विश्वास की राह हर मोड़ पर
अटल विश्वास
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए उत्पत्ति 15:6, प्रेरितों के काम 17:22-23, 2 राजा 22:14 and 1 शमूएल 17:2-3.
☀ सुबह का पल
उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धार्मिकता गिना। (रोम. 4:3)
उत्पत्ति 15:6
गिन लिया, यह एक हिसाब-किताब का शब्द है। जैसे कोई सिक्के तौलकर खाते में दर्ज करे, या कोई तराजू को ठीक-ठीक बराबर कर दे। इब्रानी भाषा में जिस शब्द का अनुवाद धार्मिकता किया गया है, उसकी जड़ में यही तस्वीर है, कोई चीज़ जो टेढ़ी थी, उसे सीधा कर देना। कोई चीज़ जो अपनी जगह से हट गई थी, उसे फिर से सही जगह बिठा देना।
हम धार्मिकता पढ़ते हैं और सोचते हैं, व्यक्तिगत पवित्रता, कोई ठीक इंसान होना। पर तसेदाकाह इससे बड़ी बात कहता है। आमोस के पास यही शब्द फिर आता है, जहाँ परमेश्वर चाहते हैं कि न्याय नदी की तरह बहे, और धार्मिकता कभी न सूखने वाली धारा की तरह। वहाँ यह गरीबों के साथ ठीक व्यवहार की, तराजू के सही बाट की, रिश्तों के सीधे होने की बात है। अब्राम के पास कोई संतान नहीं थी, केवल एक वचन। उसने उस वचन पर भरोसा किया, और परमेश्वर ने उस भरोसे को गिन लिया, एक रिश्ता फिर से सीधा हो गया।
आज शनिवार है, घर पर ज़्यादा समय, परिवार के साथ बैठने का दिन। शायद कोई रिश्ता है जो टेढ़ा पड़ा है, कोई बात अधूरी रह गई है।
आज
आज किसी एक टेढ़ी बात को याद करो, घर में या किसी रिश्ते में, और उसे सीधा करने के लिए एक छोटा कदम उठाओ, एक फोन करो, एक वाक्य कहो, या कोई बात साफ करो।
✦ दोपहर का पल
तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा होकर कहा, “हे एथेंस के लोगों, मैं देखता हूँ कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो। क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, ‘अनजाने ईश्वर के लिये।’ इसलिए जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूँ।
प्रेरितों के काम 17:22-23
पौलुस कई दिनों से अकेला अथेन्स की गलियों में घूम रहा था। सीलास और तीमुथियुस अब तक नहीं पहुंचे थे, और हर गली के मोड़ पर एक नई मूर्ति उसका सामना करती थी, पत्थर और संगमरमर में गढ़े हुए देवता, हर गुण के लिए एक अलग प्रतिमा।
अरियुपगुस शहर के बीच एक चट्टानी पहाड़ी थी, एक्रोपोलिस के सामने, खुले आसमान के नीचे। यहीं शहर की सबसे बड़ी परिषद बैठती थी, यहीं दार्शनिक अपने तर्क रखते थे, स्तोइक और एपिक्यूरियन, हर कोई अपनी बात मनवाने के लिए। यह निर्णय और बहस दोनों की जगह थी।
पौलुस ने वहाँ किसी को नीचा नहीं दिखाया। उसने उनकी ही एक वेदी उठाई, वह वेदी जो उन्होंने उस देवता के लिए बनाई थी जिसे वे जानते तक नहीं थे, और उसी से बात शुरू की। उसने दूर से हमला नहीं किया, पास से बात की।
शनिवार की इस दोपहर, मेज पर बैठे लोगों में भी शायद कोई ऐसा है जो अब तक किसी अज्ञात को ढूंढ रहा है, बिना नाम जाने। उसे नीचा दिखाने की ज़रूरत नहीं, बस उसकी खोज को पहचानने की ज़रूरत है।
आज
आज दोपहर के भोजन के बाद एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखें जो अब तक परमेश्वर को नहीं जानता, और उस नाम को पढ़कर उसके लिए एक वाक्य में ज़ोर से प्रार्थना करें।
◐ दोपहर का पल
So Hilkiah the priest, and Ahikam, and Achbor, and Shaphan, and Asaiah, went to Huldah the prophetess, the wife of Shallum the son of Tikvah, the son of Harhas, keeper of the wardrobe (now she lived in Jerusalem in the second quarter); and they talked with her.
