मत्ती 3:12
यह पाठ
यूहन्ना अपनी बात एक किसान की तस्वीर से खत्म करता है। जो आनेवाला है, उसके हाथ में सूप है, वह अनाज उड़ाकर अलग करने का औजार; वह खलिहान को अधूरे मन से नहीं, बल्कि "अच्छी रीति से साफ करेगा।" गेहूँ खत्ते में जाएगा, सुरक्षित और संभाला हुआ, और भूसी उस आग में जलेगी "जो बुझने की नहीं।" यह वही वाक्य है जो पिछले पद में शुरू हुआ था, जहाँ यूहन्ना ने कहा था कि वह "पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।" यानी दोनों तस्वीरें एक ही व्यक्ति की हैं: वही जो आत्मा उँडेलता है, वही सूप थामे खड़ा है। यूहन्ना यहाँ कोई नरम उपसंहार नहीं दे रहा, वह अपने पूरे प्रचार की धार को एक ही छवि में समेट रहा है।
मर्म
ध्यान दीजिए कि गेहूँ और भूसी दो अलग खेतों से नहीं आते। वे एक ही बाली पर साथ उगते हैं, एक ही दराँती से कटते हैं, एक ही खलिहान में आते हैं। यूहन्ना का संदेश यह नहीं कि दुनिया में कहीं अच्छे लोग हैं और कहीं बुरे; उसका संदेश यह है कि परमेश्वर के अपने लोगों के बीच से ही यह छँटाई होगी। इसीलिए उसने फरीसियों और सदूकियों से कहा था कि अब्राहम की सन्तान होना कोई ढाल नहीं। परमेश्वर का राज्य केवल क्षमा की घोषणा नहीं, वह एक निर्णायक कार्रवाई भी है। और यही बात आराम देती है: जो न्याय करने आ रहा है, वही गेहूँ को "इकट्ठा करेगा", फेंकेगा नहीं। छँटाई का मकसद नाश नहीं, बचाना है।
मुख्य धारा
यूहन्ना की यह तस्वीर पुराने नियम की फसल-भाषा से उठी है: भविष्यद्वक्ताओं ने परमेश्वर के दिन को बार-बार कटनी, दाँवनी और आग के रूप में देखा। मलाकी ने उस आनेवाले को सोना तपानेवाले की आग कहा, और यूहन्ना का ऊँट के रोम का वस्त्र और चमड़े का कमरबन्द (पद 4) सीधे एलिय्याह की ओर इशारा करता है, वही भविष्यद्वक्ता जिसके लौटने की बात मलाकी ने उस भयानक दिन से पहले की थी। यानी यूहन्ना जानबूझकर खुद को उस अंतिम दृश्य के द्वार पर खड़ा करता है। पर मुख्य धारा यहाँ मुड़ती है: जो सूप थामे आया, उसने पहले खुद को आग के नीचे रख दिया। क्रूस पर वह गेहूँ की तरह नहीं, भूसी की जगह खड़ा हुआ। छँटाई टली नहीं, पर उसका क्रम बदल गया।
दर्पण
यूहन्ना की चेतावनी सबसे ज़्यादा उन्हीं को चुभती है जो धार्मिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं। आपका नाम कलीसिया की सूची में है, आप रविवार चूकते नहीं, शायद आप ही दूसरों को सिखाते हैं; और ठीक यही "हमारा पिता अब्राहम है" का आधुनिक रूप बन सकता है। भूसी कहीं बाहर नहीं, वह आपके अपने जीवन में उगती है, उसी बाली पर: वह सेवा जो नाम के लिए होती है, वह उदारता जिसका हिसाब आप मन में रखते हैं, वह क्षमा जो मुँह से दी गई पर दिल में रोक ली गई। सूप इन्हें अलग करता है, आपको नहीं।
आज एक काम कीजिए: कागज़ पर अपने जीवन की एक ऐसी चीज़ लिखिए जो बाहर से गेहूँ दिखती है पर भीतर से खोखली है, और उसे ज़ोर से परमेश्वर के सामने नाम लेकर कहिए।
कठिन प्रश्न
"आग जो बुझने की नहीं" को नरम करने का मन करता है, और ईमानदारी यही कहती है कि पाठ हमें वह छूट नहीं देता। यूहन्ना अलंकार में बोल रहा है, हाँ, पर अलंकार किसी कम गंभीर चीज़ की ओर नहीं, अधिक गंभीर चीज़ की ओर इशारा करता है। बाइबल हमें नरक का नक्शा नहीं देती; वह हमें चेतावनी देती है और फिर चुप हो जाती है। मैं यहाँ कोई साफ़ हल नहीं दे सकता, केवल दो बातें साथ रख सकता हूँ: न्याय सचमुच का है, और न्यायी वही है जिसने अपने हाथ कीलों के लिए खोल दिए। इन दोनों को एक साथ थामे रहना असहज है। उस असहजता को जल्दी हटाइए मत; यूहन्ना ने भी नहीं हटाई।
एक बारीकी
"अच्छी रीति से साफ करेगा" के पीछे का यूनानी शब्द दियाकथारिएई है, यानी आर-पार, पूरी तरह साफ करना, कुछ भी बचा न रहने देना। यह छवि समझने के लिए खलिहान की कल्पना कीजिए: शाम की हवा चलती है, किसान सूप से अनाज हवा में उछालता है, बार-बार, जब तक हल्का भाग उड़ न जाए। ध्यान दीजिए, गेहूँ भी उछाला जाता है। हवा में फेंका जाना अस्वीकार नहीं है, वह शुद्ध किए जाने का तरीका है। जब आपका जीवन हवा में उछाला हुआ लगे, अनिश्चित और टिकाव के बिना, तो यह ज़रूरी नहीं कि आप भूसी हैं। यह सूप हो सकता है, और सूप उसी हाथ में है जो गेहूँ को खत्ते में संभालता है।
शास्त्र की गूँज
भजन संहिता की शुरुआत ही इसी तस्वीर से होती है: दुष्ट भूसी के समान हैं जिसे हवा उड़ा ले जाती है। यानी पूरे भजन-संग्रह का पहला शब्द वही छँटाई है जो यूहन्ना घोषित करता है, और यीशु उसी को पूरा करने आते हैं। पर एक तनाव भी है। मत्ती 13 में यीशु खुद गेहूँ और जंगली बीज का दृष्टांत कहते हैं, और वहाँ सेवक जब अभी छाँटना चाहते हैं, मालिक कहते हैं: ठहरो, कटनी तक। यूहन्ना कहता है कुल्हाड़ा जड़ पर रखा है, अभी; यीशु कहते हैं, समय आएगा। दोनों सच हैं। निर्णय निश्चित है, पर उसकी घड़ी परमेश्वर के धीरज में टली हुई है, और वह टाला जाना ही हमारे लिए मन फिराने की जगह है।
मनन
आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा आप चुपचाप "अब्राहम की सन्तान" वाली सुरक्षा पर टिकाए हुए हैं, जिसे यूहन्ना का सूप हवा में उछाल देगा?
यदि न्याय करनेवाला वही है जो गेहूँ को इकट्ठा करता है, तो यह जानना आपके आज के डर को कैसे बदलता है?
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Matthew 3:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 3:12 का क्या अर्थ है?
मत्ती 3:12 किस विषय में है?
मत्ती 3:12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मत्ती 3:12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 3:12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 3 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
यूहन्ना उन्हें लौटाता नहीं, पर पूछता है, "हे साँप के बच्चों, तुम्हें किसने चेतावनी दी कि आनेवाले प्रकोप से भागो?" वे सही जगह आए थे, पर शायद गलत कारण से। सज़ा से बचने की चाह और परमेश्वर की ओर मुड़ने की चाह, दोनों एक जैसी दिखती हैं। आज तू जिस प्रार्थना में खड़ा है, उसमें डर बोल रहा है या प्रेम?
यूहन्ना कहता है, "उसका सूप उसके हाथ में है।" सूप गेहूँ को नष्ट करने नहीं, उसे भूसी से अलग करने के लिए उठाया जाता है। ध्यान दे, वही हाथ जो भूसी को जलाता है, गेहूँ को खत्ते में सम्भालकर रखता है। आज जो तेज़ हवा तेरे जीवन पर चल रही है, शायद वह तुझे उड़ाने नहीं, तुझमें से भूसी हटाने आई है।
लोग यरूशलेम से चलकर जंगल तक आए, और वहाँ पानी में खड़े होकर "अपने अपने पापों को मानकर" बपतिस्मा लिया। किसी ने बहाना नहीं बनाया। हर एक ने अपना नाम, अपना बोझ खुद कहा। सोचो, तुम्हारे मन में जो बात सालों से छिपी है, क्या तुमने कभी उसे शब्द दिए हैं? जो पाप कहा नहीं जाता, वह धोया भी नहीं जाता।
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