बाइबल व्याख्या

रोमियों 8:11

बाइबल
यह वचन Evangelical Church of India द्वारा समर्पित है

पाठ

रोम के किसी किरायेदार कमरे में, जहाँ दास, कारीगर और कुछ धनी स्त्रियाँ एक साथ बैठकर पौलुस की चिट्ठी सुन रहे थे, यह वाक्य ऊँची आवाज़ में पढ़ा गया: "और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।" कहने का अर्थ सीधा है: जिस सामर्थ्य ने कब्र से यीशु को उठा खड़ा किया, वही सामर्थ्य अब विश्वासी के भीतर बसेरा किए हुए है, और वह वहीं रुकने वाली नहीं। जो देह आज थकती है, बीमार पड़ती है और अंत में मिट्टी होती है, उसी देह को परमेश्वर जिलाएँगे। पौलुस आत्मा की बात करते हुए शरीर को पीछे नहीं छोड़ते; वे शरीर को ही वादे के भीतर खींच लाते हैं।

मूल बात

रोम में देह सस्ती चीज़ थी। दास के शरीर पर मालिक का दाग लगता था, गरीबों की लाशें शहर के बाहर सामूहिक गड्ढों में फेंकी जाती थीं, और अखाड़े में मांस तमाशा था। उस दुनिया के पढ़े-लिखे लोग कहते थे कि आत्मा को इस मरनहार देह से छुटकारा चाहिए। पौलुस ठीक उलटा कहते हैं: परमेश्वर देह को छोड़ते नहीं, उसका दावा करते हैं। पिता ने यीशु को जिलाया, वही आत्मा अब तुम में बसते हैं, और वे तुम्हारी इसी नश्वर देह को जिलाएँगे। उद्धार यहाँ कोई भीतरी अनुभव भर नहीं, बल्कि पूरे मनुष्य का, हड्डी और साँस समेत, नया किया जाना है। और यह आत्मा की उपस्थिति कोई प्रेरणा नहीं, बयाना है: जो भीतर आ बसे हैं, वे अधूरा काम छोड़कर नहीं जाते।

जोड़ने वाला सूत्र

इस्राएल की सबसे गहरी आशा कभी शरीरविहीन नहीं रही। यहेजकेल को सूखी हड्डियों की घाटी दिखाई गई थी, और वहाँ परमेश्वर का उत्तर यह नहीं था कि आत्माएँ स्वर्ग चली जाएँ, बल्कि यह कि हड्डियाँ जुड़ें, नसें चढ़ें, और उन में श्वास आए। पौलुस उसी धारा में खड़े हैं। मिस्र से निकाले गए लोगों को परमेश्वर ने शरीर समेत छुड़ाया था, और अब मसीह की कब्र खाली होकर उस छुटकारे का अंतिम रूप दिखाती है। यीशु का जी उठना कोई अकेली घटना नहीं, पहला फल है; जो पिता ने पुत्र की देह के साथ किया, वही वे उनके संगी वारिसों की देह के साथ करेंगे। सृष्टि को तोड़कर नहीं, उसे चंगा करके परमेश्वर अपना राज्य पूरा करते हैं।

दर्पण

आप अपनी देह से थके हुए हो सकते हैं। घुटनों का दर्द जो अब जाता नहीं, वह रिपोर्ट जिसका डर आपको रात में जगाए रखता है, आईने में दिखती वह ढलान जिसे आप फोटो में छिपाते हैं, या किसी अपने की वह कमज़ोर काया जिसे आपने अस्पताल के बिस्तर पर देखा। हमारी संस्कृति कहती है: जवानी बचाओ, या फिर शरीर को अनदेखा करके "आध्यात्मिक" बन जाओ। यह वचन दोनों रास्ते काट देता है। आपकी मरनहार देह न पूजा की चीज़ है, न फेंकने की; वह परमेश्वर के वादे की वस्तु है। आज कुछ ही मिनट लीजिए: अपने शरीर का वह हिस्सा जो आपको सबसे ज़्यादा निराश करता है, उस पर हाथ रखकर ज़ोर से कहिए, "इसे भी परमेश्वर जिलाएँगे," और फिर उसी सच्चाई के लिए धन्यवाद दीजिए।

मुख्य पात्र

इस वाक्य में असली कर्ता कोई मनुष्य नहीं। पौलुस परमेश्वर को उनके एक काम से पहचानते हैं: "जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।" यह नाम नहीं, चरित्र-वर्णन है। रोम के देवता शक्ति दिखाते थे, संरक्षण बेचते थे, और मृत्यु के सामने चुप रहते थे। इस्राएल का परमेश्वर वही है जो कब्र के भीतर हाथ डालते हैं। और ध्यान दीजिए, वे यह काम दूर से नहीं करते; वही आत्मा जो कब्र पर काम कर चुके हैं, अब विश्वासी के भीतर "बसा हुआ" है। परमेश्वर यहाँ मालिक नहीं, निवासी हैं। जो परमेश्वर आपके भीतर रहने को तैयार हुए, उनके लिए आपकी देह कोई तुच्छ चीज़ नहीं हो सकती।

एक बारीकी

"बसा हुआ है" शब्द पर रुकिए। ग्रीक शब्द का अर्थ है घर बनाकर रहना, किरायेदार की तरह नहीं, मेहमान की तरह भी नहीं। रोम के सुनने वालों में से कई ऐसे थे जिनके पास अपना घर था ही नहीं; वे किसी बड़े घर के पिछले कमरे में, या किराए की तंग कोठरी में सोते थे, जहाँ से कभी भी निकाला जा सकता था। और उन्हीं से कहा जा रहा है कि परमेश्वर के आत्मा ने तुम्हारे भीतर स्थायी निवास बना लिया है। जिसके पास ठिकाना नहीं, वह स्वयं परमेश्वर का ठिकाना बन गया। मंदिर की भाषा जानबूझकर है: पवित्रता का स्थान अब पत्थर नहीं, यह नश्वर देह है।

शास्त्र की गूँज

इसी अध्याय में आगे पौलुस कहते हैं कि हमारे पास "आत्मा का पहला फल" है और हम "अपनी देह के छुटकारे की प्रतीक्षा" करते हैं। यह वचन 11 को खोल देता है: भीतर बसा आत्मा फसल का पहला गट्ठर है, पूरी फसल अभी आनी बाकी है, इसलिए कराहना और आशा साथ-साथ चलते हैं। और अध्याय के अंत में वही तर्क अपने चरम पर पहुँचता है, जहाँ न मृत्यु, न जीवन, कुछ भी हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग नहीं कर सकता। मृत्यु सूची में पहली है, क्योंकि वही सबसे बड़ा दावेदार लगती है। जी उठे मसीह का आत्मा भीतर हो, तो मृत्यु अंतिम शब्द नहीं, केवल बीच का विराम है।

चिंतन के प्रश्न

आप अपने शरीर के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, उससे क्या पता चलता है कि आप उसे बोझ मानते हैं, मूर्ति, या परमेश्वर के वादे का पात्र?

यदि वही आत्मा जिसने यीशु को जिलाया आप में बसे हुए हैं, तो इस सप्ताह की किस निराशा को आपको आखिरी सच मानना बंद कर देना चाहिए?

Romans में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Romans 1-7 For You

Timothy Keller

Keller opens Paul's masterpiece with clarity and pastoral warmth.

Romans 8-16 For You

Timothy Keller

The second half: assurance, election and everyday Christian living.

The Message of Romans

John Stott

A modern classic on the letter that has changed history more than once.

Romans: An Introduction and Commentary

F.F. Bruce

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Romans

Douglas Moo

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Romans 8:11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

रोमियों 8:11 का क्या अर्थ है?
रोम के किसी किरायेदार कमरे में, जहाँ दास, कारीगर और कुछ धनी स्त्रियाँ एक साथ बैठकर पौलुस की चिट्ठी सुन रहे थे, यह वाक्य ऊँची आवाज़ में पढ़ा गया: "और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।" कहने का अर्थ सीधा है: जिस सामर्थ्य ने कब्र से यीशु को उठा खड़ा किया, वही सामर्थ्य अब विश्वासी के भीतर बसेरा किए हुए है, और वह वहीं रुकने वाली नहीं। जो देह आज थकती है, बीमार पड़ती है और अंत में मिट्टी होती है, उसी देह को परमेश्वर जिलाएँगे। पौलुस आत्मा की बात करते हुए शरीर को पीछे नहीं छोड़ते; वे शरीर को ही वादे के भीतर खींच लाते हैं।
रोमियों 8:11 किस विषय में है?
इस्राएल की सबसे गहरी आशा कभी शरीरविहीन नहीं रही। यहेजकेल को सूखी हड्डियों की घाटी दिखाई गई थी, और वहाँ परमेश्वर का उत्तर यह नहीं था कि आत्माएँ स्वर्ग चली जाएँ, बल्कि यह कि हड्डियाँ जुड़ें, नसें चढ़ें, और उन में श्वास आए। पौलुस उसी धारा में खड़े हैं। मिस्र से निकाले गए लोगों को परमेश्वर ने शरीर समेत छुड़ाया था, और अब मसीह की कब्र खाली होकर उस छुटकारे का अंतिम रूप दिखाती है। यीशु का जी उठना कोई अकेली घटना नहीं, पहला फल है; जो पिता ने पुत्र की देह के साथ किया, वही वे उनके संगी वारिसों की देह के साथ करेंगे। सृष्टि को तोड़कर नहीं, उसे चंगा करके परमेश्वर अपना राज्य पूरा करते हैं।
रोमियों 8:11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इस वाक्य में असली कर्ता कोई मनुष्य नहीं। पौलुस परमेश्वर को उनके एक काम से पहचानते हैं: "जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।" यह नाम नहीं, चरित्र-वर्णन है। रोम के देवता शक्ति दिखाते थे, संरक्षण बेचते थे, और मृत्यु के सामने चुप रहते थे। इस्राएल का परमेश्वर वही है जो कब्र के भीतर हाथ डालते हैं। और ध्यान दीजिए, वे यह काम दूर से नहीं करते; वही आत्मा जो कब्र पर काम कर चुके हैं, अब विश्वासी के भीतर "बसा हुआ" है। परमेश्वर यहाँ मालिक नहीं, निवासी हैं। जो परमेश्वर आपके भीतर रहने को तैयार हुए, उनके लिए आपकी देह कोई तुच्छ चीज़ नहीं हो सकती।
रोमियों 8:11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इसी अध्याय में आगे पौलुस कहते हैं कि हमारे पास "आत्मा का पहला फल" है और हम "अपनी देह के छुटकारे की प्रतीक्षा" करते हैं। यह वचन 11 को खोल देता है: भीतर बसा आत्मा फसल का पहला गट्ठर है, पूरी फसल अभी आनी बाकी है, इसलिए कराहना और आशा साथ-साथ चलते हैं। और अध्याय के अंत में वही तर्क अपने चरम पर पहुँचता है, जहाँ न मृत्यु, न जीवन, कुछ भी हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग नहीं कर सकता। मृत्यु सूची में पहली है, क्योंकि वही सबसे बड़ा दावेदार लगती है। जी उठे मसीह का आत्मा भीतर हो, तो मृत्यु अंतिम शब्द नहीं, केवल बीच का विराम है।
रोमियों 8:11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि वही आत्मा जिसने यीशु को जिलाया आप में बसे हुए हैं, तो इस सप्ताह की किस निराशा को आपको आखिरी सच मानना बंद कर देना चाहिए?
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Romans 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 2

पिता, मैं अक्सर उन्हीं पुरानी जंजीरों में लौट जाता हूँ, जिनसे तूने मुझे छुड़ाया है। आज मुझे याद दिला कि तेरे आत्मा ने मुझे मसीह में आज़ाद कर दिया है। मेरे डर और अपराधबोध पर तेरा जीवन भारी पड़े, और मैं सचमुच स्वतंत्र होकर जीऊँ।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 27

पिता, तू मेरे मन की गहराई तक देखता है, वहाँ भी जहाँ मैं खुद नहीं देख पाता। जब शब्द नहीं मिलते और प्रार्थना अधूरी रह जाती है, तेरा आत्मा मेरे लिए बोलता है। यह जानकर मेरा बोझ हल्का हो जाता है। मुझे भरोसा दे कि तू मेरी चुप्पी भी समझता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो वह परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है और न हो सकता है।"

ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि शरीरिक मन परमेश्वर के अधीन होता नहीं, वह कहता है हो ही नहीं सकता। यही बात हमें तोड़ती है। हम सोचते हैं थोड़ी और कोशिश, थोड़ा और संकल्प। पर यहाँ बात ताकत की नहीं, स्वभाव की है। तुझे सुधार नहीं, नया जीवन चाहिए। और वही तो मसीह देने आया है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 37

पौलुस ने पहले गिनाया था: क्लेश, संकट, उपद्रव, अकाल, नंगाई, संकट, तलवार। और फिर लिखा, "परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्तों से भी बढ़कर हैं।"

ध्यान दे, वह नहीं कहता कि इन बातों से बाहर निकलकर, बल्कि इन्हीं के बीच में। तेरी जीत तेरी परिस्थिति बदलने से नहीं, उस प्रेम से आती है जो आग में तेरे साथ खड़ा है।

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