आमोस 9:13
पाठ
आमोस की भविष्यवाणी का अंत एक ऐसे चित्र पर पहुँचता है जो खेती की सामान्य लय को तोड़ देता है: "देखो, ऐसे दिन आते हैं, कि हल जोतनेवाला लवनेवाले को और दाख रौंदनेवाला बीज बोनेवाले को जा लेगा।" यानी फसल काटने का काम अभी खत्म नहीं हुआ कि अगली बुवाई का समय आ गया; अंगूर कुचलने वाला अभी हौद में है और बोने वाला पहले से खेत में खड़ा है। और फिर वह वाक्य जो हर किसान के सपने से भी बड़ा है: "पहाड़ों से नया दाखमधु टपकने लगेगा, और सब पहाड़ियों से बह निकलेगा।" जो ढलानें सूखी और पथरीली थीं, वे बहने लगेंगी।
मर्म
यह पद इस्राएल के लिए इनाम नहीं है, यह परमेश्वर के स्वभाव का प्रकाशन है। नौ अध्यायों तक आमोस ने न्याय की तलवार भाँजी है; अभी दो पद पहले तक परमेश्वर कह रहे थे कि वे "भलाई करने के लिये नहीं, बुराई ही करने के लिये दृष्टि" करेंगे। और अब वही मुँह बहुतायत की बात करता है। ध्यान दें: बदलाव इस्राएल के सुधरने से नहीं आया। पाठ में कहीं पश्चाताप का वर्णन नहीं है। जो आया है वह अनुग्रह है, बिना शर्त, बिना कारण। परमेश्वर की अंतिम बात न्याय नहीं, पुनर्स्थापना है, और यह पुनर्स्थापना कंजूस नहीं है। वह उतना ही देती है जितना ज़मीन सम्भाल सके, और फिर उससे भी ज़्यादा।
सूत्र
दाऊद की गिरी हुई झोपड़ी का खड़ा किया जाना (पद 11) और ये बहती पहाड़ियाँ एक ही वचन के दो हिस्से हैं: राजा लौटता है, और उसके साथ भूमि जी उठती है। प्रेरितों 15 में याकूब ठीक इसी अंश को उठाकर कहते हैं कि मसीह में यह शुरू हो चुका है, और इसीलिए अन्यजातियाँ भीतर आ रही हैं। एक और गूँज सुनिए: यीशु का पहला चिन्ह काना में पानी को दाखमधु बनाना था, और वह भी ज़रूरत से कई गुना ज़्यादा। आमोस का चित्र किसी दूर के स्वर्ग का नहीं, बल्कि उस राज्य का है जो मसीह के साथ शुरू हुआ और जिसकी पूर्णता में अभी सृष्टि कराह रही है।
दर्पण
आपको सूखे की आदत पड़ गई है, यही समस्या है। आप हिसाब लगाकर जीते हैं: इतनी तनख़्वाह में इतना ही चलेगा, इस रिश्ते में इतना ही सुधार सम्भव है, अपने बच्चे से इतनी ही उम्मीद रखनी चाहिए, अपनी प्रार्थना से इतना ही। और आपको लगता है यह विवेक है। आमोस का यह पद उस विवेक को नंगा कर देता है और पूछता है कि क्या आपका छोटा हिसाब वाकई नम्रता है, या यह डर है कि अगर आपने बड़ी आशा रखी और वह टूटी, तो आप सम्भाल नहीं पाएँगे। पहाड़ियों से बहते दाखमधु का यह वचन आपके संकोच को चुनौती देता है। परमेश्वर मापकर नहीं देते; आप मापकर लेते हैं, और फिर शिकायत करते हैं कि थोड़ा मिला।
मुख्य पात्र
यहाँ बोलनेवाले परमेश्वर उसी अध्याय के परमेश्वर हैं जो अधोलोक और समुद्र की थाह तक पीछा करते हैं। यह वही तीव्रता है, बस दिशा बदल गई है। जो हाथ भागनेवाले को पकड़ने के लिए बढ़ा था, वही हाथ अब उजड़े नगरों को सुधारता है। इससे परमेश्वर के बारे में एक असुविधाजनक सच्चाई खुलती है: वे उदासीन नहीं हैं, न न्याय में न दया में। हमें ऐसा परमेश्वर चाहिए जो थोड़ा नाराज़ हो और थोड़ा प्रेम करे, ताकि हम आराम से रह सकें। आमोस का परमेश्वर दोनों में पूरे हैं। और जो अंत में टिकता है, वह उनकी करुणा है, क्योंकि पद 8 में ही उन्होंने अपने आप को बाँध लिया था: "मैं पूरी रीति से याकूब के घराने को नाश न करूँगा।"
एक बारीकी
"जा लेगा" पर रुकिए। हिब्रू में यह वही क्रिया है जो शाप और आशीष के पीछे दौड़ने के लिए इस्तेमाल होती है: पकड़ लेना, आ धमकना। यहाँ हल जोतनेवाला लवनेवाले को पकड़ लेता है। किसान के कैलेंडर में इनके बीच महीनों का अंतर है: कटाई वसंत में, बुवाई पतझड़ में, और बीच में लम्बा सूखा इंतज़ार। आमोस कहते हैं कि वह इंतज़ार ढह जाएगा। समय का वह खाली हिस्सा, जिसमें आप हमेशा घबराते हैं कि क्या पिछली फसल अगली तक चलेगी, वह मिट जाएगा। यह केवल अधिक अनाज का वादा नहीं है, यह चिंता के मौसम के अंत का वादा है। आपके जीवन का वह हिस्सा जहाँ आप बस टिके रहते हैं, वह भी भर दिया जाएगा।
सवाल
तो फिर आज क्यों नहीं? आमोस ने यह वादा किया, इस्राएल बँधुआई में गया, लौटा, और पहाड़ियाँ कभी दाखमधु से नहीं बहीं। जो किसान अकाल में मरा, उसके लिए यह पद क्या था? इसे झट से "आत्मिक अर्थ" कहकर टाल देना बेईमानी होगी, क्योंकि पाठ मिट्टी, अंगूर और बाड़ियों की बात करता है, रूपक की नहीं। सच यह है कि हम दो समयों के बीच खड़े हैं: वचन दिया जा चुका, आरम्भ मसीह में हो चुका, पूर्णता बाकी है। इसका मतलब है कि विश्वास का बड़ा हिस्सा इंतज़ार है, और इंतज़ार में दर्द होता है। आमोस हमें यह नहीं बताते कि कब। वे केवल यह बताते हैं कि कहनेवाला कौन है, और यही उन्हें काफ़ी लगा।
चिंतन
आपने अपने जीवन के किस क्षेत्र में चुपचाप यह तय कर लिया है कि यहाँ ज़्यादा कुछ सम्भव नहीं, और यह पद उस फ़ैसले पर क्या कहता है?
जो वादा आपके जीवनकाल में पूरा होता न दिखे, उस पर भरोसा रखना आपके लिए व्यावहारिक रूप से कैसा दिखेगा?
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Amos 9:13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
आमोस 9:13 का क्या अर्थ है?
आमोस 9:13 किस विषय में है?
आमोस 9:13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आमोस 9:13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
आमोस 9:13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Amos 9 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
मेरी प्रजा में के सब पापी जो कहते हैं, 'वह विपत्ति हम तक न पहुँचेगी, न हम पर आ पड़ेगी,' वे तलवार से मारे जाएँगे।" ध्यान दे, यहाँ इनका पाप गिना नहीं गया, बस उनका वाक्य दोहराया गया। यही सबसे खतरनाक बात थी, वह लापरवाह भरोसा कि "मुझ पर कुछ नहीं आएगा।"
चेतावनी सुनकर भी हम अकसर मन में यही कहते हैं, यह मेरे लिए नहीं है। आज परमेश्वर जो तुझसे कह रहा है, उसे किसी और के नाम मत कर।
धन्यवाद, प्रभु, कि कोई गहराई आपकी पहुँच से बाहर नहीं। जब मन अधोलोक जैसे अँधेरे में उतर जाता है, तब भी आपका हाथ मुझे खोज निकालता है। आपसे छिपना असंभव है, और यही मेरी सबसे बड़ी शांति है, क्योंकि जो हाथ मुझे ढूँढ़ता है, वही मुझे थामे भी रखता है।
हे प्रभु, आकाश में तेरा भवन है और धरती पर तेरा हाथ टिका है। समुद्र का पानी भी तेरी आवाज़ सुनता है। मेरा छोटा सा जीवन तेरे इतने बड़े होने में सुरक्षित है। जब डर मुझे घेरता है, मुझे याद दिला कि सब कुछ तेरे बस में है।
पिता, धन्यवाद कि तू सचमुच सेनाओं का यहोवा है, जिसके छूने से पृथ्वी गल जाती है। जो हाथ पहाड़ों और नदियों को हिला देता है, वही मेरे छोटे से जीवन को थामे हुए है। धन्यवाद कि मेरी चिंताएँ तेरी सामर्थ्य के आगे कुछ भी नहीं, और मैं तेरे हाथों में सुरक्षित हूँ।
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