1 यूहन्ना 5:3
पाठ
यूहन्ना एक ऐसा वाक्य लिखते हैं जो पहली सदी के कान में लगभग उकसाने वाला था: परमेश्वर से प्रेम करने का अर्थ भावना नहीं, आज्ञापालन है। "क्योंकि परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उसकी आज्ञाओं को मानें; और उसकी आज्ञाएँ बोझदायक नहीं।" प्रेम को वे भीतर की गरमाहट से नहीं, बल्कि जीवन की दिशा से नापते हैं। और फिर, जैसे किसी थके हुए विश्वासी की आपत्ति को पहले से भाँपकर, वे तुरंत जोड़ देते हैं कि ये आज्ञाएँ कंधे तोड़ने वाला बोझ नहीं हैं। पिछले पद में उन्होंने कहा था कि परमेश्वर से प्रेम और उसकी आज्ञाओं का पालन ही यह पहचान देता है कि हम उसकी सन्तानों से प्रेम रखते हैं। यहाँ वे उसी बात को उलटकर रख देते हैं: जो प्रेम आज्ञा तक नहीं पहुँचता, वह अभी प्रेम बना ही नहीं।
मूल बात
जिन घरों में यह पत्र पढ़ा गया, वहाँ "बोझ" शब्द केवल रूपक नहीं था। इफिसुस जैसे शहरों में मज़दूर पीठ पर बोरे ढोते थे, दास मालिक के आदेश गिनते थे, और मंदिरों में देवताओं को खुश रखने के लिए बलि पर बलि चढ़ाई जाती थी, कभी न खत्म होने वाला हिसाब। धर्म का मतलब था: देवता नाराज़ न हो जाएँ, इसलिए और चढ़ाओ। इस माहौल में यूहन्ना कहते हैं कि परमेश्वर की आज्ञाएँ वैसा बोझ नहीं हैं। क्यों नहीं? क्योंकि वे पद 1 से आगे बढ़ रहे हैं: जो परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, उसके भीतर नया जीवन काम कर रहा है। आज्ञा किसी नाराज़ मालिक की माँग नहीं, बल्कि पिता के परिवार का स्वाभाविक तरीका है। कृपा पहले आती है, आज्ञापालन उसका फल है, कीमत नहीं।
कथा का सूत्र
परमेश्वर ने आज्ञाएँ कभी लोगों को गुलाम बनाने के लिए नहीं दीं। सीनै पर्वत पर व्यवस्था तब मिली जब इस्राएल मिस्र से निकल चुका था, गुलामी के बाद, छुड़ाए जाने के बाद। पहले छुटकारा, फिर आज्ञा। व्यवस्थाविवरण में मूसा इस्राएल से कहते हैं कि यह आज्ञा उनके लिए बहुत कठिन या दूर की चीज़ नहीं, वह उनके मुँह और मन में है। यूहन्ना उसी पुरानी धुन को मसीह में दोहराते हैं। और यीशु ने खुद अपने जुए को हल्का कहा था, ठीक उन धर्मगुरुओं के सामने जो लोगों की पीठ पर नियमों की गठरियाँ लाद देते थे। यही सूत्र है: परमेश्वर पहले जन्म देते हैं, फिर चलना सिखाते हैं। पद 4 इसे पूरा करता है, नया जन्म संसार पर जय लाता है, इसलिए आज्ञापालन हार का नहीं, जीत का रास्ता है।
दर्पण
आपको पता है कि आपकी थकान कहाँ से आती है। रविवार की सेवा, समूह की तैयारी, वे रिश्तेदार जिनसे बात करना बोझ लगता है, वह पैसा जो देना चाहिए था पर नहीं दिया, वह माफ़ी जो गले में अटकी है। और भीतर एक चुपचाप शिकायत उठती है: मसीही होना इतना भारी क्यों है? यूहन्ना उस शिकायत को खारिज नहीं करते, वे उसकी जड़ पर हाथ रखते हैं। शायद बोझ आज्ञा का नहीं, बल्कि उस कोशिश का है जिससे आप परमेश्वर की स्वीकृति कमाना चाहते हैं। जो बेटा घर में है, वह घर के काम करता है; जो नौकर साबित करना चाहता है, वह हाँफता है। आज एक कागज़ पर वह एक आज्ञा लिखिए जिसे आप महीनों से टाल रहे हैं, उसके नीचे लिखिए "बोझदायक नहीं", और ज़ोर से परमेश्वर से कहिए कि आप उसे इसी सप्ताह पूरा करेंगे।
संदर्भ
पहली सदी का अंत, एशिया माइनर के शहर। यह पत्र किसी भव्य गिरजे में नहीं, बल्कि किसी के आँगन या ऊपरी कमरे में पढ़ा गया, तेल के दीये की गंध, गोद में बच्चे, दिन भर की मज़दूरी के बाद इकट्ठे हुए लोग। कुछ दास थे, कुछ कारीगर, कुछ ने अपने संघ के भोज छोड़ दिए थे क्योंकि वहाँ मूर्तियों को चढ़ाया माँस परोसा जाता था, और इसका मतलब था ग्राहक खोना। हाल ही में समुदाय टूटा था, कुछ शिक्षक निकल गए थे जो कहते थे कि असली आत्मिकता ऊँचे ज्ञान में है, शरीर से किए गए कामों में नहीं। ऐसे लोगों के सामने यूहन्ना नाप-तौल का सीधा पैमाना रखते हैं: प्रेम दिखता है, और वह आज्ञापालन जैसा दिखता है।
मुख्य पात्र
इस पद में केंद्र में परमेश्वर हैं, और वे पिता के रूप में सामने आते हैं, मालिक के रूप में नहीं। पद 1 में वे उत्पन्न करने वाले हैं; पद 3 में वे आज्ञा देने वाले हैं। यही दो बातें साथ रखनी हैं। जो देवता केवल आज्ञा देता है, वह अपने भक्तों को निचोड़ता है; जो पिता पहले जीवन देता है, वह अपने बच्चों से अपेक्षा रखने का हक भी रखता है, और वह अपेक्षा उन्हें कुचलती नहीं। यूनानी शब्द जो यहाँ है, बारिस, उस भार के लिए है जो दबा देता है, कमर तोड़ देता है। परमेश्वर की आज्ञाओं में वज़न है, पर वह कुचलने वाला वज़न नहीं। यह परमेश्वर अपने बच्चों को उतना ही देता है जितना उन्होंने उससे पाया है।
प्रश्न
फिर भी ईमानदारी से: कई बार आज्ञापालन भारी ही लगता है। जिसने पति की हिंसा सही है और उससे क्षमा की बात कही जाती है, जो अकेलेपन में शुद्धता चुनता है, जो नौकरी खोकर सच बोलता है, उसके लिए यूहन्ना का वाक्य किसी सुखी आदमी की सलाह जैसा लग सकता है। ध्यान दीजिए, यूहन्ना यह नहीं कहते कि आज्ञाएँ हल्की हैं, वे कहते हैं कि वे कुचलने वाली नहीं हैं। भार और कुचलन में फ़र्क है। जो वह वादा करते हैं वह दर्द से छुटकारा नहीं, बल्कि पद 4 की जीत है: भीतर एक नया जन्म काम कर रहा है जो संसार से बड़ा है। कभी-कभी वह जीत हमें उसी क्षण महसूस नहीं होती, और उस खाली जगह को भर देना ईमानदारी नहीं होगी।
चिंतन
आपके जीवन में कौन सी आज्ञा इस समय सबसे भारी लगती है, और क्या वह भार आज्ञा का है या कुछ साबित करने की कोशिश का?
अगर कोई आपके पिछले महीने को देखे, तो उसे किन कामों से पता चलेगा कि आप परमेश्वर से प्रेम रखते हैं?
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1 John 5:3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
1 यूहन्ना 5:3 का क्या अर्थ है?
1 यूहन्ना 5:3 किस विषय में है?
1 यूहन्ना 5:3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
1 यूहन्ना 5:3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
1 यूहन्ना 5:3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
1 John 5 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, दुनिया की टूट और अंधेरा कभी कभी बहुत भारी लगता है। फिर भी मुझे याद रहे कि मैं तेरा हूँ, तेरे हाथ में सुरक्षित। जो बुराई चारों ओर दिखती है, वह मेरी पहचान नहीं बदल सकती। मुझे थामे रख, और मेरे भीतर आशा जगाए रख।
धन्यवाद पिता, कि आपके सामने हमें यह हियाव होता है कि जब हम आपकी इच्छा के अनुसार कुछ माँगते हैं, आप हमारी सुनते हैं। मेरी टूटी फूटी प्रार्थनाएँ भी आपके कानों तक पहुँचती हैं, यह जानकर मन शांत हो जाता है। धन्यवाद कि आप कभी मुँह नहीं मोड़ते।
जब हम मनुष्यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्वर की गवाही तो उससे बढ़कर है।"
सोचो, डॉक्टर की रिपोर्ट पर तुम भरोसा कर लेते हो, बैंक के कागज़ पर, किसी दोस्त की बात पर। बिना जाँचे मान लेते हो। फिर परमेश्वर जब अपने पुत्र के विषय में गवाही देता है, वहीं मन अटक जाता है, वहीं सबूत माँगने लगता है।
आज खुद से पूछो: किसकी बात मुझे सबसे भारी लगती है? अगर परमेश्वर की गवाही सबसे बड़ी है, तो मेरा डर उससे बड़ा क्यों बैठा है?
धन्यवाद, पिता, कि जब मैं अपने भाई को पाप करते देखता हूँ, तो मैं हाथ बाँधकर खड़ा नहीं रहता, बल्कि प्रार्थना कर सकता हूँ, और तू उसे जीवन देता है। मेरी टूटी-फूटी विनती को तू सुनता है और गिरे हुए को उठाता है, इसके लिए मेरा मन तेरा आभारी है।
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