6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 शमूएल 17

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पलिश्तियों की सेना और इस्राएल की सेना दो पहाड़ों पर खड़ी थीं। बीच में एक तराई थी। तभी पलिश्तियों की छावनी से एक विशाल योद्धा निकला। उसका नाम गोलियत था। वह छः हाथ एक बित्ता लंबा था, यानी एक पूरे घर जितना ऊँचा लगता था। उसके सिर पर पीतल का टोप था, शरीर पर भारी कवच, और हाथ में एक ऐसा भाला जिसकी छड़ जुलाहे के डोंगी जैसी मोटी थी।

गोलियत चिल्लाया, "अपने में से एक पुरुष चुनो, कि वह मेरे पास उतर आए।" चालीस दिन तक वह सुबह शाम यही ललकार दोहराता रहा। शाऊल और सारी इस्राएली सेना यह सुनकर डर से काँपने लगी। कोई भी आगे नहीं आया।

उसी समय दाऊद नाम का एक लड़का अपने पिता यिशै की भेड़-बकरियाँ चराता था। एक दिन पिता ने उसे भाइयों के लिए रोटी और भुना अनाज देकर छावनी भेजा। दाऊद वहाँ पहुँचा तो सुना कि गोलियत फिर ललकार रहा है। उसने पूछा, "यह खतनारहित पलिश्ती क्या है कि जीवित परमेश्वर की सेना को ललकारे?" उसके बड़े भाई एलीआब को यह सुनकर गुस्सा आया, "तू यहाँ क्यों आया है?" पर दाऊद का मन नहीं बदला।

बात राजा शाऊल तक पहुँची। दाऊद ने कहा, "तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।" शाऊल ने कहा, "तू तो लड़का ही है।" पर दाऊद ने जवाब दिया, "जब कोई सिंह या भालू मेम्ना उठा ले जाता, मैं उसका पीछा करके उसे मार डालता था। यहोवा जिसने मुझे बचाया है, वह मुझे इससे भी बचाएगा।"

शाऊल ने दाऊद को अपना कवच पहनाया, पर वह उसमें चल नहीं सका। दाऊद ने उसे उतार दिया। उसने बस अपनी लाठी, एक गोफन, और नदी से चुने हुए पाँच चिकने पत्थर लिए।

जब गोलियत ने दाऊद को देखा, वह हँस पड़ा, "क्या मैं कुत्ता हूँ, कि तू लाठी लेकर आता है?" पर दाऊद ने निडर होकर कहा, "तू तलवार लेकर आता है, मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से आता हूँ। आज सारी पृथ्वी जान लेगी कि इस्राएल में एक परमेश्वर है।"

फिर दाऊद दौड़ा, एक पत्थर गोफन में रखा, और गोलियत के माथे पर मारा। पत्थर उसके माथे में घुस गया और वह गिर पड़ा। दाऊद ने उसी की तलवार से उसका सिर काट डाला। यह देखकर पलिश्ती भाग खड़े हुए।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी केवल एक बहादुर लड़के की नहीं है। दाऊद खुद कमजोर था, उसके पास न कवच था, न बड़ी तलवार। पर उसके पास परमेश्वर पर भरोसा था। वह जानता था कि लड़ाई तलवार से नहीं, यहोवा से जीती जाती है। डर बड़ा था, गोलियत सचमुच डरावना था, पर दाऊद का परमेश्वर उससे भी बड़ा था।

सिलसिला

परमेश्वर हमेशा ऐसे ही काम करते हैं। वे छोटे और कमजोर को चुनते हैं ताकि सब देखें कि जीत उनकी अपनी ताकत से नहीं, परमेश्वर से आती है। बहुत बाद में एक और छोटा और कमजोर आया, एक बच्चा जो चरनी में रखा गया। यीशु मसीह भी दुनिया की नजर में कमजोर लगे, पर उन्होंने मृत्यु और पाप को हराया, सबसे बड़े दुश्मन को भी। जैसे दाऊद ने कहा था कि यहोवा तलवार के बिना भी जिता सकते हैं, वैसे ही यीशु ने क्रूस पर अपनी जान देकर सबसे बड़ी जीत पाई।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हारे जीवन में भी कोई गोलियत जैसी बड़ी चीज़ है, कोई डर, कोई मुश्किल काम, कोई ऐसा बच्चा जो तुम्हें तंग करता है। तुम अकेले उतने मजबूत नहीं हो, पर परमेश्वर तुम्हारे साथ हैं। आज किसी ऐसी चीज़ के बारे में सोचो जिससे तुम डरते हो, और उसे परमेश्वर को बता दो, जैसे दाऊद ने भरोसा रखा था।

बात करें

क्या तुम कभी किसी बहुत बड़ी चीज़ से डरे हो? तब तुमने क्या किया?

