यशायाह 30:18
यह पाठ
पहाड़ की चोटी पर अकेला खड़ा एक डंडा, टीले पर फड़फड़ाता एक झंडा, और चारों ओर सन्नाटा। पद 17 का दृश्य यही है: सेना भाग चुकी, घोड़े काम न आए, बस एक निशान बाकी रह गया कि कभी यहाँ लोग थे। और ठीक इसी उजाड़ के ऊपर पद 18 अपना पहला शब्द रखता है: "तो भी"। तो भी यहोवा प्रतीक्षा में हैं, इसलिए विलम्ब करते हैं कि आप पर अनुग्रह कर सकें; इसलिए उठ खड़े होंगे कि दया कर सकें। कारण चौंकाने वाला है: "क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है।" और अन्त में एक आशीर्वाद उन पर, जो भागने के बजाय उन पर आशा लगाए रहते हैं। एक ही पद में हार, धैर्य, न्याय और आनन्द, सब एक साथ।
मूल बात
हम आमतौर पर सोचते हैं कि परमेश्वर की देरी उनकी उदासीनता है, या उनका क्रोध ठंडा होने का इन्तज़ार। यह पद उस सोच को उलट देता है। विलम्ब का उद्देश्य अनुग्रह है, और "ऊँचे उठना", जो युद्ध में उठ खड़े होने की भाषा है, यहाँ दया के लिए उठना है। जो हाथ मारने को उठता है, वही हाथ थामने को उठता है। और इसका आधार भावुकता नहीं, बल्कि न्याय है: "क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है।" परमेश्वर अपनी वाचा के प्रति खरे हैं, इसलिए वे विश्वासघाती लोगों को तुरन्त मिटा नहीं देते। अनुग्रह उनके चरित्र से फूटता है, हमारे पश्चाताप की कीमत से नहीं। यही कारण है कि जो प्रतीक्षा करते हैं, वे "धन्य" कहलाते हैं: उनकी आशा किसी संयोग पर नहीं, परमेश्वर के स्वभाव पर टिकी है।
सम्पूर्ण कथा का सूत्र
यह "तो भी" इस्राएल की कहानी का सबसे बार-बार दोहराया जाने वाला शब्द है। लोग मिस्र की ओर भागते हैं, ऊँट धन लादे रेगिस्तान पार करते हैं, और परमेश्वर वहीं खड़े रह जाते हैं जहाँ उन्होंने कहा था: "लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है।" वही अध्याय आगे बताता है कि यह प्रतीक्षा बाँझ नहीं रहेगी: "उस समय यहोवा अपनी प्रजा के लोगों का घाव बाँधेगा और उनकी चोट चंगा करेगा।" यही दिशा क्रूस तक जाती है। वहाँ परमेश्वर का न्याय और उनकी दया एक-दूसरे से टकराते नहीं, एक ही स्थान पर मिलते हैं। यीशु मसीह में वह "ऊँचे उठना" शरीर धारण करता है: परमेश्वर केवल प्रतीक्षा में खड़े नहीं रहे, वे चलकर आए। इसलिए यशायाह का "तो भी" कोई भावुक आशावाद नहीं, एक भविष्यवाणी है।
दर्पण
आपका मिस्र कौन सा है? शायद वह रिश्तेदार जिसे आप तीसरी बार फोन करने वाले हैं, वह दूसरा काम जो आपने बिना सोचे पकड़ लिया क्योंकि डर था कि महीना कैसे कटेगा, वह ईमेल जो आपने रात दो बजे गुस्से में तैयार किया और सुबह तक भेजने को तैयार है। मिस्र हमेशा गलत नहीं दिखता; उसके पास घोड़े सचमुच हैं। समस्या यह है कि हम "बिन पूछे" जाते हैं। और सबसे तीखी बात यह है कि जब प्रचारक सच बोलता है, हम कहते हैं, "हम से चिकनी-चुपड़ी बातें बोलो।" हम सलाह नहीं, पुष्टि चाहते हैं। आज यह कीजिए: एक कागज़ पर उस एक योजना का नाम लिखिए जो आपने इस हफ़्ते परमेश्वर से बिना पूछे बनाई है, और उसी कागज़ पर एक वाक्य में लिखिए कि आप उसे उनके सामने रख रहे हैं। फिर वह कागज़ अपने बटुए में रख लीजिए।
मुख्य पात्र
इस पद का मुख्य पात्र वह परमेश्वर हैं जो अभी-अभी टूटे घड़े की भाषा बोल रहे थे, इतना चूर-चूर कि "उसके टुकड़ों का एक ठीकरा भी न मिलेगा"। और फिर, बिना साँस बदले, वे प्रतीक्षा करने लगते हैं। यह कोई कमज़ोर, सब कुछ सह लेने वाला देवता नहीं है; इसी अध्याय के अन्त में उनकी साँस "जलती हुई गन्धक की धारा के समान" है। पर उनके भीतर की तीव्रता विनाश की ओर नहीं, दया की ओर झुकती है। कल्पना कीजिए एक पिता की, जो दरवाज़े पर खड़ा है, हाथ में वह पत्र लिए जो बच्चे ने फाड़ दिया था, और जो जाता नहीं। परमेश्वर की पवित्रता ही उन्हें रोके रखती है, क्योंकि वे अपनी वाचा तोड़ नहीं सकते, चाहे हम अपनी तोड़ते रहें।
एक बारीकी
पद के दोनों सिरों पर एक ही क्रिया खड़ी है। इब्रानी में "विलम्ब करता है" और "आशा लगाए रहते हैं" के पीछे एक ही मूल है: חכה (हाकाह), यानी "प्रतीक्षा करना"। परमेश्वर हमारी प्रतीक्षा करते हैं, और धन्य वे हैं जो उनकी प्रतीक्षा करते हैं। यह कोई शब्दों का खेल नहीं; यह पूरे पद की रीढ़ है। प्रतीक्षा पहले परमेश्वर का काम है, हमारा नहीं। हमारी सब्र उनकी सब्र की प्रतिध्वनि है, वैसे ही जैसे बच्चा उसी भाषा में बोलना सीखता है जो घर में बोली जाती है। और यह हमें आराम देता है: अगर आपकी प्रतीक्षा आज लड़खड़ा रही है, तो वह पहले से चल रही उस लम्बी प्रतीक्षा में जाकर टिक जाती है जो परमेश्वर की ओर से है।
शास्त्र की गूँज
पतरस बहुत बाद में उसी उलझन का उत्तर देता है जो यशायाह के श्रोताओं की थी: प्रभु अपनी प्रतिज्ञा में देर नहीं करते, बल्कि धीरज धरते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि कोई नाश हो। वही तर्क, वही "तो भी"। और लूका 15 में वह पिता जो बेटे की राह देखता रहा, फिर दौड़ पड़ा, यशायाह के "ऊँचे उठेगा" को चेहरा दे देता है। दोनों जगह देरी खालीपन नहीं, भरी हुई जगह है। पर ध्यान दीजिए: यशायाह उस पिता को भावुक नहीं बनाता। उसी पद में लिखा है, "यहोवा न्यायी परमेश्वर है।" जो प्रतीक्षा करते हैं वे किसी नरमदिल बुज़ुर्ग के भरोसे नहीं, बल्कि उस न्यायी के भरोसे खड़े हैं जिसकी दया कभी अनुशासन से अलग नहीं होती।
मनन के प्रश्न
आपके जीवन में इस समय किस चीज़ की प्रतीक्षा सबसे भारी लग रही है, और क्या आप मान पाते हैं कि उसी प्रतीक्षा के दूसरे छोर पर परमेश्वर भी खड़े हैं?
आप किन लोगों से "चिकनी-चुपड़ी बातें" सुनना पसंद करते हैं, और पिछली बार आपने किसी को सच बोलने की अनुमति कब दी थी?
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Isaiah 30:18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यशायाह 30:18 का क्या अर्थ है?
यशायाह 30:18 किस विषय में है?
यशायाह 30:18 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यशायाह 30:18 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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Isaiah 30 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, कई बार मैं ऐसी बातें सुनना चाहता हूँ जो मुझे सहज लगें, और तेरी सच्चाई से मुँह मोड़ लेता हूँ। मुझे माफ़ कर। मेरे मन को ऐसा बना कि जब तेरा वचन मुझे चुभे, तब भी मैं उसे सुनूँ और तेरे रास्ते पर ही चलता रहूँ।
यशायाह कहता है, "क्योंकि ये बलवा करनेवाले लोग हैं, धोखा देनेवाले लड़के, ऐसे लड़के जो यहोवा की व्यवस्था सुनना नहीं चाहते।" गौर कर, सच उनके कानों तक पहुँचा था। कमी सुनने की नहीं, चाहने की थी। आज भी हम वही वचन चुनते हैं जो चुभे नहीं। तू किस बात को जानबूझकर अनसुना कर रहा है?
इस्राएल मिस्र से मदद माँगने भागा था, परमेश्वर से नहीं। फिर भी यशायाह कहता है, "वह तुम्हारी चिल्लाहट का शब्द सुनते ही तुम पर अनुग्रह करेगा; और सुनते ही तुम्हें उत्तर देगा।" सुनते ही। कोई देरी नहीं, कोई ताना नहीं कि पहले कहाँ गए थे। तेरी आवाज़ ही काफ़ी है। आज जो रोना तू छिपा रहा है, उसे उसके सामने खुलकर रो ले।
मिस्र पर भरोसा करना, यही तो इस्राएल का पाप था। संकट के समय वे परमेश्वर के पास नहीं, बल्कि उस बड़ी शक्ति के पास दौड़े जो असल में कुछ भी नहीं कर सकती थी। यशायाह ने मिस्र को "बैठी रहनेवाली रहब" कहा, यानी वह बड़ा दिखता है, पर हिलता तक नहीं।
आज भी हम अक्सर ऐसे ही "मिस्र" ढूंढते हैं, कोई इंसान, कोई पैसा, कोई योजना, जो देखने में मजबूत लगे। पर क्या वे सच में उठकर तुम्हारी मदद करेंगे? या बस बैठे रहेंगे? परमेश्वर पूछ रहा है, तेरा असली सहारा कौन है?
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