परमेश्वर पर भरोसा, हर घड़ी
भरोसा और शरण
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यशायाह 33:2, नीतिवचन 15:16, यशायाह 55:8-9 and भजन संहिता 91:1-2.
☀ सुबह का पल
हे यहोवा, हम लोगों पर अनुग्रह कर; हम तेरी ही बाट जोहते हैं। भोर को तू उनका भुजबल, संकट के समय हमारा उद्धारकर्ता ठहर।
यशायाह 33:2
बल शब्द किसी वीरता की कहानी से नहीं आता, यह उस थकान से उपजता है जो आँख खुलते ही शरीर में महसूस होती है। कंधे भारी लगते हैं, मन पहले से ही आज की सूची से घिरा होता है, और फिर भी उठना पड़ता है।
यशायाह के ये शब्द किसी शांत समय में नहीं लिखे गए थे। यह उस लोगों की पुकार है जो संकट में घिरे थे, जिनके पास खुद का कोई बल बचा नहीं था। इसलिए वे कहते हैं, हमने तेरी बाट जोही है। यह इंतज़ार हार का नहीं, भरोसे का इंतज़ार है।
ध्यान दो, यहाँ लिखा है हर सुबह। एक बार का बल नहीं, बल्कि रोज़ नया दिया जाने वाला बल। कल का बल आज के लिए काफी नहीं होता, और यह ठीक भी है। इसका मतलब है कि परमेश्वर को हर सुबह फिर से तेरी ज़िंदगी में आने का न्योता मिलता है।
जो थकान लेकर तू आज उठा है, वह इस पद के पूरी तरह अनुरूप है। यह पद कमज़ोर के लिए लिखा गया, थके हुए के लिए, जिसे संकट का डर सता रहा है।
आज
घर से निकलने या काम शुरू करने से ठीक पहले, एक मिनट रुक और ज़ोर से कह, यहोवा, आज का बल तू ही दे। फिर बिना देर किए दिन शुरू कर दे।
✦ दोपहर का पल
घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है,
नीतिवचन 15:16
जो ईमेल आपने आधे घंटे पहले भेजा, वह जो पेट में एक गांठ छोड़ गया, क्या आपने खुद से पूछा है कि यह सब आखिर किसलिए है?
दोपहर का यह ब्रेक अक्सर वह पल होता है जब सुबह की भागदौड़ थोड़ी थमती है और सवाल उठता है, यह मेहनत, यह होड़, यह लक्ष्य पाने की जिद, क्या यह उस शांति से बड़ी है जो इसके बदले खोती जा रही है।
सुलैमान ने भी यही देखा। बड़ा धन, बड़ी सफलता, अगर उसके साथ भीतर की उथल-पुथल आए, तो वह थोड़े से से बेहतर नहीं। थोड़ा, अगर उसमें परमेश्वर का भय हो, यानी उसके सामने जीने की सच्चाई और चैन हो, तो वही असली दौलत है।
यह काम छोड़ने की बात नहीं है। यह याद रखने की बात है कि आपका मूल्य आज के आंकड़ों से तय नहीं होता। जो काम अभी अधूरा पड़ा है, वह कल भी रहेगा, पर आपकी आत्मा को अभी सांस चाहिए।
आज
डेस्क से उठिए, पानी भरने जाते हुए या सीढ़ियों पर चलते हुए, धीरे से यह एक वाक्य कहिए, "प्रभु, मुझे बड़ा धन नहीं, तेरा भय और तेरी शांति चाहिए।" इसे ज़ोर से बोलिए, फुसफुसा कर ही सही, और फिर वापस अपनी मेज़ पर लौट आइए।
◐ दोपहर का पल
क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। (रोम. 11:33) क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
यशायाह 55:8-9
आज दोपहर तुम्हारा हिसाब गड़बड़ा गया है। सुबह जो योजना बनाई थी, वह वैसे पूरी नहीं हुई जैसा सोचा था। काम अटका, जवाब नहीं मिला, रास्ता जो सीधा लगता था, वह मुड़ गया।
हम अक्सर परमेश्वर को अपने हिसाब-किताब में फिट करना चाहते हैं, जैसे वह हमारे तर्क का पालन करेगा, हमारी समयसारणी के अनुसार चलेगा। और जब वह ऐसा नहीं करता, तो भीतर कुछ चिढ़ जाता है।
