चुने गए हैं आराधना के लिए
चुनी हुई प्रजा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 95:1-2, 1 पतरस 2:9, यशायाह 66:2 and भजन संहिता 122:8-9.
☀ सुबह का पल
आओ हम यहोवा के लिये ऊँचे स्वर से गाएँ, अपने उद्धार की चट्टान का जयजयकार करें! हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएँ, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें।
भजन संहिता 95:1-2
सम्मुख। यह छोटा सा शब्द आज की सुबह को खोल देता है। भजन कहता है, आओ हम उसके सम्मुख आएं, यानी उसके सामने, आमने-सामने, बिना किसी परदे के। तुम अभी जैसे भी हो, थके हुए, उलझे हुए मन के साथ, या हल्के दिल से, तुम्हें दूर से बुलावा नहीं आया है। तुम्हें उसके सम्मुख आने का न्यौता मिला है।
यह रविवार की सुबह है, प्रभु का दिन। आज कोई काम की सूची तुम्हें आगे नहीं धकेल रही। आज तुम इकट्ठे होंगे, दूसरे विश्वासियों के साथ, और यही भजन तुमसे कहता है कि उस मिलन में अकेले मत जाओ, धन्यवाद लेकर जाओ।
भजनकार ने कोई कारण नहीं गिनाया कि क्यों गाना है। उसने बस कहा, गाओ, शोर मचाओ, आओ। जैसे कोई बच्चा अपने पिता की गोद में दौड़ता है, बिना यह सोचे कि आज कुछ ठीक है या नहीं। यही निमंत्रण आज तुम्हारे लिए भी है।
जिस चट्टान की बात यहाँ है, वही आज तुम्हारे पैरों के नीचे भी है। परिस्थिति डोल सकती है, पर वह चट्टान नहीं डोलती। इसलिए आज गाना कोई दिखावा नहीं, यह उस पर टिकने का एक तरीका है।
आज
आज सुबह, चर्च जाने से पहले, ऊँची आवाज़ में एक भजन की एक पंक्ति गा। भले सुर बिगड़े, भले घर में कोई और सुने या नहीं, वह पंक्ति उसके सम्मुख कहकर आज का दिन शुरू कर।
✦ दोपहर का पल
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5,6, व्यव. 7:6, व्यव. 14:2, यशा. 9:2)
1 पतरस 2:9
पतरस उन लोगों को लिख रहा था जो अपने ही देश में परदेशी की तरह जी रहे थे, तितर-बितर, संदेह से घिरे, यह भूलने के कगार पर कि वे वास्तव में कौन हैं। उन्हें कोई मंदिर, कोई भवन, कोई सुरक्षित जगह नहीं दी गई थी, फिर भी पतरस उन्हें बताता है कि वे एक चुनी हुई जाति, एक राजकीय याजकपद हैं।
आज रविवार है, प्रभु का दिन, जब हम फिर से इकट्ठा होते हैं। कोई इमारत हमें यह पहचान नहीं देती, न ही गीत की धुन या उपदेश की लंबाई। हमारी पहचान इससे पहले ही तय हो चुकी है, अंधकार से उजियाले में बुलाए जाने में।
यह आसान है कि हम आराधना को आदत बना लें, आते हैं, बैठते हैं, चले जाते हैं, बिना यह याद किए कि हम किसके हैं। पतरस का शब्द हमें झकझोरता है, यह केवल जमा होना नहीं है, यह घोषणा है, यह गवाही है कि परमेश्वर ने हमें बुलाया।
जिस समुदाय में आज आप बैठेंगे, वह आपकी अपनी पसंद से बड़ा है। वह उसकी बुलाहट से बना है, जिसने अंधकार में हाथ बढ़ाया और आपको प्रकाश में खींच लिया।
आज
आज कलीसिया में सेवा के बाद रुकिए और किसी एक भाई या बहन से खुलकर कहिए कि परमेश्वर के लोगों का हिस्सा होने के लिए आप किस बात के लिए धन्यवादी हैं। यह छोटा वाक्य आज ही, आमने-सामने, ज़ोर से बोलिए।
◐ दोपहर का पल
यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएँ मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, इसलिए ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो। (भज. 34:18, मत्ती 5:3)
यशायाह 66:2
मंदिर के पत्थर धूप में तप रहे हैं, हाथ भेंट थामे हुए हैं, धूप की भाप ऊपर उठ रही है। सब कुछ ठीक दिखता है, हर रीति पूरी हुई है। और फिर यह वाणी बीच में आती है, तेज़, सीधी, बेचैन कर देने वाली।
