नूह का जीवन: जलप्रलय, जहाज़ और परमेश्वर की वाचा
परिचय
एक आदमी सूखी ज़मीन पर खड़ा है, हाथ में हथौड़ा, सिर के ऊपर नीला साफ़ आसमान। न बादल, न समुद्र, न कोई नदी पास में। और वह लकड़ी काट रहा है, राल पिघला रहा है, दिन पर दिन, साल पर साल, एक ऐसे विपत्ति के लिए तैयारी करते हुए जो अब तक किसी ने देखी नहीं। पड़ोसी आते-जाते हँसते होंगे। बच्चे उसे "पागल बूढ़ा" कहते होंगे। और वह फिर भी ठोंकता रहा।
नूह की कहानी को हम अक्सर बच्चों की दीवार पर बनी तस्वीर बना देते हैं: प्यारे जानवर, मुस्कुराता जहाज़, रंगीन इंद्रधनुष। पर उत्पत्ति का यह हिस्सा दरअसल एक भारी, गंभीर और आश्चर्यजनक रूप से आशा से भरी कहानी है, जिसमें पूरी बाइबल का ढाँचा छिपा है। इस पन्ने पर आप नूह के जीवन को शुरू से अंत तक देखेंगे, उसकी वीरता भी और उसका पतन भी, और यह भी कि उसका जहाज़ किस ओर इशारा कर रहा है।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
यह पन्ना नूह को "दूसरे आदम" के रूप में पढ़ता है। जलप्रलय केवल दंड नहीं, बल्कि सृष्टि का उलट जाना और फिर से शुरू होना है: पानी लौट आता है, फिर भूमि उभरती है, पक्षी उड़ते हैं, और एक आदमी नई दुनिया में परमेश्वर की आशीष लेकर बाहर निकलता है, बिल्कुल आदम की तरह। पर वही आदमी एक बगीचे में, एक फल के कारण, नंगा और शर्मिंदा होकर गिर जाता है, बिल्कुल आदम की तरह। यही इस कहानी का चुभने वाला सच है: पानी दुनिया को धो सकता है, मानव हृदय को नहीं। इसलिए हमें एक बेहतर नूह चाहिए, और वह आ चुका है।
बाइबल नूह के जीवन के बारे में क्या कहती है?
नूह का नाम पहली बार उत्पत्ति 5 की वंशावली में आता है, जहाँ उसके पिता लेमेक उसका नाम रखते हुए एक उम्मीद जताते हैं: यह लड़का उस शापित भूमि पर हमारी मेहनत और पीड़ा से हमें शान्ति देगा। यह छोटी सी बात बहुत बड़ी है। आदम के पाप के बाद से ज़मीन शापित थी, और आदमी पसीने से रोटी खाता था। लेमेक की आह में पूरी मानवजाति की आह सुनाई देती है: कोई आए जो इस बोझ को उठा ले।
फिर उत्पत्ति 6 आता है, और तस्वीर काली पड़ जाती है। लिखा है, "और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।" ध्यान दीजिए, समस्या केवल व्यवहार की नहीं, "मन के विचार" की है। हिंसा से पृथ्वी भर गई थी, और परमेश्वर का हृदय दुखी हुआ। न्याय की घोषणा होती है। और ठीक उसी अंधकार के बीच एक वाक्य दीया जलाता है: "परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रही।" बाइबल में "अनुग्रह" शब्द यहीं पहली बार प्रकट होता है, और वह नूह की योग्यता के बाद नहीं, उससे पहले आता है।
इसके बाद ही परिचय दिया जाता है: "नूह की वंशावली यह है। नूह धर्मी पुरुष और अपने समय के लोगों में खरा था, और नूह परमेश्वर ही के साथ साथ चलता रहा" (उत्पत्ति 6:9)। यह पद तीन बातें कहता है। नूह धर्मी था, यानी उसका जीवन सही ठहराया गया था। वह "खरा" था, यानी अपने भ्रष्ट समय के बीच बँटा हुआ नहीं, पूरा और सच्चा था। और सबसे गहरी बात, वह परमेश्वर के साथ-साथ चलता रहा, ठीक जैसे हनोक चला था। धार्मिकता यहाँ कोई अकेला गुण नहीं, एक संगति है। नूह इसलिए बचा नहीं कि वह अच्छा था; वह इसलिए अच्छा बना क्योंकि वह परमेश्वर के साथ चलता था, और अनुग्रह की दृष्टि उस पर पहले पड़ चुकी थी।
फिर आदेश आता है: "इसलिये तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले, और उस में कोठरियां बनाना, और उस पर भीतर बाहर राल लगाना" (उत्पत्ति 6:14)। यह जहाज़ कोई सुंदर नाव नहीं था। कोई पाल नहीं, कोई पतवार नहीं, कोई दिशा तय करने का साधन नहीं। बस एक विशाल तैरता हुआ संदूक, लगभग एक सौ पैंतीस मीटर लंबा, तीन मंज़िला, जिसमें ऊपर एक खिड़की और बग़ल में एक द्वार था। इसका डिज़ाइन नूह ने नहीं चुना; परमेश्वर ने नाप-नाप कर बताया। उद्धार का ढाँचा हमेशा ऊपर से उतरता है।
बचाव का नक्शा हमेशा परमेश्वर बनाते हैं, हम नहीं।
निर्माण के बीच ही परमेश्वर एक ऐसी बात कहते हैं जो उत्पत्ति में पहली बार आती है: "परन्तु तेरे संग मैं वाचा बान्धता हूं" (उत्पत्ति 6:18)। जहाज़ बनने से पहले वाचा बंध चुकी थी। नूह हथौड़ा चलाते समय अनुमान पर नहीं, वादे पर खड़ा था।
फिर वह दिन आया: "तब यहोवा ने नूह से कहा, तू अपने सारे घराने समेत जहाज में जा; क्योंकि मैं ने इस समय के लोगों में से केवल तुझी को अपनी दृष्टि में धर्मी देखा है" (उत्पत्ति 7:1)। यहाँ दो बातें कोमल हैं। पहली, "तू आ" कहा गया है, "तू जा" नहीं; परमेश्वर पहले से भीतर हैं, बुलाने वाले भीतर से बुला रहे हैं। दूसरी, "अपने सारे घराने समेत"। नूह का विश्वास उसकी पत्नी, तीन बेटों और तीन बहुओं को भी भीतर ले गया। एक आदमी के परमेश्वर के साथ चलने से आठ जानें बचीं।
पानी नीचे से फूटा और ऊपर से बरसा, चालीस दिन तक; जल पर्वतों के ऊपर चढ़ गया, और डेढ़ सौ दिन तक बना रहा। जहाज़ का द्वार नूह ने नहीं, यहोवा ने बंद किया था। फिर उत्पत्ति 8 का सबसे सुंदर वाक्य आता है: परमेश्वर ने नूह की और उसके संग के सब प्राणियों की सुधि ली। "सुधि लेना" का अर्थ यह नहीं कि परमेश्वर भूल गए थे; इसका अर्थ है कि उन्होंने अपनी वाचा के अनुसार काम करना शुरू किया। हवा चली, पानी घटा, जहाज़ अरारात के पहाड़ों पर टिका, कौआ उड़ा, कबूतरी लौटी, फिर ज़ैतून की पत्ती लेकर आई, और अंत में लौटी ही नहीं।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
नूह की कहानी उत्पत्ति में बंद नहीं रहती; वह पूरी बाइबल में बहती रहती है। सृष्टि के आरंभ में परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मँडराता था, फिर परमेश्वर ने जल को अलग करके सूखी भूमि निकाली, और उस पर जीवन रखा। जलप्रलय में यह सब उल्टा चलता है: जल फिर लौट आते हैं, भूमि डूब जाती है, जीवन मिट जाता है। फिर परमेश्वर एक हवा चलाते हैं, जल घटते हैं, सूखी भूमि निकलती है, और जीवन बाहर आता है। नूह को वही आशीष मिलती है जो आदम को मिली थी: फूलो-फलो और पृथ्वी में भर जाओ। यह दूसरी सृष्टि है, और नूह उसका दूसरा आदम।
