धीरज और आशा हर पहर में
धीरज और भरोसा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 119:147, नीतिवचन 14:29, सभोपदेशक 4:1 and भजन संहिता 63:6-7.
☀ सुबह का पल
मैंने पौ फटने से पहले दुहाई दी; मेरी आशा तेरे वचनों पर थी।
भजन संहिता 119:147
"अंधेरा छटने से पहले" यह वाक्यांश आसानी से पढ़ा और भुला दिया जाता है, पर यही इस पद की जान है। भजनकार सूरज निकलने का इंतज़ार नहीं करता, वह अंधेरे में ही पुकारता है। यानी उसकी पुकार उस दिन की किसी भी परिस्थिति, किसी भी खबर, किसी भी थकान से पहले आती है। दिन अभी बना ही नहीं, और वह पहले ही परमेश्वर की ओर मुड़ चुका है।
यह क्रम मायने रखता है। पहले पुकार, फिर आशा। भजनकार यह नहीं कहता कि उसने पहले हालात परखे और तब भरोसा किया। वह हालात जानने से पहले ही परमेश्वर के वचन पर आशा रखता है। यही वह चाल है जो एक थकी हुई सुबह को बदल सकती है।
हम में से बहुत लोग जागते ही फोन उठाते हैं, सूचनाएं, कामों की सूची, दुनिया की खबरें पहले सुनते हैं। भजनकार का तरीका उल्टा है, पहले पुकार, फिर बाकी सब। यह कोई नियम नहीं, एक निमंत्रण है।
परमेश्वर सुबह से पहले भी जागता है, और वह आपकी पुकार का इंतज़ार कर रहा है, चाहे दिन कैसा भी बीतने वाला हो।
आज
आज फोन उठाने से पहले, बिस्तर पर बैठे-बैठे ही, ज़ोर से एक वाक्य कह दें, "परमेश्वर, आज के इस दिन के लिए मुझे आपकी सहायता चाहिए।" इसे कहने के बाद ही दिन की बाकी चीज़ें शुरू करें।
✦ दोपहर का पल
जो विलम्ब से क्रोध करनेवाला है वह बड़ा समझवाला है, परन्तु जो अधीर होता है, वह मूर्खता को बढ़ाता है।
नीतिवचन 14:29
आपकी नाराज़गी आपकी बुद्धि से कहीं ज़्यादा तेज़ बोलती है।
दोपहर का समय है, काम अभी पूरा नहीं हुआ, और किसी ने वह बात कह दी जो आपको चुभ गई। शायद बॉस की टिप्पणी, शायद सहकर्मी का लहज़ा, शायद वह मेसेज जो अभी-अभी आया और भीतर कुछ सुलगा गया। जवाब उंगलियों पर तैयार है, तीखा और तुरंत।
यही वह पल है जिसकी बात यह कहावत करती है। जल्दी क्रोधित न होने वाला महान समझ रखता है, पर तेज़ स्वभाव वाला मूर्खता ही दिखाता है। समझदारी शांत रहने का ढोंग नहीं है, यह असली ताकत है, जो जवाब देने से पहले एक साँस लेने की हिम्मत रखती है।
दफ्तर की भाषा में इसे कमज़ोरी कहा जाता है, जैसे धीमे बोलने वाला हार गया हो। पर यह वचन उलट देता है, तेज़ी नहीं समझ का पैमाना है, ठहराव है। जो रुक सकता है, वह अक्सर वही देखता है जो जल्दबाज़ी में छिप जाता है।
यह छोटा सा दोपहर का ठहराव इसी की याद है, तेज़ी हर बार सही नहीं होती, कभी-कभी सबसे बुद्धिमान चाल रुक जाना है।
आज
अभी जिस मेसेज या मेल का जवाब आपको तीखा लगे, उसे लिख लें पर भेजें नहीं। दस मिनट रुकें, फिर उसे फिर से पढ़ें और तय करें कि उसमें से कितना भेजना ज़रूरी है।
◐ दोपहर का पल
तब मैंने वह सब अंधेर देखा जो सूर्य के नीचे होता है। और क्या देखा, कि अंधेर सहनेवालों के आँसू बह रहे हैं, और उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं! अंधेर करनेवालों के हाथ में शक्ति थी, परन्तु उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं था।
सभोपदेशक 4:1
दफ्तर की खिड़की से बाहर धूप तेज़ हो गई है, और भीतर सब कुछ धीमा पड़ गया है। यही वह घड़ी है जब आँखें थक जाती हैं और मन इधर-उधर भटकने लगता है।
प्रचारक कोई गीत नहीं गा रहा। वह सिर्फ देख रहा है, और जो देखता है वह अच्छा नहीं है। कोई रो रहा है और पास कोई सांत्वना देने वाला नहीं। जिसके हाथ में ताकत है, वही और ताकतवर होता जा रहा है। यह कोई कहानी का अंत नहीं, यह बीच का सच है, अधूरा और कच्चा।
सबसे कठिन बात यह है कि यहाँ परमेश्वर का नाम नहीं आता। कोई निर्णय नहीं सुनाया जाता, कोई तुरंत उम्मीद नहीं दी जाती। प्रचारक सिर्फ आँसू गिनता है और आगे बढ़ जाता है। शायद इसी में इस पद की ईमानदारी है, यह दुख को जल्दी लपेटकर नहीं रख देता।
हम चाहते हैं कि हर अन्याय का जवाब वहीं मिल जाए, इस पद में नहीं मिलता। सवाल छूट जाता है, हवा में लटका रहता है, जैसे कोई शिकायत जिसका उत्तर अभी नहीं आया।
पर सवाल हमें भी छोड़ नहीं देता। कहीं कोई है जिसके पास सांत्वना देने वाला नहीं, शायद वह तुम्हारे दफ्तर में, तुम्हारी गली में, या तुम्हारे फ़ोन की सूची में दबा बैठा है।
आज
आज एक नाम याद करो, वह व्यक्ति जो हाल में अनदेखा या अकेला महसूस कर रहा है। उसे अभी एक छोटा संदेश भेजो, दस मिनट के भीतर, सिर्फ यह कहते हुए कि तुम उसे याद कर रहे हो।
☾ संध्या का क्षण
जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूँगा, तब रात के एक-एक पहर में तुझ पर ध्यान करूँगा; क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिए मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूँगा।
भजन संहिता 63:6-7
आज मान लिया जाता है कि रात सिर्फ बैटरी चार्ज करने का समय है, दिनभर की थकान को नींद के हवाले कर देना, ताकि कल फिर से मशीन की तरह चल सकें। मन को भी बंद कर देना ही समझदारी लगती है।
पर दाऊद कुछ और ही करता है। वह बिस्तर पर लेटकर परमेश्वर को याद करता है। नींद से पहले का समय उसके लिए खाली नहीं, भरा हुआ है, परमेश्वर के साथ बातचीत का समय।
यह छोटी सी बात गहरी है। दिनभर हमने जो देखा, सुना, सहा, उसे बिना सोचे-समझे बस भूल जाना नहीं है काम। बल्कि यह पूछना है, आज तू मेरा सहायक कहाँ था। और यह सवाल पूछते ही आँखें भर आती हैं, कहीं शांति से, कहीं धन्यवाद से।
परमेश्वर के पंखों की छाया कोई दूर की कल्पना नहीं। वह आज भी वहीं है, जहाँ थकान है, जहाँ चिंता बची रह गई है। रात के पहरों में भी वह जागता रहता है, इसलिए हमें हर पल जागे रहने की ज़रूरत नहीं।
आज
आज रात, बत्ती बुझाने से ठीक पहले, आँखें बंद करके धीरे से कहें, हे परमेश्वर, आज तू मेरा सहायक था। इसे फुसफुसाहट में ही सही, पर ज़ोर से मुँह से निकालें, इससे पहले कि नींद आँखें बंद कर दे।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
147मैंने पौ फटने से पहले दुहाई दी; मेरी आशा तेरे वचनों पर थी।
29जो विलम्ब से क्रोध करनेवाला है वह बड़ा समझवाला है, परन्तु जो अधीर होता है, वह मूर्खता को बढ़ाता है।
1तब मैंने वह सब अंधेर देखा जो सूर्य के नीचे होता है। और क्या देखा, कि अंधेर सहनेवालों के आँसू बह रहे हैं, और उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं! अंधेर करनेवालों के हाथ में शक्ति थी, परन्तु उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं था।
6जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूँगा, तब रात के एक-एक पहर में तुझ पर ध्यान करूँगा;
7क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिए मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूँगा।
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें