सही समय पर पूरी होती प्रतिज्ञा
धैर्य और भरोसा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए मत्ती 13:44, हबक्कूक 2:3, योना 4:2 and मत्ती 1:21.
☀ सुबह का पल
“स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाकर छिपा दिया, और आनन्द के मारे जाकर अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया।
मत्ती 13:44
उस आदमी ने धन पाकर उसे फिर से गाड़ दिया। यह बात अक्सर पढ़ते हुए छूट जाती है। वह चोर नहीं था, वह बेईमान नहीं था, बस उस ज़माने की एक साधारण सच्चाई थी, गड़ा हुआ धन उस खेत की भूमि के साथ बंधा होता था। जब तक खेत उसका नहीं, तब तक धन भी उसका नहीं। इसलिए वह उसे वहीं छोड़ता है, और पूरी ज़मीन खरीदने निकल जाता है।
यहीं मोड़ है, जो अक्सर छूट जाता है। वह पहले धन को अपने घर नहीं ले जाता, वह पहले खरीदने जाता है, और वह भी आनन्द के साथ। बेचना उसके लिए बोझ नहीं, उत्सव है। उसने कुछ ऐसा देख लिया है जिसके सामने उसकी बाकी सारी संपत्ति फीकी पड़ गई।
आज रविवार है, आराधना का दिन, वह दिन जब हम सब मिलकर उसी खेत की ओर लौटते हैं जहाँ धन गड़ा है। परमेश्वर का राज्य किसी दूर के सपने में नहीं, आज की सुबह में, आज की आराधना में छिपा पड़ा है।
सवाल यह नहीं कि तुम्हारे पास कितना है, सवाल यह है कि क्या तुमने उस धन को पहचाना है जो तुम्हारी हर चीज़ से बड़ा है। पहचान आते ही बाकी सब अपनी जगह पर आ जाता है।
आज
आज आराधना के लिए निकलने से पहले, एक कागज़ पर वह एक बात लिख लो जो तुम्हारे जीवन में किसी भी और चीज़ से ज़्यादा कीमती है, और उसे ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने धन्यवाद के साथ पढ़ो।
✦ दोपहर का पल
क्योंकि इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होनेवाली है, वरन् इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इसमें धोखा न होगा। चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी।
हबक्कूक 2:3
हबक्कूक शहर की दीवार पर चढ़ता है, पहरेदार की तरह अपनी जगह ले लेता है। उसने पहले ही हिंसा और अन्याय की शिकायत आसमान की ओर फेंक दी थी, और जवाब में सिर्फ सन्नाटा मिला था। तो वह चौकी पर टिका रहता है, देखने के लिए कि परमेश्वर क्या कहेंगे।
चौकी शहर की दीवार पर बना वह ऊँचा स्थान था जहाँ से पहरेदार दूर तक देख सकता था, और जो कुछ पास आ रहा था उसकी खबर दे सकता था। हबक्कूक ने अपनी शिकायत के साथ ठीक यही किया। वह मुँह मोड़कर चला नहीं गया, वह अपनी जगह पर टिका रहा, आँखें खुली रखे।
और परमेश्वर का जवाब आता है, इंतज़ार करो। समय भले ही लगे, पर जब वह पल आएगा तो देर नहीं होगी। और इसे इतना साफ़ लिखो कि दौड़ता हुआ आदमी भी उसे पढ़ सके।
आज रविवार है, और हम सब मिलकर बैठे हैं परमेश्वर की उपस्थिति में। हर सवाल का जवाब आज ही मिल जाए, यह ज़रूरी नहीं। पर हम अपनी जगह पर टिके रह सकते हैं, साथ मिलकर, सुनने के लिए तैयार, जैसे पहरेदार दूर से आती हुई खबर की राह देखता है।
आज
आज कागज़ का एक टुकड़ा लो और आराधना या वचन से जो एक बात तुम्हारे भीतर टिकी है उसे साफ़-साफ़ लिख दो। उस कागज़ को कहीं ऐसी जगह रख दो जहाँ यह हफ्ते भर तुम्हारी नज़र में रहे।
◐ दोपहर का पल
और उसने यहोवा से यह कहकर प्रार्थना की, “हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैंने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, और विलम्ब से कोप करनेवाला करुणानिधान है, और दुःख देने से प्रसन्न नहीं होता।
योना 4:2
