बाइबल व्याख्या

उत्पत्ति 1:21

बाइबल

पाठ

पाँचवें दिन परमेश्वर समुद्र और आकाश को जीवन से भर देते हैं। पहले वे बोलते हैं, फिर वे बनाते हैं: जाति-जाति के बड़े-बड़े जल-जन्तु, पानी में कुलबुलाते असंख्य जीव, और हर प्रकार के उड़नेवाले पक्षी। और फिर वही वाक्य आता है जो इस अध्याय में बार-बार लौटता है, मानो कोई अपनी बनाई चीज़ को हाथ में उठाकर धूप में देख रहा हो: "और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।" ध्यान दीजिए, यहाँ पहली बार "सृष्टि की" क्रिया लौटती है, वही शब्द जो पद 1 में आकाश और पृथ्वी के लिए इस्तेमाल हुआ था। जीवन कोई मामूली विस्तार नहीं है; यह एक नई शुरुआत है।

मूल बात

समुद्र प्राचीन दुनिया में डर का नाम था, और उसमें बसनेवाले विशालकाय जन्तु उस डर के चेहरे थे। इस्राएल के पड़ोसी देशों की कहानियों में इन्हीं जल-दानवों से देवता लड़ते थे, हारते-जीतते थे। उत्पत्ति यहाँ जानबूझकर उन्हें नाम देकर एक पंक्ति में निपटा देती है: परमेश्वर ने उनकी भी सृष्टि की, और वे भी "अच्छे" हैं। कोई युद्ध नहीं, कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं। जिस चीज़ से आप काँपते हैं, वह भी उन्हीं के हाथ की बनी है और उनके फैसले के अधीन खड़ी है। यही इस पद का धर्मशास्त्रीय दिल है: सृष्टि में कुछ भी ऐसा नहीं जो परमेश्वर के नियंत्रण के बाहर, अपनी मर्ज़ी से, आपके जीवन में घुस आए। गहराई भी उन्हीं की है।

सूत्र

पाँचवें दिन जो सच बोला गया, वह गलील की झील पर एक नाव में देह लेकर खड़ा हुआ। मरकुस 4 में शिष्य डूबते हुए चिल्लाते हैं, और यीशु उठकर हवा और पानी को डाँटते हैं, और सब शान्त हो जाता है। शिष्यों का सवाल, "यह कौन है कि हवा और पानी भी इसकी आज्ञा मानते हैं," असल में उत्पत्ति 1 का ही सवाल है। जो बोलकर समुद्र को जीवन से भरता है, वही बोलकर समुद्र को चुप करा सकता है। इसलिए यह पद केवल जीव विज्ञान का नहीं, उद्धार का पद है: वह परमेश्वर जिसने गहराई को बनाया, गहराई में उतरने से नहीं डरते। क्रूस वही उतरना है, और पुनरुत्थान वही "अच्छा है" जो पाँचवें दिन कहा गया था, अब मृत्यु के पार से दोहराया गया।

आईना

आपके जीवन में भी एक "बड़ा जल-जन्तु" है। वह मेडिकल रिपोर्ट हो सकती है जो अगले हफ़्ते आनी है। वह वह आदमी हो सकता है जिसके ऑफ़िस में घुसते ही आपकी साँस छोटी हो जाती है। वह कर्ज़ का वह आँकड़ा हो सकता है जिसे आप जानबूझकर नहीं खोलते, या वह लत जो आपके बेटे को खा रही है, या रात के दो बजे का वह विचार जिसे आप दिन में किसी को नहीं बताते। हम इन चीज़ों को अपने भीतर देवता बना लेते हैं: बहुत बड़ी, बहुत गहरी, बिना बनानेवाले के, स्वयंभू। यह पद उस झूठ को काट देता है। वह चीज़ बनाई हुई है। उसका आकार असली है, पर उसकी सत्ता नकली है। और साथ ही यह पद आपके घमंड को भी छूता है: आप गहराई को नाप नहीं सकते, नियंत्रित नहीं कर सकते, सिर्फ़ उसके बनानेवाले पर भरोसा कर सकते हैं।