दाऊद के पास तलवार नहीं थी, फिर भी वह निडर था। उसके पास क्या था जो उसे हिम्मत देता था?

साथ प्रार्थना करें

हे प्रभु परमेश्वर, आप दाऊद के साथ थे जब वह छोटा और डरा हुआ था। हमें भी भरोसा दीजिए कि आप हमारे साथ हैं, चाहे डर कितना भी बड़ा क्यों न लगे। हमें वह हिम्मत दीजिए जो दाऊद के पास थी, हिम्मत जो आप पर भरोसा करने से आती है। यीशु के नाम में, आमीन।

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1 शमूएल 17 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 शमूएल 17 किस विषय में है?
पलिश्तियों की सेना और इस्राएल की सेना दो पहाड़ों पर खड़ी थीं। बीच में एक तराई थी। तभी पलिश्तियों की छावनी से एक विशाल योद्धा निकला। उसका नाम गोलियत था। वह छः हाथ एक बित्ता लंबा था, यानी एक पूरे घर जितना ऊँचा लगता था। उसके सिर पर पीतल का टोप था, शरीर पर भारी कवच, और हाथ में एक ऐसा भाला जिसकी छड़ जुलाहे के डोंगी जैसी मोटी थी।
1 शमूएल 17 क्या कहता है?
बात राजा शाऊल तक पहुँची। दाऊद ने कहा, "तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।" शाऊल ने कहा, "तू तो लड़का ही है।" पर दाऊद ने जवाब दिया, "जब कोई सिंह या भालू मेम्ना उठा ले जाता, मैं उसका पीछा करके उसे मार डालता था। यहोवा जिसने मुझे बचाया है, वह मुझे इससे भी बचाएगा।"
1 शमूएल 17 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर दाऊद दौड़ा, एक पत्थर गोफन में रखा, और गोलियत के माथे पर मारा। पत्थर उसके माथे में घुस गया और वह गिर पड़ा। दाऊद ने उसी की तलवार से उसका सिर काट डाला। यह देखकर पलिश्ती भाग खड़े हुए।
बच्चे 1 शमूएल 17 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुम्हारे जीवन में भी कोई गोलियत जैसी बड़ी चीज़ है, कोई डर, कोई मुश्किल काम, कोई ऐसा बच्चा जो तुम्हें तंग करता है। तुम अकेले उतने मजबूत नहीं हो, पर परमेश्वर तुम्हारे साथ हैं। आज किसी ऐसी चीज़ के बारे में सोचो जिससे तुम डरते हो, और उसे परमेश्वर को बता दो, जैसे दाऊद ने भरोसा रखा था।
1 शमूएल 17 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे प्रभु परमेश्वर, आप दाऊद के साथ थे जब वह छोटा और डरा हुआ था। हमें भी भरोसा दीजिए कि आप हमारे साथ हैं, चाहे डर कितना भी बड़ा क्यों न लगे। हमें वह हिम्मत दीजिए जो दाऊद के पास थी, हिम्मत जो आप पर भरोसा करने से आती है। यीशु के नाम में, आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पलिश्तियों ने अपनी सेनाओं को युद्ध के लिये इकट्ठा किया... और सोको और अजेका के बीच एपेसदम्मीम में डेरे डाले।"

गोलियत का नाम अभी आया भी नहीं, सिर्फ जगहों के नाम हैं। पर ध्यान दे, शत्रु यहूदा की ही ज़मीन पर डेरा डाल रहा है, वादे के देश के भीतर।

तेरी लड़ाई भी शायद ऐसे ही शुरू हुई थी, बिना शोर के। परमेश्वर उस नक्शे को पहले से जानता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

गोलियत ने इस्राएल को यही याद दिलाया, "क्या तुम शाऊल के अधीन नहीं हो?" वह उन्हें परमेश्वर के लोग नहीं, बस एक राजा के दास कहता है। डर की आवाज़ हमेशा यही करती है, तुम्हारी पहचान छोटी कर देती है। आज जो आवाज़ तुमसे कहती है कि तुम बस अपनी कमज़ोरी हो, उससे पूछो, तू मुझे नाम देने वाला कौन होता है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास नन्हे बच्चों (3-5 वर्ष) और किशोरों (13 वर्ष और उससे ऊपर) के लिए अलग संस्करण भी हैं।

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