बाइबल पात्र

पतरस प्रेरित का जीवन: मछुए से कलीसिया की चट्टान तक

परिचय

यरूशलेम की एक ठंडी रात। महायाजक के आँगन में कोयले की आग जल रही है, और उसके पास एक मज़बूत कंधों वाला मछुआ हाथ सेंक रहा है। कुछ घंटे पहले उसने तलवार खींची थी। कुछ हफ़्ते पहले उसने कहा था, "तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।" और अब, उसी आग की रोशनी में, वह तीन बार कहेगा कि वह उस आदमी को जानता ही नहीं।

यह पतरस है। मछुआ, प्रेरित, उपदेशक, शहीद। बाइबल में यीशु मसीह के बाद जिस व्यक्ति के बारे में सबसे ज़्यादा लिखा गया है, वही व्यक्ति सबसे ज़्यादा बार गिरता भी है।

इस पृष्ठ पर आप पतरस के जीवन को शुरू से अंत तक देखेंगे, गलील की झील से रोम तक, और रास्ते में यह पाएँगे कि परमेश्वर का अनुग्रह कमज़ोर लोगों को दरकिनार नहीं करता, उन्हें ही नींव बनाता है।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

हम पतरस के जीवन को तीन आगों के सामने खड़े होकर पढ़ेंगे। पहली, महायाजक के आँगन की आग, जहाँ उसने अपने प्रभु का इन्कार किया। दूसरी, गलील के किनारे भोर में जलती वह कोयले की आग, जहाँ यीशु मसीह ने उसे नाश्ता खिलाकर बहाल किया। तीसरी, पिन्तेकुस्त के दिन आग की जीभों जैसी वह ज्वाला, जिसने डरे हुए मछुए को कलीसिया का पहला उपदेशक बना दिया।

यह कोण मायने रखता है, क्योंकि अधिकतर लोग पतरस को उसकी वीरता या उसकी विफलता, इन दो में से किसी एक खाँचे में डाल देते हैं। सच यह है कि पतरस की चट्टान जैसी मज़बूती उसके स्वभाव से नहीं आई, बल्कि उस अनुग्रह से आई जिसने उसे टूटने के बाद फिर से जोड़ा।

बाइबल पतरस के जीवन के बारे में क्या कहती है?

पतरस का असली नाम शमौन था, जो बैतसैदा का एक मछुआ था और बाद में कफरनहूम में बस गया (यूहन्ना 1:44, मरकुस 1:29)। उसका पिता यूहन्ना था, उसका भाई अन्द्रियास था, और वह विवाहित था, क्योंकि सुसमाचार उसकी सास के चंगे होने की बात करते हैं। यह कोई धार्मिक विद्वान नहीं था। यह एक मेहनतकश आदमी था, जिसके हाथों में रस्सियों के निशान थे और जिसकी बोली से गलील की गंध आती थी।

सबसे पहले अन्द्रियास ही उसे यीशु मसीह के पास लाया, और उस पहली मुलाक़ात में ही प्रभु ने उसे एक नया नाम दिया, कैफा, अर्थात् पतरस, चट्टान (यूहन्ना 1:41-42)। ध्यान दें कि यह नाम उपलब्धि के बाद का इनाम नहीं था, यह शुरुआत में दिया गया वादा था। परमेश्वर हमें उस नाम से बुलाते हैं जो हम उनके हाथों में बनने वाले हैं, उस नाम से नहीं जो हम आज हैं।

फिर आती है वह पुकार जिसने उसकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। मत्ती 4:18-20 कहता है: "उस ने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों को अर्थात् शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछुवे थे। और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़नेवाले बनाऊंगा। वे तुरन्त जाल छोड़कर उसके पीछे हो लिए।" यहाँ दो बातें दिखती हैं। पहली, बुलाहट पूरी तरह मसीह की पहल है, पतरस उन्हें ढूँढ़ नहीं रहा था, वे उसे ढूँढ़ रहे थे। दूसरी, यीशु मसीह पतरस के हुनर को रद्द नहीं करते, वे उसे बड़ा कर देते हैं। जो जाल मछलियों के लिए डाले जाते थे, वही अब मनुष्यों के लिए डाले जाएँगे।

लूका 5 में जब चमत्कारी मछलियाँ जाल तोड़ने लगीं, तो पतरस की पहली प्रतिक्रिया उत्साह नहीं, भय थी: "हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूँ।" यह पतरस के पूरे जीवन का बीज है। जितना करीब वह पवित्रता के आता है, उतना ही अपनी असलियत देखता है। और जितना अपनी असलियत देखता है, उतना ही अनुग्रह उसे थामे रखता है।

बुलाहट योग्यता की पहचान नहीं, अनुग्रह का निमंत्रण है।

पानी पर चलने की घटना पतरस के स्वभाव की सबसे सच्ची तस्वीर है। मत्ती 14:29-31 कहता है: "उस ने कहा, आ! तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा। पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा तो चिल्लाकर कहा, हे प्रभु, मुझे बचा। यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उस से कहा, हे अल्पविश्वासी, तू ने क्यों सन्देह किया?" बाकी ग्यारह नाव में बैठे रहे। पतरस ही उतरा, और पतरस ही डूबा। उसकी हिम्मत और उसकी कमज़ोरी एक ही जड़ से निकलती हैं, और दोनों बार जो चीज़ उसे बचाती है वह उसका संतुलन नहीं, बल्कि मसीह का बढ़ा हुआ हाथ है।

कैसरिया फिलिप्पी में वह शिखर आता है। जब यीशु मसीह ने पूछा कि तुम मुझे क्या कहते हो, तो मत्ती 16:16 में उत्तर मिलता है: "शमौन पतरस ने उत्तर दिया, तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।" यह कलीसिया का पहला विश्वास-अंगीकार है। और प्रभु स्पष्ट करते हैं कि यह समझ मनुष्य के दिमाग़ से नहीं आई, बल्कि स्वर्ग के पिता ने प्रकट की। उसी बातचीत में वे कहते हैं, "तू पतरस है, और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा।" फिर भी कुछ ही पलों बाद, जब मसीह अपने क्रूस की बात करते हैं, यही पतरस उन्हें रोकता है और सुनता है, "हे शैतान, मेरे सामने से दूर हो।" एक ही व्यक्ति, एक ही अध्याय, स्वर्ग की प्रकाशना और मानवीय ज़िद, दोनों साथ।

आगे का सफ़र इसी लय में चलता है। रूपान्तरण के पहाड़ पर वह तीन मंडप बनाने की बात करता है (मत्ती 17:4)। ऊपरी कमरे में वह पैर धुलवाने से इन्कार करता है, और फिर पूरा शरीर धुलवाने की ज़िद करता है (यूहन्ना 13:8-9)। गतसमनी में वह सो जाता है, फिर तलवार खींच कर मलखुस का कान काट देता है (यूहन्ना 18:10)। और उसी रात, आग के पास, वह गिर जाता है।

बाइबल में चलने वाला सूत्र

पतरस की कहानी अचानक शुरू नहीं होती। पुराने नियम में परमेश्वर बार-बार वही करते हैं जो वे उसके साथ करते हैं। अब्राहम झूठ बोलता है, फिर भी विश्वास का पिता कहलाता है। मूसा हकलाता है और भाग जाता है, फिर भी इस्राएल का अगुवा बनता है। दाऊद व्यभिचार और हत्या तक गिरता है, फिर भजन 51 में टूटे मन के साथ लौटता है। योना भाग जाता है, और फिर मछली के पेट से निकल कर उपदेश देता है। यह सिलसिला संयोग नहीं है, यह परमेश्वर की कार्यशैली है। वे टूटे बर्तनों में अपनी महिमा रखना जानते हैं।

