2 राजाओं 25:9
पाठ
पाँचवें महीने के सातवें दिन, जब घेराबंदी टूट चुकी थी और राजा अंधा होकर बाबेल जा चुका था, नबूजरदान यरूशलेम में घुसा। वह सेनापति नहीं, बाबेल के राजा का अंगरक्षक-प्रधान था, आग लगाने का काम जिसे सौंपा गया। और उसने तीन चीज़ों को जलाया: "यहोवा के भवन और राजभवन और यरूशलेम के सब घरों को अर्थात् हर एक बड़े घर को आग लगाकर फूँक दिया।" पहले परमेश्वर का भवन, फिर राजा का, फिर नगर का हर बड़ा घर। चार सौ वर्षों से जो पत्थर, देवदार और सोना यहूदा की पहचान थे, वे एक दोपहर में धुआँ बन गए।
मर्म
यहाँ जो जला, वह केवल इमारत नहीं थी; वह एक धर्मशास्त्र था। यहूदा का विश्वास यह था कि यहोवा सिय्योन में बसते हैं, इसलिए सिय्योन अजेय है। परमेश्वर अपने ही घर को जलने कैसे दे सकते हैं? पर लेखक एक शब्द भी परमेश्वर के बचाव में नहीं कहता। वह न तो रोता है, न समझाता है। वह सिर्फ़ तारीख़ लिखता है, जैसे कोई डॉक्टर मृत्यु का समय दर्ज करे। और इस ठंडी तटस्थता में ही सबसे बड़ी बात छिपी है: यह बाबेल की यहोवा पर जीत नहीं, यहोवा का अपना न्याय है। परमेश्वर अपने मंदिर के बंधक नहीं हैं। जहाँ भवन तो खड़ा रहे पर वाचा टूटी रहे, वहाँ वे भवन को गिरा देंगे, ताकि लोग फिर उन्हें ढूँढ़ें, पत्थरों को नहीं।
सूत्र
जला हुआ मंदिर बाइबल की कहानी का अंत नहीं, एक मोड़ है। सुलैमान ने जिस दिन यह भवन समर्पित किया था, उसी दिन चेतावनी भी दी गई थी: यदि तुम मुड़ जाओ, तो यह भवन खंडहर हो जाएगा। परमेश्वर ने अपनी बात निभाई, दोनों तरफ़ से। पर इसके बाद एक लंबा सवाल खुला रह जाता है: अब परमेश्वर कहाँ बसेंगे? पाँच सौ साल बाद एक आदमी यरूशलेम के दूसरे मंदिर के आँगन में खड़ा होकर कहता है, इस मंदिर को ढा दो, और मैं इसे तीन दिन में खड़ा कर दूँगा। वह अपनी देह की बात कर रहा था। नबूजरदान की आग ने जो सिखाया, क्रूस ने उसे पूरा किया: परमेश्वर की उपस्थिति पत्थरों में बंधी नहीं रहती, और जब वह उपस्थिति टूटती है, तो न्याय और अनुग्रह एक ही जगह मिलते हैं। यहाँ इमारत जली ताकि लोग बचें; वहाँ पुत्र दिया गया ताकि लोग जिएँ।
दर्पण
हम सबके पास कुछ ऐसा है जिसे हम चुपचाप अजेय मानते हैं। वह नौकरी जो पंद्रह साल से सुरक्षित लगी, वह शरीर जिसने कभी धोखा नहीं दिया, वह विवाह जिसके बारे में हमने सोचा कि चाहे कुछ हो जाए, यह तो रहेगा ही। और कभी-कभी वह चीज़ भी जो धार्मिक है: हमारी कलीसिया, हमारी सेवकाई, हमारा नाम। यहूदा ने मंदिर से यही किया था, उसे परमेश्वर के बदले सुरक्षा का तावीज़ बना लिया। इस पद की चुभन यह है कि परमेश्वर उस तावीज़ को तोड़ने से नहीं हिचकते, क्योंकि वे हमें अपने उपहारों से नहीं, अपने आप से बाँधना चाहते हैं। जब आपके जीवन में कुछ जला है, तो शायद वहाँ भी परमेश्वर विरोधी नहीं, न्यायी और उद्धारकर्ता दोनों थे। आज एक काम कीजिए: काग़ज़ पर उस एक चीज़ का नाम लिखिए जिसे खोने की कल्पना से आप सबसे ज़्यादा डरते हैं, और उसे हाथ में पकड़कर ऊँची आवाज़ में कहिए, "यह आपकी है, मेरी सुरक्षा नहीं।"
अंतर्पाठ
यिर्मयाह बरसों तक मंदिर के फाटक पर खड़ा होकर यही चिल्लाता रहा था कि "यहोवा का मंदिर, यहोवा का मंदिर" कहते रहने से कोई नहीं बचेगा, और उसे इसके लिए कुएँ में डाला गया। 2 राजा 25:9 यिर्मयाह की सच्चाई का दर्दनाक प्रमाण-पत्र है: भविष्यद्वक्ता सही था, और सही होना उसके लिए कोई जीत नहीं थी। दूसरी ओर भजन 74 उसी मलबे पर बैठकर विलाप करता है, आग, कुल्हाड़ी, पवित्रस्थान का अपवित्र होना, और फिर भी पूछता है कि परमेश्वर कब तक चुप रहेंगे। इन दोनों को साथ पढ़िए और आप इस्राएल की ईमानदारी देखेंगे: वे न्याय को स्वीकार करते हैं और साथ ही परमेश्वर से शिकायत करना नहीं छोड़ते। विश्वास का अर्थ चुप रह जाना नहीं है।
