हर दुःख में उसकी उपस्थिति
साथ में शांति
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 46:10, नीतिवचन 15:15, यिर्मयाह 45:3 and भजन संहिता 139:9-10.
☀ सुबह का पल
“चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ। मैं जातियों में महान हूँ, मैं पृथ्वी भर में महान हूँ!”
भजन संहिता 46:10
छुट्टी का दिन आते ही हम उसे तुरंत भर देते हैं, बाज़ार का काम, सफाई, किसी से मुलाकात, कोई शौक पूरा करना। जैसे खाली समय अपने आप में कुछ मूल्यवान नहीं, जब तक उसमें कुछ ठूँस न दिया जाए। परमेश्वर का यह वचन उस धारणा को चुपचाप हिला देता है।
यहाँ परमेश्वर कोई काम नहीं माँग रहा। वह कह रहा है, थम जा। शांत हो जा। और जान ले कि मैं परमेश्वर हूँ। यह आलस्य का बुलावा नहीं है, यह भरोसे का बुलावा है। जिसे यह मालूम है कि दुनिया उसके कंधों पर नहीं टिकी, वह रुक सकता है।
शनिवार की सुबह अक्सर घर में अलग तरह की चहल-पहल लाती है। बच्चे देर तक सोते हैं, चाय धीरे-धीरे बनती है, कोई जल्दी नहीं। यही वह समय है जब आत्मा भी धीमी पड़ सकती है, और परमेश्वर को फिर से पहचान सकती है।
कल रविवार है, आराधना का दिन। आज की शांति उसकी तैयारी बन सकती है। जो मन आज थमना सीखता है, वह कल भी सच्चे मन से आराधना कर पाएगा।
Today
आज सुबह घर में कोई एक कोना चुनें, वहाँ फोन एक तरफ रखकर तीन मिनट चुपचाप बैठें और धीरे से बोलें, तू परमेश्वर है।
✦ दोपहर का पल
दुःखियारे के सब दिन दुःख भरे रहते हैं, परन्तु जिसका मन प्रसन्न रहता है, वह मानो नित्य भोज में जाता है।
नीतिवचन 15:15
मेज़ पर आज दाल और सब्ज़ी की खुशबू फैली है, बच्चे बाहर से दौड़ते हुए आए हैं, हाथ धोने की जल्दी में हैं, और कोई पूछ रहा है कि चटनी कहाँ रखी है। शनिवार की यह दोपहर जल्दी में नहीं है, फिर भी मन कभी-कभी उसी पुरानी थकान को खींच लाता है, जैसे छुट्टी के दिन भी भार उठाना ज़रूरी हो।
नीतिवचन का यह वचन दो तरह के दिनों की बात करता है, एक वो जिसमें दुख भारी है और दूसरा वो जिसमें हृदय आनंदित है। दिलचस्प बात यह है कि परिस्थिति एक जैसी हो सकती है, वही मेज़, वही भोजन, वही परिवार, पर हृदय ही तय करता है कि यह दिन बोझ है या उत्सव।
एक आनंदित हृदय किसी बड़े कारण की प्रतीक्षा नहीं करता। वह आज की छोटी दाल-रोटी को भी उत्सव बना लेता है, क्योंकि वह जानता है कि हर भोजन परमेश्वर के हाथ से आया है। यह हृदय शिकायत की जगह धन्यवाद चुनता है।
शनिवार की यह दोपहर छोटी बात नहीं है। यह वो समय है जब परिवार साथ बैठता है, बातें होती हैं, हँसी होती है। यही तो एक निरंतर उत्सव जैसा जीवन है, जिसे परमेश्वर हर दिन देना चाहता है, बस हमारा हृदय उसे पहचाने।
Today
आज भोजन शुरू करने से पहले परिवार के साथ ऊँची आवाज़ में एक वाक्य का धन्यवाद कहो, जिसमें आज की किसी छोटी बात का नाम लो, जैसे मौसम, हँसी, या कोई खास पल।
◐ दोपहर का पल
हे बारूक, तूने कहा, ‘हाय मुझ पर! क्योंकि यहोवा ने मुझे दुःख पर दुःख दिया है; मैं कराहते-कराहते थक गया और मुझे कुछ चैन नहीं मिलता।’
यिर्मयाह 45:3
बारूक, यिर्मयाह का लेखक, दिन भर आग जैसे जलते शब्दों को स्क्रॉल पर उतारता रहा है, वे शब्द जो यरूशलेम के विनाश की घोषणा करते हैं। शाम होते-होते वह टूट जाता है और कह उठता है, मुझ पर हाय! उसकी थकान किसी काम की थकान नहीं, आत्मा की थकान है।