"चट्टान" शब्द भी नया नहीं है। व्यवस्थाविवरण 32:4 परमेश्वर के बारे में कहता है, "वह चट्टान है, उसका काम खरा है।" भजन संहिता में दाऊद बार-बार परमेश्वर को अपनी चट्टान कहता है। इसलिए जब यीशु मसीह एक मछुए को कैफा कहते हैं, तो वे अपनी जगह किसी मनुष्य को नहीं दे रहे। वे यह दिखा रहे हैं कि जीवते परमेश्वर की सच्ची चट्टान अपने अनुग्रह से रेत जैसे लोगों को भी ठोस बना सकती है। इसीलिए बाद में पतरस स्वयं लिखता है कि मसीह ही वह चुना हुआ बहुमूल्य पत्थर हैं और विश्वासी "जीवते पत्थरों के समान आत्मिक घर" बनते जाते हैं (1 पतरस 2:4-5)। जिस आदमी को पत्थर का नाम मिला, उसने सारा श्रेय कोने के पत्थर को लौटा दिया।

एक और सूत्र चरवाहे का है। यहेजकेल 34 में परमेश्वर इस्राएल के स्वार्थी चरवाहों को डाँटते हैं और वादा करते हैं कि वे स्वयं अपनी भेड़ों को चराएँगे। यीशु मसीह अच्छे चरवाहे के रूप में आते हैं जो भेड़ों के लिए अपनी जान देते हैं। और झील के किनारे वे उसी काम में पतरस को साझी बनाते हैं, "मेरी भेड़ों को चरा।" पुराने नियम की प्रतिज्ञा नए नियम में पूरी होती है, और फिर कलीसिया के सेवकों के हाथों में सौंपी जाती है।

तीसरा सूत्र भविष्यवाणी का है। यिर्मयाह 16:16 में परमेश्वर मछुओं को भेजने की बात करते हैं। योएल 2 में वे अपने आत्मा को सब प्राणियों पर उंडेलने का वादा करते हैं। पिन्तेकुस्त के दिन पतरस खड़ा होकर ठीक उसी भविष्यवाणी को पढ़ता है और कहता है कि यही आज पूरा हो रहा है। इस तरह गलील का मछुआ पुराने और नए नियम के बीच का जीवित पुल बन जाता है।

सब कुछ मसीह में आकर मिलता है। पतरस की बुलाहट मसीह ने दी, उसका अंगीकार मसीह के बारे में था, उसकी विफलता मसीह के सामने हुई, उसकी बहाली मसीह ने की, उसका सामर्थ्य मसीह के आत्मा से आया, और उसकी मृत्यु मसीह की महिमा के लिए हुई। पतरस के जीवन का नायक पतरस नहीं है।

उसके जीवन का सार

तीन आगें पतरस की पूरी कहानी कह देती हैं।

पहली आग महायाजक के आँगन में है। यूहन्ना बताता है कि नौकर और सिपाही ठंड के कारण कोयले की आग जलाकर तापने लगे थे, और पतरस भी उनके साथ खड़ा था। वहीं, रोशनी और गर्मी के बीच, तीन बार उसका इन्कार निकला। और फिर लूका 22:61-62 का वह दृश्य आता है जिसे पढ़कर आज भी सांस रुक जाती है: "तब प्रभु ने घूमकर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उस ने कही थी, कि आज मुर्ग के बाँग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा। और वह बाहर निकलकर फूट फूटकर रोने लगा।" उस दृष्टि में तिरस्कार नहीं था। कुछ घंटे पहले प्रभु ने उसी पतरस से कहा था, "मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे" (लूका 22:32)। पतरस गिरा, पर वह गिरना प्रार्थना से घिरा हुआ गिरना था। यही अंतर यहूदा और पतरस के बीच है। दोनों टूटे, पर एक पछतावे में डूब गया और दूसरा पछतावे से होकर अपने प्रभु के पास लौट आया।

दूसरी आग गलील की झील के किनारे है। जी उठे प्रभु ने भोर में मछली और रोटी के साथ कोयले की आग तैयार की। वही गंध, वही धुआँ, वही टिमटिमाती रोशनी, पर इस बार परिणाम उल्टा है। यूहन्ना 21:15-17 में तीन बार प्रश्न आता है: "हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रीति रखता है?" और तीन बार सौंपा गया काम, "मेरे मेम्नों को चरा," "मेरी भेड़ों की रखवाली कर," "मेरी भेड़ों को चरा।" तीन इन्कार के बदले तीन अंगीकार। ध्यान दें कि यीशु मसीह पतरस से यह नहीं पूछते कि क्या तू फिर कभी नहीं गिरेगा। वे केवल प्रेम के बारे में पूछते हैं, और उसी टूटे हुए प्रेम पर सेवकाई की ज़िम्मेदारी रख देते हैं। अनुग्रह क्षमा देकर रुक नहीं जाता, वह ज़िम्मेदारी भी लौटाता है।

तीसरी आग पिन्तेकुस्त की है। ऊपरी कमरे में आग की जीभों जैसी कोई चीज़ उन पर ठहर गई, और वह आदमी जो एक नौकरानी के सामने घबरा गया था, अब हज़ारों की भीड़ के सामने खड़ा है। प्रेरितों के काम 2:14 कहता है: "तब पतरस उन ग्यारह के साथ खड़ा हुआ और ऊंचे शब्द से कहने लगा, हे यहूदी लोगो, और हे यरूशलेम के सब रहनेवालो, यह जान लो और कान लगाकर मेरी बातें सुनो।" उसी शहर में, उसी भीड़ के सामने, जिसने कुछ हफ़्ते पहले उसके प्रभु को क्रूस पर चढ़वाया था, वह मसीह के पुनरुत्थान का प्रचार करता है, और तीन हज़ार लोग विश्वास करते हैं। यह वही जीभ है जो शपथ खाकर मुकर गई थी। पवित्र आत्मा ने उसे नया व्यक्तित्व नहीं दिया, उसे साहस दिया, और उसकी बातों का केंद्र स्वयं से हटाकर मसीह पर रख दिया।

पतरस से हम क्या सीखते हैं

पहला सबक यह है कि विफलता अंत नहीं होती, जब वह मसीह के सामने ले आई जाए। पिन्तेकुस्त के बाद पतरस का जीवन रुका नहीं। उसने मन्दिर के फाटक पर लंगड़े को चंगा किया, महासभा के सामने निडर होकर कहा, "किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं" (प्रेरितों के काम 4:12), जेल गया, कोड़े खाए और आनन्दित हुआ। और सबसे बड़ी बात, उसने कुरनेलियुस के घर जाकर वह दीवार गिराई जिसे वह अपने ही मन में सालों से पाल रहा था: "निश्चय मैं समझ गया हूँ, कि परमेश्वर किसी का पक्ष नहीं करता" (प्रेरितों के काम 10:34)। जो आदमी बहाल किया गया है, वही दूसरों के लिए दरवाज़े खोल सकता है।

दूसरा सबक यह है कि परिपक्वता का मतलब पूर्णता नहीं है। पिन्तेकुस्त के बाद भी पतरस लड़खड़ाया। गलातियों 2:11 में पौलुस लिखता है, "पर जब कैफा अन्ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुँह पर उसका सामना किया, क्योंकि वह दोषी ठहरा था।" कलीसिया के इस स्तम्भ को एक साथी प्रेरित से सार्वजनिक सुधार मिला, और उसने उसे स्वीकार किया। इसीलिए वह बाद में पौलुस के लेखों को आदर से "हमारे प्रिय भाई पौलुस" के पत्र कहता है (2 पतरस 3:15)। सिखाए जाने योग्य बने रहना आत्मिक बड़ेपन की निशानी है, कमज़ोरी की नहीं।

तीसरा सबक उसके पत्र से आता है, जो उसके पूरे जीवन का सार है। 1 पतरस 5:6-7 कहता है: "इसलिये परमेश्वर के बलवन्त हाथ के नीचे दीनता से दबे रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारी चिन्ता करता है।" यह उस आदमी की कलम से निकला है जिसने अपनी ताक़त पर भरोसा करके मुँह की खाई थी। जिसने कहा था "मैं तेरे लिये अपना प्राण दूँगा," वह अब जानता है कि दीनता ही सुरक्षित जगह है। और जिसने डूबते हुए हाथ थामे जाने का अनुभव किया, वह पूरे अधिकार से कह सकता है कि अपनी चिंता उन पर डाल दो, क्योंकि वे तुम्हारी चिंता करते हैं। बूढ़े पतरस की सलाह किताबी नहीं है, वह चोट खाकर सीखी गई है।

दर्पण

आपने भी कभी किसी आग के पास खड़े होकर मुँह फेरा है। दफ़्तर की उस बातचीत में, जब मसीह का नाम आया और आपने विषय बदल दिया। रिश्तेदारों की उस महफ़िल में, जब मज़ाक उड़ाया गया और आप हँसते रहे। घर में, जब आपने प्रार्थना करना सिखाया और उसी दिन गुस्से में ऐसी बात कह दी जो आपके सारे उपदेश को खोखला कर गई। शायद कोई मुर्ग नहीं बोला, पर भीतर कुछ चुभा।

और अब सवाल यह है कि आप उस चुभन के साथ क्या कर रहे हैं। कुछ लोग उसे दबा देते हैं और खुद को समझा लेते हैं कि इतना सब चलता है। कुछ लोग उसे अपनी सज़ा बना लेते हैं और सालों तक अपने ही मुक़दमे के कैदी बने रहते हैं। पतरस ने तीसरा रास्ता चुना। वह रोया, और फिर वह लौट आया। जब सुबह खाली कब्र की ख़बर आई, तो वह दौड़ने वालों में सबसे आगे था।

यहाँ आपके लिए सबसे कठिन बात यह हो सकती है कि झील के किनारे प्रभु ने पतरस से उसकी विफलता का हिसाब नहीं माँगा। उन्होंने उसे नाश्ता खिलाया। पैसे की चिंता में डूबे आपसे, थके हुए शरीर वाले आपसे, अकेलेपन में रातें काटने वाले आपसे, बच्चों के सामने अपनी नाकामी महसूस करने वाले आपसे, मसीह पहला सवाल यह नहीं करते कि तुमने क्या बिगाड़ा। वे पूछते हैं, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है।

अगर आपका उत्तर हाँ है, कमज़ोर और काँपता हुआ हाँ भी, तो जान लीजिए कि वे उसी हाँ पर काम सौंपने के लिए तैयार हैं। आपकी सेवा आपकी बेदाग़ फ़ाइल पर नहीं टिकी है। वह उनके अनुग्रह पर टिकी है, जो आपको आपके नाम से नहीं, आपके नए नाम से बुलाते हैं।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चों को पतरस की कहानी सुनाना आसान है, क्योंकि वह हर बच्चे जैसा है। वह जोश में आगे बढ़ जाता है, फिर डर जाता है। वह बड़ी बड़ी बातें कहता है, फिर उन्हें निभा नहीं पाता। और सबसे अच्छी बात, यीशु मसीह उसे कभी छोड़ते नहीं।

छोटे बच्चों के लिए सबसे सरल तस्वीर पानी पर चलने की घटना है। पतरस नाव से उतरा, डूबने लगा, चिल्लाया और प्रभु ने उसका हाथ पकड़ लिया। यहाँ मुख्य बात यह नहीं है कि पतरस डूब गया, बल्कि यह है कि प्रभु का हाथ हमेशा पास था। बड़े बच्चों के साथ आप इन्कार और बहाली की बात कर सकते हैं, बहुत नरमी से, इस सच के साथ कि गलती करने के बाद भी हम यीशु मसीह के पास लौट सकते हैं और वे हमें फिर काम सौंपते हैं। किशोरों के साथ आप और गहरे जा सकते हैं, कि दोस्तों के दबाव में सच छिपा देना क्या होता है, और सच्चा पश्चाताप आत्म-घृणा से किस तरह अलग है।

एक व्यावहारिक सुझाव, कहानी सुनाते समय बच्चे से पूछिए कि उसे पतरस की कौन सी बात अपने जैसी लगती है। जवाब अक्सर आपको चौंका देगा और बातचीत के दरवाज़े खोल देगा।

फेथ नेटवर्क पर पतरस के जीवन की अलग अलग आयु के लिए तैयार व्याख्याएँ उपलब्ध हैं, तीन से छह साल के छोटे बच्चों के लिए, सात से बारह साल के बच्चों के लिए, और बारह साल से ऊपर के किशोरों के लिए। आप अपने घर या कलीसिया की कक्षा के लिए उपयुक्त स्तर चुन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पतरस का असली नाम क्या था?

उसका जन्म का नाम शमौन था, और सुसमाचारों में उसे कभी शमौन, कभी शमौन पतरस और कभी कैफा कहा गया है। यीशु मसीह ने पहली मुलाक़ात में ही उसे कैफा नाम दिया, जो अरामी भाषा में चट्टान के लिए प्रयोग होता है, और यूनानी में उसका अनुवाद पेत्रोस, अर्थात् पतरस हुआ (यूहन्ना 1:42)। उसके पिता का नाम यूहन्ना था, इसलिए यूहन्ना 21 में प्रभु उसे "शमौन, यूहन्ना के पुत्र" कहकर बुलाते हैं। नाम का यह बदलाव बताता है कि परमेश्वर पहचान बदलने वाले परमेश्वर हैं।

पतरस को "चट्टान" क्यों कहा गया?

मत्ती 16 में अपने अंगीकार के बाद पतरस सुनता है कि प्रभु इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाएँगे। इसका अर्थ यह नहीं है कि पतरस स्वयं कलीसिया की नींव बन गया, क्योंकि पूरा नया नियम मसीह को ही कोने का पत्थर कहता है और पतरस खुद यही सिखाता है (1 पतरस 2:6)। पतरस उस अंगीकार करने वाले विश्वास का पहला प्रतिनिधि है जिस पर कलीसिया खड़ी है। नाम एक वादा था, जो उसकी बहाली के बाद पिन्तेकुस्त में पूरा होते दिखता है।

पतरस ने यीशु का इन्कार क्यों किया?

तीन कारण साफ़ दिखते हैं। पहला, अति आत्मविश्वास, क्योंकि उसने कहा था कि सब छोड़ दें तो भी मैं नहीं छोड़ूँगा। दूसरा, प्रार्थना की कमी, क्योंकि गतसमनी में जब जागकर प्रार्थना करने का समय था, वह सो रहा था। तीसरा, डर, क्योंकि उस रात मसीह का अनुयायी होना जान का जोखिम था। ध्यान देने की बात यह है कि प्रभु ने पहले ही उसके गिरने की भविष्यवाणी की थी और साथ ही उसके लिए प्रार्थना भी की थी (लूका 22:31-32)।

क्या पतरस पहला पोप था?

बाइबल पतरस को ऐसा कोई पद नहीं देती जो बाद की सदियों में विकसित हुआ। नया नियम उसे बारह प्रेरितों में अग्रणी दिखाता है, यरूशलेम की कलीसिया का एक प्रमुख अगुवा, पर यरूशलेम की सभा में अंतिम शब्द याकूब कहता है (प्रेरितों के काम 15), और अन्ताकिया में पौलुस उसे सार्वजनिक रूप से सुधारता है। बाइबल के अनुसार कलीसिया का सिर मसीह हैं, और प्रेरित सेवक हैं। पतरस स्वयं अपने पत्र में खुद को "संगी पुरनिया" कहता है, स्वामी नहीं (1 पतरस 5:1)।

पतरस और पौलुस में क्या अंतर था?

दोनों की पृष्ठभूमि और सेवकाई का क्षेत्र अलग था। पतरस गलील का मछुआ था, बिना औपचारिक धर्मशास्त्रीय शिक्षा वाला, और मुख्य रूप से यहूदियों के बीच सेवा करता रहा। पौलुस गमलीएल का शिष्य था और अन्यजातियों के लिए भेजा गया। उनके बीच अन्ताकिया में एक गंभीर टकराव भी हुआ। फिर भी दोनों का सुसमाचार एक ही था, अनुग्रह से विश्वास के द्वारा उद्धार। पतरस बाद में पौलुस के लेखों को पवित्रशास्त्र के स्तर पर रखते हुए उन्हें अपना प्रिय भाई कहता है।

पतरस की मृत्यु कैसे हुई?

बाइबल उसकी मृत्यु का विवरण नहीं देती, पर संकेत देती है। यूहन्ना 21:18-19 में प्रभु उससे कहते हैं कि बुढ़ापे में वह अपने हाथ बढ़ाएगा और दूसरा उसे बाँधकर ले जाएगा, और यूहन्ना जोड़ता है कि यह उसकी मृत्यु के बारे में था जिससे वह परमेश्वर की महिमा करेगा। 2 पतरस 1:14 में वह अपनी मृत्यु के निकट होने का ज़िक्र करता है। प्राचीन कलीसियाई परंपरा कहती है कि उसे रोम में नीरो के समय क्रूस पर, अपनी विनती के अनुसार उल्टा लटकाकर मारा गया।

यीशु ने पतरस से तीन बार क्यों पूछा कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?

क्योंकि इन्कार तीन बार हुआ था। तीन प्रश्न पतरस के तीन झूठों के ऊपर तीन नई नींवें रख देते हैं। प्रभु उसे शर्मिंदा करने के लिए नहीं, उसे पूरी तरह चंगा करने के लिए बार-बार पूछते हैं। और हर उत्तर के बाद वे उसे काम सौंपते हैं, मेम्नों को चराने का, भेड़ों की रखवाली का। यह बहाली का नमूना है, जहाँ क्षमा केवल अपराध मिटाती नहीं, बल्कि सेवा का अधिकार भी लौटा देती है।

पतरस पानी पर चलते हुए क्यों डूबने लगा?

मत्ती 14:30 बताता है कि वह हवा को देखकर डर गया। जब तक उसकी दृष्टि मसीह पर थी, असंभव संभव था। जैसे ही परिस्थिति उसकी नज़र का केंद्र बन गई, वह डूबने लगा। प्रभु का प्रश्न "तू ने क्यों सन्देह किया" उसे कोसना नहीं, उसे सिखाना है। ध्यान दें कि डूबते हुए भी उसने ठीक प्रार्थना की, "हे प्रभु, मुझे बचा," और वही सबसे छोटी और सबसे सच्ची प्रार्थना है जो हमेशा सुनी जाती है।

पतरस ने बाइबल की कौन सी पुस्तकें लिखीं?

नए नियम में उसके नाम से दो पत्र हैं, 1 पतरस और 2 पतरस। पहला पत्र सताए जा रहे विश्वासियों को लिखा गया है और उसका मुख्य स्वर आशा, दीनता और धीरज है। दूसरा पत्र झूठे शिक्षकों के विरुद्ध चेतावनी देता है और मसीह के दूसरे आगमन की प्रतीक्षा पर ज़ोर देता है। प्राचीन कलीसिया यह भी मानती है कि मरकुस का सुसमाचार बड़े हद तक पतरस की गवाही पर आधारित है, जो उसकी सादगी और सच्चाई को समझाता है।

क्या पतरस विवाहित था?

हाँ। सुसमाचार बताते हैं कि यीशु मसीह ने पतरस की सास को बुखार से चंगा किया (मरकुस 1:30-31), जिससे स्पष्ट है कि वह विवाहित था। पौलुस भी 1 कुरिन्थियों 9:5 में लिखता है कि कैफा सहित प्रेरित अपनी पत्नियों को साथ लेकर यात्रा करते थे। यह विवरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिखाता है कि परमेश्वर की सेवा और पारिवारिक जीवन एक साथ चल सकते हैं, और कलीसिया का पहला अगुवा एक परिवार वाला मेहनतकश आदमी था।

स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ देने का क्या अर्थ है?

मत्ती 16:19 में प्रभु पतरस को राज्य की कुंजियाँ देने की बात करते हैं। प्रेरितों के काम में हम इसे होते हुए देखते हैं। पतरस पिन्तेकुस्त के दिन यहूदियों के लिए, सामरिया में सामरियों के लिए, और कुरनेलियुस के घर में अन्यजातियों के लिए सुसमाचार का दरवाज़ा खोलता है। कुंजियाँ किसी गुप्त अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि सुसमाचार सुनाने के काम का प्रतीक हैं, क्योंकि जब मसीह का संदेश खुलकर सुनाया जाता है, तब राज्य के द्वार लोगों के लिए खुलते हैं।

पतरस के जीवन से आज एक विश्वासी सबसे बड़ी बात क्या सीख सकता है?

यह कि आपकी सबसे बड़ी विफलता भी आपकी बुलाहट का अंत नहीं है, बशर्ते आप उसे लेकर मसीह के पास लौट आएँ। पतरस का जीवन बताता है कि आत्मिक विकास सीधी चढ़ाई नहीं होती, उसमें गिरना, रोना और उठना शामिल है। और वह यह भी सिखाता है कि अनुग्रह पाने वाला व्यक्ति अनुग्रह बाँटने वाला बन जाता है। जिसने माफ़ी की गहराई चखी है, वही दूसरों के लिए धीरजवंत चरवाहा बन सकता है।

अंत में

तीन आगें, एक आदमी। पहली आग ने दिखाया कि पतरस कितना कमज़ोर था। दूसरी ने दिखाया कि मसीह कितने वफ़ादार हैं। तीसरी ने दिखाया कि पवित्र आत्मा एक बहाल किए गए इंसान के ज़रिए क्या कर सकते हैं। इन तीनों को एक साथ रखे बिना पतरस की कहानी अधूरी रहती है, और हमारी भी।

अगर आप आगे पढ़ना चाहें, तो सबसे अच्छा रास्ता यह है कि लूका 22 और यूहन्ना 21 को एक ही बैठक में पढ़िए, इन्कार और बहाली को साथ रखकर। फिर प्रेरितों के काम 2 से 12 तक पढ़िए और देखिए कि वही आदमी कैसे बोलता है। और अंत में 1 पतरस को धीरे धीरे पढ़िए, यह याद रखते हुए कि यह किसी सैद्धांतिक विद्वान का ग्रंथ नहीं, एक चोट खाए और चंगे हुए चरवाहे का पत्र है।

फिर उसके शब्दों को अपने ऊपर लागू कीजिए। परमेश्वर के बलवन्त हाथ के नीचे दीनता से दबे रहिए, और अपनी सारी चिंता उन पर डाल दीजिए। जो हाथ गलील की लहरों में डूबते हुए मछुए को थाम सका, वह आज भी बढ़ा हुआ है।

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प्रार्थना संपादकीय पर भजन संहिता 12:4

पिता, कई बार मुझे लगता है कि मेरे शब्द मेरे अपने हैं और मैं जो चाहूँ कह सकता हूँ। पर…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर 2 राजाओं 20:19

यशायाह अभी अभी कह चुका था कि सब कुछ बाबेल ले जाया जाएगा, यहाँ तक कि तेरे बेटे भी। और…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर यशायाह 38:6

हिजकिय्याह ने सिर्फ़ अपनी जान के लिए रोकर प्रार्थना की थी, पर परमेश्वर ने उत्तर में कहा, "मैं तुझे और…

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