सही होना खुद में एक संतोष देता है। जब आपने पहले से जान लिया हो कि क्या गलत होने वाला है, और वह सचमुच वैसा ही निकले, तो एक राहत मिलती है, एक चुप्पी की जीत। योना के पास यह संतोष था। उसने पहले ही कह दिया था कि यही होगा। और यही बात उसे तोड़ गई।
योना नीनवे के बाहर बैठा है, शहर बच गया है, और वह गुस्से से जल रहा है। वजह यह नहीं कि परमेश्वर असफल हो गए, बल्कि यह कि परमेश्वर ने ठीक वही किया जिसका डर योना को था, दया दिखाई। उसकी प्रार्थना में परमेश्वर के अपने ही स्वभाव पर आरोप है, कृपालु, दयावन्त, विलम्ब से क्रोध करने वाला। योना यह सिद्धांत पूरी तरह जानता था। बस उसे नीनवे पर लागू होते नहीं देखना चाहता था।
नीनवे, अश्शूर की राजधानी, इस्राएल पर अत्याचार करने वाला शहर, चालीस दिन की चेतावनी पाकर पशुओं तक पश्चाताप करता है। और योना एक झोपड़ी बना कर बाहर बैठ जाता है, यह देखने के लिए कि शायद फिर भी आग बरसे। परमेश्वर एक पौधा उगाते हैं छाया के लिए, फिर एक कीड़ा उसे खा जाता है, धूप फिर सिर पर आ जाती है, और योना मरना चाह लेता है।
यह गुस्सा अविश्वास से नहीं, बल्कि बहुत ज़्यादा यकीन से आता है, इस यकीन से कि हम जान गए हैं कौन दया के लायक है और कौन नहीं। किताब का आखिरी वाक्य एक सवाल है, जवाब नहीं। यह सवाल आज भी खुला रह सकता है, आपके लिए भी।
आज
आज आराधना में जाने या भजन गाने से पहले, एक कागज़ पर उस व्यक्ति या समूह का नाम लिखिए जिस पर दया दिखाई जाए तो आपको भीतर से एतराज़ होता है, और उसके नाम पर खुले शब्दों में आशीष माँगिए।
☾ संध्या का क्षण
वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”
मत्ती 1:21
यह आज्ञा मरियम को नहीं, यूसुफ को दी गई है। बालक उसका अपना पुत्र नहीं था, फिर भी नाम रखने का अधिकार उसे दिया गया। उस संस्कृति में नाम रखना पिता का काम था, और इस एक आज्ञा से यूसुफ को उस बालक का पिता बना दिया गया, कानूनी रूप से, पूरी जिम्मेदारी के साथ।
नाम खुद भी कोई साधारण शब्द नहीं है। यीशु, यहूदी भाषा में यहोशू, इसका अर्थ है यहोवा बचाता है। यह नाम उस समय के इस्राएल में असामान्य नहीं था, पर यहां इसे यूं ही नहीं चुना गया, इसे कारण के साथ दिया गया है।
क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा, यह वाक्य साफ बताता है कि यह नाम राजनीतिक मुक्ति की बात नहीं करता। यह गहरी बात है, पाप से छुड़ाने की बात।
आज रविवार है, आराधना का दिन। शायद आज सुबह कलीसिया में यही नाम गाया गया, पुकारा गया। शाम को जब दिन शांत हो रहा है, यही नाम फिर से याद करने योग्य है, क्योंकि इसमें अर्थ भरा है।
आज
आज रात प्रार्थना में यीशु का नाम धीरे से ज़ोर से बोलें, और साथ में वह एक बात कहें जिससे आप आज़ाद होना चाहते हैं।
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44“स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाकर छिपा दिया, और आनन्द के मारे जाकर अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया।
3क्योंकि इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होनेवाली है, वरन् इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इसमें धोखा न होगा। चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी।
2और उसने यहोवा से यह कहकर प्रार्थना की, “हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैंने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, और विलम्ब से कोप करनेवाला करुणानिधान है, और दुःख देने से प्रसन्न नहीं होता।
21वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”
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