आज यह कीजिए: एक काग़ज़ पर उस एक चीज़ का नाम लिखिए जिससे आप सबसे ज़्यादा डरते हैं, और उसके नीचे अपने हाथ से लिखिए, "परमेश्वर ने जाति-जाति के बड़े-बड़े जल-जन्तुओं की सृष्टि की," फिर उसे ज़ोर से एक बार पढ़िए।

शास्त्र-संगति

भजन 104 में वही समुद्री दानव लौटता है, पर एक चौंकाने वाले वाक्य के साथ: लिव्यातान, जिसे परमेश्वर ने समुद्र में खेलने के लिए बनाया। जो कौमों के लिए आतंक का प्रतीक था, वह इस्राएल के भजनकार के लिए परमेश्वर के आँगन का पालतू है। और अय्यूब 41 में परमेश्वर अय्यूब को उसी जन्तु का लंबा, लगभग गर्वीला वर्णन सुनाते हैं, इसलिए नहीं कि अय्यूब और डरे, बल्कि इसलिए कि अय्यूब समझे कि जिस सृष्टि को वह चला नहीं सकता, उसे कोई और बड़े प्रेम से चला रहा है। उत्पत्ति 1:21 इन दोनों की जड़ है। बाइबल डर के प्रतीकों को मिटाती नहीं, उन्हें उनके मालिक के सामने खड़ा कर देती है।

एक बारीकी

"जिनसे जल बहुत ही भर गया।" इब्रानी क्रिया शारात्स का अर्थ है कुलबुलाना, झुंड में उमड़ना, इतनी भीड़ में हिलना कि गिनना असंभव हो जाए। यह करीने से सजाई गई सृष्टि नहीं, यह उमड़ता हुआ अपव्यय है। और यहाँ वह बात है जो आसानी से छूट जाती है: उस दिन जो अधिकांश प्राणी बनाए गए, उन्हें किसी मनुष्य ने कभी नहीं देखा। समुद्र की तलहटी में आज भी ऐसे जीव हैं जिनका कोई नाम नहीं, कोई दर्शक नहीं, कोई उपयोग नहीं। फिर भी परमेश्वर ने उन्हें देखा और कहा कि अच्छा है। अगर परमेश्वर की स्वीकृति के लिए दर्शकों की ज़रूरत नहीं, तो आपके अनदेखे जीवन, अनदेखी वफ़ादारी, अनदेखी थकान पर भी वही निगाह पड़ चुकी है।

एक कठिन प्रश्न

अगर ये सब "अच्छे" हैं, तो वह शार्क क्या है जो तैराक को चीर देती है, वह परजीवी क्या है जो बच्चे की आँख अंधी कर देता है? यह सवाल टालने लायक नहीं। ध्यान दीजिए, पद यह नहीं कहता कि हर जीव मनुष्य के लिए सुविधाजनक है; वह कहता है कि परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। "अच्छा" का पैमाना हमारी सुरक्षा नहीं, बनानेवाले का उद्देश्य है। इससे दर्द कम नहीं होता। और बाइबल स्वयं मानती है कि सृष्टि में कुछ टूटा है, कि वह कराहती है और छुटकारे की बाट जोहती है। मैं इस खाई को पाट नहीं सकता। मैं बस यह जानता हूँ कि जिसने गहराई बनाई, वही गहराई में उतरा, और वहाँ से वापस आया।

चिंतन के प्रश्न

आपके भीतर वह कौन-सी चीज़ है जिसे आपने अनजाने में "बिना बनानेवाले वाली" मान लिया है, इतनी बड़ी कि परमेश्वर भी उसके सामने छोटे लगते हैं?

अगर परमेश्वर उन जीवों को "अच्छा" कहते हैं जिन्हें कोई नहीं देखता, तो आपके जीवन का कौन-सा अनदेखा हिस्सा आज उनकी निगाह के नीचे रखा जाना चाहिए?

Genesis में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Genesis

Derek Kidner

A beloved compact classic that opens up Genesis with warmth and precision.

The Message of Genesis 1-11

David Atkinson

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The Message of Genesis 12-50

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Abraham to Joseph: the promises of God traced through one family.

Genesis: Beginning and Blessing

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Genesis 1:21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

उत्पत्ति 1:21 का क्या अर्थ है?
पाँचवें दिन परमेश्वर समुद्र और आकाश को जीवन से भर देते हैं। पहले वे बोलते हैं, फिर वे बनाते हैं: जाति-जाति के बड़े-बड़े जल-जन्तु, पानी में कुलबुलाते असंख्य जीव, और हर प्रकार के उड़नेवाले पक्षी। और फिर वही वाक्य आता है जो इस अध्याय में बार-बार लौटता है, मानो कोई अपनी बनाई चीज़ को हाथ में उठाकर धूप में देख रहा हो: "और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।" ध्यान दीजिए, यहाँ पहली बार "सृष्टि की" क्रिया लौटती है, वही शब्द जो पद 1 में आकाश और पृथ्वी के लिए इस्तेमाल हुआ था। जीवन कोई मामूली विस्तार नहीं है; यह एक नई शुरुआत है।
उत्पत्ति 1:21 किस विषय में है?
पाँचवें दिन जो सच बोला गया, वह गलील की झील पर एक नाव में देह लेकर खड़ा हुआ। मरकुस 4 में शिष्य डूबते हुए चिल्लाते हैं, और यीशु उठकर हवा और पानी को डाँटते हैं, और सब शान्त हो जाता है। शिष्यों का सवाल, "यह कौन है कि हवा और पानी भी इसकी आज्ञा मानते हैं," असल में उत्पत्ति 1 का ही सवाल है। जो बोलकर समुद्र को जीवन से भरता है, वही बोलकर समुद्र को चुप करा सकता है। इसलिए यह पद केवल जीव विज्ञान का नहीं, उद्धार का पद है: वह परमेश्वर जिसने गहराई को बनाया, गहराई में उतरने से नहीं डरते। क्रूस वही उतरना है, और पुनरुत्थान वही "अच्छा है" जो पाँचवें दिन कहा गया था, अब मृत्यु के पार से दोहराया गया।
उत्पत्ति 1:21 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज यह कीजिए: एक काग़ज़ पर उस एक चीज़ का नाम लिखिए जिससे आप सबसे ज़्यादा डरते हैं, और उसके नीचे अपने हाथ से लिखिए, "परमेश्वर ने जाति-जाति के बड़े-बड़े जल-जन्तुओं की सृष्टि की," फिर उसे ज़ोर से एक बार पढ़िए।
उत्पत्ति 1:21 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"जिनसे जल बहुत ही भर गया।" इब्रानी क्रिया शारात्स का अर्थ है कुलबुलाना, झुंड में उमड़ना, इतनी भीड़ में हिलना कि गिनना असंभव हो जाए। यह करीने से सजाई गई सृष्टि नहीं, यह उमड़ता हुआ अपव्यय है। और यहाँ वह बात है जो आसानी से छूट जाती है: उस दिन जो अधिकांश प्राणी बनाए गए, उन्हें किसी मनुष्य ने कभी नहीं देखा। समुद्र की तलहटी में आज भी ऐसे जीव हैं जिनका कोई नाम नहीं, कोई दर्शक नहीं, कोई उपयोग नहीं। फिर भी परमेश्वर ने उन्हें देखा और कहा कि अच्छा है। अगर परमेश्वर की स्वीकृति के लिए दर्शकों की ज़रूरत नहीं, तो आपके अनदेखे जीवन, अनदेखी वफ़ादारी, अनदेखी थकान पर भी वही निगाह पड़ चुकी है।
उत्पत्ति 1:21 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके भीतर वह कौन-सी चीज़ है जिसे आपने अनजाने में "बिना बनानेवाले वाली" मान लिया है, इतनी बड़ी कि परमेश्वर भी उसके सामने छोटे लगते हैं?
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Genesis 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 8

पिता, आपने आकाशमण्डल को स्वर्ग कहा, और मैं हर सुबह उस नीले विस्तार को देखकर धन्यवाद देता हूँ। सांझ हुई फिर भोर हुआ, यह क्रम आपके हाथ में है। इसलिए मेरे दिनों की गिनती भी आप ही करते हैं, और यह मुझे शान्ति देता है।

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