थके मन को विश्राम की पुकार
विश्राम की पुकार
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यशायाह 40:28, नीतिवचन 18:21, अय्यूब 30:20 and भजन संहिता 55:6.
☀ सुबह का पल
क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सृजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।
यशायाह 40:28
खिड़की के बाहर अभी हल्की रोशनी है। कमरे में सन्नाटा है, बस घड़ी की आवाज़ सुनाई देती है।
तुम्हारी आँखें अभी पूरी तरह खुली नहीं हैं, पर दिमाग़ पहले से दौड़ने लगा है, आज की सूची, वे बातचीत जो टालनी नहीं चाहिए, वह थकान जो कल रात भी पूरी तरह नहीं गई। और यहीं यह वचन आकर खड़ा हो जाता है, बिना किसी शोर के।
यशायाह की यह बात किसी काल्पनिक देवता की नहीं है, यह उस परमेश्वर की है जिसने पृथ्वी के छोर तक सब कुछ रचा। वह न थकता है, न शिथिल होता है। तुम्हारी सुबह की थकान उसकी शक्ति को छूती तक नहीं। और उसकी बुद्धि की थाह नहीं मिलती, यानी जो उलझन तुम्हें समझ नहीं आती, वह उसकी नज़र से छिपी नहीं है।
यह जानना राहत देता है, आज पूरा दिन तुम्हें अकेले नहीं संभालना। जिसने सूरज को हर सुबह उगाया, वही तुम्हारे दिन को भी थामे हुए है, चाहे वह कैसा भी निकले।
आज
आज सुबह, बिस्तर से उठने से पहले, अपने मन में सबसे भारी चिंता को एक शब्द में नाम दो, और चुपचाप कहो, यहोवा नहीं थकता। फिर उठ जाओ।
✦ दोपहर का पल
जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा।
नीतिवचन 18:21
लंच टेबल पर की गई बातें बस हवा में उड़ जाती हैं, ऐसा माना जाता है। सहकर्मी की शिकायत, बॉस के बारे में एक तीखा मज़ाक, किसी की पीठ पीछे एक टिप्पणी, इन सबको हम हल्के में लेते हैं क्योंकि ये तो बस दस मिनट की बातचीत है। पर यह वचन उस भ्रम को तोड़ देता है।
ज़बान में जीवन और मृत्यु दोनों की ताकत बताई गई है। जो शब्द हम लंच ब्रेक में उछालते हैं वे भी उतने ही वज़नी हैं जितने किसी गंभीर मीटिंग में बोले गए शब्द। एक कड़वा वाक्य किसी का दिन तोड़ सकता है, और एक सच्चा प्रोत्साहन किसी को उठा भी सकता है।
दिन के बीच में जब थकान बढ़ती है, तब ज़बान पर नियंत्रण रखना सबसे कठिन होता है। यही वह समय है जब शिकायत सबसे आसान लगती है और तीखी बात मुँह से जल्दी निकलती है।
यह वचन हमें रोकता नहीं, बल्कि चुनाव करने को कहता है। जो अपनी ज़बान से प्रीति रखते हैं, यानी उसका सोच समझकर उपयोग करते हैं, वे उसका अच्छा फल भी पाते हैं।
आज
आज दोपहर के भोजन के समय, अपने किसी सहकर्मी या घर के किसी सदस्य से एक ऐसा वाक्य कहो जो उन्हें उत्साहित करे। कोई शिकायत नहीं, कोई तीखी टिप्पणी नहीं, सिर्फ एक सच्चा और भला शब्द, बस इतना ही काफी है।
◐ दोपहर का पल
मैं तेरी दुहाई देता हूँ, परन्तु तू नहीं सुनता; मैं खड़ा होता हूँ परन्तु तू मेरी ओर घूरने लगता है।
अय्यूब 30:20
तीन बजे का सन्नाटा सबसे भारी होता है।
सुबह की भागदौड़ खत्म हो चुकी है, शाम अभी दूर है, और इसी बीच के खाली समय में सवाल सिर उठाते हैं। अय्यूब ने भी ऐसे ही किसी पल में पुकारा होगा, न सुबह की जल्दबाजी में, न रात के अंधेरे में, बल्कि उस थके हुए मध्याह्न में जब सब कुछ छिन चुका था और उत्तर कहीं नहीं था।
यह पंक्ति आराम नहीं देती। अय्यूब यह नहीं कहता कि परमेश्वर ने जवाब दे दिया और सब ठीक हो गया। वह कहता है कि उसने पुकारा, और उत्तर नहीं मिला। वह खड़ा हुआ, अपनी पीड़ा दिखाने, और परमेश्वर ने बस देखा। यह वाक्य किसी भी आसान उपदेश से ज़्यादा ईमानदार है।
शायद आज भी कोई मेल अनुत्तरित पड़ी है, कोई प्रार्थना जिसका जवाब हफ्तों से नहीं आया, कोई निर्णय जिसमें परमेश्वर चुप हैं। इस पंक्ति को पढ़कर उस चुप्पी को झूठा साबित करने की ज़रूरत नहीं। अय्यूब की किताब भी तुरंत जवाब नहीं देती, वह चुप्पी को वहीं रहने देती है।
आज
एक कागज़ का टुकड़ा लो और वह एक सवाल या प्रार्थना लिख दो जिसका उत्तर अभी तक नहीं मिला है। उसे ऊँची आवाज़ में एक बार पढ़ो, फिर उसे अपनी मेज़ पर या बाइबल के पन्ने के बीच रख दो, बिना यह उम्मीद किए कि आज ही जवाब आ जाएगा।
☾ संध्या का क्षण
तब मैंने कहा, “भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
भजन संहिता 55:6
दाऊद का सबसे करीबी दोस्त उसके खिलाफ हो गया था, कोई विश्वासघात इतना गहरा था कि दाऊद अब लड़ना नहीं चाहता था, वह सिर्फ भागना चाहता था। उसने अपने भीतर की थकान को छिपाया नहीं, बल्कि कह दिया, काश मेरे पास पंख होते, मैं उड़ जाता और विश्राम पाता।
बुधवार की शाम भी कभी-कभी वैसी ही होती है। मीटिंग खत्म हो गई, काम पूरा हुआ या अधूरा रह गया, फिर भी मन कहीं दूर उड़ जाना चाहता है, किसी ऐसी जगह जहाँ कोई माँग न हो, कोई सूची न हो।
दाऊद उड़ नहीं पाया, वह भागा नहीं। उसने अपनी थकी हुई इच्छा को शब्द दिए और उन शब्दों को परमेश्वर के सामने रख दिया। यही वह रास्ता है जो असली विश्राम की ओर जाता है, भागना नहीं, बल्कि सौंप देना।
थकान को स्वीकार करना कमजोरी नहीं है, यह प्रार्थना की शुरुआत है। परमेश्वर आपसे झूठी मुस्कान नहीं चाहता, वह आपका सच्चा दिल चाहता है, जैसा वह आज शाम है।
आज
आज रात सोने से पहले एक कागज़ पर वह एक बात लिख दें जो आज आपको सबसे ज़्यादा थका गई। फिर उस कागज़ को धीरे से मोड़कर दराज़ में रख दें और कहें, प्रभु, मैं इसे आज रात आपके हाथों में सौंपता हूँ।
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28क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सृजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।
21जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा।
20मैं तेरी दुहाई देता हूँ, परन्तु तू नहीं सुनता; मैं खड़ा होता हूँ परन्तु तू मेरी ओर घूरने लगता है।
6तब मैंने कहा, “भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
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