बाइबल व्याख्या

हबक्कूक 2:3

बाइबल
यह वचन THE OPEN HEAVEN CHURCH द्वारा समर्पित है

पाठ

गुम्मट की दीवार पर खड़ा एक आदमी, आँखें क्षितिज पर गड़ाए, और नीचे शहर में सब कुछ वैसा ही चलता हुआ जैसा कल था। इसी मुद्रा में हबक्कूक को उत्तर मिलता है, और वह उत्तर हाथ में पकड़ी जा सकने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि एक समय-सूचना है। परमेश्वर कहते हैं कि जो दर्शन उन्होंने दिखाया है, उसका एक "नियत समय" तय है; वह समय अपनी ओर दौड़ता हुआ आ रहा है और वह दर्शन झूठा नहीं निकलेगा। अगर देर लगती दिखे, तो भी प्रतीक्षा करते रहना, क्योंकि वह पूरा होकर ही रहेगा। एक ही वाक्य में दो बातें साथ रखी गई हैं: विलम्ब भी सच है, और देर नहीं होगी, यह भी सच है।

मर्म

बेबीलोन की सेनाएँ उत्तर से बढ़ रही थीं, यरूशलेम के व्यापारी अब भी तराजू में धोखा कर रहे थे, और नबी का प्रश्न अनुत्तरित लटका था कि परमेश्वर चुप क्यों हैं। इस पृष्ठभूमि में परमेश्वर हबक्कूक को न तो तारीख बताते हैं, न कारण समझाते हैं; वे केवल अपनी विश्वसनीयता गिरवी रखते हैं। "इसमें धोखा न होगा" का अर्थ है कि दर्शन साँस लेता हुआ जीवित वचन है, जो अपने नियत क्षण की ओर हाँफता हुआ भाग रहा है। यहाँ परमेश्वर का चरित्र इतिहास के कैलेंडर से बड़ा दिखाया गया है: वे धीमे नहीं, समय के स्वामी हैं। और मनुष्य की भूमिका बदल जाती है, अब वह हिसाब माँगने वाला नहीं, प्रतीक्षा करने वाला है, और यही प्रतीक्षा अगले ही पद में "विश्वास" कहलाती है।

सूत्र

यह पद उस लंबी प्रतीक्षा की रीढ़ है जो पूरे पुराने नियम में तनी हुई है। अब्राहम को दिया गया वचन सौ वर्ष तक हवा में लटका रहा, मिस्र की गुलामी चार पीढ़ियाँ चली, और यहाँ हबक्कूक को भी वही सिखाया जाता है: परमेश्वर के वचन और उसके पूरा होने के बीच एक खाली जगह होती है, और उस खाली जगह का नाम विश्वास है। नया नियम इस पद को सीधे उठा लेता है। इब्रानियों 10 में लेखक इसी वाक्य को मसीह के दोबारा आने पर लागू करता है, और वहाँ "वह" कोई दर्शन नहीं, एक व्यक्ति बन जाता है, जो आने वाला है और देर नहीं करेगा। बेबीलोन की छाया में बोला गया समय-वचन क्रूस और खाली कब्र के बाद और भी भारी हो जाता है: परमेश्वर ने एक बार अपना "नियत समय" निभाकर दिखा दिया है।

दर्पण

हमारी प्रतीक्षा गुम्मट पर नहीं होती, दफ्तर की कुर्सी पर होती है, अस्पताल के गलियारे में, उस बच्चे के कमरे के बाहर जिसने बात करना बंद कर दिया है। और हमारा असली संकट यह नहीं कि परमेश्वर कुछ करते नहीं, बल्कि यह कि वे हमारी समय-सारणी से काम नहीं करते। हम हिसाब लगाते हैं: इतने साल प्रार्थना की, अब तो कुछ होना चाहिए। हबक्कूक को यही सिखाया जाता है कि दर्शन की गति उसकी अपनी है, हमारे धैर्य की नहीं। विलम्ब को झूठ मान लेना सबसे बड़ा प्रलोभन है, और उसी से मन कड़वा होता है।

आज एक काम कीजिए: एक कागज़ पर, साफ अक्षरों में, वह एक बात लिखिए जिसकी प्रतीक्षा आप परमेश्वर से कर रहे हैं, नीचे आज की तारीख डालिए, और उसे वहाँ चिपका दीजिए जहाँ आपकी नज़र रोज़ पड़ती है। "साफ-साफ लिख दे" यही आज्ञा है।