ब्यौरा
"हर एक बड़े घर" वाला वाक्यांश आसानी से फिसल जाता है। मूल में यह शब्द उन लोगों के घरों की ओर इशारा करता है जो ऊँचे थे, धनी, कुलीन, वे जिनके आँगन चौड़े थे और जिनके नौकर थे। नबूजरदान ने झोपड़ियाँ नहीं जलाईं। उसने ठीक वही घर चुने जहाँ सत्ता रहती थी। और पद 12 बताता है कि "देश के कंगालों में से कितनों को" छोड़ दिया गया, दाख की बारियों के लिए। यह विडंबना रोंगटे खड़ी करती है: जिन्होंने अदालत में ग़रीबों का हक़ दबाया था, उनके घर राख हुए; और जिनके पास कुछ भी नहीं था, वे ज़मीन पर रह गए। आग अंधाधुंध नहीं थी। वह चुनकर उन जगहों पर गिरी जहाँ से अन्याय निकलता था।
श्रोता
यह पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई जो बाबेल में बैठे थे, शायद दूसरी पीढ़ी, जिनके बच्चे अक्कादी भाषा में सपने देखते थे। उनके लिए यह पद कोई इतिहास का पन्ना नहीं था, वह उनके पिता की आँखों की याद थी। वे यह पूछते हुए बड़े हुए थे कि क्या यहोवा हार गए? और यह लेखक उन्हें ठीक वही जवाब देता है जो सबसे कठिन और सबसे मुक्त करने वाला है: नहीं, वे हारे नहीं, उन्होंने यह किया। क्योंकि अगर बाबेल के देवता जीते होते, तो कोई आशा नहीं बचती। पर अगर यह परमेश्वर का न्याय था, तो वही परमेश्वर लौटा भी सकते हैं। इसीलिए यह अध्याय यहोयाकीन के राजा की मेज़ पर भोजन करने के साथ ख़त्म होता है, राख के बीच जलती हुई एक छोटी-सी बाती।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन-सी "अच्छी" चीज़ है जो चुपके से परमेश्वर की जगह लेकर आपकी सुरक्षा बन गई है?
जब कुछ टूटता है, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया परमेश्वर को दोष देना होती है या उनसे पूछना कि वे क्या कर रहे हैं? इन दोनों में फ़र्क़ क्या है?
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2 Kings 25:9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
2 राजाओं 25:9 का क्या अर्थ है?
2 राजाओं 25:9 किस विषय में है?
2 राजाओं 25:9 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
2 राजाओं 25:9 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 राजाओं 25:9 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Kings 25 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
यरूशलेम सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष तक घिरा रहा, पर उस लम्बे घेरे का भी एक अंत था। धन्यवाद, पिता, कि मेरी घेराबंदी के दिन भी आपने गिन रखे हैं। आप भूलते नहीं, आप हर बीतते महीने में मेरे साथ ठहरे रहते हैं और नियत समय पर छुटकारा देते हैं।
सुलैमान ने जो बनाया था, वह इतना भव्य था कि "उन सब में इतना पीतल था कि वह तौल से बाहर था।" पर वही बेतौल पीतल टुकड़ों में बँटकर बाबेल ले जाया गया। जो चीज़ें तुम्हें अटल लगती हैं, तुम्हारा घर, तुम्हारी कमाई, तुम्हारी सेहत, वे भी तोड़ी जा सकती हैं। फिर तुम्हारा भरोसा कहाँ टिका है? मन्दिर गिर गया, पर परमेश्वर नहीं गिरा।
हे प्रभु, कई बार हालात हमारे चुने हुए नहीं होते, फिर भी हमें उन्हीं में जीना पड़ता है। डर को मेरे मन पर राज करने मत दे। जहाँ तूने मुझे रखा है, वहीं ईमानदारी से जीने और काम करने की हिम्मत दे, और मुझे भरोसा दिला कि तेरी देखभाल वहाँ भी मेरे साथ है।
पिता, धन्यवाद कि जब मन्दिर उजड़ा और खम्भे तोड़े गए, तब भी आपने एक एक हाथ की ऊँचाई, जाली और अनार तक का ब्योरा याद रखा। जो हमारे जीवन में टूटा और छिन गया, वह भी आपकी दृष्टि से ओझल नहीं। आप सब कुछ गिनते और सम्भालते हैं।
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