पर बाइबल इस नए आदम को आदर्श बनाकर नहीं छोड़ती। उत्पत्ति 9 के अंत में वही आदमी दाख की बारी लगाता है, उसके फल से मतवाला होता है, अपने तंबू में नंगा हो जाता है, और उसके एक बेटे की गलत नज़र से घर में शाप उतर आता है। बगीचा, फल, नंगापन, शर्म, शाप, वही पुराना क्रम। यही इस पन्ने का केंद्र है: बाढ़ ने दुनिया को धो दिया, पर आदमी का मन नहीं धुला। इसीलिए वेदी पर बलि चढ़ाने के बाद परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि वे भूमि को फिर कभी इस तरह शाप न देंगे, यद्यपि मनुष्य के मन में बचपन से ही बुरे विचार उठते हैं। परमेश्वर ने समस्या का सही निदान किया, और इसीलिए उन्होंने एक और जलप्रलय नहीं, एक उद्धारकर्ता भेजा।
पुराने नियम में नूह धार्मिकता का प्रतीक बन जाता है। यहेजकेल 14 में परमेश्वर कहते हैं कि यदि नूह, दानिय्येल और अय्यूब भी उस देश में होते, तो वे अपनी धार्मिकता से केवल अपने प्राण बचाते। यशायाह 54 में परमेश्वर अपने लोगों से कहते हैं कि जैसे उन्होंने नूह के दिनों की शपथ खाई थी, वैसे ही अब वे अपने करुणा की वाचा न तोड़ेंगे। यानी इंद्रधनुष केवल मौसम का चिन्ह नहीं, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही बन जाता है।
नए नियम में यीशु मसीह स्वयं नूह की ओर लौटते हैं: "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा" (मत्ती 24:37)। वे कहते हैं कि लोग खाते-पीते, ब्याह करते-कराते रहे, और तब तक न समझे जब तक जलप्रलय आकर सबको बहा न ले गया। यीशु मसीह नूह की कहानी को इतिहास मानते हैं और उसे भविष्य का नक्शा भी बनाते हैं। पतरस दो बार इस पर लौटता है: 2 पतरस 2 में नूह "धर्म का प्रचारक" कहलाता है जिसके साथ आठ प्राणी बचाए गए, और 1 पतरस 3 में जहाज़ का पानी बपतिस्मे का चित्र बन जाता है, क्योंकि जो न्याय दूसरों पर टूटा, उससे होकर परमेश्वर के लोग सुरक्षित पार निकले। और इब्रानियों 11:7 नूह को विश्वास के महानायकों की सूची में रखता है।
एक जहाज़, एक द्वार, एक बचा हुआ घराना: यह क्रूस की छाया है। मसीह ही वह जहाज़ हैं जिसमें न्याय की लहरें हम पर नहीं, उन पर टूटीं।
उसके जीवन का सार
नूह के जीवन को तीन क्षणों में समझा जा सकता है, और तीनों मिलकर उसका पूरा चेहरा दिखाते हैं।
पहला क्षण है वह लंबा, थकाने वाला निर्माण। इब्रानियों 11:7 इसे इस तरह पकड़ता है: "विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धार्मिकता का अधिकारी हुआ, जो विश्वास से होती है।" इस एक पद में सब कुछ है। नूह ने वह देखा नहीं जो आने वाला था, उसने केवल सुना। उसने "भक्ति के साथ", यानी पवित्र भय के साथ, काम किया। उसका जहाज़ स्वयं एक उपदेश बन गया, जिसने बिना शब्दों के संसार को दोषी ठहराया। और अंत में उसे धार्मिकता उसके परिश्रम से नहीं, विश्वास से मिली। नूह का हथौड़ा उसका उपदेश था।
दूसरा क्षण है वेदी। जहाज़ से बाहर आकर नूह ने सबसे पहले कोई घर नहीं बनाया, कोई खेत नहीं जोता। लिखा है, "तब नूह ने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई; और सब शुद्ध पशुओं, और सब शुद्ध पक्षियों में से, कुछ कुछ लेकर वेदी पर होमबलि चढ़ाई" (उत्पत्ति 8:20)। सोचिए, उसके पास बहुत कम पशु थे, और उसने उन्हीं में से चढ़ाए। यही आराधना का असली स्वरूप है: बचे हुए में से नहीं, पहले में से देना। परमेश्वर ने उस सुगंध को ग्रहण किया और मन में ठाना कि वे फिर कभी इस रीति से सब जीवितों को न मारेंगे। नए संसार की नींव एक वेदी पर पड़ी, और वह वेदी हमें गोलगोथा की ओर देखने पर मजबूर करती है।
तीसरा क्षण है वाचा और इंद्रधनुष: "मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिन्ह होगा" (उत्पत्ति 9:13)। जिस शब्द का अनुवाद "धनुष" है, वह लड़ाई के धनुष के लिए ही इस्तेमाल होता है। परमेश्वर मानो अपना युद्ध-धनुष टाँग रहे हैं, और उसकी नोक पृथ्वी की ओर नहीं, आकाश की ओर है। और ध्यान दीजिए, यह चिन्ह किसके लिए है? परमेश्वर कहते हैं, "मैं उसे देखकर याद करूँगा।" यह हमारी स्मरणशक्ति का नहीं, उनकी प्रतिज्ञा का चिन्ह है।
पर कहानी यहीं नहीं रुकती, और यही ईमानदारी बाइबल की पहचान है। नूह किसान बना, दाख की बारी लगाई, दाखमधु पीकर मतवाला हुआ, और अपने तंबू में नंगा पड़ा रहा। हाम ने अपने पिता का नंगापन देखा और बाहर जाकर बताया; शेम और येपेत ने पीछे चलकर कपड़ा डाला। परिणाम में कनान पर शाप उतरा, जो आगे चलकर इस्राएल के इतिहास में गूँजता रहा। जो आदमी संसार के न्याय से बच गया, वह अपने ही अंगूर से हार गया।
नूह से हम क्या सीखते हैं
पहला पाठ यह है कि अनुग्रह हमेशा पहले आता है। बहुत से लोग नूह की कहानी को इस तरह पढ़ते हैं: वह अच्छा था, इसलिए बच गया। पर पाठ का क्रम उल्टा है। पहले लिखा गया कि उस पर यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि बनी रही, उसके बाद उसकी धार्मिकता का वर्णन आया। और उत्पत्ति 7:1 में परमेश्वर उसे धर्मी कहते हैं, नूह स्वयं का बखान नहीं करता। यदि आप सोचते हैं कि परमेश्वर आपको तभी स्वीकारेंगे जब आपका रिकॉर्ड साफ़ हो जाए, तो नूह का जीवन आपको मुक्त करता है। पहले कृपा, फिर चरित्र; पहले बुलाहट, फिर आज्ञाकारिता।
दूसरा पाठ है लंबी आज्ञाकारिता का मूल्य। नूह ने एक दिन का साहसी काम नहीं किया, उसने दशकों तक एक ही आदेश को पकड़े रखा, बिना किसी परिणाम को देखे। कोई बादल नहीं आया, कोई सहमति नहीं मिली, कोई तालियाँ नहीं बजीं। ईसाई जीवन का बड़ा हिस्सा ऐसा ही है: चुपचाप वफ़ादार रहना जब कोई देख नहीं रहा, प्रार्थना करते रहना जब कोई उत्तर नहीं दिख रहा, बच्चों को सिखाते रहना जब फल दूर लगता है। विश्वास वह नहीं जो चमत्कार देखने पर आता है, विश्वास वह है जो हथौड़ा उठाए रखता है।
तीसरा पाठ सबसे कठिन है, और वही इस पन्ने का केंद्र है: बाहर की सफ़ाई भीतर के हृदय को नहीं बदलती। नूह नई पृथ्वी पर उतरा, हवा साफ़ थी, समाज नहीं था, हिंसा मिट चुकी थी, और फिर भी पाप उसके साथ जहाज़ में सवार होकर आ गया था। यदि दुनिया का सबसे धर्मी आदमी, सबसे नई शुरुआत में, कुछ ही समय में गिर सकता है, तो हमारी उम्मीद बेहतर हालातों में नहीं हो सकती। नौकरी बदलने से, शहर बदलने से, संगति बदलने से मन नहीं बदलता। हमें नया हृदय चाहिए, और वही यीशु मसीह देते हैं। नूह हमें दिखाता है कि समस्या कितनी गहरी है; मसीह दिखाते हैं कि समाधान कितना गहरा है।
दर्पण