अंतर्पाठ

पौलुस रोमियों 1 में और गलातियों 3 में अगली ही पंक्ति, "धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा", उठाकर सुसमाचार की नींव बना देता है। यह आकस्मिक नहीं है: हबक्कूक के लिए विश्वास कोई मानसिक सहमति नहीं था, बल्कि एक ढहते हुए राज्य में परमेश्वर के वचन पर टिके रहने की ज़िद। पतरस अपनी दूसरी पत्री में यही तर्क दूसरे सिरे से पकड़ता है, जब वह कहता है कि प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करते, बल्कि सहनशील हैं। दोनों जगह वही समीकरण है जो हबक्कूक 2:3 में खड़ा किया गया: जिसे मनुष्य देरी कहता है, वह परमेश्वर की ओर से या तो नियत समय है या धीरज। और इसी अध्याय का चौदहवाँ पद बता देता है कि अंत में क्या होगा, जब पृथ्वी परमेश्वर की महिमा के ज्ञान से समुद्र की तरह भर जाएगी।

प्रश्न

पर ईमानदारी से: हबक्कूक इस पूर्ति को देख नहीं पाया। बेबीलोन गिरा, हाँ, पर उसके गिरने में लगभग सत्तर साल लगे, और तब तक यरूशलेम जलकर राख हो चुका था, मंदिर लूटा जा चुका था, बच्चे बंधुआई में मर चुके थे। "उसमें देर न होगी" उस विधवा के लिए क्या अर्थ रखता था जिसका पति दीवार पर मारा गया? यहाँ पाठ हमें आसान उत्तर नहीं देता। वह केवल यह दावा करता है कि परमेश्वर का समय झूठा नहीं है, यह नहीं कि वह हमारे जीवनकाल में समा जाएगा। कुछ प्रतिज्ञाएँ हमारे मरने के बाद पूरी होती हैं, और विश्वास का सबसे कठिन रूप यही है: उस फसल के लिए जीना जिसे कोई और काटेगा। इस रहस्य को चिकना करना बेईमानी होगी।

विवरण

"दौड़ते हुए भी वे सहज से पढ़ी जाएँ" इस चित्र पर ठहरिए। प्राचीन शहरों में पत्थर की पटिया चौक में गाड़ी जाती थी, और संदेशवाहक भागते हुए उसे पढ़ते थे। पर असली बात यह है कि दर्शन खुद भी दौड़ रहा है, "उसके पूरे होने का समय वेग से आता है"। यानी दो दौड़ें हैं: एक वह मनुष्य जो खबर लेकर भागता है, और एक वह भविष्य जो हमारी ओर दौड़ा चला आ रहा है। हम सोचते हैं हम भविष्य की ओर धीरे-धीरे रेंग रहे हैं; परमेश्वर कहते हैं कि उनका नियत क्षण हमारी ओर वेग से बढ़ रहा है। प्रतीक्षा निष्क्रिय बैठना नहीं, किसी आते हुए के सामने खड़े रहना है।

चिंतन

आप जिस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उसमें आपने चुपचाप कौन-सी समय-सीमा परमेश्वर पर थोप रखी है, और उस सीमा के बीत जाने पर आपके भीतर क्या बदला?

अगर आपकी प्रार्थना का उत्तर आपके जीवनकाल के बाद आए, तो क्या वह आपके लिए अब भी उत्तर होगा?

Habakkuk में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Joel, Micah and Habakkuk

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Three minor prophets, one big vision of judgment and restoration.

Jonah, Nahum, Habakkuk, Zephaniah

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Habakkuk 2:3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

