बाइबल व्याख्या

2 तीमुथियुस 4:13

बाइबल

पाठ

मौत के मुहाने पर खड़ा एक बूढ़ा आदमी लिखता है: त्रोआस में करपुस के घर मेरा बागा छूट गया, आते समय ले आना, और किताबें भी, खासकर चर्मपत्र। बस इतना। जो व्यक्ति दो पद पहले कह रहा था कि वह अर्घ के समान उण्डेला जा रहा है और उसके संसार से जाने का समय आ पहुँचा है, वही अब एक कोट की, कुछ पोथियों की, और विशेष रूप से चर्मपत्रों की याद दिलाता है। ऊँची उड़ान भरते वाक्य के तुरंत बाद एक बहुत ही मामूली अनुरोध, जिसे किसी संपादक ने काटा नहीं, किसी ने अनावश्यक कहकर हटाया नहीं। पवित्रशास्त्र में यह वाक्य बना रहा, और यही उसकी सबसे बड़ी पहेली है।

मूल मर्म

हम आत्मिकता को शरीर से ऊपर उठने के रूप में सोचने के अभ्यस्त हैं, लेकिन यह पद उस आदत को धीरे से तोड़ देता है। जो प्रेरित मुकुट की बात कर चुका है, वह जाड़े की ठंड को भी गंभीरता से लेता है; जिसने विश्वास की रखवाली की है, वह अपनी पढ़ने की सामग्री भी माँगता है। परमेश्वर की कृपा मनुष्य को देहहीन नहीं बनाती। वह उसे उसकी देह में, उसकी ठिठुरन में, उसकी बौद्धिक भूख में ही सँभालती है। और गौर करें कि पौलुस यह सब किसी सेवक से नहीं, बल्कि अपने आत्मिक पुत्र से माँगता है, जैसे कोई पिता बेटे से कहे, आते हो तो वह चीज़ ले आना। पवित्रता यहाँ किसी उदात्त मुद्रा में नहीं, बल्कि एक कोट और कुछ पन्नों की ज़रूरत मानने की विनम्रता में दिखती है। क्या हमें यह खटकता है? शायद इसलिए कि हम संतों को हमसे कम मानवीय देखना चाहते हैं।

सूत्र

चर्मपत्र माँगने वाला आदमी वही है जिसने इसी पत्र में लिखा था कि हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है। बहुत संभव है कि ये चर्मपत्र भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पोथियाँ थीं, वही शब्द जिनमें से उसने वर्षों तक मसीह को खोजकर दिखाया था। यानी मरने से पहले वह जो आखिरी चीज़ माँगता है, वह परमेश्वर का वचन है, और उसके साथ एक कोट। छुटकारे की कहानी कभी देह से घृणा नहीं करती। जो परमेश्वर मनुष्य बने, वे भी वस्त्र पहनते थे, और क्रूस पर वही वस्त्र उनसे छीन लिया गया था। पौलुस का बागा उस बड़े सत्य की छोटी परछाईं है: उद्धार शरीर से पलायन नहीं, शरीर तक पहुँची कृपा है।

दर्पण

आपके पास भी एक ऐसी सूची है, जिसे आप आत्मिक नहीं मानते: बिजली का बिल, घुटने का दर्द, वह दवा जो खत्म हो रही है, वह किताब जो आप महीनों से पढ़ना चाहते हैं। हम सोचते हैं कि सच्चा विश्वास इन बातों से ऊपर उठ जाता है, और फिर अपनी ज़रूरतों को छिपाकर थकते रहते हैं। पौलुस ऐसा नहीं करता। वह माँगता है, और किसी अजनबी से नहीं, बल्कि उस युवक से जिसे उसने विश्वास में जन्मा देखा। किसी से यह कहना कि मुझे तुम्हारी ज़रूरत है, आते समय यह ले आना, आत्मिक कमज़ोरी नहीं है; वह उस समुदाय का ढाँचा है जिसे परमेश्वर ने बनाया। सवाल यह है: आप आखिरी बार कब किसी से कुछ माँगे थे, बिना सफाई दिए?

पहले श्रोता

तीमुथियुस को यह पत्र मिला तो उसने इसे कोई सूक्ति नहीं, बल्कि एक यात्रा-निर्देश की तरह पढ़ा। रोम की जेल की दीवारें पत्थर की थीं, और जाड़ा आ रहा था; पद इक्कीस में साफ है, जाड़े से पहले चले आने का प्रयत्न कर, क्योंकि सर्दियों में समुद्री रास्ते बंद हो जाते थे। त्रोआस रास्ते में पड़ता था, करपुस का घर वहाँ जाना-पहचाना ठिकाना। चर्मपत्र महँगे थे, कोई उन्हें यूँ ही पीछे नहीं छोड़ता; इसका मतलब पौलुस त्रोआस से जल्दबाज़ी में, संभवतः गिरफ्तारी के कारण निकला था। और पद दस-ग्यारह पढ़ चुका तीमुथियुस यह भी सुनता है कि देमास छोड़ गया, केवल लूका साथ है। यानी यह अनुरोध किसी संपन्न प्रेरित का नहीं, एक अकेले, ठिठुरते कैदी का है।

प्रश्न

तो परमेश्वर ने एक कोट का उल्लेख पवित्रशास्त्र में क्यों रहने दिया? इसका कोई सीधा उत्तर पाठ नहीं देता, और इसे जबरदस्ती आत्मिक अर्थ पहनाना बेईमानी होगी। इससे भी असहज प्रश्न यह है: क्या बागा पहुँचा? क्या तीमुथियुस जाड़े से पहले रोम पहुँच पाया, या पौलुस उसी ठंड में, उन पोथियों के बिना, मारा गया? पवित्रशास्त्र चुप है। हमें आदत है कि हर कहानी का सिरा जुड़ जाए, प्रार्थना का उत्तर दिखे, ज़रूरत पूरी हो। यहाँ वह संतोष नहीं मिलता। जो मिलता है वह यह है: परमेश्वर ने एक आदमी की अनुत्तरित माँग को अपने वचन में जगह दी। कभी-कभी विश्वास का अर्थ यही होता है, कि आपकी अधूरी सूची भी परमेश्वर के सामने दर्ज है।

अंतर्पाठ

इसी अध्याय के भीतर दो तस्वीरें आमने-सामने रखी हैं। पद आठ में धार्मिकता का मुकुट है, जो प्रभु उस दिन देंगे; पद तेरह में एक पुराना बागा है, जो करपुस के घर पड़ा है। एक ही आदमी दोनों की बात करता है, और यही मसीही जीवन का सच्चा नाप है: अनंत की आशा और आज की ठंड, एक साथ, बिना एक-दूसरे को नकारे। दूसरी गूँज मत्ती पचीस से आती है, जहाँ प्रभु न्याय के दिन कहते हैं कि मैं नंगा था और तुमने मुझे कपड़ा पहनाया। तीमुथियुस के लिए वह बागा उठाना कोई छोटा काम नहीं था; वह उस सेवा का ठोस रूप था जिसे मसीह अपनी ही सेवा कहते हैं।

मनन

आपकी अपनी "बागा और चर्मपत्र" वाली सूची में क्या है, और आपने उसे परमेश्वर के सामने रखने लायक क्यों नहीं समझा?

किसकी ठंड आप जानते हैं, और जाड़े से पहले क्या ले जाना आपके हाथ में है?

2 Timothy में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of 2 Timothy

John Stott

Paul's final letter: guarding the gospel and finishing the race.

Paul For Everyone: The Pastoral Letters

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2 Timothy 4:13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 तीमुथियुस 4:13 का क्या अर्थ है?
मौत के मुहाने पर खड़ा एक बूढ़ा आदमी लिखता है: त्रोआस में करपुस के घर मेरा बागा छूट गया, आते समय ले आना, और किताबें भी, खासकर चर्मपत्र। बस इतना। जो व्यक्ति दो पद पहले कह रहा था कि वह अर्घ के समान उण्डेला जा रहा है और उसके संसार से जाने का समय आ पहुँचा है, वही अब एक कोट की, कुछ पोथियों की, और विशेष रूप से चर्मपत्रों की याद दिलाता है। ऊँची उड़ान भरते वाक्य के तुरंत बाद एक बहुत ही मामूली अनुरोध, जिसे किसी संपादक ने काटा नहीं, किसी ने अनावश्यक कहकर हटाया नहीं। पवित्रशास्त्र में यह वाक्य बना रहा, और यही उसकी सबसे बड़ी पहेली है।
2 तीमुथियुस 4:13 किस विषय में है?
चर्मपत्र माँगने वाला आदमी वही है जिसने इसी पत्र में लिखा था कि हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है। बहुत संभव है कि ये चर्मपत्र भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पोथियाँ थीं, वही शब्द जिनमें से उसने वर्षों तक मसीह को खोजकर दिखाया था। यानी मरने से पहले वह जो आखिरी चीज़ माँगता है, वह परमेश्वर का वचन है, और उसके साथ एक कोट। छुटकारे की कहानी कभी देह से घृणा नहीं करती। जो परमेश्वर मनुष्य बने, वे भी वस्त्र पहनते थे, और क्रूस पर वही वस्त्र उनसे छीन लिया गया था। पौलुस का बागा उस बड़े सत्य की छोटी परछाईं है: उद्धार शरीर से पलायन नहीं, शरीर तक पहुँची कृपा है।
2 तीमुथियुस 4:13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
तीमुथियुस को यह पत्र मिला तो उसने इसे कोई सूक्ति नहीं, बल्कि एक यात्रा-निर्देश की तरह पढ़ा। रोम की जेल की दीवारें पत्थर की थीं, और जाड़ा आ रहा था; पद इक्कीस में साफ है, जाड़े से पहले चले आने का प्रयत्न कर, क्योंकि सर्दियों में समुद्री रास्ते बंद हो जाते थे। त्रोआस रास्ते में पड़ता था, करपुस का घर वहाँ जाना-पहचाना ठिकाना। चर्मपत्र महँगे थे, कोई उन्हें यूँ ही पीछे नहीं छोड़ता; इसका मतलब पौलुस त्रोआस से जल्दबाज़ी में, संभवतः गिरफ्तारी के कारण निकला था। और पद दस-ग्यारह पढ़ चुका तीमुथियुस यह भी सुनता है कि देमास छोड़ गया, केवल लूका साथ है। यानी यह अनुरोध किसी संपन्न प्रेरित का नहीं, एक अकेले, ठिठुरते कैदी का है।
2 तीमुथियुस 4:13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इसी अध्याय के भीतर दो तस्वीरें आमने-सामने रखी हैं। पद आठ में धार्मिकता का मुकुट है, जो प्रभु उस दिन देंगे; पद तेरह में एक पुराना बागा है, जो करपुस के घर पड़ा है। एक ही आदमी दोनों की बात करता है, और यही मसीही जीवन का सच्चा नाप है: अनंत की आशा और आज की ठंड, एक साथ, बिना एक-दूसरे को नकारे। दूसरी गूँज मत्ती पचीस से आती है, जहाँ प्रभु न्याय के दिन कहते हैं कि मैं नंगा था और तुमने मुझे कपड़ा पहनाया। तीमुथियुस के लिए वह बागा उठाना कोई छोटा काम नहीं था; वह उस सेवा का ठोस रूप था जिसे मसीह अपनी ही सेवा कहते हैं।
2 तीमुथियुस 4:13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
किसकी ठंड आप जानते हैं, और जाड़े से पहले क्या ले जाना आपके हाथ में है?
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2 Timothy 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

पौलुस जंजीरों में है, अंत पास है, और आखिरी सांसों में वह तीमुथियुस से कहता है, "तू वचन का प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह।" सुविधा का इंतज़ार मत कर। और ध्यान दे, डाँटने के साथ वह "सब प्रकार की सहनशीलता" जोड़ता है। सच बोलना आसान है, सच बोलकर उस इंसान के साथ धीरज से ठहरे रहना कठिन। तू किसके लिए ठहरा हुआ है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

पौलुस मृत्यु के करीब है, जंजीरों में है, और उसके मन में क्या है? नाम। "प्रिस्का और अक्विला को, और उनेसिफुरुस के घराने को नमस्कार।" उनेसिफुरुस ने रोम में उसे ढूंढ़कर ताज़गी दी थी, अब पौलुस उसके घर वालों को याद कर रहा है। अंतिम घड़ी में भी रिश्ते नहीं भूले। तुम्हारे मन में आज किसका नाम है, जिसे तुमने कब से याद नहीं किया?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

पौलुस लिखता है, "क्योंकि ऐसा समय आएगा, जब लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुत सारे उपदेशक बटोर लेंगे।" ध्यान दे, वे शिक्षकों को ठुकराते नहीं, बल्कि बटोरते हैं। खतरा सुनना छोड़ देना नहीं, बल्कि वही सुनना है जो मन को गुदगुदाए। आज खुद से पूछ: मैं वह सुनता हूँ जो मुझे अच्छा लगता है, या वह जो मुझे बदलता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 20

पौलुस, जिसके हाथों से परमेश्वर ने अनोखे सामर्थ्य के काम किए थे, लिखता है: "त्रुफिमुस को मैंने मिलेतुस में बीमार छोड़ा।" चंगाई हर बार नहीं आई। वह अपने साथी को बीमार छोड़कर आगे बढ़ा, और यह बात उसने छिपाई नहीं। तेरी वह प्रार्थना जिसका उत्तर अब तक नहीं मिला, तुझे विश्वास से बाहर नहीं करती। परमेश्वर की नज़र में तू भूला नहीं गया है।

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