3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

1 राजाओं 22

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक राजा था। उसका नाम अहाब था। अहाब एक लड़ाई में जाना चाहता था।

उसने बहुत से लोगों को बुलाया। वे कहते थे, "हाँ, जाओ! जीत मिलेगी!" चार सौ आदमी। सब एक जैसा बोलते थे।

पर एक राजा, यहोशापात, वहाँ बैठा था। उसने पूछा, "क्या कोई और नहीं है? कोई जो परमेश्वर की सच्ची बात बताए?"

अहाब ने सिर हिलाया। "एक है। उसका नाम मीकायाह है। पर मुझे वह पसंद नहीं। वह हमेशा बुरी बात कहता है।"

मीकायाह को बुलाया गया। वह चलकर आया।

इसका क्या मतलब है?

सब लोग मीकायाह से कहते थे, "तू भी वही बोल, जो सब बोल रहे हैं।"

पर मीकायाह ने सिर हिलाया। उसने कहा, "जो परमेश्वर कहेंगे, वही मैं कहूँगा।"

फिर मीकायाह ने सच बात कही। उसने कहा, "राजा, तुम लड़ाई में मारे जाओगे। मैंने सारे इस्राएल को भेड़ों की तरह बिखरा हुआ देखा। उनका कोई चरवाहा नहीं।"

राजा को यह सुनना पसंद नहीं आया। उसने गुस्से में मीकायाह को बन्दीगृह में डलवा दिया। रोटी भी कम दी, पानी भी कम दिया।

मीकायाह डरा नहीं। उसने फिर कहा, "सब लोग सुन लो, यही सच है।"

समान सूत्र

मीकायाह अकेला खड़ा रहा। सबने उसके विरुद्ध बात कही। एक आदमी, सिदकिय्याह, उसके गाल पर थप्पड़ भी मारा।

फिर भी मीकायाह ने झूठ नहीं बोला।

बहुत साल बाद, एक और सच्चा व्यक्ति आया। उनका नाम यीशु मसीह है। उन्होंने भी हमेशा सच बोला। लोगों को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने भी यीशु को मारा, और भी ज़्यादा जोर से।

पर यीशु डरे नहीं। परमेश्वर उनके साथ थे। जैसे परमेश्वर मीकायाह के साथ थे।

राजा अहाब लड़ाई में गया। उसने अपना भेष बदल लिया, ताकि कोई उसे पहचान न सके। पर एक तीर, बस ऐसे ही उड़ता हुआ आया। और वह तीर ठीक राजा को जा लगा। शाम को राजा मर गया।

वही हुआ, जो मीकायाह ने कहा था। परमेश्वर की बात हमेशा सच निकलती है।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी तुम्हें भी सच बोलना कठिन लगेगा। शायद दोस्त कुछ और कहें। शायद सब एक जैसा बोलें।

पर तुम मीकायाह जैसे बन सकते हो। धीरे से, पर सच बोलकर।

परमेश्वर तुम्हारी बात सुनते हैं, जब तुम सच बोलते हो। वे तुम्हारे साथ रहते हैं, जैसे वे मीकायाह के साथ रहे।

तुम्हें क्या लगता है, मीकायाह को डर क्यों नहीं लगा?

क्या तुम कभी सच बोलने से डर गए हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, मीकायाह ने हमेशा सच बोला। मुझे भी ऐसा बनाइए। जब मुझे सच बोलना कठिन लगे, तब आप मेरे पास रहिए। आमीन।

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1 राजाओं 22 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 राजाओं 22 किस विषय में है?
एक राजा था। उसका नाम अहाब था। अहाब एक लड़ाई में जाना चाहता था।
1 राजाओं 22 क्या कहता है?
सब लोग मीकायाह से कहते थे, "तू भी वही बोल, जो सब बोल रहे हैं।"
1 राजाओं 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
मीकायाह डरा नहीं। उसने फिर कहा, "सब लोग सुन लो, यही सच है।"
नन्हे बच्चे 1 राजाओं 22 से क्या सीख सकते हैं?
राजा अहाब लड़ाई में गया। उसने अपना भेष बदल लिया, ताकि कोई उसे पहचान न सके। पर एक तीर, बस ऐसे ही उड़ता हुआ आया। और वह तीर ठीक राजा को जा लगा। शाम को राजा मर गया।
1 राजाओं 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, मीकायाह ने हमेशा सच बोला। मुझे भी ऐसा बनाइए। जब मुझे सच बोलना कठिन लगे, तब आप मेरे पास रहिए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 44

यहोशापात अच्छा राजा था, फिर भी एक पंक्ति रह जाती है: "और यहोशापात ने इस्राएल के राजा से मेल किया।" आहाब से मेल, जिसने उसे झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बीच खड़ा किया और युद्ध में लगभग मार डाला। हर मेल परमेश्वर की ओर से नहीं होता। किससे तुमने शांति बनाई है, यह सोचकर कि इससे जीवन आसान हो जाएगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 48

यहोशापात ने तर्शीश जाने के लिये जहाज़ बनवाए, परन्तु वे एस्योनगेबेर में टूट गए।" जहाज़ बन गए थे, समुद्र सामने था, पर यात्रा शुरू ही न हुई। इतिहास बताता है कि यह साझेदारी गलत हाथों से हुई थी। कभी परमेश्वर तेरी योजना तोड़ता है इसलिए नहीं कि वह तुझसे नाराज़ है, बल्कि इसलिए कि वह तुझे उस संगति में दूर जाने नहीं देना चाहता। टूटा जहाज़ भी दया हो सकता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

तीन साल की खामोशी के बाद एक छोटा सा कदम, "तीसरे वर्ष यहूदा का राजा यहोशापात इस्राएल के राजा के पास गया।" बस एक मुलाकात, बस एक दावत। पर यहीं से वह गठबंधन शुरू हुआ जो उसे युद्ध के मैदान में मौत के मुँह तक ले गया। जिनके साथ तू बैठता है, वे धीरे धीरे तय करने लगते हैं कि तू कहाँ खड़ा होगा। आज तेरी मेज़ पर कौन बैठा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

आहाब भेस बदलता है, पर यहोशाफ़ात से कहता है, "तू अपने ही वस्त्र पहने रह।" अपनी जान बचाने के लिए वह अपने साथी को निशाना बना देता है। ठहर कर सोच, तेरे डर ने कब किसी और को खतरे में धकेला? और यह भी याद रख, भेस बदलकर तू परमेश्वर के वचन से नहीं छिप सकता। बिना निशाना साधा हुआ तीर भी उसे ढूँढ़ ही लेता है।

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