परमेश्वर कहते हैं कि आकाश उनका सिंहासन है, पृथ्वी उनकी चौकी है। कोई भवन, कोई भव्य आयोजन उन्हें बांध नहीं सकता। तो फिर वे किस चीज़ की ओर देखते हैं? उस मनुष्य की ओर जो दीन है, जिसका मन खेदित है, जो उनके वचन से थरथराता है।
यह रविवार की सुबह चुभने वाली बात है। हम इकट्ठा होते हैं, गीत गाते हैं, हाथ उठाते हैं, पर क्या हृदय भी झुकता है? या केवल शरीर उपस्थित है और मन कहीं और भटक रहा है? परमेश्वर बाहरी रीति से संतुष्ट नहीं होते, वे भीतर की स्थिति देखते हैं।
यह सवाल आसानी से नहीं टलता। क्या मेरा हृदय आज सचमुच विनम्र है, या केवल आदत से मुड़ा हुआ है? यह प्रश्न उत्तर की मांग नहीं करता, केवल ठहरने की मांग करता है।
आज
आज कलीसिया में जाने से पहले पांच मिनट अकेले बैठो। एक ऐसी बात लिख डालो जो तुम्हारे भीतर घमंड या कठोरता की तरह जमी हुई है, और उस कागज़ को परमेश्वर के सामने चुपचाप रख दो।
☾ संध्या का क्षण
अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूँगा कि तुझ में शान्ति होवे! अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूँगा।
भजन संहिता 122:8-9
पुराने यरूशलेम में घर एक-दूसरे से सटे हुए बनते थे, दीवार से दीवार, गली इतनी संकरी कि पड़ोसी की बातचीत भी सुनाई देती थी। शाम होते ही नगर के फाटक बंद हो जाते, और भीतर बसे सब लोग एक-दूसरे के साथ बंधे रहते, चाहें या न चाहें। उसी निकटता में दाऊद यह आशीष माँगता है, तेरे भीतर शान्ति हो।
आज रविवार की शाम है। सुबह हम कलीसिया में इकट्ठे हुए, गीत गाए, वचन सुना, एक-दूसरे से मिले। अब दिन ढल रहा है, और वही निकटता जो सुबह आराधना के आँगन में थी, अब स्मरण बनकर लौट आती है। परमेश्वर के घर की भलाई खोजना केवल भवन की बात नहीं, यह उन लोगों की बात है जिनके साथ हमने आराधना की।
शायद उन चेहरों को याद करें जो आज पास बैठे थे। कोई गीत गाते हुए रो रहा था, किसी ने प्रार्थना में हाथ उठाया, किसी ने आपकी ओर मुस्कुराकर देखा। यह भी परमेश्वर का घर है, ईंटों से नहीं, बल्कि लोगों से बना हुआ।
शान्ति की यह प्रार्थना केवल शब्द नहीं, यह इच्छा है कि जिनके साथ हम रहते हैं वे भी चैन से सोएं। आज रात परमेश्वर से यही माँगिए, उन सबके लिए जो सुबह आपके पास बैठे थे।
आज
अभी अपने फोन पर उस एक व्यक्ति को संदेश भेजें जिसके साथ आज आराधना में आपकी मुलाकात हुई, और लिखें, तेरे भीतर शान्ति हो, आज तुम्हारे साथ रहकर अच्छा लगा।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
1आओ हम यहोवा के लिये ऊँचे स्वर से गाएँ, अपने उद्धार की चट्टान का जयजयकार करें!
2हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएँ, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें।
9पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5,6, व्यव. 7:6, व्यव. 14:2, यशा. 9:2)
2यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएँ मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, इसलिए ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो। (भज. 34:18, मत्ती 5:3)
8अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूँगा कि तुझ में शान्ति होवे!
9अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूँगा।
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें