परमेश्वर में मन की सच्ची शान्ति
शान्ति और भरोसा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए फिलिप्पियों 4:6-7, नीतिवचन 15:1, यिर्मयाह 2:13 and भजन संहिता 62:1-2.
☀ The सुबह moment
किसी भी बात की चिन्ता मत करो, परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएँ। तब परमेश्वर की शान्ति, जो सारी समझ से परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।
फिलिप्पियों 4:6-7
सुरक्षित। यही एक शब्द आज सुबह अपने हाथ में लीजिए। पौलुस नहीं कहते कि परमेश्वर की शान्ति आपकी परिस्थिति बदल देगी, या आपकी सूची छोटी कर देगी। वे कहते हैं, वह शान्ति आपको सुरक्षित रखेगी।
जैसे कोई पहरेदार किले के फाटक पर खड़ा हो। भीतर जो है, वह भीतर ही रहे। बाहर की चिन्ता भीतर घुसकर आपके हृदय को लूट न ले।
शुक्रवार की सुबह है। सप्ताह का आखिरी दिन, और शायद वही दिन जिस पर अधूरे काम, अनसुलझी बातें और थकान एक साथ खड़ी हैं। पौलुस की सलाह छोटी है, पर गहरी: चिन्ता को प्रार्थना में बदल दीजिए, और प्रार्थना में धन्यवाद मिला दीजिए।
धन्यवाद क्यों? क्योंकि धन्यवाद याद दिलाता है कि परमेश्वर पहले भी विश्वासयोग्य रहे हैं। जो कल संभालने वाले थे, वे आज भी हैं।
आज हर बात समझ में आए, यह जरूरी नहीं। जो शान्ति परमेश्वर देते हैं, वह समझ से परे है। वह तर्क से नहीं, उपस्थिति से आती है।
तो जाइए, अपने दिन में। आपके भीतर एक पहरेदार खड़ा है, और वह मसीह यीशु के नाम पर पहरा दे रहा है।
यह दिन समर्पित करें →✦ The दोपहर का भोजन moment
A gentle answer turns away wrath, but a harsh word stirs up anger.
नीतिवचन 15:1
'कोमल उत्तर।' ध्यान दीजिए, यहाँ 'चुप्पी' नहीं लिखा है। सुलैमान यह नहीं कह रहा कि जवाब मत दो, वह कह रहा है कि जवाब दो, पर कोमलता से। यह छोटा अंतर बहुत बड़ा है।
दोपहर तक कई ईमेल आ चुके होंगे। शायद कोई सहकर्मी का तीखा संदेश, कोई ग्राहक की शिकायत, या घर से एक चुभती बात। भीतर एक गर्म उत्तर तैयार बैठा है, उंगलियाँ कीबोर्ड पर तेज़ हैं।
रुकिए। भेजने से पहले एक बार पढ़िए। क्या यह शब्द आग बुझाएगा या भड़काएगा?
कोमल उत्तर कमज़ोरी नहीं है। यह ताकत है, क्योंकि इसमें आत्म-नियंत्रण चाहिए। क्रोध का जवाब क्रोध से देना आसान है, बच्चा भी कर लेता है। पर ठंडे दिमाग से, सच्चाई के साथ, पर नरमी से उत्तर देना, यह बुद्धि है।
यीशु के सामने पीलातुस खड़ा था, झूठे आरोप लग रहे थे। उनका उत्तर संक्षिप्त था, शांत था, पर सच्चा था। वह टूटे नहीं, न ही भड़के।
आज दोपहर, अगला कठिन जवाब भेजने से पहले, तीन साँस लीजिए। शब्द बदल दीजिए। देखिए, आग कैसे बुझती है।
यह दिन समर्पित करें →◐ The दोपहर moment
For my people have committed two evils: they have forsaken me, the spring of living waters, and cut them out cisterns, broken cisterns, that can hold no water.
यिर्मयाह 2:13
चट्टान पर हथौड़े की ठक-ठक। पसीना, धूल, और एक आदमी जो अपने ही हाथों से पत्थर में गड्ढा खोद रहा है, क्योंकि वह अपने लिए पानी जमा करना चाहता है। पास ही एक झरना बह रहा है, ठंडा, साफ, मुफ्त। पर वह उसकी तरफ पीठ किए बैठा है।
यिर्मयाह के ज़रिए परमेश्वर यही तस्वीर दिखाते हैं। दो बुराइयाँ, एक साथ। पहली, उन्हें छोड़ देना जो जीवन का सोता हैं। दूसरी, अपने लिए कुछ ऐसा बनाना जो टिक ही नहीं सकता।
दोपहर के इस थके हुए घंटे में यह सवाल चुभता है। मैंने आज सुबह से अब तक किन हौदों से पीने की कोशिश की? काम में तारीफ़, फ़ोन की स्क्रीन, अगली उपलब्धि, किसी की सहमति। हर एक में दरार है। पानी रिस जाता है। और मैं फिर प्यासा।
यह पद जवाब नहीं देता कि हौद तोड़ने में इतनी मेहनत क्यों मीठी लगती है। यह सिर्फ़ आईना दिखाता है।
शायद आज का काम यही है, हथौड़ा नीचे रखना। एक पल के लिए खुदाई बंद करना।
झरना अब भी बह रहा है। पीठ मोड़ने की देर है।
यह दिन समर्पित करें →☾ The शाम moment
मेरा प्राण चुपचाप होकर परमेश्वर ही की बाट जोहता है; उसी से मेरा उद्धार होता है। वही मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा ऊँचा गढ़ है; मैं कभी न डगमगाऊँगा।
भजन संहिता 62:1-2
रसोई की मेज़ पर चाय का आधा खाली प्याला रखा है, लैपटॉप अभी-अभी बंद हुआ है, और शुक्रवार की शाम की वह अजीब सी शांति कमरे में उतर रही है, जब शरीर तो थक चुका है पर मन अभी भी दिन की मीटिंगों में उलझा है।
सप्ताह का आखिरी दिन अपने साथ बहुत कुछ लेकर आता है। कुछ काम पूरे हुए, कुछ अधूरे रह गए। कुछ बातें अच्छी हुईं, कुछ बातें आप दोबारा सोचते हैं कि काश दूसरी तरह कहीं होतीं।
दाऊद कहते हैं, प्राण चुपचाप होकर परमेश्वर की बाट जोहता है। चुपचाप होना अपने आप नहीं होता। यह एक निर्णय है, एक धीमा साँस छोड़ना, एक जानबूझकर किया गया विश्राम।
आज रात कुछ भी सुलझाने की ज़रूरत नहीं है। सोमवार की चिंता सोमवार तक ठहर सकती है। जो चट्टान आज सुबह आपको थामे हुए थी, वही आज रात भी है।
एक पल रुककर उन तीन बातों के लिए धन्यवाद कहिए जो आज हुईं, चाहे वे कितनी भी छोटी क्यों न हों। और फिर पूरा दिन, उसकी थकान और उसकी अनसुलझी गाँठें, उस ऊँचे गढ़ के हाथों में सौंप दीजिए।
आप डगमगाएँगे नहीं। वह जागते रहेंगे।
यह दिन समर्पित करें →इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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6किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएँ।
7तब परमेश्वर की शान्ति, जो सारी समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी। (यशा. 26:3)
1कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध भड़क उठता है।
13क्योंकि मेरी प्रजा ने दो बुराइयाँ की हैं: उन्होंने मुझ जीवन के जल के सोते को त्याग दिया है, और, उन्होंने हौद बना लिए, वरन् ऐसे हौद जो टूट गए हैं, और जिनमें जल नहीं रह सकता। (यिर्म. 17:13)
1सचमुच मैं चुपचाप होकर परमेश्वर की ओर मन लगाए हूँ मेरा उद्धार उसी से होता है।
2सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है मैं अधिक न डिगूँगा।
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