स्थिर रहो · शुक्रवार, सितम्बर 4, 2026

कठिन राह में साथ देनेवाला परमेश्वर

साथ और भरोसा

कल 2 मिनट का पठन 4 बाइबिल के अंश

शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यशायाह 43:2, नीतिवचन 14:30, यशायाह 40:27 and भजन संहिता 23:5.

☀ सुबह का पल

जब तू जल में होकर जाए, मैं तेरे संग-संग रहूँगा और जब तू नदियों में होकर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेगी; जब तू आग में चले तब तुझे आँच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।

यशायाह 43:2

जिन गाँवों में पुल नहीं होते, वहाँ लोग भोर में ही नदी पार करते हैं, जब पानी सबसे शांत होता है। पैर पत्थरों पर फिसलते हैं, धारा टखनों को खींचती है, और सामान सिर पर संभालना पड़ता है। हर कदम पर यह डर रहता है कि पानी कहीं ज़्यादा गहरा न निकले।

परमेश्वर यहाँ यह नहीं कहते कि नदी नहीं आएगी। वे कहते हैं कि जब वह आए, तो वे साथ होंगे। पानी हो या आग, दोनों ऐसी ताकतें हैं जो इंसान को बहा सकती हैं या जला सकती हैं, फिर भी परमेश्वर का वचन है कि वे उस पर हावी नहीं होंगी।

आज की सुबह जिस काम, जिस परीक्षा या जिस अनिश्चितता के साथ शुरू हो रही है, वह शायद पहले से कहीं ज़्यादा गहरी लग रही हो। पर वादा नदी के सूखने का नहीं, उसके साथ चलने का है।

यह भरोसा कमरे में बैठकर नहीं, धारा में उतरकर ही पता चलता है। इसीलिए परमेश्वर पहले ही कह देते हैं, वे साथ होंगे, ताकि पहला कदम उठाने का डर कम हो जाए।

आज
घर से निकलने से पहले, एक मिनट रुककर धीरे से बोल: 'आज तू मेरे साथ चलेगा।' इसे ज़ोर से कहो, भले फुसफुसाकर, और फिर दिन की ओर कदम बढ़ा।

यह दिन समर्पित करें →

✦ दोपहर का पल

शान्त मन, तन का जीवन है, परन्तु ईर्ष्या से हड्डियाँ भी गल जाती हैं।

नीतिवचन 14:30

किसी सहकर्मी की तरक्की की खबर सुनते ही आपके भीतर वह जो जलन उठी थी, वह कहाँ गई? दोपहर के इस थोड़े समय में भी वह कहीं भीतर सुलग रही है, है ना?

सुबह से लेकर अब तक कितनी बार आपने खुद को किसी और से तौला। किसकी मेज़ बड़ी है, किसका काम पहले सराहा गया, किसकी ज़िंदगी आसान लगती है। यह तुलना थकाती नहीं दिखती, पर भीतर से खा जाती है।

नीतिवचन इसे बड़े साफ शब्दों में कहता है। शांत हृदय शरीर को जीवन देता है, पर जलन हड्डियों को गला देती है। यह कोई भावनात्मक बात नहीं, यह शरीर की सच्चाई है। जो भीतर सड़ता है वह बाहर भी दिखता है, थकान में, चिड़चिड़ेपन में, नींद की कमी में।

परमेश्वर आपको किसी दूसरे के नाप से नहीं देखता। वह आपके भीतर शांति रखना चाहता है, तुलना नहीं। यह शांति कोई मूड नहीं, एक चुनाव है, हर घंटे नया।

आज
अभी, इसी दोपहर, एक कागज़ के टुकड़े पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिससे आप बार-बार अपनी तुलना करते हैं। फिर धीरे से, ज़ोर से बोलकर, उसके लिए एक भलाई की प्रार्थना कहिए, उसके काम, उसके परिवार, उसके दिन के लिए।

यह दिन समर्पित करें →

◐ दोपहर का पल

हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, “मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?”

यशायाह 40:27

बेबीलोन में बंदी इस्राएलियों की तीसरी पीढ़ी बड़ी हो चुकी थी, वादे का देश सिर्फ दादा-दादी की कहानियों में बचा था। उन्होंने मान लिया था कि उनका रास्ता परमेश्वर से छिप गया है, कि उनकी फ़रियाद कहीं दर्ज ही नहीं हो रही।

तुम्हारी दोपहर भी शायद वैसी ही थकी हुई है। काम की मेज़ पर वही फ़ाइलें, वही सवाल जिनका जवाब कल भी नहीं मिला था, और भीतर वही शिकायत जो शब्दों में नहीं आती लेकिन दिल में बजती रहती है, मेरी सुनी नहीं जा रही।

यशायाह इस शिकायत को दबाता नहीं, वह उसे सीधा नाम देता है, मेरा रास्ता यहोवा से छिपा है। और फिर परमेश्वर वहीं सवाल लौटा देता है, तू ऐसा क्यों कहता है? यह सवाल तुरंत आराम नहीं देता, यह पहले हिलाता है। शायद तूने भी अपनी थकान को सच मान लिया है, बिना यह पूछे कि क्या यह सच वैसा ही है जैसा दिखता है।

रास्ता छिपा हो सकता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह मिटा दिया गया है। नक्शे पर धुंध छाई हो सकती है, फिर भी मंज़िल जगह पर टिकी रहती है। परमेश्वर की खामोशी और परमेश्वर की भूल एक चीज़ नहीं हैं, भले दोपहर की धूप में यह फ़र्क करना कठिन लगे।

आज
आज एक कागज़ पर वह शिकायत लिख दे जो तेरे भीतर बज रही है, मेरा रास्ता तुझसे छिपा है, या जो भी शब्द सच लगें। फिर उसे पढ़ ले और चुपचाप परमेश्वर के सामने रख दे, बिना उसे तुरंत सुलझाने की कोशिश किए।

यह दिन समर्पित करें →

☾ संध्या का क्षण

तू मेरे सतानेवालों के सामने मेरे लिये मेज बिछाता है; तूने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमड़ रहा है।

भजन संहिता 23:5

तेल की एक बूंद माथे से नीचे बहती है, धीरे, बिना जल्दी के। मेज पहले से सजी हुई है, दीवट की लौ में बर्तन चमक रहे हैं, और कटोरा इतना भरा है कि वह किनारों से बह रहा है। यह किसी शांत, सुरक्षित घर का दृश्य नहीं है, यह उस मेज़ का दृश्य है जो शत्रुओं के बीच, विरोध के बीच बिछाई गई है।

आज का दिन भी ऐसा ही रहा होगा, कोई डेडलाइन, कोई थकान, कोई अनकहा तनाव जो सुबह से साथ चला। और फिर भी शाम आती है, और मेज़ फिर से बिछती है। परमेश्वर ने आज भी आपकी परवाह की, चाहे दिन कैसा भी बीता।

तेल अभिषेक का चिन्ह है, यह कहता है कि आप भुलाए नहीं गए, आप चुने गए हैं। कटोरे का बहना यह याद दिलाता है कि परमेश्वर की भलाई नाप-तोल कर नहीं, बहुतायत से आती है। यह किसी योग्यता का पुरस्कार नहीं, बस उसका उपहार है।

दिन की चिंताएं, बातचीत में रह गई खुरदुरी बातें, अधूरे काम, ये सब मेज़ पर रख दें। आज रात आपको हर चीज़ अपने कंधों पर उठाकर नहीं सोना है।

आज
आज रात सोने से पहले एक कटोरी या गिलास पानी भर लें, उसे धीरे-धीरे पीएं, और हर घूंट के साथ मन में एक बात कहें जिसके लिए आज आप परमेश्वर के आभारी हैं।

यह दिन समर्पित करें →

इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें

पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।

और गहराई में जाना चाहते हैं?

इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।

गहन अध्ययन आरंभ करें

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव