एज्रा 4
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
परमेश्वर का घर फिर से बनाना
The Explanation
यरूशलेम में लोग एक घर बना रहे थे। बहुत बड़ा घर। परमेश्वर का घर।
वे खुश थे। हाथों से पत्थर उठाते थे। गाते हुए काम करते थे।
पर कुछ दूसरे लोग भी थे। वे पास आए। बोले, "हमें भी साथ बनाने दो।"
जरुब्बाबेल नाम के आदमी ने सुना। उसने सोचा। फिर बोला, "नहीं। यह घर हम ही बनाएँगे। परमेश्वर ने हमें कहा है।"
ये दूसरे लोग गुस्सा हो गए। बहुत गुस्सा हो गए।
उन्होंने एक चिट्ठी लिखी। राजा के पास भेजी। चिट्ठी में बुरी बातें लिखी थीं। झूठी बातें भी थीं।
राजा ने चिट्ठी पढ़ी। राजा ने कहा, "काम रोक दो!"
सिपाही आए। दौड़ते हुए आए। उन्होंने काम रोक दिया।
हथौड़े नीचे रख दिए गए। पत्थर जहाँ के तहाँ पड़े रह गए।
घर बनना बंद हो गया। बहुत दिनों तक बंद रहा।
What Does This Mean?
लोग दुखी हुए होंगे। बहुत दुखी।
वे चाहते थे परमेश्वर का घर बनाना। पर रुकावट आ गई।
कभी-कभी ऐसा होता है। हम कुछ अच्छा करना चाहते हैं। और कोई रोक देता है।
पर एक बात याद रखो। काम रुक गया था। बंद नहीं हुआ था।
The Common Thread
परमेश्वर का घर बनना रुक गया। पर परमेश्वर कहीं नहीं गए।
वे अपने लोगों के साथ ही रहे। रुकावट में भी। इंतज़ार में भी।
बहुत बाद में एक और घर बना। उस घर में यीशु खुद आए। वे परमेश्वर के पास ले जाने वाला सच्चा रास्ता हैं।
रुकावटें आती हैं। पर परमेश्वर का काम कभी हार नहीं मानता।
For You
कभी तुम कुछ अच्छा करना चाहते हो। और कोई कहता है, "नहीं, रुको।"
तुम्हारा मन दुखी होता है। है ना?
जरुब्बाबेल भी दुखी हुआ होगा। पर उसने परमेश्वर को नहीं भुलाया।
तुम भी याद रखो, परमेश्वर तुम्हें देख रहे हैं। जब रुकना पड़े, तब भी।
Talk About It
जब कोई तुमसे कहे "नहीं, रुको", तब तुम्हें कैसा लगता है?
जरुब्बाबेल ने उन लोगों को क्या जवाब दिया था?
Praying Together
प्रभु, कभी-कभी काम रुक जाता है। मुझे दुख होता है।
पर आप हमेशा मेरे पास रहते हैं। धन्यवाद।
आमीन।
एज्रा 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एज्रा 4 किस विषय में है?
एज्रा 4 क्या कहता है?
एज्रा 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे एज्रा 4 से क्या सीख सकते हैं?
एज्रा 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
राजा के पत्र की आख़िरी पंक्ति देखिए: "सावधान रहो, इस बात में ढिलाई न करो।" काम रोकने में कितनी फुर्ती, कितनी तत्परता। और परमेश्वर का भवन? वह सालों तक अधूरा खड़ा रहा।
विरोध कभी सुस्त नहीं होता। पर जो काम परमेश्वर ने तुम्हें सौंपा है, उसे तुमने कब से "बाद में" कहकर टाल रखा है?
तब यरूशलेम में परमेश्वर के भवन का काम रुक गया, और वह फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।" सोलह साल। नींव पड़ी रही, दीवारें अधूरी रहीं, और लोग हर सुबह उस अधूरे काम को देखते रहे। तेरे जीवन में भी शायद कुछ ऐसा ही अधूरा पड़ा है। पर ध्यान दे, यह आयत "रुक गया" पर खत्म नहीं होती, वह एक तारीख बताती है। परमेश्वर ने रुकने का समय भी तय कर रखा था, और फिर से शुरू होने का भी।
जरुब्बाबेल और येशुअ ने मदद ठुकरा दी: "हमारे परमेश्वर के लिये भवन बनाना तुम्हारा नहीं हमारा ही काम है।" कितना कठिन रहा होगा, जब काम बड़ा था और हाथ कम। पर हर बढ़ा हुआ हाथ परमेश्वर की ओर से नहीं होता। क्या तुम्हारे जीवन में भी कोई ऐसी मदद है, जो काम तो आसान करती है, पर नींव कमज़ोर कर देती है?
पत्र में विरोधियों ने पहले अपना परिचय बड़े नामों से दिया, "महान और प्रतिष्ठित ओस्नप्पर" जिसने उन्हें लाकर सामरिया में बसाया था। ध्यान दे, ये लोग खुद उजाड़े गए और किसी और की मर्जी से बसाए गए थे। फिर भी अब दूसरों के बसने का विरोध कर रहे हैं। दर्द इंसान को कोमल भी बनाता है और कठोर भी। तेरे साथ जो हुआ, उसने तुझे किस ओर मोड़ा?
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