में यह कीजिए: उस एक व्यक्ति को, जिससे आप धीरे-धीरे दूर हटते जा रहे हैं, संदेश भेजिए और उसमें यह वाक्य लिखिए, "मैं कहीं नहीं जा रहा, मैं यहीं हूँ।" बस इतना, कोई सलाह नहीं।

प्रसंग

यह न्यायियों का समय है, अकाल का समय, जब हर कोई अपनी दृष्टि में ठीक काम करता था। बैतलहम, यानी "रोटी का घर", में रोटी नहीं थी, इसलिए एलीमेलेक का परिवार मोआब भागा, उसी मोआब में जो इस्राएल का पुराना बैरी था। दस साल बाद तीन कब्रें पीछे छूट गईं। दो विधवाएँ, बिना पुत्र, बिना ज़मीन, बिना किसी पुरुष के संरक्षण के, उस दुनिया में कानूनी रूप से लगभग अदृश्य थीं। नाओमी का बहुओं को लौटाना निर्दयता नहीं, दया है: मायके में उन्हें दूसरा पति मिल सकता था, इस्राएल में एक मोआबिन विधवा के पास कुछ नहीं था। रूत बिल्कुल यही जानते हुए चुनती है। वह भविष्य नहीं चुन रही, वह व्यक्ति चुन रही है।

अंतर्पाठ

पिछले पद में लिखा है कि "रूत उससे अलग न हुई।" इब्रानी में यह क्रिया है दावक, "चिपक जाना", वही शब्द जो उत्पत्ति 2:24 में है, जहाँ पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहता है। कहानीकार जानबूझकर विवाह की भाषा एक सास और बहू पर लगाता है: यह निष्ठा वैवाहिक गहराई की है। दूसरी गूँज और भी पुरानी है। उत्पत्ति 12 में अब्राहम को कहा जाता है कि अपने देश, अपने कुटुम्ब और अपने पिता के घर से निकलकर उस देश में जा, जो मैं तुझे दिखाऊँगा। रूत को किसी ने बुलाया नहीं, कोई प्रतिज्ञा नहीं मिली, फिर भी वह ठीक वही करती है। एक मोआबिन बिना वादे के अब्राहम का रास्ता चलती है।

श्रोता

पहले सुनने वालों के कान में दो चीज़ें चुभी होंगी। पहली, यहोवा का नाम एक मोआबिन के मुँह से। उनके लिए मोआब का मतलब था मूर्तिपूजा, कमोश, और सीमा पर का ख़तरा; और यहाँ वही मोआब वाचा की सबसे साफ़ बात कह रहा है जो पूरी पुस्तक में है। दूसरी, यह कि यह स्त्री उनके महान राजा की परदादी बनी। जो लोग वंश की शुद्धता से पहचान नापते थे, उनके लिए यह असुविधाजनक सत्य था। पुस्तक इसे छिपाती नहीं, बार-बार "मोआबिन रूत" दोहराती है। संदेश तीखा है: परमेश्वर के लोगों में शामिल होने की शर्त जन्म नहीं, चिपक जाना है। और जो इस्राएली अपनी विरासत पर गर्व कर रहे थे, उन्हें एक परदेशिन ने दिखाया कि वाचा में रहना असल में दिखता कैसा है।

मनन के प्रश्न

आपके जीवन में वह कौन है जिसके पास रुकने का अब कोई व्यावहारिक कारण नहीं बचा, और जिसे छोड़ने का हर बहाना आपके पास तैयार है?

रूत ने परमेश्वर को तब चुना जब उन्हें केवल दुःख में ही देखा था; आप अपने विश्वास को किस सबूत पर टिकाए हुए हैं, और वह सबूत हट जाए तो क्या बचेगा?

Ruth में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Faithful God: An Exposition of the Book of Ruth

Sinclair Ferguson

A warm exposition of God's quiet providence in ordinary lives.

The Message of Ruth

David Atkinson

Draws out the loyalty, loss and redemption woven through this short story.

A Loving Life

Paul Miller

Ruth as a school of committed love when life is hard and unglamorous.

Judges and Ruth: An Introduction and Commentary

Arthur Cundall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Judges, Ruth

K. Lawson Younger

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Ruth 1:16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