आप शायद इस समय अपना जहाज़ बना रहे हैं और किसी को दिख नहीं रहा। आप वह माँ हैं जो सालों से एक बेटे के लिए प्रार्थना कर रही हैं जो अब फ़ोन तक नहीं उठाता। आप वह आदमी हैं जो ऑफ़िस में ईमानदारी की कीमत चुका रहे हैं जबकि बेईमान सहकर्मी तरक्की पा रहे हैं। आप वह जवान हैं जो अकेले पवित्रता चुन रहे हैं, जबकि आपके सारे दोस्त हँसते हैं कि आप किस ज़माने में जी रहे हैं। नूह के आसपास भी कोई सहमत नहीं था। और वह जहाज़ फिर भी बना।
पर दर्पण दूसरा चेहरा भी दिखाता है। नूह का सबसे बड़ा गिरना तब हुआ जब तूफ़ान खत्म हो चुका था। संकट में हम प्रार्थना करते हैं; शांति में हम ढीले पड़ जाते हैं। बीमारी में हम परमेश्वर को पकड़ते हैं; ठीक होने के बाद रविवार वैकल्पिक हो जाता है। कर्ज़ के समय हम रोते हैं; तनख़्वाह बढ़ने पर हम भूल जाते हैं। पूछिए अपने आप से, आपकी असली परीक्षा तंगी है या आराम? क्या आप वह इंसान हैं जो दबाव में खड़े रहते हैं और सुविधा में फिसल जाते हैं?
और एक बात और, जो चुभती है। नूह के मतवाले होने की खबर घर के भीतर से बाहर गई। एक बेटे ने अपने पिता की कमज़ोरी को ढका नहीं, उसे चर्चा बना दिया। हम भी यही करते हैं, कभी परिवार के बारे में, कभी कलीसिया के भाई-बहनों के बारे में। दूसरों के नंगेपन पर हँसना आसान है; पीछे चलकर कपड़ा डालना कठिन है। प्रेम कमज़ोरी को छिपाने के लिए झूठ नहीं बोलता, पर वह उसे तमाशा भी नहीं बनाता।
द्वार आज भी खुला है, और उसे बंद करने का समय परमेश्वर तय करते हैं। जब तक वह खुला है, भीतर आइए।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों को नूह की कहानी सुनाना बहुत आसान लगता है, और यही खतरा है। जानवरों और इंद्रधनुष के कारण यह अक्सर एक प्यारी कहानी बनकर रह जाती है, जबकि इसका दिल कहीं और है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि दुनिया में लोगों ने एक-दूसरे को बहुत दुख देना शुरू कर दिया था, और परमेश्वर को यह देखकर दुख हुआ, क्योंकि वे प्रेम करते हैं और इसलिए बुराई से परवाह करते हैं। फिर बताइए कि परमेश्वर ने एक आदमी से दोस्ती की, उसे एक बड़ा सुरक्षित घर बनाने को कहा, और जब पानी आया तो वह द्वार परमेश्वर ने खुद बंद किया। सबसे अच्छा अंत यह है: आसमान में रंगीन धनुष परमेश्वर का वादा है, और आज हमारा सुरक्षित जहाज़ यीशु मसीह हैं।
छोटे बच्चों के लिए ज़ोर सुरक्षा और परमेश्वर की देखभाल पर रखिए। बड़े बच्चों से आप ईमानदारी से बात कर सकते हैं कि पाप कितना गंभीर है और नूह भी परिपूर्ण नहीं था। किशोरों के साथ आप वह सवाल उठा सकते हैं जो वे वैसे भी पूछेंगे: क्या ऐसा न्याय अन्यायपूर्ण नहीं है, और यह कहानी विज्ञान के साथ कैसे बैठती है।
हमारे पास हर उम्र के लिए अलग-अलग तैयार समझाइशें उपलब्ध हैं, तीन से छह साल के छोटे बच्चों के लिए, सात से बारह साल के स्कूली बच्चों के लिए, और बारह साल से ऊपर के किशोरों के लिए, ताकि आप अपने बच्चे की उम्र और सवालों के अनुसार सही भाषा चुन सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नूह कौन था और वह बाइबल के इतिहास में कब हुआ?
नूह लेमेक का पुत्र और आदम की दसवीं पीढ़ी था, हनोक का परपोता। उत्पत्ति 6:9 उसका परिचय इस तरह देता है कि वह अपने समय के लोगों में धर्मी और खरा था और परमेश्वर के साथ-साथ चलता रहा। बाइबल के अनुसार वह जलप्रलय से पहले के उस युग में जीया जब लोग बहुत लंबी आयु तक जीते थे और पृथ्वी हिंसा से भर चुकी थी। वह छह सौ वर्ष का था जब जलप्रलय आया, और वही आदमी नई मानवजाति का पूर्वज बना, क्योंकि उसके तीन बेटों से सारे राष्ट्र फैले।
नूह का जहाज़ कितना बड़ा था और वह किस चीज़ से बना था?
उत्पत्ति 6:14 में परमेश्वर कहते हैं कि नूह गोपेर वृक्ष की लकड़ी से जहाज़ बनाए, उसमें कोठरियाँ बनाए और भीतर-बाहर राल लगाए। उसकी नाप तीन सौ हाथ लंबाई, पचास हाथ चौड़ाई और तीस हाथ ऊँचाई थी, यानी लगभग एक सौ पैंतीस मीटर लंबा, बाईस मीटर चौड़ा और तेरह मीटर ऊँचा, तीन मंज़िलों वाला। इसमें न पाल था, न पतवार, क्योंकि इसे कहीं जाना नहीं था, केवल तैरते रहना था। यह डिज़ाइन पूरी तरह परमेश्वर ने दिया, जो दिखाता है कि उद्धार की योजना मनुष्य की कल्पना नहीं होती।
जलप्रलय कितने समय तक चला और नूह जहाज़ में कितने दिन रहा?
बारिश चालीस दिन और चालीस रात हुई, पर पानी केवल उतने ही दिन नहीं रहा। उत्पत्ति बताती है कि जल एक सौ पचास दिन तक पृथ्वी पर प्रबल रहा, फिर धीरे-धीरे घटने लगा और जहाज़ अरारात के पहाड़ों पर टिका। इसके बाद भी नूह ने महीनों प्रतीक्षा की, कौआ और कबूतरी भेजी, और तब तक बाहर नहीं निकला जब तक परमेश्वर ने आज्ञा नहीं दी। कुल मिलाकर वह और उसका परिवार लगभग एक वर्ष से कुछ अधिक समय जहाज़ में रहे, जो धैर्य की एक लंबी परीक्षा थी।
क्या जलप्रलय पूरी पृथ्वी पर आया था या केवल एक क्षेत्र में?
बाइबल की भाषा बहुत व्यापक है: पानी ऊँचे पहाड़ों को ढँक गया और सब प्राणी नष्ट हो गए, केवल वे बचे जो जहाज़ में थे। मसीही लोग इस पर दो मुख्य दृष्टिकोण रखते हैं, कुछ इसे पूरी पृथ्वी पर आया वैश्विक प्रलय मानते हैं, और कुछ इसे उस समय की पूरी बसी हुई दुनिया पर आया व्यापक न्याय मानते हैं। दोनों दृष्टिकोण वाले विश्वासयोग्य मसीही यह मानते हैं कि यह वास्तविक ऐतिहासिक घटना थी, कि परमेश्वर ने पाप का न्याय किया, और कि उन्होंने अनुग्रह से एक घराना बचाया। यही धर्मशास्त्र का केंद्र है।
नूह के कितने बेटे थे और उनसे क्या हुआ?
