स्थिर रहो · शनिवार, सितम्बर 5, 2026

परमेश्वर की सुरक्षा और सच्चा साथ

सुरक्षा और सच्चा साथ

आज 2 मिनट का पठन 4 बाइबिल के अंश

शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 118:14, नीतिवचन 18:24, यशायाह 5:2 and भजन संहिता 116:8-9.

☀ सुबह का पल

परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है।

भजन संहिता 118:14

अभी टेबल पर कल रात के बर्तन धरे हैं, कॉफी की गंध रसोई में फैल रही है, और बच्चे अभी भी सो रहे हैं। हाथ में आज की सूची है, बाज़ार, सफाई, शायद कोई मरम्मत का काम। मन में हल्की थकान भी है, क्योंकि हफ्ता खत्म होने के बाद भी शरीर पूरी तरह तरोताज़ा नहीं लगता।

ऐसे ही किसी सुबह के लिए यह शब्द लिखा गया है, यहोवा मेरा बल और मेरा गीत है। इसका मतलब यह नहीं कि आज सब आसान हो जाएगा, बल्कि यह कि दिन की ताकत हमारी अपनी योजना से नहीं, परमेश्वर से आती है। वह पहले से जानता है कि सूची कितनी लंबी है।

शनिवार का दिन अलग होता है, इसमें दफ्तर का दबाव नहीं, फिर भी घर के काम अपनी जगह मांगते हैं। इस दिन को भारी बोझ बनाने की बजाय, इसे उस गीत की तरह जीने की कोशिश करें जो परमेश्वर ने हमें दिया है। काम के बीच भी आनंद की जगह है

यह सुबह कल की आराधना की तैयारी भी है। आज का आराम, आज की हंसी, कल के धन्यवाद की भूमिका बांधती है।

आज
इस सुबह चाय या कॉफी का पहला घूंट लेने से पहले, धीरे से यह वाक्य ऊँची आवाज़ में कहें, यहोवा मेरा बल और मेरा गीत है। फिर बिना जल्दी किए, वहीं एक मिनट बैठे रहें।

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✦ दोपहर का पल

मित्रों के बढ़ाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्र होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है।

नीतिवचन 18:24

मेज पर बर्तन रखे जा रहे हैं, और घर में कुछ देर के लिए हलचल शांत हो गई है। शनिवार की दोपहर का यह पल जल्दी में नहीं, बल्कि साथ बैठने के लिए बना है।

आज किसी दफ्तर की मीटिंग नहीं, कोई डेडलाइन नहीं। बस परिवार है, शायद कोई पुराना दोस्त फोन पर, या पड़ोसी जो चाय के लिए रुक गया है। ऐसे ही मामूली पलों में यह वचन गहराई से बोलता है।

बहुत से परिचित होना आसान है, पर सच्चा साथी दुर्लभ है। ऐसा कोई जो हर हाल में साथ खड़ा रहे, नाम भर का रिश्ता नहीं बल्कि दिल से जुड़ा हुआ। परमेश्वर ने हमें ऐसे रिश्तों के लिए ही रचा है, अकेले चलने के लिए नहीं।

यीशु खुद ऐसे मित्र हैं जो भाई से भी निकट रहते हैं। जब जीवन के भारी बोझ आते हैं, तब भी वे साथ छोड़ते नहीं। यह भरोसा हमें अपने रिश्तों को भी उसी गंभीरता से जीने का बल देता है।

आज
आज दोपहर घर के किसी सदस्य या करीबी दोस्त के पास जाकर, या फोन करके, उसे स्पष्ट शब्दों में बताएं, "मुझे खुशी है कि तुम मेरे जीवन में हो।" यह वाक्य अभी, इसी समय, ज़ोर से या सामने बोल दें।

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◐ दोपहर का पल

उसने उसकी मिट्टी खोदी और उसके पत्थर बीनकर उसमें उत्तम जाति की एक दाखलता लगाई; उसके बीच में उसने एक गुम्मट बनाया, और दाखरस के लिये एक कुण्ड भी खोदा; तब उसने दाख की आशा की, परन्तु उसमें निकम्मी दाखें ही लगीं।

यशायाह 5:2

एक अच्छा किसान अंगूर की बारी लगाने से पहले महीनों काम करता है। पहले वह ज़मीन को खोदता है, हर पत्थर को हाथ से उठाकर बाहर फेंकता है, ताकि जड़ें बिना रुके नीचे जा सकें। फिर वह बाजार में जाकर सबसे अच्छी किस्म की बेल चुनता है, सस्ती नहीं, सबसे उत्तम। पहाड़ी की चोटी पर वह एक ऊँचा पहरे का बुर्ज बनाता है, और चट्टान में खुद हाथ से एक कुण्ड खोदता है जहाँ अंगूर कुचले जाएँगे। यह काम हफ्तों का है, पीठ दुखाने वाला, हाथ छिल जाने वाला। और फिर वह इंतज़ार करता है, साल दर साल, फल के लिए।

यशायाह की यह बारी परमेश्वर का चित्र है, और वह चित्र सुखद नहीं रहता। हर पत्थर हटाया गया, सबसे अच्छी बेल चुनी गई, फिर भी जो निकला वह जंगली अंगूर था, कड़वा, बेकाम। यह पढ़कर आराम नहीं मिलता, बल्कि एक सवाल उठता है जो टलता नहीं।

आज शनिवार है, घर में समय है, परिवार पास है, कल रविवार की तैयारी भी होगी। ऐसे दिन में यह सवाल आसानी से टाला जा सकता है, क्योंकि आराम और मेहनत का हिसाब अलग रखना सरल है। पर यशायाह की बारी बताती है कि परमेश्वर का काम हमारे भीतर रुका नहीं है, वह अब भी खोद रहा है, पत्थर हटा रहा है। सवाल यह नहीं कि उसने कितना किया, सवाल यह है कि हम क्या फल दे रहे हैं।

आज
आज दोपहर घर के किसी पौधे, गमले या बगीचे के पास जाएं। उसकी एक पत्ती या फल हाथ में लें, और खुद से पूछें, क्या यही फल है जो मेरे जीवन से निकल रहा है। जो जवाब मन में आए, उसे एक पंक्ति में कागज़ पर लिख दें।

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☾ संध्या का क्षण

तूने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आँख को आँसू बहाने से, और मेरे पाँव को ठोकर खाने से बचाया है। मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के सामने जानकर नित चलता रहूँगा।

भजन संहिता 116:8-9

आज शाम, जब घर में सन्नाटा फैलने लगा है, क्या तुमने खुद से पूछा, मैं आज बच कैसे गया? वह गिरता हुआ पल, वह भारी मन, वह अनकहा डर, सब कहाँ गया?

दाऊद के मन में भी ऐसा ही एक दिन था, जब आँसू आँखों तक आ गए थे, जब पैर लड़खड़ाने को थे। पर उसने पीछे मुड़कर देखा और पाया कि परमेश्वर ने उसकी जान को थाम लिया था। उसने अपने दुःख को नहीं भुलाया, बल्कि उसे धन्यवाद में बदल दिया।

शनिवार की यह शाम शायद उतनी नाटकीय न लगे, कोई बड़ा संकट नहीं, कोई बड़ा उद्धार नहीं। पर देखो ज़रा, तुम्हारे बच्चे आँगन में हँस रहे हैं, तुमने चाय की चुस्की ली, तुम्हारा दिल अब भी धड़क रहा है। यह सब उसी हाथ से आया है जिसने दाऊद को थामा था।

परमेश्वर के सामने चलना कोई बड़ा कदम नहीं, बल्कि आज की छोटी-छोटी साँसों को उसकी ओर मोड़ना है। जीवितों के देश में चलना, यानी आज के इस साधारण दिन में उसकी उपस्थिति को पहचानना।

आज
आज रात सोने से पहले कागज़ पर तीन बातें लिखो जो आज अच्छी हुईं, चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हों, और हर एक के लिए ज़ोर से परमेश्वर का धन्यवाद करो।

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