रुकने और भरोसा करने का निमंत्रण
ठहरना और भरोसा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए प्रेरितों 9:3-4, न्यायियों 5:24, मरकुस 14:32 and लैव्यव्यवस्था 25:4.
☀ सुबह का पल
As he traveled, he came near Damascus, and suddenly a light from the sky shone around him. He fell on the earth, and heard a voice saying to him, "Saul, Saul, why do you persecute me?"
प्रेरितों 9:3-4
दोपहर का सूरज रेगिस्तान की सड़क पर सीधा नीचे गिरता है, इतना तेज़ कि कोई छाया नहीं बचती, आँखें अपने आप सिकुड़ जाती हैं। यही वह घड़ी थी जब शाऊल दमिश्क की सड़क पर चल रहा था, धूल भरे पैरों के साथ, हाथ में गिरफ़्तारी के पत्र लिए हुए। और फिर, उस चमकती दोपहर में भी, एक और रोशनी उतरी, सूरज से भी तेज़, ऐसी कि आदमी ज़मीन पर गिर पड़ा।
इससे पहले शाऊल अपने रास्ते को लेकर पूरी तरह निश्चिंत था। वह मसीह के अनुयायियों को पकड़ने निकला था, अपने विश्वास के लिए, अपने परमेश्वर के लिए, ऐसा वह सोचता था। कोई शक नहीं, कोई हिचकिचाहट नहीं।
फिर वह आवाज़ आई, सीधी, व्यक्तिगत, नाम लेकर। मसीह ने खुद को उन विश्वासियों के साथ जोड़ा जिन्हें शाऊल सता रहा था। यह कोई सामान्य फटकार नहीं थी, यह पहचान का सवाल था।
इस एक पल से सब कुछ बदल गया। जो आदमी कलीसिया मिटाने चला था, वही आगे चलकर उसका सबसे बड़ा प्रचारक बना। कुछ दिन अंधा रहा, फिर हनन्याह के हाथों से नई आँखें मिलीं, और परमेश्वर का सुसमाचार दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचा।
आज सुबह भी हम अपने रास्ते को लेकर उतने ही निश्चिंत निकल सकते हैं जितना शाऊल था। यह घटना याद दिलाती है कि सबसे तय रास्ते को भी परमेश्वर मोड़ सकता है, नाश करने के लिए नहीं, नई दिशा देने के लिए।
आज
एक कागज़ पर उस व्यक्ति का नाम लिखिए जिसका आप विरोध करते आए हैं या जिसे आप जज करते रहे हैं, और घर से निकलने से पहले उसका नाम लेकर उसके लिए प्रार्थना कीजिए।
✦ दोपहर का पल
“सब स्त्रियों में से केनी हेबेर की स्त्री याएल धन्य ठहरेगी; डेरों में रहनेवाली सब स्त्रियों में से वह धन्य ठहरेगी। (लूका 1:42)
न्यायियों 5:24
तंबू के भीतर एक हथौड़े की आवाज़, धीमी पर पूरी ताकत से टिकी हुई। सीसरा गहरी नींद में पड़ा है, ऐसी नींद जो सिर्फ पूरी तरह थके हुए आदमी को आती है, युद्ध हार चुका, भागते-भागते एक अजनबी की शरण में पहुँचा। याएल के हाथ में कोई तलवार नहीं, कोई भाला नहीं, बस एक खूँटा और एक हथौड़ा, तंबू लगाने के रोज़ के औज़ार।
यही तो चौंकाता है। याएल के पास कोई खास हथियार नहीं था। जो उसके हाथ में हर दिन रहता था, वही उस पल में इस्तेमाल हुआ। उस ज़माने में तंबू में शरण देना सुरक्षा का वादा था, मेहमान को छेड़ा नहीं जाता था। याएल ने उस भरोसे को तोड़ा, और यही उसकी कहानी को इतना कठिन बनाता है, इतना असहज भी। पर इस्राएल के लिए वह पल छुटकारे का पल बन गया, दबोरा के गीत में उसकी सराहना यूँ ही नहीं हुई।
इसमें कुछ है जो दोपहर के इस थके हुए पल में ठहरने लायक है। अक्सर हम सोचते हैं कि बड़ा काम बड़े औज़ार से होगा, बड़ी योजना से, बड़े मौके से। याएल के पास सिर्फ वही था जो हर दिन उसके तंबू में पड़ा रहता था। परिणाम बड़ा निकला।
आज दफ्तर की मेज़ पर, घर के काम में, जो चीज़ पड़ी है सामने, वही काफ़ी हो सकती है। बड़े मौके की प्रतीक्षा में मत रुको।
आज
अपनी मेज़ पर पड़ा वह छोटा काम उठाओ जिसे तुम टालते आए हो, अभी, अगले दस मिनट में उसे पूरा करो, वही औज़ार इस्तेमाल करो जो सामने रखा है।
◐ दोपहर का पल
फिर वे गतसमनी नामक एक जगह में आए; और उसने अपने चेलों से कहा, “यहाँ बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूँ।”
मरकुस 14:32
धरती पर एक ऐसा शब्द है जो कभी काव्यात्मक नहीं था। "गतशमने" इब्रानी के दो शब्दों से बना है, गत यानी पेरने की जगह, और शमानीम यानी तेल। यह जैतून के तेल का कोल्हू था, वह स्थान जहाँ भारी पत्थर के नीचे जैतून कुचले जाते थे ताकि उनसे तेल निकले।
यह कोई रूपक नहीं है। यह उस बगीचे का असली, रोज़मर्रा का नाम था जहाँ यीशु उस रात प्रार्थना करने गए। वे किसी शांत, सुंदर बाग में नहीं गए; वे उस जगह गए जिसका नाम ही कुचलने की प्रक्रिया बताता है।
शायद यह संयोग है, शायद नहीं। पर सुसमाचार इस विवरण को यूँ ही नहीं छोड़ता, वह नाम को दर्ज करता है, जैसे यह याद दिलाने के लिए कि उस रात जो हुआ वह हल्का नहीं था। तेल तभी निकलता है जब कुछ पूरी तरह दबाया जाए।
यह सवाल खुला छोड़ना ही ठीक है, क्या हर दबाव का कोई फल होता है। पवित्रशास्त्र यहाँ सीधा जवाब नहीं देता। पर यह इतना ज़रूर दिखाता है कि यीशु उस दबाव से भागे नहीं, वे उसमें गए, जागते हुए, प्रार्थना करते हुए, अपने चेलों के पास ही रहते हुए।
आज
आज दोपहर रसोई से जैतून का तेल या कोई भी खाना पकाने का तेल निकालें, अपनी हथेली पर कुछ बूँदें डालें, और उसे अपने माथे पर लगाते हुए ज़ोर से कहें कि आज आपको किस बात का दबाव महसूस हो रहा है, फिर अपने काम पर लौट जाएँ।
☾ संध्या का क्षण
परन्तु सातवें वर्ष भूमि को यहोवा के लिये परमविश्रामकाल मिला करे; उसमें न तो अपना खेत बोना और न अपनी दाख की बारी छाँटना।
लैव्यव्यवस्था 25:4
अगर मैं आज रुक जाऊं, तो क्या सब कुछ बिखर जाएगा?
इस्राएल में हर सातवें वर्ष खेत को यही करना था, रुकना। कोई बीज नहीं बोया जाता था, कोई दाख की बारी छांटी नहीं जाती थी। जो अपने आप उग आए, वह गरीब के लिए, परदेशी के लिए, पशुओं के लिए भी था। यह किसान की मर्जी नहीं थी, यह आज्ञा थी। और यह कोई आसान आज्ञा नहीं थी, क्योंकि एक साल बिना खेती के जीना डर पैदा करता है। फिर भी परमेश्वर ने वादा किया कि छठे वर्ष में इतनी उपज देगा कि सातवां वर्ष भी संभल जाए।
यह आज्ञा सिर्फ खेत के बारे में नहीं थी। यह बताती है कि भूमि किसकी है, परमेश्वर की। किसान मालिक नहीं, संभालने वाला था। और जो भूमि हर साल दिए बिना थक जाती, उसे विश्राम देना उसका सम्मान करना था।
यही आज रात की बात है। दिन खत्म हुआ, कुछ अधूरा रह गया, कोई काम नहीं हुआ जो होना चाहिए था। पर आज का दिन भी किसी और का है, तुम्हारा नहीं। जैसे खेत परमेश्वर को लौटाया जाता था, वैसे ही आज की थकान, आज की चूक, आज का अधूरापन उन्हीं के हाथ में रखा जा सकता है।
आज
आज रात अपने काम की सूची या फोन को दस मिनट के लिए एक तरफ रख दें, और ज़ोर से कहें, यह दिन अब तेरा है, प्रभु, मैं इसे रोक रहा हूं।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
24“सब स्त्रियों में से केनी हेबेर की स्त्री याएल धन्य ठहरेगी; डेरों में रहनेवाली सब स्त्रियों में से वह धन्य ठहरेगी। (लूका 1:42)
32फिर वे गतसमनी नामक एक जगह में आए; और उसने अपने चेलों से कहा, “यहाँ बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूँ।”
4परन्तु सातवें वर्ष भूमि को यहोवा के लिये परमविश्रामकाल मिला करे; उसमें न तो अपना खेत बोना और न अपनी दाख की बारी छाँटना।
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें