परमेश्वर की उपस्थिति में विश्राम पाना
उसके संग विश्राम
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 92:1-2, इब्रानियों 10:24-25, यशायाह 30:15 and भजन संहिता 27:4.
☀ सुबह का पल
यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; प्रातःकाल को तेरी करुणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
भजन संहिता 92:1-2
अच्छा। भजनकार लिखता है कि यहोवा का धन्यवाद करना 'अच्छा' है। कोई कर्तव्य नहीं, कोई भारी आज्ञा नहीं, बस यह कि यह अच्छा है, स्वयं आपके लिए अच्छा है।
आज रविवार है, प्रभु का दिन। सप्ताह का वह दिन जब मंडली एक साथ आती है, गीत उठते हैं, और हृदय ऊपर देखता है। यह भजन मानो इसी दिन के लिए लिखा गया हो।
ध्यान दीजिए कि क्रम क्या है। सुबह उसकी करुणा की घोषणा, और रात को उसकी विश्वासयोग्यता की। दिन का आरंभ इस विश्वास से होता है कि उसका प्रेम आज भी नया है, और दिन का अंत इस गवाही से कि वह आज भी विश्वासयोग्य रहा।
शायद आप थके हुए उठे हैं, या मन में कोई चिंता लिए हुए। भजनकार आपसे यह नहीं कहता कि पहले सब ठीक करो, फिर धन्यवाद दो। वह कहता है, बस शुरू कर दो। एक नाम लेकर, एक धन्यवाद कहकर।
आज मंडली में जाइए, या घर पर ही रुककर, उसकी करुणा को पहचानिए। यह अच्छा है। यह हृदय को हल्का करता है, और दिन को सही दिशा देता है।
परमेश्वर आज आपके साथ चलने के लिए तैयार है। उसकी करुणा नई है।
यह दिन समर्पित करें →✦ दोपहर का पल
और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों-ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों-त्यों और भी अधिक यह किया करो।
इब्रानियों 10:24-25
जो अनजान लेखक ने यह पत्री लिखी, उसके पाठक थक चुके थे। सताव बढ़ रहा था, और कई विश्वासी चुपचाप सभा से गायब होने लगे थे। घर पर रहना आसान लगता था, सुरक्षित भी।
आज रविवार है। शायद आप अभी-अभी मण्डली से लौटे हैं, या जाने की तैयारी में हैं, या सोच रहे हैं कि इस बार छोड़ ही दिया जाए।
लेखक कोई नियम नहीं थोप रहा। वह एक कारण दे रहा है: 'एक दूसरे को उस्काने के लिये।' आप वहाँ इसलिए नहीं जाते कि आपको कुछ मिले, बल्कि इसलिए भी कि किसी और को आपकी उपस्थिति से हिम्मत मिले।
यह सोचकर देखिए: आज मण्डली में कोई ऐसा है जिसका पूरा हफ्ता टूटा हुआ बीता। आपकी मुस्कान, आपका 'कैसे हैं आप,' आपका साथ बैठना, वही उसकी सांस हो सकता है।
हम अक्सर सोचते हैं कि आराधना एकांत का काम है। पर परमेश्वर ने हमें एक शरीर बनाया, अंग नहीं। रविवार का ठहराव अकेले नहीं, संग में पूरा होता है।
आज जाइए। और किसी की ओर देखिए, केवल परमेश्वर की ओर नहीं।
यह दिन समर्पित करें →◐ दोपहर का पल
प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यह कहता है, “लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहने और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है।” परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया,
यशायाह 30:15
"तुमने इनकार किया।" वाक्य के अंत में यह छोटा सा वाक्यांश, लगभग एक फुसफुसाहट की तरह। परमेश्वर ने पूरा वादा रख दिया, विश्राम, शांति, भरोसा, उद्धार, और फिर एक अल्पविराम, और फिर यह दो शब्द।
यह छोटा सा 'इनकार' छोटा नहीं है। यह पूरे अध्याय का दिल है। इस्राएल भाग रहा था, घोड़ों पर, मिस्र की ओर, अपनी योजनाओं में। परमेश्वर ने कहा, लौट आओ, रुक जाओ, चुप हो जाओ। और उन्होंने कहा, नहीं।
आज रविवार है। सभा हो चुकी, या होने वाली है। पर क्या मन सचमुच लौटा? या भीतर वही दौड़ चल रही है, अगले हफ्ते की, अगले फैसले की, अगली चिंता की?
यहाँ चुभने वाली बात यह है कि परमेश्वर ज़ोर नहीं डालते। वे शक्ति देते हैं, पर हमारी मौन सहमति के बिना नहीं। विश्राम एक भेंट है, थोपा हुआ आदेश नहीं।
तो सवाल यह नहीं कि परमेश्वर कहाँ हैं। सवाल यह है कि आज दोपहर, इस घड़ी में, क्या मैं भी चुपचाप 'इनकार' कर रहा हूँ? शायद इसी शब्द के सामने कुछ देर बैठना ही आज की प्रार्थना है।
यह दिन समर्पित करें →☾ संध्या का क्षण
एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊँ, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूँ। (भज. 6:8, भज. 23:6, फिलि. 3:13)
भजन संहिता 27:4
मंदिर के आंगन में एक दीपक जल रहा है। दाऊद वहाँ बैठा है, घुटनों पर, हाथ खाली। बाहर दुश्मन हैं, षड्यंत्र हैं, राजा का बोझ है। पर उसकी एक ही इच्छा है, बस एक।
सौ चीज़ें नहीं। हज़ार प्रार्थनाएँ नहीं। एक।
आज रविवार था। शायद आपने आराधना में गीत गाए, शायद अकेले शांति में बैठे रहे। दिन अब ढल रहा है, और मन कई दिशाओं में भागता है, कल की चिंता, बीते सप्ताह की थकान, वे बातें जो अनकही रह गईं।
दाऊद यहाँ हमें एक तोहफ़ा देता है, ध्यान को इकट्ठा करने का तरीका। सब कुछ माँगने के बजाय, एक चीज़। परमेश्वर की उपस्थिति में रहना। उनकी सुंदरता को देखना। बस वहाँ होना।
यह शाम आपको सब कुछ सुलझाने की ज़रूरत नहीं है। हर धागा पकड़ने की भी नहीं। आज की चिंताओं को उनके हाथ में रखिए, धीरे से, जैसे कोई थका बच्चा माँ के कंधे पर सिर टिकाता है।
एक चीज़, प्रभु। बस आप। आपकी उपस्थिति ही मेरा घर है, आज रात और हर रात।
यह दिन समर्पित करें →इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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1यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
2प्रातःकाल को तेरी करुणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
24और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें।
25और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों-ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों-त्यों और भी अधिक यह किया करो।
15प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यह कहता है, “लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहने और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है।” परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया,
4एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊँ, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूँ। (भज. 6:8, भज. 23:6, फिलि. 3:13)
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