लूका 6
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक छोटा पहाड़ था। उस पर यीशु खड़े थे। उनके पास बहुत सारे लोग आए थे। बीमार लोग, दुखी लोग, सब आए थे। यीशु ने सबको छुआ। और सब अच्छे हो गए।
फिर यीशु अपने चेलों की तरफ देखते हैं। उनकी आँखें प्यार से भरी हैं। वे धीरे से कहते हैं, "धन्य हो तुम।"
इससे पहले, एक और दिन हुआ था। यीशु एक मनुष्य से मिले। उसका हाथ सूखा हुआ था। बेचारा, वह अपना हाथ हिला नहीं पाता था। कुछ लोग वहाँ खड़े थे, वे गुस्से से देख रहे थे। यीशु ने उस मनुष्य से कहा, "अपना हाथ बढ़ा।" मनुष्य ने हाथ बढ़ाया। और देखो, उसका हाथ फिर अच्छा हो गया। पूरा अच्छा।
इसका क्या अर्थ है?
यीशु भला करना चाहते हैं। हमेशा। चाहे सब्त का दिन हो या कोई और दिन। चाहे लोग गुस्सा हों या खुश। यीशु किसी को भी ठीक करने से नहीं डरते।
और फिर यीशु पहाड़ पर गए। अकेले। रात हुई, बहुत अंधेरी रात। तारे चमक रहे थे। यीशु वहाँ परमेश्वर से बात करते रहे। पूरी रात। सुबह जब उजाला हुआ, यीशु ने बारह दोस्त चुने। शमौन, अन्द्रियास, याकूब, यूहन्ना, और बाकी सब। ये उनके खास साथी बने।
सामान्य सूत्र
यीशु ने कहा, "जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो।" ये बात सुनने में आसान है, पर करने में बड़ी कठिन।
इसलिए यीशु एक और बात बताते हैं। एक घर की बात। एक मनुष्य ने अपना घर चट्टान पर बनाया। मजबूत चट्टान पर। बारिश आई, बहुत तेज बारिश। पानी घर से टकराया। पर घर नहीं गिरा। क्योंकि वह चट्टान पर खड़ा था।
यीशु मसीह वही चट्टान हैं। जो उनकी बात सुनता है और मानता है, वह उस मनुष्य जैसा है। उसका घर, उसका दिल, मजबूत रहता है।
तुम्हारे लिए
तुम भी किसी से प्यार कर सकते हो, भले वह तुमसे प्यार न करे। तुम किसी को माफ कर सकते हो। तुम किसी को रोटी दे सकते हो, अगर वह भूखा हो। यीशु की बात सुनना, और उसे मानना, यही चट्टान पर घर बनाना है।
बात करें
तुम्हें क्या लगता है, उस मनुष्य का सूखा हाथ ठीक होने पर कैसा लगा होगा?
क्या तुम किसी ऐसे को माफ कर सकते हो, जिसने तुम्हें दुख दिया?
साथ में प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर, यीशु सबको अच्छा करते हैं। मुझे भी प्यार करना सिखाइए। मेरा दिल चट्टान जैसा मजबूत बनाइए। आमीन।
लूका 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
लूका 6 किस विषय में है?
लूका 6 क्या कहता है?
लूका 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे लूका 6 से क्या सीख सकते हैं?
लूका 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
क्षमा करो, तो तुम्हारी भी क्षमा की जाएगी।" ध्यान दे, यीशु पहले दो बातें रोकने को कहते हैं, दोष लगाना और अपराधी ठहराना। पर तीसरी बात करने को कहते हैं। चुप रह जाना काफी नहीं है। जिस व्यक्ति का नाम अभी तेरे मन में आया, उसके बारे में तू कुछ न कहे, यह तो शुरुआत है। असली काम है उसे छोड़ देना, जैसे परमेश्वर ने तुझे छोड़ दिया।
यीशु यह नहीं कहते कि भाई की आँख का तिनका पड़ा रहने दे। वह कहते हैं, "पहले अपनी आँख से लट्ठा निकाल ले, तब जो तिनका तेरे भाई की आँख में है, भली भाँति देखकर निकाल सकेगा।" सुधारना मना नहीं है, अंधे होकर सुधारना मना है। आँख बहुत कोमल चीज़ है। जिस हाथ ने अपनी पीड़ा पहचानी हो, वही किसी और की आँख छूने के योग्य है।
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