नूह के तीन बेटे थे: शेम, हाम और येपेत। ये तीनों अपनी पत्नियों समेत जहाज़ में गए, इसलिए बचाए गए कुल आठ लोग थे। उत्पत्ति 10 में इन तीनों के वंशों की सूची दी गई है, जिसे अक्सर "राष्ट्रों की तालिका" कहा जाता है, और वहीं से पूरी पृथ्वी के लोग फैले। शेम की वंशावली से आगे चलकर अब्राहम आया, और उसी रेखा से इस्राएल और अंततः यीशु मसीह। इस तरह नूह का परिवार बाइबल की उद्धार-कहानी की अगली कड़ी बन जाता है।
इंद्रधनुष का बाइबल में क्या अर्थ है?
उत्पत्ति 9:13 में परमेश्वर कहते हैं, "मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिन्ह होगा।" यह चिन्ह मुख्य रूप से हमें याद दिलाने के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रतिज्ञा की घोषणा के रूप में दिया गया है, क्योंकि वे स्वयं कहते हैं कि वे उसे देखकर अपनी वाचा को स्मरण करेंगे। जिस शब्द का अनुवाद "धनुष" है वह युद्ध के धनुष के लिए प्रयोग होता है, मानो परमेश्वर अपना हथियार टाँग रहे हों। यह वाचा नूह और सब प्राणियों तथा आने वाली सब पीढ़ियों के साथ बाँधी गई।
क्या नूह पाप से मुक्त या परिपूर्ण मनुष्य था?
नहीं। उत्पत्ति 6:9 उसे "धर्मी" और "खरा" कहती है, पर इसका अर्थ निष्पाप होना नहीं, बल्कि सच्चाई से परमेश्वर के साथ चलना है। उत्पत्ति 9 साफ़ बताती है कि जलप्रलय के बाद नूह ने दाख की बारी लगाई, दाखमधु पीकर मतवाला हुआ और अपने तंबू में नंगा हो गया, जिसका असर उसके परिवार पर बुरा पड़ा। बाइबल अपने नायकों को सजाती नहीं। यही ईमानदारी हमें बताती है कि पानी दुनिया को धो सकता है पर हृदय को नहीं, और इसीलिए हमें मसीह की ज़रूरत है।
हाम के पाप के बाद शाप कनान पर क्यों पड़ा?
यह उत्पत्ति के कठिन हिस्सों में से एक है। हाम ने अपने पिता का नंगापन देखा और उसे ढकने के बजाय बाहर जाकर भाइयों को बताया, जो अनादर और अपने ही घर की मर्यादा भंग करने का काम था। जब नूह जागा, तो उसने शाप हाम पर नहीं, हाम के पुत्र कनान पर उच्चारा। इसका सबसे संभावित अर्थ यह है कि यह भविष्यवाणी उस कनानी जाति की ओर संकेत करती है जिसकी नैतिक भ्रष्टता आगे चलकर बहुत बढ़ी। यह पद किसी नस्ल या रंग को नीचा दिखाने का आधार नहीं है, और इसका ऐसा प्रयोग शास्त्र के साथ अन्याय है।
यीशु ने "नूह के दिन" का उल्लेख क्यों किया?
मत्ती 24:37 में यीशु मसीह कहते हैं, "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा।" वे यह नहीं कह रहे कि उस समय के लोग असाधारण रूप से बुरे काम कर रहे थे; वे यह कह रहे हैं कि लोग खाते-पीते और ब्याह करते हुए सामान्य जीवन में इतने डूबे थे कि उन्होंने आने वाली घड़ी पर ध्यान ही नहीं दिया। मुख्य चेतावनी उदासीनता के विरुद्ध है, बेख़बरी के विरुद्ध है। साथ ही यीशु मसीह इस कहानी को वास्तविक इतिहास मानते हैं और उसे अपने दूसरे आगमन का नमूना बनाते हैं।
जलप्रलय और बपतिस्मे में क्या संबंध है?