2 राजा 22:14
यह मान लिया जाता है कि बड़े फैसलों की पुष्टि सदा बड़े पदों से होती है, मुख्य पुजारी से, राजा के मंत्रियों से, मंदिर के अधिकारियों से। यह पाठ चुपचाप इस धारणा को तोड़ देता है, राजा के सबसे भरोसेमंद अधिकारी एक ऐसी स्त्री के पास जाते हैं जिसका नाम इतिहास में बहुत कम मिलता है।
मंदिर की मरम्मत के दौरान एक पुरानी पुस्तक मिलती है, व्यवस्था की पुस्तक, जो सालों से भुला दी गई थी। हिल्किय्याह महापुजारी और राजा के अधिकारी इसे पढ़ते हैं और घबरा जाते हैं। वे इसे समझने के लिए सीधे हुल्दा नबिया के पास जाते हैं, जो यरूशलेम के दूसरे हिस्से में रहती थी, और जिसका पति शल्लूम राजमहल के वस्त्रों की देखरेख करता था। एक साधारण घर, कोई बड़ा मंदिर का पद नहीं, फिर भी वहीं परमेश्वर का वचन बोला जाता है।
राजा योशिय्याह और उसके सलाहकारों के पास अधिकार था, शास्त्री थे, पुजारी थे, फिर भी वे खुद यह तय नहीं कर सकते थे कि यह पुरानी पुस्तक सच में परमेश्वर का वचन है या नहीं। उन्हें झुकना पड़ा, अपने पदों से बाहर निकलकर एक ऐसी आवाज़ तक जाना पड़ा जिसे उन्होंने खुद नहीं चुना था।
आज भी कोई पुराना वचन, कोई भूला हुआ पन्ना, अपने आप कुछ नहीं कहता जब तक कोई उसे ज़ोर से नहीं पढ़ता। हमें अक्सर किसी और की आवाज़ चाहिए होती है, जो हमसे ज़्यादा पदवी वाली नहीं, बल्कि परमेश्वर के करीब चलने वाली हो, ताकि हम सुन सकें कि यह वचन सच में हमारे लिए है।
आज
आज कोई पुरानी डायरी, पुराना पत्र, या अपनी बाइबल का वह हिस्सा निकालो जिसे महीनों से नहीं खोला। किसी विश्वासी मित्र को फोन करो, उससे वह अंश पढ़कर सुनाने को कहो, और पूछो कि उसे उसमें परमेश्वर की आवाज़ कहां सुनाई देती है।
☾ संध्या का क्षण
शाऊल और इस्राएली पुरुषों ने भी इकट्ठे होकर एला नामक तराई में डेरे डाले, और युद्ध के लिये पलिश्तियों के विरुद्ध पाँति बाँधी। पलिश्ती तो एक ओर के पहाड़ पर और इस्राएली दूसरी ओर के पहाड़ पर खड़े रहे; और दोनों के बीच तराई थी।
1 शमूएल 17:2-3
दोनों पहाड़ियों के बीच खुली जमीन, नीचे एक सूखी नदी की तली, उसमें पड़े चिकने गोल पत्थर जो सदियों से बहते पानी ने मांजे थे। चालीस दिन तक सुबह शाम वही ललकार इन्हीं ढलानों से टकराकर गूंजती रही, और नीचे की तराई खाली पड़ी रही, किसी ने उसमें पैर रखने का साहस नहीं किया।
एला की तराई कोई संकरी घाटी नहीं थी, एक चौड़ा, खुला मैदान था, जहां दोनों सेनाएं अपने अपने पहाड़ पर टिकी रहीं। पहाड़ पर खड़े रहना सुरक्षित था, नीचे उतरना जोखिम। यही वह जगह थी जहां डर और विश्वास आमने सामने आए, बीच में कोई आड़ नहीं, कोई छिपने की जगह नहीं, सिर्फ खुला मैदान और एक नदी की तली जिसमें पांच पत्थर पड़े थे।
यही तराई याद दिलाती है कि कुछ लड़ाइयां पहाड़ पर खड़े रहकर नहीं लड़ी जातीं। उतरना पड़ता है, खुले में आना पड़ता है, वहां जहां बचने का कोई रास्ता नहीं बचता।
आज शनिवार की इस शांत शाम में सोचिए, आपके जीवन में वह कौन सी तराई है, वह खुला मैदान जिससे आप बचते रहे हैं, जिसे आप पहाड़ पर से ही देखते रह गए हैं। परमेश्वर उसी खुले मैदान में भी साथ चलने को तैयार हैं।
आज
आज बाहर जाकर एक चिकना पत्थर उठाइए, आंगन से, रास्ते से, कहीं से भी। उसे खिड़की की चौखट पर रख दीजिए, और उसे देखकर याद कीजिए कि छोटी चीज़ों में भी परमेश्वर का साहस छिपा होता है।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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6उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धार्मिकता गिना। (रोम. 4:3)
22तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा होकर कहा, “हे एथेंस के लोगों, मैं देखता हूँ कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो।
23क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, ‘अनजाने ईश्वर के लिये।’ इसलिए जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूँ।
2शाऊल और इस्राएली पुरुषों ने भी इकट्ठे होकर एला नामक तराई में डेरे डाले, और युद्ध के लिये पलिश्तियों के विरुद्ध पाँति बाँधी।
3पलिश्ती तो एक ओर के पहाड़ पर और इस्राएली दूसरी ओर के पहाड़ पर खड़े रहे; और दोनों के बीच तराई थी।
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