भजन संहिता 10:3
पाठ
वह आदमी अपनी लालसा छिपाता नहीं; वह उसे गले में हार की तरह पहनकर घूमता है। जो उसने हड़पा, जिसे उसने कुचलकर पाया, उसी की कहानी वह मंडली के बीच हँसते हुए सुनाता है, और लोग सिर हिलाकर उसकी चतुराई की तारीफ़ करते हैं। पद ३ यही दृश्य पकड़ता है: "दुष्ट अपनी अभिलाषा पर घमण्ड करता है, और लोभी यहोवा को त्याग देता है और उसका तिरस्कार करता है।" दो बातें एक साथ चल रही हैं। भीतर एक भूख है जिसे वह शर्म की नहीं, शान की बात मानता है; और बाहर परमेश्वर की ओर पीठ है, ऐसी पीठ जिसमें केवल उपेक्षा नहीं, खुली तौहीन है। लोभ यहाँ चुपचाप नहीं पलता, वह मंच पर खड़ा होकर ताली बटोरता है।
मर्म
ध्यान दीजिए कि क्रम क्या है। पहले वह अपनी अभिलाषा पर घमण्ड करता है, फिर यहोवा को त्यागता है। लोभ केवल ज़्यादा चाहने का नाम नहीं; वह एक प्रतिद्वंद्वी उपासना है। जिस चीज़ पर आप गर्व करते हैं, वही आपका देवता बन जाती है, और एक सिंहासन पर दो नहीं बैठ सकते। इसीलिए भजनकार ईश्वरहीनता को किसी बौद्धिक बहस की तरह नहीं, बल्कि एक रिश्ते के टूटने की तरह बयान करता है: त्याग और तिरस्कार, जैसे कोई पति अपनी पत्नी को छोड़कर मुड़े और मुँह बिचकाए। और यहीं इस भजन की चुभन है: जिसने परमेश्वर को छोड़ा, वह अगले ही क्षण दीन और लाचार पर झपटता है (पद ९)। जहाँ परमेश्वर का भय मिटता है, वहाँ कमज़ोर आदमी शिकार बन जाता है। भक्ति और न्याय एक ही जड़ से उगते हैं।
सूत्र
इस भजन में दो अभिलाषाएँ आमने-सामने खड़ी हैं। पद ३ में दुष्ट की अभिलाषा है, जिस पर वह घमण्ड करता है; पद १७ में वही शब्द लौटता है, पर उलटी दिशा में: "हे यहोवा, तूने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है।" एक चाहत मंच पर चिल्लाती है, दूसरी घुटनों पर काँपती है, और परमेश्वर दूसरी सुनते हैं। पूरे शास्त्र में यही ढलान चलती है, और उसका सबसे गहरा मोड़ मसीह में आता है: फिलिप्पियों २ में पौलुस कहता है कि यीशु ने परमेश्वर के तुल्य होने को पकड़े रहने की वस्तु नहीं समझा, बल्कि अपने आपको खाली कर दिया। जहाँ पद ३ का आदमी झपटता है, वहाँ मसीह छोड़ते हैं। और इसीलिए वे उस दीन की ओर से खड़े हो सके जिसे यह आदमी झाड़ी में से ताक रहा था।
दर्पण
हममें से ज़्यादातर लोग घात में बैठकर किसी को नहीं लूटते। पर पद ३ का पहला हिस्सा हमारे बहुत पास आता है। वह सौदा जिसमें आपने ठेकेदार को आख़िरी हज़ार तक दबा दिया और रात के खाने पर हँसते हुए सुनाया। वह पोस्ट जिसमें "परमेश्वर की कृपा" लिखा था पर असली विषय आपका प्रमोशन था। वह तुलना जो आप रिश्तेदारों की गाड़ी देखकर मन में करते हैं। लोभ का सबसे ख़तरनाक रूप छिपा हुआ नहीं, सम्मानित रूप है, वही जिसे हम महत्वाकांक्षा कहकर सराहते हैं। और यह भजन कहता है कि वह शान धीरे-धीरे परमेश्वर की जगह ले लेती है, बिना किसी नास्तिक घोषणा के।
आज शाम अपने फ़ोन में पिछले महीने के अपने संदेश या पोस्ट खोलिए, एक ऐसी बात चुनिए जहाँ आपने अपनी किसी उपलब्धि का ज़िक्र किया, और उसे ज़ोर से पढ़कर कहिए: "यह मेरी अभिलाषा थी, मेरा परमेश्वर नहीं।"
कठिन प्रश्न
भजन का सवाल टालने लायक नहीं है: जब कोई आदमी खुलेआम यहोवा का तिरस्कार करता है, तो परमेश्वर चुप क्यों रहते हैं? पद १ में भजनकार यही चीख़ता है, "तू क्यों दूर खड़ा रहता है?" और पूरे भजन में उसे कोई सीधा उत्तर नहीं मिलता। सिर्फ़ एक दावा मिलता है, पद १४ में: "तूने देख लिया है।" यह उत्तर नहीं, गवाही है। परमेश्वर देर क्यों करते हैं, इसका कारण यह भजन नहीं बताता, और हमें भी उसे गढ़ना नहीं चाहिए। जो मिलता है वह इतना है कि देरी अंधेपन का सबूत नहीं। जिसने आपकी ज़मीन, आपकी इज़्ज़त, आपका बचपन छीना, उसका लेखा लिया जाएगा। कब, यह हमारे हाथ में नहीं, और यही सबसे कठिन हिस्सा है।
पहले सुननेवाले
इसे पहले उन लोगों ने गाया जिनके गाँव में अदालत फाटक पर लगती थी और जहाँ हर कोई हर किसी को नाम से जानता था। जब वे पद ३ सुनते थे, उनके मन में कोई अमूर्त "दुष्ट" नहीं आता था, बल्कि वह साहूकार आता था जिसने विधवा का खेत गिरवी रखकर हड़प लिया, और फिर त्योहार पर सबसे आगे बैठकर भेंट चढ़ाई। उनके लिए यह भजन शिकायत नहीं, अदालत में दायर अर्ज़ी थी, क्योंकि गाँव की अदालत उस आदमी की जेब में थी। एक ही अदालत बची थी जिसे ख़रीदा नहीं जा सकता था। इसीलिए पद १२ में वे गरजते हैं, "उठ, हे यहोवा।" यह आदर नहीं, पुकार है, जैसे कोई न्यायाधीश को नींद से जगा रहा हो।
एक बारीकी
"लोभी" के लिए इब्रानी में शब्द है बोत्सेआ, जिसकी जड़ का अर्थ है "काटकर टुकड़ा अलग कर लेना"। यह मुनाफ़े का सामान्य शब्द नहीं है; यह उस कमाई का शब्द है जो किसी दूसरे के जीवन में से काटकर निकाली गई है। कपड़े से टुकड़ा फाड़ा गया है, और वह कपड़ा किसी और का है। इसलिए पद ३ का दूसरा हिस्सा संयोग से नहीं जुड़ा: जो इस तरह काटकर कमाता है, वह यहोवा को छोड़ता भी है और उनका तिरस्कार भी करता है। क्योंकि दीन को काटना परमेश्वर की छवि को काटना है, और यह बात जाने-अनजाने उस आदमी को मालूम होती है। उसका घमण्ड उसी जानकारी पर पर्दा डालने की कोशिश है।
चिंतन के प्रश्न
आपकी कौन-सी चाहत ऐसी है जिसे आप शर्म की नहीं, शान की बात मानते हैं, और क्या वह सचमुच परमेश्वर के सामने टिक सकती है?
आपके आसपास किसका जीवन "काटकर" किसी और की कमाई बना है, और इस हफ़्ते आप उसके लिए क्या ठोस कदम उठा सकते हैं?
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Psalms 10:3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 10:3 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 10:3 किस विषय में है?
भजन संहिता 10:3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 10:3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 10:3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 10 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
दुष्ट अपने मन में कहता है, "परमेश्वर भूल गया है; उसने अपना मुँह छिपा लिया है, वह कभी न देखेगा।" यही उसकी सबसे बड़ी भूल है। वह परमेश्वर की चुप्पी को अंधापन समझ बैठा। पर उसी भजन में आगे लिखा है, "तू ने तो देखा है।"
तू भी कभी सोचता है कि तेरे आँसू किसी ने नहीं गिने? वे गिने गए हैं। देर का मतलब भूलना नहीं होता।
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