1 पतरस 3 में पतरस लिखता है कि नूह के दिनों में थोड़े लोग, अर्थात आठ प्राणी, पानी के द्वारा बचाए गए, और उसी का दृष्टांत बपतिस्मा है। इसका अर्थ यह नहीं कि पानी अपने आप बचाता है, क्योंकि पतरस स्वयं जोड़ता है कि यह शरीर के मैल दूर करने की बात नहीं, बल्कि शुद्ध विवेक की प्रार्थना है, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान से प्रभावी होती है। जैसे न्याय का पानी जहाज़ के ऊपर से गुज़रा और भीतर के लोग सुरक्षित रहे, वैसे ही परमेश्वर का न्याय मसीह पर पड़ा और उनमें रहने वाले सुरक्षित हैं।
नूह कितने वर्ष जीवित रहा और उसकी मृत्यु कैसे हुई?
बाइबल बताती है कि नूह जलप्रलय के बाद तीन सौ पचास वर्ष और जीया, और उसकी कुल आयु साढ़े नौ सौ वर्ष की हुई, फिर वह मर गया। उसकी मृत्यु के बारे में कोई नाटकीय विवरण नहीं दिया गया; उत्पत्ति बस शांत ढंग से यह दर्ज करती है, जैसे अध्याय 5 की वंशावली में बार-बार दोहराया गया वाक्य "तब वह मर गया"। यह याद दिलाता है कि जलप्रलय से बचना भी मृत्यु से बचना नहीं था। एक बड़े बचाव के बाद भी असली शत्रु बाकी था, जिसे केवल मसीह के पुनरुत्थान ने हराया।
क्या नूह ने अपने समय के लोगों को चेतावनी दी थी?
2 पतरस 2:5 नूह को "धर्म का प्रचारक" कहता है, जिससे यह समझा जाता है कि उसने केवल जहाज़ नहीं बनाया, बल्कि आने वाले न्याय के बारे में बोला भी। साथ ही इब्रानियों 11:7 कहती है कि उसने जहाज़ के द्वारा संसार को दोषी ठहराया, यानी उसकी आज्ञाकारिता स्वयं एक जीवित उपदेश थी। जितने वर्षों तक वह निर्माण करता रहा, उतने वर्षों तक परमेश्वर धीरज धरते रहे, जैसा 1 पतरस 3 में लिखा है। किसी ने भी उसकी बात मानी हो, इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता, फिर भी वह वफ़ादार रहा।
अंत में
नूह की कहानी को हल्के में लेना आसान है, क्योंकि उसे हमने बच्चों के कमरे की दीवार पर टाँग दिया है। पर जब आप उसे ध्यान से पढ़ते हैं, तो आप देखते हैं कि यह सृष्टि के दोबारा शुरू होने की कहानी है, और साथ ही यह कड़वी स्वीकारोक्ति भी कि दोबारा शुरू करना काफ़ी नहीं। परमेश्वर ने पूरी दुनिया को धो दिया और एक धर्मी आदमी को नई भूमि पर उतारा, और कुछ ही समय में वही आदमी एक बगीचे में, एक फल के कारण, नंगा और शर्मिंदा पड़ा मिला। इसीलिए परमेश्वर ने दूसरा जलप्रलय नहीं भेजा, उन्होंने अपना पुत्र भेजा।
आज आप जहाँ भी हैं, चाहे लंबी और नीरस वफ़ादारी के बीच, चाहे किसी गिरावट के बाद की शर्म में, नूह का जीवन दो बातें आपके सामने रखता है: अनुग्रह की दृष्टि पहले पड़ती है, और वेदी हमेशा नई शुरुआत की जगह होती है। आगे पढ़ने के लिए उत्पत्ति 6 से 9 को एक बैठक में पढ़िए, फिर मत्ती 24 और इब्रानियों 11 पर जाइए, और अंत में ठहरकर पूछिए: मेरा असली जहाज़ कौन है, और क्या मैं उसके भीतर हूँ?