यह वचन आराम देने से पहले चुभता है। यहोवा कह रहा है कि उसके विचार हमारे विचारों जैसे नहीं। इसका मतलब है कि जो आज समझ नहीं आया, वह शायद कभी हमारी समझ में पूरी तरह न आए। यह मानना आसान नहीं।
सवाल यह है, क्या हम उस परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं जिसकी चाल हमसे इतनी ऊँची है कि हम उसे नाप नहीं सकते? यह सवाल आज सुलझेगा नहीं, और शायद सुलझना भी नहीं चाहिए। कभी-कभी विश्वास वहीं से शुरू होता है जहाँ समझ खत्म हो जाती है।
आज
एक कागज़ का टुकड़ा लो। उस पर वह एक बात लिखो जो आज तुम्हारी योजना के अनुसार नहीं हुई। उसके नीचे लिख दो, "तेरे विचार मेरे विचारों से ऊँचे हैं।" फिर उस कागज़ को अपनी डेस्क दराज या जेब में रख दो, बिना उसे तुरंत सुलझाने की कोशिश किए।
☾ संध्या का क्षण
जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा। मैं यहोवा के विषय कहूँगा, “वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, जिस पर मैं भरोसा रखता हूँ”
भजन संहिता 91:1-2
तपती दोपहर के बाद जब कोई किसी बड़े पेड़ की छाया के नीचे कदम रखता है, त्वचा को पहला स्पर्श ठंडी हवा का मिलता है, वह राहत तुरंत महसूस होती है, बिना किसी शब्द के शरीर खुद जान लेता है कि आराम कहाँ छिपा है।
मंगलवार का दिन भी ऐसी ही तपिश लेकर आया था, बैठकों की भागदौड़, फोन की लगातार घंटियाँ, सूची में लिखे काम जो कभी पूरे नहीं होते। अब शाम ढल चुकी है, और भजनकार की तरह हम भी उस छाया की तलाश करते हैं जो हमें सुरक्षित रखे।
भजनकार कोई काल्पनिक आश्रय नहीं ढूँढ़ता, वह सीधे कहता है, यहोवा मेरा दुर्ग है, मेरा परमेश्वर है, जिस पर मैं भरोसा करता हूँ। यह भरोसा किसी बड़ी उपलब्धि से नहीं आता, बल्कि सामने आकर स्वीकार करने से आता है कि हम स्वयं अपनी रक्षा नहीं कर सकते।
जो कुछ आज हुआ, अच्छा या अधूरा, उसे पकड़े रहने की जरूरत नहीं। परमप्रधान की छाया इतनी बड़ी है कि उसमें दिन की चिंता, थकान और छोटी हार सब समा जाती है। उसकी बाहों में विश्राम पाना कोई कमजोरी नहीं, यह वही है जिसके लिए हम बनाए गए हैं।
आज
आज रात सोने से पहले दो मिनट के लिए खिड़की के पास खड़े होकर धीरे से कहें, "तू मेरा दुर्ग है, मेरा परमेश्वर है, जिस पर मैं भरोसा करता हूँ," और फिर दिन की एक चिंता को नाम लेकर उसके हाथों में सौंप दें।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
2हे यहोवा, हम लोगों पर अनुग्रह कर; हम तेरी ही बाट जोहते हैं। भोर को तू उनका भुजबल, संकट के समय हमारा उद्धारकर्ता ठहर।
16घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है,
8क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। (रोम. 11:33)
9क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
1जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।
2मैं यहोवा के विषय कहूँगा, “वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, जिस पर मैं भरोसा रखता हूँ”
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें