थकान में नया बल और शान्ति
बल और शान्ति
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यशायाह 40:31, नीतिवचन 16:3, 2 कुरिन्थियों 4:8-9 and भजन संहिता 131:2.
☀ सुबह का पल
परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएँगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।
यशायाह 40:31
सुबह 6:45 बजे रसोई की मेज़ पर आधी पी हुई चाय ठंडी पड़ी है, और फ़ोन की स्क्रीन पर बुधवार की सूची पहले से इंतज़ार कर रही है: एक मीटिंग, एक बिल, एक संदेश जिसका जवाब कल ही देना था। सप्ताह का बीच वाला दिन अपनी थकान के साथ आता है, बिना शोर मचाए।
यह थकान कोई कमज़ोर विश्वास की निशानी नहीं है। यह इंसान होने की निशानी है। जो लोग परमेश्वर की बाट जोहते हैं, वे भी थकते हैं, फ़र्क सिर्फ़ यह है कि उनकी थकान का अंत उनके अपने भंडार पर नहीं होता।
ध्यान दीजिए, वचन यह नहीं कहता कि दौड़ना बंद हो जाएगा। दफ़्तर, कक्षा, रसोई, वे सब आज भी वहीं रहेंगे। कहा गया है कि नया बल मिलता रहेगा, थोड़ा-थोड़ा, ठीक उतना जितना आज के कदम के लिए ज़रूरी है।
"बाट जोहना" का अर्थ हाथ पर हाथ रखकर बैठना नहीं है। इसका अर्थ है काम के बीच में भी अपनी आशा किसी और पर टिकाए रखना। एक छोटी प्रार्थना, एक गहरी साँस, एक स्वीकारोक्ति: प्रभु, आज मेरा बल आपसे आता है।
तो उठिए, चाय गर्म कर लीजिए, और सूची का पहला काम कीजिए। आप अकेले नहीं चल रहे। जिसने उकाबों को पंख दिए, वह आज आपके साथ है, और उसकी शक्ति शाम तक चुकेगी नहीं।
यह दिन समर्पित करें →✦ दोपहर का पल
अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, इससे तेरी कल्पनाएँ सिद्ध होंगी।
नीतिवचन 16:3
आपकी सूची आपसे बड़ी नहीं है।
दोपहर के इस पड़ाव पर ऐसा लगता ही नहीं। आधे काम अटके पड़े हैं, दो संदेश जवाब मांग रहे हैं, और किसी ने अभी-अभी कुछ और जोड़ दिया है। दिन आपको चला रहा है, आप दिन को नहीं।
सौंपने का मतलब हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाना नहीं है। इसका मतलब है मालिक बदल जाना। वही काम, वही फाइलें, वही बातचीत, पर अब उनका बोझ अकेले आपके कंधे पर नहीं टिका है।
थकान अक्सर काम की मात्रा से नहीं आती। वह इस भ्रम से आती है कि सब कुछ मुझ पर ही निर्भर है। यह भ्रम बहुत मेहनती लोगों को भीतर से खोखला कर देता है।
ध्यान दीजिए, वचन यह नहीं कहता कि हर योजना ठीक वैसी ही पूरी होगी जैसी आपने सोची थी। वह कहता है कि जो काम परमेश्वर के हाथ में रखा जाता है, वह स्थिर हो जाता है। कभी वे हमारी योजना पूरी करते हैं, कभी उसे सुधार देते हैं। दोनों में हमारा भला है।
तो अगला काम शुरू करने से पहले दस सेकंड रुकिए। नाम लेकर कहिए: प्रभु, यह काम मैं आपके हाथ में रखता हूँ। बस एक वाक्य।
बाकी आधा दिन फिर भी व्यस्त रहेगा। पर आप उसे अकेले ढोने वाले नहीं रहेंगे।
यह दिन समर्पित करें →◐ दोपहर का पल
हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2 कुरिन्थियों 4:8-9
पपीरस पर सरकंडे की कलम की खरखर, और मिट्टी के दीये की काँपती लौ। जो आदमी ये शब्द बोलकर लिखवा रहा है, उसकी पीठ पर कोड़ों के निशान अभी ताज़े हैं। वह दीवार का सहारा लेकर बैठा है, क्योंकि सीधा बैठना दर्द देता है।
गौर कीजिए, वह यह नहीं कहता कि दबाव हट गया। वह नहीं कहता कि उलझन सुलझ गई, या पीछा करने वाले थक कर लौट गए। वह चार बार एक ही पतली रेखा खींचता है: फिर भी नहीं।
यह वह गवाही नहीं है जो हम माँगते हैं। हम चाहते हैं कि पहला हिस्सा मिट जाए, कि चारों ओर से घिरना ही बंद हो जाए। पौलुस को दूसरा हिस्सा मिला, कुचले न जाने का वादा, टिके रहने का।
दोपहर के तीन बजे यह बात चुभती है। अधूरी फ़ाइलें, वही पुरानी थकान, वही सवाल जो सुबह से हल नहीं हुआ। और भीतर एक और सवाल जिसका जवाब आज नहीं मिलेगा: परमेश्वर दबाव को हटा सकता था, तो उसने क्यों नहीं हटाया?
मैं वह जवाब आपके सामने नहीं रख सकता। पर इतना कह सकता हूँ कि पौलुस उस सवाल के साथ जीता रहा, और मरा नहीं। कुचला नहीं गया।
आज शायद आपकी प्रार्थना यही हो: प्रभु, दबाव तो है। मुझे उसमें से बाहर नहीं, उसमें से पार ले चल।
यह दिन समर्पित करें →☾ संध्या का क्षण
निश्चय मैंने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ बच्चा अपनी माँ की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए बच्चे के समान मेरा मन भी रहता है।
भजन संहिता 131:2
चुप। यह छोटा सा शब्द जल्दी में पढ़ा जाता है, पर इसमें एक पूरा निर्णय छिपा है। मन अपने आप चुप नहीं होता। उसे चुप करना पड़ता है, जैसे किसी रोते हुए बच्चे को गोद में उठाकर थपकी दी जाती है। दाऊद कहता है, यह काम उसने किया।
बुधवार की शाम है। आधा सप्ताह बीत चुका, और भीतर अभी भी वही शोर चल रहा है। जो काम अधूरा रह गया, वह बातचीत जो ठीक से नहीं हुई, कल की सूची जो अभी से लंबी लग रही है।
दूध छुड़ाया हुआ बालक माँ की गोद में इसलिए नहीं बैठा कि उसे कुछ चाहिए। उसे मिल चुका है। वह वहाँ बस इसलिए है कि उसे माँ चाहिए। यही शान्ति है, माँगना बंद हो जाना और केवल पास रहना।
आज की अधूरी बातें आपकी नहीं रहेंगी अगर आप उन्हें परमेश्वर के हाथ में रख दें। वह रात भर जागता है, और उसका काम आपकी नींद पर टिका नहीं है।
थोड़ी देर चुप बैठिए और कहिए: पिता, आज जो हो पाया उसके लिए धन्यवाद, और जो नहीं हो पाया उसे मैं Your हाथों में छोड़ता हूँ। मुझे Your गोद में चैन दे।
यह दिन समर्पित करें →इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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31परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएँगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।
3अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, इससे तेरी कल्पनाएँ सिद्ध होंगी।
8हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
9सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2निश्चय मैंने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ बच्चा अपनी माँ की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए बच्चे के समान मेरा मन भी रहता है।
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