रूत 2
संयोग या मार्गदर्शन
रूत खेत में जाती है, और लेखक एक छोटी सी बात कहता है जो सब कुछ बदल देती है: "जिस खेत में वह संयोग से गई थी वह एलीमेलेक के कुटुम्बी बोअज का था।" यह "संयोग" शब्द रूत की पूरी कहानी की धुरी है। एक विधवा, परदेशिन, बिना सुरक्षा के, बालें बटोरने निकलती है और "अनजाने में" ठीक उसी खेत में पहुँचती है जहाँ उसका छुटकारा प्रतीक्षा कर रहा है। यह पाठ हमें दिखाता है कि परमेश्वर की करुणा कैसे साधारण काम, साधारण चुनावों, और साधारण भलाई के माध्यम से चलती है।
पाठ
अकाल के बाद बैतलहम लौटी नाओमी की बहू रूत खेतों में बालें बीनने जाती है और संयोग से बोअज के खेत में पहुँचती है, जो एलीमेलेक का कुटुम्बी है। बोअज उसकी सुधि लेता है, उसे सुरक्षा देता है, भोजन कराता है, और अपने जवानों को आज्ञा देता है कि जानबूझकर उसके लिए बालें छोड़ें। शाम को रूत एपा भर जौ लेकर लौटती है, और नाओमी में पहली बार आशा जागती है।
मूल बात
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर की करुणा अक्सर किसी के आज्ञाकारी हृदय से होकर बहती है। बोअज व्यवस्था की केवल न्यूनतम माँगें पूरी नहीं करता, वह उससे कहीं आगे जाता है। व्यवस्थाविवरण में परमेश्वर ने कहा था कि खेत के कोने न काटो, गिरी हुई बालें छोड़ दो, ताकि गरीब और परदेशी बटोर सकें। बोअज इसे मानता है, पर वह जानबूझकर मुट्ठी भर बालें भी गिरा देने को कहता है। यही अंतर है नियम-पालन और अनुग्रह में। परमेश्वर की व्यवस्था न्यूनतम रेखा है, प्रेम उसके पार जाता है। इसका मतलब है: भलाई का माप यह नहीं कि "मुझे और क्या करना ज़रूरी है", बल्कि "मैं और क्या दे सकता हूँ"।
बड़ी कहानी में जगह
रूत मोआबिन है, इस्राएल की शत्रु जाति से। फिर भी वह "यहोवा के पंखों के तले" शरण लेती है, और बोअज उसका छुड़ानेवाला बनता है। कुछ पीढ़ियों बाद इसी वंश से दाऊद जन्म लेगा, और फिर यीशु मसीह। मत्ती के पहले अध्याय में मसीह की वंशावली में रूत का नाम गिनकर लिखा गया है, मानो कहना हो: छुटकारा हमेशा बाहर के लोगों को भीतर लाता है। बोअज एक "गोएल" है, छुड़ानेवाला कुटुम्बी, जो अपने खर्चे पर दूसरे का बोझ उठाता है। मसीह इसी छाया की पूर्णता हैं, वह हमारे कर्ज़ को अपनी कीमत पर चुकाते हैं। बोअज की उदारता मसीह के अनुग्रह की छोटी सी झलक है।
आईना
यह पाठ हमारे रोज़मर्रा के व्यवहार को कुरेदता है। आपके दफ्तर में कोई नया, कमज़ोर, अजनबी है, क्या आप उसकी "सुधि" लेते हैं जैसे बोअज ने ली? आपके अधीन कोई काम करता है, क्या आपने उसे "तंग न करने" की व्यवस्था बनाई है, या केवल यह मान लिया है कि सब ठीक ही होगा? बोअज ने रूत को केवल बीनने की अनुमति नहीं दी, उसने पानी दिया, भोजन में बुलाया, और उसका सम्मान अपने जवानों के सामने स्थापित किया। यही अंतर है दान और गरिमा में। हम अक्सर पैसे तो दे देते हैं पर मेज़ पर बैठाते नहीं। कमज़ोर के लिए न्याय का मतलब है उसे बराबरी की जगह देना, न कि केवल टुकड़े गिराना। और घर में, क्या आपने अपने बच्चों, पत्नी, बूढ़े माता-पिता के लिए "मुट्ठी भर बालें जानबूझकर गिराने" की आदत बनाई है, या सब कुछ हिसाब से नापते हैं?
संदर्भ
यह न्यायियों के युग के अंत की कहानी है, जब "हर एक वही करता था जो उसकी दृष्टि में ठीक होता था"। अकाल के कारण एलीमेलेक का परिवार मोआब भागा था, वहीं दोनों बेटे और पिता मर गए। नाओमी अपनी विधवा मोआबिन बहू के साथ बैतलहम लौटी है, बिना पैसे, बिना पुरुष सुरक्षा के। उस समाज में यह मृत्यु के समान था। रूत की स्थिति तिगुनी कमज़ोर थी: स्त्री, विधवा, और परदेशिन, वह भी शत्रु जाति की। बालें बीनना गरीबों का अधिकार था, पर खतरनाक भी, क्योंकि खेत में मज़दूर स्त्रियों को छेड़ते थे। बोअज का "तुझे तंग न करें" वाक्य साधारण नहीं है, यह एक असली खतरे की ओर इशारा करता है।
अंतर-पाठ
व्यवस्थाविवरण 24:19 कहता है: "जब तू अपने पके खेत को काटे, और एक पूला खेत में भूल से छोड़ दे, तो उसे लेने को फिर न लौट जाना; वह परदेशी, अनाथ, और विधवा के लिये पड़ा रहे।" बोअज इसी आज्ञा को जीता है, पर इसे प्रेम के रूप में करता है, कर्तव्य के रूप में नहीं। दूसरी ओर, याकूब का पत्र 1:27 कहता है कि शुद्ध भक्ति यही है कि अनाथों और विधवाओं की उनके क्लेश में सुधि ली जाए। बोअज के हाथ-पाँव में यही "शुद्ध भक्ति" दिखती है, वह इसे मंदिर में नहीं, खेत में जीता है।
एक ब्यौरा
पद 4 का अभिवादन बहुत छोटा है, पर बहुत कुछ कहता है। बोअज खेत में आकर मज़दूरों से कहता है, "यहोवा तुम्हारे संग रहे," और वे उत्तर देते हैं, "यहोवा तुझे आशीष दे।" यह मालिक और मज़दूर के बीच का साधारण नमस्कार नहीं है, यह एक पूरे कार्यस्थल का माहौल है। जहाँ मालिक अपने कर्मचारियों को परमेश्वर के नाम से आशीष देता है और वे उसे लौटाते हैं, वहाँ शोषण की ज
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Ruth 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि जब रूत सांझ तक खेत में बीनती रही, तो उसका परिश्रम खाली न गया, बल्कि कोई एपा भर जौ निकला। मेरे छोटे से काम को भी आप ऐसे ही आशीष देते हैं, थोड़े दानों को भरपूरी में बदल देते हैं। आपके हाथ की उदारता के लिए मेरा मन आभारी है।
पिता, आपने बोअज़ के मन में जो उदारता डाली, वैसी ही मेरे मन में भी डालिए। मुझे उन लोगों को देखना सिखाइए जो चुपचाप संघर्ष कर रहे हैं, और जान बूझकर उनके लिए कुछ छोड़ जाना सिखाइए। और जब मैं खुद ज़रूरत में हूँ, तो याद दिलाइए कि आपकी देखभाल मुझसे पहले ही वहाँ पहुँच चुकी है।
रूत भूखी थी, पर उसने भीख नहीं माँगी। उसने कहा, "मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जिसकी दृष्टि में मैं अनुग्रह पाऊँ उसके पीछे-पीछे मैं बालें बीनती जाऊँ।" वह गिरी हुई बालें बीनने निकली, वही जो कटाई वाले छोड़ जाते थे। परदेशी, विधवा, खाली हाथ, फिर भी उठकर चल पड़ी।
तेरी कमी तुझे बैठा देती है या उठा देती है? परमेश्वर अक्सर उसी खेत में मिलता है जहाँ तू काम करने जाता है।
बोअज ने रूत से यह नहीं कहा कि जाकर पानी भर ला। उसने कहा, "जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू घड़ों के पास जाकर जवानों का भरा हुआ पानी पीना।" एक परदेशी विधवा, जिसे सेवा करनी चाहिए थी, अब सेवा पा रही है। और एक बात और, "क्या मैंने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझको न छूएँ?" सुरक्षा पहले, फिर रोटी। परमेश्वर तेरी भी चिंता ऐसे ही करता है।
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