गलातियों 5:21
पाठ
पौलुस "शरीर के कामों" की सूची का अंतिम हिस्सा गिनाता है: डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और साफ़ जोड़ता है कि सूची पूरी नहीं है, "इनके जैसे और-और काम" भी हैं। फिर वह रुककर एक चेतावनी देता है जो वह गलातिया की कलीसिया को पहले भी दे चुका था, और अब लिखकर दोहरा रहा है, मानो कोई कहे: यह बात मैंने तुम्हारे सामने पहले कही थी, इसे भूल मत जाना। चेतावनी यह है कि जो लोग ऐसे काम करते रहते हैं, वे परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। यह धमकी नहीं, चेतावनी है; और वह उस पत्री में आती है जिसका पूरा ज़ोर इसी पर है कि उद्धार व्यवस्था के कामों से नहीं, अनुग्रह से मिलता है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि पौलुस "मज़दूरी" शब्द नहीं चुनता, वह "वारिस" कहता है। विरासत कमाई नहीं जाती, वह परिवार में होने से मिलती है। इसी पत्री में पौलुस पहले ही समझा चुका है कि मसीह में विश्वास करनेवाले अब्राहम की प्रतिज्ञा के वारिस हैं, और वह वारिसी पुत्रत्व पर टिकी है, न कि प्रदर्शन पर। तो यह पद अनुग्रह के दरवाज़े के पीछे कामों का पिछला दरवाज़ा नहीं खोलता। पौलुस यह कह रहा है कि जिस जीवन की दिशा लगातार शरीर की ओर मुड़ी हुई है, वह असल में यह दिखा रहा है कि उस घर से उसका कोई रिश्ता ही नहीं जिसकी विरासत वह चाहता है। हिन्दी का "करनेवाले" यहाँ आदत की ओर इशारा करता है, किसी एक गिरावट की ओर नहीं। सवाल यह नहीं कि आप कितनी बार गिरे, सवाल यह है कि आप किस दिशा में चल रहे हैं।
जोड़नेवाला सूत्र
यह पद अकेला खड़ा होता तो कुचल देता। पर तीन पद आगे पौलुस लिखता है: "जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।" यही जोड़ है। जिस शरीर की सूची पद 19 से 21 तक फैली है, उसका अंत क्रूस पर हो चुका है, और किसी अनुशासन-कार्यक्रम पर नहीं। परमेश्वर के राज्य का वारिस बनने का रास्ता एक ही है: उस पुत्र के साथ जुड़ जाना जो स्वयं सच्चा वारिस है। अब्राहम को दी गई प्रतिज्ञा मसीह में पूरी होती है, और जो उसके हैं वे उसी विरासत में शामिल हो जाते हैं। इसलिए पद 21 की चेतावनी अनुग्रह का उलटा नहीं, अनुग्रह का ही दूसरा पहलू है: जो क्रूस से जुड़ा है, उसके भीतर आत्मा काम करती है, और आत्मा वही फल उगाती है जो पद 22 में गिनाया गया है।
आईना
शरीर के कामों की इस सूची का आख़िरी हिस्सा बहुत घरेलू है। डाह वह चीज़ है जो आपके सहकर्मी की तरक्की की ख़बर सुनते ही सीने में उठती है, और आप मुँह से बधाई देते हैं जबकि भीतर कुछ खट्टा हो जाता है। मतवालापन हमेशा शराब का नाम नहीं लेता; यह वह हर आदत है जिसे हम सुन्न होने के लिये इस्तेमाल करते हैं, फ़ोन की स्क्रीन से लेकर काम की भागदौड़ तक। लीलाक्रीड़ा यानी वह बेलगाम जीवन जिसमें कोई सीमा हमें रोकती नहीं। पौलुस इन्हें छोटे पाप नहीं कहता, वह इन्हें दिशा कहता है। और डाह विशेष रूप से कलीसिया की बीमारी है, इसीलिए वह पद 26 में उसे फिर उठाता है। आज इतना कीजिए: जिस एक व्यक्ति से आपको सबसे ज़्यादा डाह होती है, उसका नाम कागज़ पर लिखिए और ज़ोर से प्रार्थना कीजिए कि परमेश्वर उसे उस चीज़ में और आशीष दें जिसमें आपको जलन होती है।
कठिन सवाल
पौलुस कोई पैमाना नहीं देता। वह नहीं बताता कि कितनी बार गिरना "करनेवाला" बना देता है। यही इस पद की असली बेचैनी है: एक संवेदनशील विश्वासी इसे पढ़कर अपने आप को खोदने लगता है, और एक लापरवाह आदमी इसे पढ़कर कहता है कि मैं तो बस कमज़ोर हूँ। पौलुस दोनों को जवाब नहीं देता, क्योंकि वह आत्म-जाँच का औज़ार नहीं, चेतावनी दे रहा है। पर ध्यान दीजिए कि वह जिन्हें यह लिख रहा है उन्हें "हे भाइयों" कहकर बुलाता है। चेतावनी परिवार के भीतर दी जा रही है, अदालत में नहीं। इससे डर पूरी तरह नहीं मिटता, और शायद मिटना भी नहीं चाहिए। कुछ चेतावनियाँ इसलिए दी जाती हैं कि वे हमें बेचैन रखें, ताकि हम मसीह से चिपके रहें।
पहले सुननेवाले
गलातिया की कलीसियाएँ ज़्यादातर गैर-यहूदी लोगों से बनी थीं, जो कुछ ही समय पहले मंदिरों की दुनिया से निकले थे, जहाँ पीना, उत्सव और बेलगाम दावतें धर्म का ही हिस्सा थीं। पौलुस उनके पुराने जीवन का नक्शा उनके सामने रख रहा है, और वे उसे तुरंत पहचानते हैं। "वारिस" शब्द उनके कानों में कानूनी वज़न रखता था: उस समाज में दास और पुत्र एक ही घर में रहते थे, पर विरासत केवल पुत्र की थी। और वे यह भी याद कर रहे थे कि पौलुस यह बात उनके बीच बोलकर पहले भी कह चुका था। जो लोग अब उन्हें खतने की ओर खींच रहे थे, वे पवित्रता का वादा कर रहे थे। पौलुस कहता है: पवित्रता व्यवस्था से नहीं, आत्मा से आती है।
मुख्य पात्र
इस पद में पौलुस की आवाज़ साफ़ सुनाई देती है, और वह आवाज़ दो सुरों में बोलती है। यही आदमी पद 12 में गुस्से में कठोर बात कहता है, और पद 10 में कहता है कि मुझे तुम पर भरोसा है। वह अनुग्रह का सबसे ज़िद्दी रक्षक है और वही सबसे कड़ी चेतावनी देनेवाला भी। यह विरोधाभास नहीं; यह चरवाहे का दिल है। जो व्यक्ति सच में जानता है कि विरासत मुफ़्त है, वही सबसे ज़्यादा घबराता है जब कोई उस विरासत के रास्ते से भटकने लगता है। पौलुस डराने के लिये नहीं दोहराता, वह याद दिलाने के लिये दोहराता है, जैसे कोई पिता बार-बार वही बात कहे क्योंकि उसे बच्चे की चिंता है। और इसमें हमें उस परमेश्वर की झलक मिलती है जिसकी चेतावनियाँ उनके प्रेम से अलग नहीं होतीं।
मनन के लिये
आपके जीवन की दिशा इस समय किस ओर मुड़ी हुई है, और आप यह किस आधार पर कह रहे हैं: अपनी भावनाओं के आधार पर या उस फल के आधार पर जो दूसरे आपमें देखते हैं?
अगर विरासत कमाई नहीं जाती, तो पौलुस की यह चेतावनी आपको किस चीज़ से पकड़कर रहने के लिये कहती है?
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Galatians 5:21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
गलातियों 5:21 का क्या अर्थ है?
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गलातियों 5:21 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
गलातियों 5:21 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
गलातियों 5:21 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Galatians 5 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आपने शरीर के कामों को नाम लेकर साफ दिखाया, मूर्तिपूजा, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध और फूट। धन्यवाद कि आपने हमें इनसे छुड़ाया और अपने आत्मा से भर दिया, ताकि हम क्षमा करना और मेल में रहना सीखें।
पिता, मुझे बचाने वाला तेरा क्रूस ही है, मेरी कोई कोशिश नहीं। जब लोगों को खुश करने के लिए मैं सच को हल्का करना चाहूँ, तो मुझे रोक लेना। तेरी कृपा पर टिके रहने की हिम्मत दे, चाहे इसकी कीमत चुकानी पड़े।
पिता, मेरे भीतर वह फल पैदा कर जो मेरी कोशिशों से नहीं, तेरे आत्मा से आता है। जहाँ मैं चिड़चिड़ा हूँ, वहाँ धीरज दे; जहाँ कठोर हूँ, वहाँ कोमलता। मुझे प्रेम, आनंद और शांति में बढ़ने दे, थोड़ा-थोड़ा, हर दिन।
पर यदि तुम एक दूसरे को दाँत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।" पौलुस ने जंगली जानवरों की भाषा चुनी, क्योंकि कलीसिया में बहस इतनी बढ़ गई थी। ध्यान दे, वह यह नहीं कहता कि तुम दूसरे को नष्ट कर दोगे, बल्कि दोनों मिटेंगे। जिस बात को लेकर तू आज किसी भाई से लड़ रहा है, क्या वह इस कीमत के लायक है?
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