मत्ती 12:24
पाठ
एक आदमी जो न देख सकता था, न बोल सकता था, और जिसमें दुष्टात्मा थी, यीशु के सामने लाया जाता है; वह चंगा हो जाता है, बोलने और देखने लगता है, और भीड़ सन्न रह जाती है: “यह क्या दाऊद की सन्तान है?” ठीक उसी क्षण, उसी चमत्कार को देखकर, फरीसी एक बिलकुल उलटा निर्णय सुनाते हैं: “यह तो दुष्टात्माओं के सरदार शैतान की सहायता के बिना दुष्टात्माओं को नहीं निकालता।” वे घटना से इनकार नहीं करते। वे उसे झुठलाते नहीं, गवाहों को चुनौती नहीं देते, चंगाई पर सवाल नहीं उठाते। वे केवल उसका स्रोत बदल देते हैं। जो काम स्वर्ग से आया, उस पर वे नरक का लेबल चिपका देते हैं, और इसी एक वाक्य से पूरे अध्याय का सबसे अँधेरा मोड़ शुरू होता है।
मूल बात
एक ही प्रमाण, दो विरोधी फैसले। यही इस आयत का धार्मिक हृदय है। परमेश्वर का राज्य किसी बहस से नहीं, बल्कि एक बँधी हुई जीभ के खुल जाने से आता है; सृष्टि का वह टुकड़ा जो शैतान के कब्जे में था, वापस अपने बनानेवाले के हाथ में लौटता है। यीशु आगे स्वयं यही कहते हैं: “तो परमेश्वर का राज्य तुम्हारे पास आ पहुँचा है।” पर फरीसी इस मुक्ति को गुलामी का नाम देते हैं। यह केवल गलत राय नहीं, यह नैतिक जगत का उलट जाना है, जहाँ प्रकाश को अंधकार और छुटकारे को कैद कहा जाता है। और ध्यान दीजिए कि यह अंधापन ज्ञान की कमी से नहीं, बल्कि हृदय की सुरक्षा से पैदा हुआ है: यदि यह परमेश्वर का आत्मा है, तो उन्हें अपनी पूरी व्यवस्था, अपनी सत्ता और अपनी धार्मिकता छोड़नी पड़ेगी। पवित्रता की रक्षा करते-करते वे पवित्र आत्मा के विरुद्ध खड़े हो गए।
सूत्र
परमेश्वर की बड़ी कहानी में यह क्षण अचानक नहीं आता। उत्पत्ति से लेकर भविष्यद्वक्ताओं तक एक ही आशा चलती रही: कि परमेश्वर स्वयं आकर उस शक्ति को बाँधेंगे जिसने उनकी सृष्टि को बंधुआ बना रखा है। यीशु इसी अध्याय में इसे तस्वीर बनाकर कहते हैं कि जब तक “उस बलवन्त को न बाँध ले”, कोई उसका घर नहीं लूट सकता। गूँगे का बोलना और अंधे का देखना नई सृष्टि की पहली किरण है, वही जो यशायाह ने वचन दिया था। पर सूत्र यहीं मुड़ता है: यह सेवक जो “कुचले हुए सरकण्डे को न तोड़ेगा”, अपने ही लोगों के हाथों दुष्टात्मा का साथी कहलाता है। जो अस्वीकार क्रूस पर पूरा होगा, वह यहाँ शब्दों में जन्म ले रहा है। छुटकारे का रास्ता हमेशा उस पर से गुजरता है जिसे गलत नाम दिया गया।
दर्पण
हम भी घटनाओं से इनकार कम करते हैं, स्रोत ज्यादा बदलते हैं। वह सहकर्मी जिसकी ईमानदारी हमें असहज करती है, उसके पीछे हम मंसूबा ढूँढ़ते हैं। वह रिश्तेदार जो सचमुच बदल गया है, हमें खटकता है, क्योंकि उसके बदलने से हमारी पुरानी शिकायत बेकार हो जाती है। कलीसिया में जब परमेश्वर किसी ऐसे व्यक्ति या ऐसे तरीके से काम करते हैं जो हमारे साँचे में नहीं बैठता, तो हम बहुत जल्दी उसे “आत्मिक नहीं” कह देते हैं। फरीसियों का पाप धर्म-विरोध नहीं था, धर्म की हिफाज़त थी; और यही इसे इतना डरावना बनाता है, क्योंकि हम में से जो सबसे गंभीर विश्वासी हैं, वही इस जोखिम के सबसे करीब हैं। आज यह कीजिए: एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसके भले काम को आपने मन ही मन गलत नीयत का नाम दिया है, और उसके लिए तीन वाक्य में परमेश्वर को धन्यवाद दीजिए।
अंतर-पाठ
इसी अध्याय के अंत में यीशु कहते हैं, “जो मन में भरा है, वही मुँह पर आता है।” फरीसियों का यह वाक्य उनके ज्ञान की उपज नहीं, उनके भीतर के भंडार की उपज है; इसलिए यीशु बहस नहीं करते, वे पेड़ और फल की बात करते हैं। दूसरी गूँज होशे से आती है, जिसे यीशु कुछ पद पहले उद्धृत कर चुके हैं: “मैं दया से प्रसन्न होता हूँ, बलिदान से नहीं।” यही कसौटी उन्हें दोषी ठहराती है। जिसने दया नहीं सीखी, वह दया के काम को पहचान भी नहीं सकता। जहाँ हृदय में करुणा का स्थान खाली है, वहाँ परमेश्वर का काम भी संदेह जैसा दिखता है।
श्रोतागण
मत्ती के पहले पाठक यहूदी विश्वासी थे, जिनके परिवारों और आराधनालयों में यही सवाल लहू जैसा गरम था: यीशु कहाँ से है, स्वर्ग से या शैतान से? उनके लिए फरीसी कोई खलनायक कार्टून नहीं थे, बल्कि सम्मानित शिक्षक, व्यवस्था के रक्षक, वे लोग जिनके पीछे गाँव चलता था। इसलिए यह आयत उनके लिए बहुत भारी थी: जिन्हें सबसे अधिक जानना चाहिए था, वे सबसे बड़ी भूल कर बैठे। और साथ ही राहत भी थी, क्योंकि भीड़ का सवाल “यह क्या दाऊद की सन्तान है?” उनके अपने विश्वास की पुष्टि करता था। जिस कीमत पर वे यीशु को मानते थे, आराधनालय से निकाले जाना, वह इस आयत में उन्हें दिखती थी: विरोध नया नहीं, शुरू से ही था।
प्रश्न
तो क्या यह वही पाप है जिसे यीशु आगे अक्षम्य कहते हैं, और क्या मैं उसे कर सकता हूँ? ईमानदारी से: यह पद उसी की दहलीज पर खड़ा है। लेकिन ध्यान दीजिए कि यहाँ कोई क्षण भर का संदेह नहीं, बल्कि ठंडा, देखा-समझा, दोहराया गया निर्णय है, जो चमत्कार देखने के बाद भी उसे नरक का नाम देता है। जो इस डर से काँपता है कि उसने यह पाप किया होगा, उसका काँपना ही प्रमाण है कि उसका हृदय अभी बंद नहीं हुआ; फरीसी नहीं काँप रहे थे, वे सम्मति कर रहे थे कि उसे कैसे मार डालें। पर प्रश्न फिर भी पूरा नहीं सुलझता, और मुझे लगता है यीशु ने उसे जानबूझकर खुला छोड़ा: कुछ दरवाजे भीतर से बंद किए जाते हैं, और परमेश्वर इस स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। यह विचार आराम नहीं देता, पर यह हमें सतर्क रखता है, और सतर्कता ही यहाँ कृपा का रूप है।
चिंतन
किस व्यक्ति या किस काम के बारे में मेरा पहला अनुमान संदेह होता है, और यह मेरे भीतर के “भंडार” के बारे में क्या कहता है?
मैं अपनी आत्मिक व्यवस्था और आदतों में से किसे छोड़ने से इतना डरता हूँ कि परमेश्वर उसके बाहर काम करें तो मैं पहचानने से इनकार कर दूँ?
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Matthew 12:24 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 12:24 का क्या अर्थ है?
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मत्ती 12:24 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 12:24 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 12 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, मेरे शब्द बता देते हैं कि मेरे भीतर क्या भरा है। कभी कड़वाहट निकलती है, कभी जल्दबाज़ी में कही बात किसी को चोट पहुँचा देती है। मेरे मन को भीतर से साफ़ करिए, ताकि जो बाहर आए वह दूसरों के लिए आशीष बने।
याजक सब्त के दिन सबसे ज़्यादा काम करते थे, और फिर भी निर्दोष ठहरते थे। यीशु कहते हैं, "क्या तुमने व्यवस्था में नहीं पढ़ा कि याजक सब्त के दिन मन्दिर में सब्त के दिन को तोड़ते हैं, फिर भी निर्दोष ठहरते हैं?" मन्दिर की उपस्थिति ने उनके परिश्रम को पवित्र बना दिया। सोचो, तुम्हारे काम को नियम नहीं, बल्कि वह जिसके लिए तुम करते हो, शुद्ध ठहराता है। और अब तुम्हारे पास मन्दिर से भी बड़ा कोई है।
पिता, मेरे मुँह से निकलने वाले हर शब्द को तू सुनता है, यहाँ तक कि वे भी जो मैं बिना सोचे बोल देता हूँ। मुझे माफ़ कर, जहाँ मेरी बातों ने किसी को चोट पहुँचाई। मेरी जीभ को थाम, ताकि मैं ऐसा बोलूँ जिससे लोगों का हौसला बढ़े, न कि टूटे।
शीबा की रानी ने पृथ्वी की छोर से सुलैमान का ज्ञान सुनने के लिए इतनी लंबी यात्रा की। और यीशु कहते हैं, "देखो, यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है।" वह लोगों के बीच खड़े थे, और लोग ऊबे हुए थे। सोचो, कहीं ऐसा तो नहीं कि जो तुम्हारे पास रोज़ खुली पड़ी है, उसी बाइबल के लिए कोई दूर देश में तरस रहा है? नज़दीकी को लापरवाही मत बनने दो।
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