आज शनिवार की दोपहर है, वह घड़ी जब घर के काम निपटाने के बाद थोड़ी सांस लेनी चाहिए थी। पर शायद तुम्हारे भीतर भी बारूक जैसी एक कराह है, जो छुट्टी के दिन भी शांत नहीं होती। बच्चों का शोर, अधूरे कामों की सूची, कोई पुराना दर्द, जो आराम की घड़ी में भी पीछा नहीं छोड़ता।
यहोवा बारूक को यह वादा नहीं देते कि सब कुछ अभी ठीक हो जाएगा। वे केवल इतना कहते हैं कि उसकी जान बचाई जाएगी, और कुछ नहीं। यह सुनने में कठोर लगे, पर सच्चा है, कभी-कभी विश्वास का मतलब यह नहीं कि थकान मिट जाए, बल्कि यह कि उस थकान के ठीक बीच में परमेश्वर मौजूद रहते हैं।
शायद आज तुम्हें बस यह मान लेना है कि छुट्टी का दिन भी हमेशा आराम नहीं देता, और यह मान लेना कोई हार नहीं है। परमेश्वर तुम्हारी कराह सुनते हैं, भले ही वे उसे तुरंत खामोश न करें।
Today
एक कागज़ का टुकड़ा और कलम उठाओ, अपनी एक थकान, एक कराह, साफ शब्दों में वहीं लिख दो। फिर पाँच मिनट चुपचाप बैठो, उसे सुलझाने की कोशिश किए बिना, बस उसे परमेश्वर के सामने खुला छोड़ते हुए।
☾ संध्या का क्षण
यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र के पार जा बसूँ, तो वहाँ भी तू अपने हाथ से मेरी अगुआई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
भजन संहिता 139:9-10
थामे रहेगा। यह शब्द सिर्फ पकड़ने से कहीं ज्यादा कहता है। यह वह हाथ है जो छोड़ता नहीं, चाहे तुम कितनी भी दूर चले जाओ।
आज का दिन कैसा भी बीता हो, शायद तुम घर के काम में उलझे रहे, कहीं घूमने गए, या बस बच्चों के साथ खेलते रह गए, शाम का यह पल तुम्हें याद दिलाता है कि तुम अकेले नहीं थे। जब सुबह की उजास में तुम दौड़े, तब भी उसका हाथ तुम्हारे साथ था। जब दिन ढल गया और तुम थके हुए बैठे, तब भी वही हाथ तुम्हें थामे हुए है।
यह हाथ किसी नियंत्रण की मुट्ठी नहीं, बल्कि एक पिता की पकड़ है, जो गिरने से बचाती है। तुम कहीं भी रहो, चाहे भीड़ में हो या अकेले, चाहे खुश हो या उलझन में, यह हाथ वहीं है।
शनिवार की यह शाम एक अच्छा समय है यह सोचने का कि इस हफ्ते तुम कहाँ कहाँ गए, और यह पहचानने का कि हर जगह वह हाथ तुम्हारे साथ था। कल रविवार है, विश्राम और आराधना का दिन आ रहा है, और आज की यह शांति उसकी तैयारी है।
Today
आज रात सोने से पहले, घर के किसी अपने का हाथ थामो, चाहे बच्चे का, पति-पत्नी का, या माता-पिता का, और चुपचाप कहो, धन्यवाद कि तेरा हाथ आज हमारे साथ था।
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10“चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ। मैं जातियों में महान हूँ, मैं पृथ्वी भर में महान हूँ!”
15दुःखियारे के सब दिन दुःख भरे रहते हैं, परन्तु जिसका मन प्रसन्न रहता है, वह मानो नित्य भोज में जाता है।
3हे बारूक, तूने कहा, ‘हाय मुझ पर! क्योंकि यहोवा ने मुझे दुःख पर दुःख दिया है; मैं कराहते-कराहते थक गया और मुझे कुछ चैन नहीं मिलता।’
9यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र के पार जा बसूँ,
10तो वहाँ भी तू अपने हाथ से मेरी अगुआई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
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