हबक्कूक 2:3 का क्या अर्थ है?
गुम्मट की दीवार पर खड़ा एक आदमी, आँखें क्षितिज पर गड़ाए, और नीचे शहर में सब कुछ वैसा ही चलता हुआ जैसा कल था। इसी मुद्रा में हबक्कूक को उत्तर मिलता है, और वह उत्तर हाथ में पकड़ी जा सकने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि एक समय-सूचना है। परमेश्वर कहते हैं कि जो दर्शन उन्होंने दिखाया है, उसका एक "नियत समय" तय है; वह समय अपनी ओर दौड़ता हुआ आ रहा है और वह दर्शन झूठा नहीं निकलेगा। अगर देर लगती दिखे, तो भी प्रतीक्षा करते रहना, क्योंकि वह पूरा होकर ही रहेगा। एक ही वाक्य में दो बातें साथ रखी गई हैं: विलम्ब भी सच है, और देर नहीं होगी, यह भी सच है।
हबक्कूक 2:3 किस विषय में है?
यह पद उस लंबी प्रतीक्षा की रीढ़ है जो पूरे पुराने नियम में तनी हुई है। अब्राहम को दिया गया वचन सौ वर्ष तक हवा में लटका रहा, मिस्र की गुलामी चार पीढ़ियाँ चली, और यहाँ हबक्कूक को भी वही सिखाया जाता है: परमेश्वर के वचन और उसके पूरा होने के बीच एक खाली जगह होती है, और उस खाली जगह का नाम विश्वास है। नया नियम इस पद को सीधे उठा लेता है। इब्रानियों 10 में लेखक इसी वाक्य को मसीह के दोबारा आने पर लागू करता है, और वहाँ "वह" कोई दर्शन नहीं, एक व्यक्ति बन जाता है, जो आने वाला है और देर नहीं करेगा। बेबीलोन की छाया में बोला गया समय-वचन क्रूस और खाली कब्र के बाद और भी भारी हो जाता है: परमेश्वर ने एक बार अपना "नियत समय" निभाकर दिखा दिया है।
हबक्कूक 2:3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काम कीजिए: एक कागज़ पर, साफ अक्षरों में, वह एक बात लिखिए जिसकी प्रतीक्षा आप परमेश्वर से कर रहे हैं, नीचे आज की तारीख डालिए, और उसे वहाँ चिपका दीजिए जहाँ आपकी नज़र रोज़ पड़ती है। "साफ-साफ लिख दे" यही आज्ञा है।
हबक्कूक 2:3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पर ईमानदारी से: हबक्कूक इस पूर्ति को देख नहीं पाया। बेबीलोन गिरा, हाँ, पर उसके गिरने में लगभग सत्तर साल लगे, और तब तक यरूशलेम जलकर राख हो चुका था, मंदिर लूटा जा चुका था, बच्चे बंधुआई में मर चुके थे। "उसमें देर न होगी" उस विधवा के लिए क्या अर्थ रखता था जिसका पति दीवार पर मारा गया?
हबक्कूक 2:3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आप जिस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उसमें आपने चुपचाप कौन-सी समय-सीमा परमेश्वर पर थोप रखी है, और उस सीमा के बीत जाने पर आपके भीतर क्या बदला?
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Habakkuk 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

जिस घर को तूने सुरक्षित बनाना चाहा, वही तेरी लज्जा का गवाह बन जाता है। "तूने बहुत सी जातियों को काटकर अपने घर के लिये लज्जा की युक्ति बाँधी है, और अपने ही प्राण का दोषी ठहरा है।" दूसरों की कीमत पर बनाई गई दीवारें अपनों को नहीं बचातीं। सोच, जो तू अपने परिवार के लिये जोड़ रहा है, वह कहीं तेरी ही आत्मा को चोट तो नहीं पहुँचा रहा?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 1

पिता, मैं आज चुपचाप खड़ा हूँ और तेरी ओर देख रहा हूँ। मेरे सवाल अब भी मेरे भीतर हैं, पर मैं इंतज़ार करना सीखना चाहता हूँ। जब तू बोले, मेरा मन सुनने के लिए खुला रहे, और तेरा उत्तर मुझे फिर से भरोसे में थाम ले।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 11

हे प्रभु, जो कुछ मैंने अन्याय से बनाया है, उसकी दीवारें भी मेरे खिलाफ पुकारती हैं। मुझे सुनने का साहस दे। जो गलत है उसे छिपाने के बजाय ठीक करना सिखा, ताकि मेरा घर औरों के आंसुओं पर खड़ा न हो।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 19

धन्यवाद पिता, कि आप काठ या मढ़े हुए पत्थर जैसे नहीं हैं, जिनमें प्राण नहीं होता। आप जीवित हैं, आप बोलते हैं, आप सिखाते हैं। जब मैं पुकारता हूँ, तो चुप्पी नहीं, आपकी आवाज़ मिलती है। आपकी सांस मुझमें है, और यही मेरा भरोसा है।

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