रूत 1:16 का क्या अर्थ है?
सड़क के बीचोंबीच, मोआब की सीमा पर, नाओमी अपनी बहू को धकेल रही है: लौट जा, वापस चली जा, तेरी जिठानी तो जा चुकी। और रूत, जो अब तक चुप थी, बोल उठती है। वह विनती को ही रोक देती है: "तू मुझसे यह विनती न कर, कि मुझे त्याग या छोड़कर लौट जा।" फिर वह अपने जीवन का हर हिस्सा नाओमी के जीवन से बाँध देती है, एक-एक करके: रास्ता, ठिकाना, कुल, और अंत में परमेश्वर। "तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।" यह भावुक क्षण नहीं, यह शपथ है, और इसके बाद नाओमी के पास कहने को कुछ नहीं बचता।
रूत 1:16 किस विषय में है?
रूत मोआबिन है, और यही इस वाक्य को विस्फोटक बनाता है। व्यवस्था में लिखा था कि मोआबी यहोवा की मण्डली में प्रवेश न करे; वह जाति इस्राएल के इतिहास में शत्रु के खाने में दर्ज थी। और अब एक मोआबी स्त्री, बिना किसी अनुष्ठान के, केवल एक विधवा का हाथ पकड़कर, वाचा की भाषा बोलती है: "तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।" परमेश्वर उसे दरवाज़े से नहीं, दुःख की सड़क से भीतर लाते हैं। और वहीं से कहानी आगे बढ़ती है: इसी स्त्री से ओबेद, फिर यिशै, फिर दाऊद। मत्ती अपनी वंशावली में उसका नाम लिखने से नहीं हिचकता। मसीह की देह में मोआब का लहू है। बाहर वाले को भीतर खींच लेने की जो आदत परमेश्वर की है, वह यहाँ सड़क के किनारे पहली बार साफ़ दिखती है।
रूत 1:16 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह न्यायियों का समय है, अकाल का समय, जब हर कोई अपनी दृष्टि में ठीक काम करता था। बैतलहम, यानी "रोटी का घर", में रोटी नहीं थी, इसलिए एलीमेलेक का परिवार मोआब भागा, उसी मोआब में जो इस्राएल का पुराना बैरी था। दस साल बाद तीन कब्रें पीछे छूट गईं। दो विधवाएँ, बिना पुत्र, बिना ज़मीन, बिना किसी पुरुष के संरक्षण के, उस दुनिया में कानूनी रूप से लगभग अदृश्य थीं। नाओमी का बहुओं को लौटाना निर्दयता नहीं, दया है: मायके में उन्हें दूसरा पति मिल सकता था, इस्राएल में एक मोआबिन विधवा के पास कुछ नहीं था। रूत बिल्कुल यही जानते हुए चुनती है। वह भविष्य नहीं चुन रही, वह व्यक्ति चुन रही है।
रूत 1:16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पहले सुनने वालों के कान में दो चीज़ें चुभी होंगी। पहली, यहोवा का नाम एक मोआबिन के मुँह से। उनके लिए मोआब का मतलब था मूर्तिपूजा, कमोश, और सीमा पर का ख़तरा; और यहाँ वही मोआब वाचा की सबसे साफ़ बात कह रहा है जो पूरी पुस्तक में है। दूसरी, यह कि यह स्त्री उनके महान राजा की परदादी बनी। जो लोग वंश की शुद्धता से पहचान नापते थे, उनके लिए यह असुविधाजनक सत्य था। पुस्तक इसे छिपाती नहीं, बार-बार "मोआबिन रूत" दोहराती है। संदेश तीखा है: परमेश्वर के लोगों में शामिल होने की शर्त जन्म नहीं, चिपक जाना है। और जो इस्राएली अपनी विरासत पर गर्व कर रहे थे, उन्हें एक परदेशिन ने दिखाया कि वाचा में रहना असल में दिखता कैसा है।
रूत 1:16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
रूत ने परमेश्वर को तब चुना जब उन्हें केवल दुःख में ही देखा था; आप अपने विश्वास को किस सबूत पर टिकाए हुए हैं, और वह सबूत हट जाए तो क्या बचेगा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ruth 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 5

पिता, नाओमी "अपने दोनों पुत्रों और पति से रहित हो गई," फिर भी आपने उसकी साँसें थामे रखीं और रूत को उसके पास छोड़ा। धन्यवाद कि सबसे गहरे नुकसान में भी आप साथ चलने वाला कोई न कोई देते हैं, और हमारी कहानी कब्र पर खत्म नहीं होती।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 17

पिता, रूत की तरह मुझे भी ऐसा मन दे जो आसान रास्ते की जगह वफ़ादारी चुने। जब रिश्ते भारी पड़ें और साथ निभाना महँगा लगे, तब मुझे पीछे हटने से बचा। आप मेरे साथ अंत तक बने रहते हैं, मुझे भी वैसा ही बनना सिखाइए।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 20

धन्यवाद कि आपके सामने हम अपनी कड़वाहट छिपाना नहीं पड़ता। नाओमी ने खुलकर कहा, "मुझे मारा कहो," और आपने उसे ठुकराया नहीं। धन्यवाद कि आप हमारे टूटे हुए शब्द भी सुनते हैं और सर्वशक्तिमान होकर भी हमारे दुःख में साथ खड़े रहते हैं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 19

पिता, कभी कभी लंबा सफर तय करके हम वहीं लौटते हैं जहाँ से चले थे, पर बदले हुए और टूटे हुए। जब लोग हमें पहचान न पाएँ, तब भी तू हमें जानता है। इस राह पर साथ चल, और जो खाली हाथ लौटे हैं उन्हें फिर से भर दे।

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