हर पल परमेश्वर की देखभाल में
देखभाल और विश्राम
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 118:24, नीतिवचन 27:19, सभोपदेशक 3:11 and भजन संहिता 121:3-4.
☀ सुबह का पल
आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है; हम इसमें मगन और आनन्दित हों।
भजन संहिता 118:24
क्या यह दिन सच में एक उपहार जैसा लगता है, या बस एक और शनिवार जो जल्दी बीत जाना चाहिए?
शायद आप थके हुए उठे हैं। हफ्ते का बोझ अभी भी कंधों पर है, और मन कहता है कि आराम भी एक काम बन गया है। घर के काम, बच्चों की आवाज़ें, कल की आराधना की तैयारी, सब एक साथ खड़े हैं।
पर भजनकार एक बात कहता है जो सुनने लायक है। यह दिन बनाया गया है। यह अपने आप नहीं आया। परमेश्वर ने इसे गढ़ा, जैसे कुम्हार मिट्टी को गढ़ता है, और फिर आपके हाथ में रखा।
इसलिए आज आपको सब कुछ ठीक करने की ज़रूरत नहीं है। बस इसमें रहना है। धीरे चाय पीना, किसी अपने के साथ देर तक बैठना, बिना जल्दी के बाइबल खोलना, यह सब आराधना बन सकता है।
मगन होना कोई भावना नहीं है जो अपने आप आ जाए। यह एक चुनाव है, एक छोटा सा 'हाँ' जो आप इस दिन को कहते हैं क्योंकि इसे देने वाला भरोसेमंद है।
आज का दिन उधार नहीं, भेंट है। इसे खोलिए।
यह दिन समर्पित करें →✦ दोपहर का पल
जैसे जल में मुख की परछाई मुख को प्रगट करती है, वैसे ही मनुष्य का मन मनुष्य को प्रगट करती है।
नीतिवचन 27:19
शनिवार की दोपहर सबसे ईमानदार आईना है।
सोमवार से शुक्रवार तक हम भूमिकाएँ निभाते हैं। कर्मचारी, बॉस, ग्राहक, पड़ोसी। हर चेहरे के लिए एक अलग मुस्कान तैयार रहती है। पर आज, जब कोई मीटिंग नहीं, कोई डेडलाइन नहीं, तो जो बचता है, वही आप हैं।
ठहरिए और देखिए। जैसे पानी में चेहरा वैसा ही दिखता है जैसा वह है, वैसे ही आज आपका मन आपको दिखा रहा है कि आप असल में कौन हैं। क्या आप बेचैन हैं जब कुछ करने को नहीं? क्या खाली समय आपको डराता है? क्या घर के लोगों के साथ बैठना काम से भी कठिन लगता है?
ये सवाल असहज हैं, पर ज़रूरी हैं। परमेश्वर सप्ताह में एक दिन इसलिए ठहराता है ताकि हम अपने ही दिल का आमना-सामना कर सकें। भागदौड़ के बीच वह चेहरा धुंधला रहता है। ठहराव में वह साफ़ हो जाता है।
दोपहर के इस भोजन के समय अपने आप से एक सवाल पूछिए, वही जो आप किसी और से पूछने से डरते हैं। जवाब जो भी हो, उसे परमेश्वर के सामने ले जाइए। वह पहले से जानता है, और फिर भी आपसे प्रेम करता है।
यही शनिवार का असली आराम है।
यह दिन समर्पित करें →◐ दोपहर का पल
उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने-अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं; फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्तकाल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तो भी जो काम परमेश्वर ने किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य समझ नहीं सकता।
सभोपदेशक 3:11
शनिवार की दोपहर। घड़ी धीमी चलती है।
शायद आप बगीचे में बैठे हैं, या रसोई में चाय बनाते हुए बच्चों की आवाज़ें सुन रहे हैं। और फिर भी, इस शान्ति के बीच, मन में कोई हल्की सी बेचैनी है। कुछ अधूरा। कुछ जो समझ में नहीं आता।
सभोपदेशक का लेखक इसी बेचैनी को नाम देता है। परमेश्वर ने हर चीज़ को अपने समय पर सुन्दर बनाया, यह वह मानता है। पर उसी सांस में वह कहता है, उसने हमारे मन में 'अनन्तकाल' भी रख दिया है। यही वह कांटा है जो सुख के बीच भी चुभता रहता है।
इसलिए दोपहर की चाय भी कभी पूरी तरह से भर नहीं पाती। बच्चों की हँसी भी एक दिन बीत जाएगी, यह पता है। हम इस पल में हैं, और साथ ही इस पल से बहुत बड़े हैं।
यह कोई कमी नहीं है, यह परमेश्वर की छाप है। उसने हमें ऐसा ही गढ़ा। अनन्त की भूख को कोई शनिवार, कोई छुट्टी, कोई परिवार पूरी तरह नहीं मिटा सकता।
तो आज इस अधूरेपन से लड़िए मत। इसे बैठने दीजिए। यह आपको उसकी ओर मोड़ रहा है, जो अकेला अनन्त है।
यह दिन समर्पित करें →☾ संध्या का क्षण
वह तेरे पाँव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊँघेगा। सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊँघेगा और न सोएगा।
भजन संहिता 121:3-4
प्राचीन इस्राएल में रात को पहरेदार शहर की दीवार पर बैठते थे। एक कोने से दूसरे कोने तक चलते, मशाल हाथ में, आँखें अंधेरे में गड़ी हुई। अगर वह ऊँघ जाता, तो पूरा शहर खतरे में आ जाता। इसलिए पहरेदार का जागते रहना, शहर के सोने की शर्त थी।
दाऊद इसी तस्वीर को उठाकर परमेश्वर पर लगाता है। तुम्हारे ऊपर एक ऐसा पहरेदार है जो कभी ऊँघता नहीं, कभी सोता नहीं।
यह सोचकर आज की शाम को देखिए। हफ्ते भर की भागदौड़ के बाद यह शनिवार की शाम है। शायद बच्चे थके हुए सो गए हैं, शायद घर में शांति है, शायद कुछ काम अधूरे भी रह गए। जो हुआ, जो नहीं हुआ, जो कल के लिए बचा है, सब कुछ अब उस पहरेदार के हाथ में सौंप दीजिए जो जागता है।
आपको आज रात सब कुछ सँभालने की ज़रूरत नहीं है। आप सो सकते हैं क्योंकि कोई और है जो जागता है।
धन्यवाद दीजिए, उस दिन के लिए जो बीत गया। और चैन से आँखें बंद कीजिए। कल का सूरज उसी परमेश्वर के हाथ में है जिसने आज का सूरज उगाया था।
यह दिन समर्पित करें →इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
24आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है; हम इसमें मगन और आनन्दित हों।
19जैसे जल में मुख की परछाई मुख को प्रगट करती है, वैसे ही मनुष्य का मन मनुष्य को प्रगट करती है।
11उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने-अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं; फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्तकाल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तो भी जो काम परमेश्वर ने किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य समझ नहीं सकता।
3वह तेरे पाँव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊँघेगा।
4सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊँघेगा और न सोएगा।
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें