बाइबल पुस्तक

श्रेष्ठगीत की पुस्तक: प्रेम, पवित्रता और मसीह के प्रेम की झलक

परिचय

कल्पना कीजिए कि आप पहली बार बाइबल पढ़ रहे हैं और नीतिवचन की व्यावहारिक सीखों के बाद पन्ना पलटते हैं। अचानक सामने आता है एक गीत, जिसमें कोई उपदेश नहीं, कोई आज्ञा नहीं, कोई व्यवस्था नहीं। एक स्त्री अपने प्रेमी को पुकार रही है, एक पुरुष अपनी दुल्हन की सुंदरता का वर्णन कर रहा है, और चारों ओर अनार, सोसन के फूल, दाखमधु और बागों की सुगंध है। परमेश्वर का नाम तक सीधे-सीधे नहीं आता। मन में सवाल उठता है: यह पुस्तक बाइबल में कर क्या रही है?

यही सवाल सदियों से विश्वासियों के मन में रहा है, और यही सवाल इस पन्ने का शुरुआती बिंदु है। आगे आप जानेंगे कि श्रेष्ठगीत किसने लिखा, कब लिखा, इसकी बनावट कैसी है, इसके मुख्य पद क्या सिखाते हैं, यह पूरी बाइबल की कहानी में कहाँ बैठता है, और सबसे बढ़कर, यह गीत मसीह के प्रेम की कैसी अनमोल झलक हमारे सामने रखता है।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

हम श्रेष्ठगीत को एक गुप्त पहेली की तरह नहीं पढ़ेंगे जिसे "खोलना" है, और न ही केवल एक वैवाहिक पुस्तिका की तरह। हमारा दृष्टिकोण यह है: श्रेष्ठगीत अदन का वह बाग़ है जो फिर से खुल गया। उत्पत्ति में दो लोग एक बाग़ में बिना लज्जा के खड़े थे; पाप के बाद काँटे, छिपाव और दोषारोपण आ गए। श्रेष्ठगीत में अचानक फिर बाग़ है, फिर नग्नता बिना लज्जा के है, फिर प्रेम बोल रहा है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर ने देह, प्रेम और वाचा को शाप नहीं, वरदान बनाया था, और यह उस दिन की ओर इशारा करता है जब मेम्ने का विवाह होगा।

बाइबल श्रेष्ठगीत की पुस्तक के बारे में क्या कहती है?

पुस्तक अपना परिचय खुद देती है: यह "श्रेष्ठगीत" है, यानी गीतों में सबसे उत्तम गीत, सुलैमान का गीत। इब्रानी भाषा में यह अतिश्रेष्ठता दिखाने का तरीका है, जैसे "परम पवित्र स्थान" या "राजाओं का राजा"। बाइबल कह रही है कि जितने भी गीत गाए गए, उनमें यह सबसे ऊँचा है। यह दावा छोटा नहीं है, और यह हमें तुरंत सिखाता है कि प्रेम का गीत परमेश्वर की दृष्टि में सस्ती चीज़ नहीं।

पुस्तक का हृदय दो लोगों की आवाज़ों में धड़कता है। दुल्हन बोलती है, दूल्हा उत्तर देता है, और बीच-बीच में यरूशलेम की पुत्रियाँ टिप्पणी करती हैं। कोई कथावाचक हमें नहीं बताता कि क्या सोचना है; हम सीधे प्रेम के भीतर खड़े कर दिए जाते हैं। और उस प्रेम का पहला चिह्न सुरक्षा है। श्रेष्ठगीत 2:4 कहता है, "वह मुझे दाखमधु के घर में ले आया, और मेरे ऊपर उसका झण्डा प्रेम ही का था।" झण्डा युद्ध का शब्द है; सेनाएँ झण्डे के नीचे इकट्ठी होती थीं और पहचानी जाती थीं। यहाँ दुल्हन के ऊपर जो झण्डा फहरा रहा है, उस पर लिखा है "प्रेम"। उसे ढाँपा गया है, दावा किया गया है, सार्वजनिक रूप से अपनाया गया है। बाग़ में लौटने का यही अर्थ है: वहाँ छिपना नहीं पड़ता।

फिर आती है पूरी पुस्तक की सबसे प्यारी पंक्ति, जो दो बार लौटकर आती है। श्रेष्ठगीत 2:16 में दुल्हन कहती है, "मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ; वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन के फूलों के बीच में चराता है।" और श्रेष्ठगीत 6:3 में वही बात क्रम बदलकर आती है, "मैं अपने प्रेमी की हूँ और मेरा प्रेमी मेरा है, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन के फूलों के बीच में चराता है।" पहले "वह मेरा है", फिर "मैं उसकी हूँ"। यह क्रम का बदलना संयोग नहीं लगता; प्रेम जैसे-जैसे परिपक्व होता है, वैसे-वैसे ज़ोर "मुझे क्या मिला" से हटकर "मैं किसकी हूँ" पर चला जाता है। यह वाचा की भाषा है, वही भाषा जो परमेश्वर अपने लोगों से बार-बार कहते हैं: मैं तुम्हारा परमेश्वर, तुम मेरी प्रजा।

दूल्हे के मुँह से निकला वाक्य और भी चौंकाने वाला है। श्रेष्ठगीत 4:7 कहता है, "हे मेरी प्रिय तू सर्वांग सुन्दरी है; तुझ में कोई दोष नहीं है।" यही वह स्त्री है जिसने पहले अध्याय में कहा था कि वह साँवली है, कि उसके भाइयों ने उससे दाख की बारियों की रखवाली करवाई और वह अपनी ही बारी की रखवाली न कर सकी। अपनी नज़र में वह थकी हुई और धूप से झुलसी हुई है; प्रेमी की नज़र में वह निर्दोष है। बाइबल में प्रेम ऐसा ही काम करता है: वह देखता भी है और ढाँपता भी है।

और अंत में पुस्तक अपनी चोटी पर पहुँचती है। श्रेष्ठगीत 8:6 घोषणा करता है, "मुझे नगीने के समान अपने हृदय पर, और नगीने के समान अपनी बाँह पर लगाए रह, क्योंकि प्रेम मृत्यु के समान सामर्थी है, और ईर्ष्या कब्र के समान निर्दय है। उसकी ज्वाला अग्नि की दमक है वरन् परमेश्वर ही की ज्वाला है।" यहीं, पहली और एकमात्र बार, परमेश्वर का नाम छाया की तरह सामने आता है। प्रेम की लौ कोई मानवीय भावना नहीं, वह परमेश्वर ही की ज्वाला है। और श्रेष्ठगीत 8:7 जोड़ता है, "पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता, और महानदों से भी वह डूब नहीं सकता। यदि कोई अपने घर की सम्पत्ति प्रेम की सन्ती दे दे तौभी वह अत्यन्त तुच्छ ठहरेगी।" प्रेम न बाढ़ से बुझता है, न पैसे से खरीदा जाता है। यही इस पूरी पुस्तक का निचोड़ है।

बाइबल में चलने वाला सूत्र

बाइबल की कहानी एक विवाह से शुरू होती है और एक विवाह पर खत्म होती है, और श्रेष्ठगीत ठीक बीच में खड़ा होकर दोनों की ओर इशारा करता है।

उत्पत्ति 2 में परमेश्वर एक बाग़ लगाते हैं, एक पुरुष और एक स्त्री को एक साथ जोड़ते हैं, और अध्याय इस टिप्पणी पर खत्म होता है कि वे दोनों नंगे थे पर लज्जित न थे। अगला ही अध्याय बताता है कि यह खुलापन टूट गया: अंजीर के पत्ते, झाड़ियों में छिपना, और एक-दूसरे पर दोष डालना। तब से मानव प्रेम घायल चलता है। इसी पृष्ठभूमि में श्रेष्ठगीत का बाग़ चौंकाता है। यहाँ फिर से सुगंध है, फिर से देह की सराहना है, फिर से बिना शर्म का आनंद है। यह गीत कहता है कि परमेश्वर ने जो आरंभ में अच्छा कहा था, वह आज भी अच्छा है, और छुटकारे का अर्थ केवल पाप से बचना नहीं, खोई हुई सुंदरता का लौटना भी है।

भविष्यद्वक्ताओं ने इसी चित्र को उठाकर इस्राएल पर लगाया। होशे को एक विश्वासघाती पत्नी से विवाह करने को कहा गया, ताकि इस्राएल समझे कि परमेश्वर का दुख प्रेमी का दुख है, कोई ठंडी न्यायिक नाराज़गी नहीं। यशायाह ने कहा कि जैसे दूल्हा दुल्हन से हर्षित होता है, वैसे ही परमेश्वर अपने लोगों से हर्षित होते हैं। यिर्मयाह ने जंगल में इस्राएल के "सुहाग के दिनों" के प्रेम को याद किया। यहेजकेल 16 में परमेश्वर एक त्यागी हुई कन्या को उठाकर, धोकर, वस्त्र पहनाकर अपनी वाचा में लेते हैं। भविष्यद्वक्ताओं के लिए मूर्तिपूजा केवल नियम तोड़ना नहीं था, वह व्यभिचार था। और जहाँ व्यभिचार की भाषा हो, वहाँ पहले विवाह का प्रेम रहा होगा।

नया नियम इस सूत्र को उठाकर यीशु मसीह के हाथ में रख देता है। यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने स्वयं को दूल्हे का मित्र कहा और मसीह को दूल्हा। यीशु ने अपने चेलों को विवाह के बारातियों की तरह बताया, जो दूल्हे के साथ रहते हुए उपवास नहीं कर सकते। पौलुस इसे खुलकर कहता है। इफिसियों 5:25 लिखता है, "हे पतियों, अपनी-अपनी पत्नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया," और कुछ ही पदों बाद वह उत्पत्ति 2 को उद्धृत करके कहता है कि यह भेद गंभीर है, और वह मसीह और कलीसिया के विषय में कहता है। यानी पौलुस के अनुसार विवाह कभी भी केवल विवाह नहीं था; वह शुरू से ही एक बड़ी सच्चाई का चित्र था।

और प्रकाशितवाक्य में बाग़ पूरी तरह खुल जाता है: मेम्ने का विवाह, दुल्हन का तैयार होना, और नई सृष्टि के बीच बहती जीवन के जल की नदी के किनारे जीवन का वृक्ष। श्रेष्ठगीत 4:7 का "तुझ में कोई दोष नहीं है" उस दिन शब्दशः सच होगा, क्योंकि मसीह अपनी कलीसिया को निष्कलंक और निर्दोष बनाकर अपने सामने खड़ा करेंगे।

बाइबल एक बाग़ में खुलती है और एक विवाह में पूरी होती है।

रचना और मुख्य विषय

पुस्तक का पहला पद इसे सुलैमान से जोड़ता है, और यह जुड़ाव कई तरह से समझा गया है: सुलैमान द्वारा लिखा गया, सुलैमान के लिए लिखा गया, या सुलैमान की परंपरा में संकलित। 1 राजा 4 बताता है कि सुलैमान ने एक हज़ार पाँच गीत रचे; यदि उनमें से एक बच गया है, तो आश्चर्य नहीं कि वह "गीतों का गीत" कहलाए। परंपरागत तिथि दसवीं शताब्दी ईसा पूर्व है, यानी इस्राएल के राज्य के स्वर्णकाल में, जब तिरज़ा और यरूशलेम दोनों समृद्ध थे और लबानोन से मिस्र तक का व्यापार चल रहा था। पुस्तक में आए विदेशी सुगंधद्रव्यों, नगरों और दरबारी दृश्यों की भरमार इसी दुनिया की ओर इशारा करती है। कुछ विद्वान भाषा के आधार पर बाद के संपादन की बात करते हैं, पर इससे पुस्तक का संदेश या उसका अधिकार कम नहीं होता।

एक ईमानदार बात कहनी ज़रूरी है: सुलैमान का अपना वैवाहिक जीवन इस गीत के आदर्श पर खरा नहीं उतरा। सात सौ रानियाँ और तीन सौ रखैलें उस एकनिष्ठ प्रेम का उल्टा हैं जिसकी यह पुस्तक प्रशंसा करती है। इसलिए कई पाठक श्रेष्ठगीत को एक प्रकार की पुकार के रूप में पढ़ते हैं: वह प्रेम जो राजा के महल में खो गया, वह एक चरवाहे और उसकी दुल्हन के बीच जीवित है। गीत हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम संख्या से नहीं, समर्पण से नापा जाता है।

बनावट में यह नाटक नहीं, बल्कि गीतों की एक माला है। लगभग आठ अध्यायों में हम कई चरणों से गुज़रते हैं: पहली लालसा और बुलाहट, बसंत में प्रेमी का आना और "उठ, मेरी प्रिय, चली आ" की पुकार, विवाह का जुलूस और सुहागरात, फिर रात में खोने और ढूँढ़ने का बेचैन दृश्य, पुनर्मिलन, और अंत में अध्याय आठ की वह गंभीर घोषणा जो पूरे गीत को वाचा की मुहर लगा देती है। पुस्तक को बाँधने वाले कुछ दोहराव हैं: "मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ" की पारस्परिकता, यरूशलेम की पुत्रियों से बार-बार की गई वह विनती कि प्रेम को समय से पहले न जगाया जाए, और बाग़, सुगंध तथा बंद किए हुए सोते का चित्र, जहाँ दुल्हन स्वयं एक सुरक्षित बाग़ कहलाती है जिसकी चाबी केवल उसके पति के पास है।

मुख्य विषय चार हैं और वे आपस में गुँथे हुए हैं। पहला, पारस्परिकता: यहाँ कोई मालिक और संपत्ति नहीं, दोनों एक-दूसरे की प्रशंसा करते हैं, दोनों पहल करते हैं, दोनों एक-दूसरे के हैं। दूसरा, देह की पवित्रता: शरीर का वर्णन न अश्लील है न शर्मनाक, क्योंकि वह वाचा की सीमा के भीतर है। तीसरा, प्रेम की शक्ति और गंभीरता: श्रेष्ठगीत 8:6 के अनुसार प्रेम मृत्यु के समान सामर्थी है, इसलिए उसे खिलौना बनाकर खेलना खतरनाक है। चौथा, धैर्य: प्रेम को जगाने का एक सही समय होता है, और उसे जल्दबाज़ी से उकसाना उसे घायल करना है। यह गीत देह से नहीं डरता, पर उसे सस्ता भी नहीं करता।

इस पुस्तक के मुख्य पद

श्रेष्ठगीत 2:16, "मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ," इस पुस्तक का सबसे अधिक दोहराया जाने वाला सत्य है और इसका वज़न केवल रोमानी नहीं। इब्रानी बाइबल में यह "मैं तुम्हारा परमेश्वर और तुम मेरी प्रजा" वाली वाचा-भाषा की प्रतिध्वनि है। जब दुल्हन यह कहती है, तो वह अपने प्रेमी की भावनाओं का हाल नहीं बता रही; वह एक संबंध की कानूनी और आत्मिक स्थिरता की घोषणा कर रही है। और यही बात विश्वासी के लिए सबसे बड़ी सांत्वना है: आपके और मसीह के बीच का संबंध आपके आज के मूड पर नहीं, उनकी वाचा पर टिका है। श्रेष्ठगीत 6:3 में जब क्रम पलटकर "मैं अपने प्रेमी की हूँ" पहले आता है, तो हम परिपक्वता की ओर बढ़ते हुए देखते हैं; विश्वास की यात्रा भी इसी दिशा में चलती है, माँगने से समर्पण की ओर।

श्रेष्ठगीत 4:7, "हे मेरी प्रिय तू सर्वांग सुन्दरी है; तुझ में कोई दोष नहीं है," उस व्यक्ति के लिए लिखा गया है जो आईने में खड़ा होकर अपनी कमियाँ गिनता है। ध्यान दीजिए कि यह वाक्य दुल्हन के सुधर जाने के बाद नहीं आता, बल्कि तब जब वह स्वयं को धूप से झुलसी और उपेक्षित मानती है। बाइबल की पूरी गवाही यही है कि परमेश्वर का प्रेम हमारी योग्यता का इनाम नहीं, हमारी पहचान की नींव है। इफिसियों 5 में पौलुस कहता है कि मसीह कलीसिया को धोकर, पवित्र करके, बिना धब्बे या झुर्री के अपने सामने खड़ा करते हैं। निर्दोषता कोई दिखावा नहीं; वह दूल्हे का दिया हुआ उपहार है।

श्रेष्ठगीत 8:6 और श्रेष्ठगीत 8:7 मिलकर पुस्तक की मुहर हैं। "प्रेम मृत्यु के समान सामर्थी है" का अर्थ है कि प्रेम उतना ही अटल और अपरिहार्य है जितनी मौत; जहाँ मृत्यु किसी को छोड़ती नहीं, वहाँ सच्चा प्रेम भी पकड़ नहीं छोड़ता। "उसकी ज्वाला... परमेश्वर ही की ज्वाला है" बताता है कि प्रेम का स्रोत ऊपर से है, इसलिए वह इंसानी हालात से बुझता नहीं। और श्रेष्ठगीत 8:7 दो परीक्षाओं की बात करता है: बाढ़ और बाज़ार। संकट उसे डुबा नहीं सकता, और पैसा उसे खरीद नहीं सकता। क्रूस पर यही दोनों सच साबित हुए; न परमेश्वर के क्रोध की बाढ़ ने मसीह के प्रेम को बुझाया, और न ही तीस चाँदी के सिक्कों ने उसे खरीदा।

इस पुस्तक को पढ़ने की व्यावहारिक मार्गदर्शिका

सबसे पहले इसे एक ही बैठक में, आवाज़ निकालकर पढ़िए। आठ अध्याय लगभग बीस से पच्चीस मिनट लेते हैं, और यह गीत है, इसलिए कानों से सुनने पर इसका असर आँखों से पढ़ने की तुलना में कहीं गहरा होता है। पहली बार पढ़ते समय हर रूपक का अर्थ निकालने की कोशिश मत कीजिए। कविता पहले दिल को छूती है, फिर दिमाग को समझाती है।

दूसरी बार पढ़ते समय आवाज़ों पर निशान लगाइए। कौन बोल रहा है, दुल्हन, दूल्हा या यरूशलेम की पुत्रियाँ? कई हिंदी बाइबलों में शीर्षक दिए होते हैं, पर उन पर पूरी तरह निर्भर मत रहिए; क्रियाओं के स्त्रीलिंग और पुल्लिंग रूपों से भी बहुत कुछ साफ़ हो जाता है। जब आप आवाज़ें अलग-अलग करके पढ़ेंगे, तो पुस्तक एक उलझी हुई कविता से निकलकर एक जीवित बातचीत बन जाएगी।

तीसरी बार दोहरावों को ढूँढ़िए। "मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ" कहाँ-कहाँ आता है और उसका क्रम कहाँ बदलता है। प्रेम को समय से पहले न जगाने की विनती कितनी बार लौटती है और हर बार उसके आसपास क्या हो रहा है। बाग़, सुगंध, सोसन और सोते के चित्र कैसे पूरी पुस्तक को जोड़ते हैं। दोहराव इब्रानी कविता के मील के पत्थर हैं; वे बताते हैं कि लेखक किस बात पर ज़ोर देना चाहता है।

चौथी बार इसे बाइबल की बड़ी कहानी में रखकर पढ़िए। साथ में उत्पत्ति 2, होशे 2, यशायाह 62, इफिसियों 5 और प्रकाशितवाक्य 19 पढ़िए। तब आपको वह बाग़ दिखाई देगा जो खो गया था और जो फिर खुलने वाला है। यहीं संयम भी ज़रूरी है: हर अनार और हर ताला मसीह के किसी गुण का कोड नहीं है। पुस्तक को पहले वही कहने दीजिए जो वह कह रही है, मानव प्रेम की पवित्र सुंदरता, और फिर उस प्रेम को उस महान प्रेम की ओर इशारा करने दीजिए जिसने हमें खरीदा।

अंत में, इसे प्रार्थना में बदलिए। यदि आप विवाहित हैं, तो एक-एक अध्याय अपने जीवनसाथी के साथ पढ़िए और पूछिए कि हमारे घर से कौन-सी सुगंध गायब हो गई है। यदि आप अविवाहित हैं, तो श्रेष्ठगीत 8:7 को अपनी प्रार्थना बनाइए, कि आपका हृदय सस्ते सौदों में न बिके। और चाहे आपकी स्थिति कुछ भी हो, श्रेष्ठगीत 4:7 को ज़ोर से पढ़कर मसीह से कहिए कि आप उनकी दृष्टि पर अपनी दृष्टि से अधिक भरोसा करना चाहते हैं।

दर्पण

अब सीधे आपसे बात। आप शायद उस स्त्री की तरह हैं जिसने कहा था कि उसने दूसरों की दाख की बारियों की रखवाली की, पर अपनी ही बारी की रखवाली न कर सकी। ऑफिस के प्रोजेक्ट, बच्चों की फीस, रिश्तेदारों की अपेक्षाएँ, कलीसिया की सेवकाई; इन सबकी रखवाली में आपकी अपनी बारी सूख रही है। आपका विवाह चल तो रहा है, पर उसमें कोई सुगंध नहीं बची। आप एक ही कमरे में रहते हैं और महीनों से एक-दूसरे को देखा नहीं है।

या शायद आप आईने के सामने खड़े होकर वही करते हैं जो यह दुल्हन करती थी, अपनी कमियाँ गिनते हैं। आपका शरीर वैसा नहीं जैसा आप चाहते थे, आपकी उम्र बढ़ रही है, आपका अतीत साफ़ नहीं है। और जब श्रेष्ठगीत 4:7 पढ़ते हैं, तो मन कहता है कि यह मेरे लिए नहीं हो सकता। ठहरिए। मसीह आपको वैसा ही नहीं कहते जैसा आप अपने आप को कहते हैं। उन्होंने आपको जानते हुए चुना और जानते हुए अपने आपको आपके लिए दे दिया।

या शायद आपका दर्द दूसरी तरफ़ है। आपने प्रेम को समय से पहले जगा दिया और अब उसकी चोट ढो रहे हैं। एक रिश्ता जो वादे के बिना शुरू हुआ, एक स्क्रीन पर बनी लत, एक ऐसा समझौता जिसे आपने "बस इतना ही तो है" कहकर मान लिया था। श्रेष्ठगीत 8:7 आपसे कह रहा है कि जो चीज़ पैसे से नहीं खरीदी जा सकती, उसे आपने सस्ते में क्यों दे दिया? यह सवाल शर्मिंदा करने के लिए नहीं, घर लौटाने के लिए है।

और शायद आप अकेले हैं। विवाह नहीं हुआ, या साथी चला गया, और यह पुस्तक आपके ज़ख्म पर नमक जैसी लगती है। तो सुनिए: इस गीत की सबसे गहरी पंक्ति सिंगल या विवाहित होने के बारे में नहीं, एक ऐसी ज्वाला के बारे में है जो परमेश्वर से निकलती है। वह ज्वाला आपके अकेलेपन की बाढ़ में भी नहीं बुझती। आप पहले से ही एक दूल्हे के प्रेम के झण्डे के नीचे खड़े हैं।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चों को श्रेष्ठगीत समझाने में माता-पिता अक्सर घबरा जाते हैं, पर घबराने की ज़रूरत नहीं। बच्चों को पूरी कविता की हर पंक्ति समझाने की आवश्यकता नहीं है; उन्हें इस पुस्तक का दिल बताइए, और वह बहुत सरल है। कह सकते हैं: "बाइबल में एक गीत है जो बताता है कि जब दो लोग एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं, तो वह कितनी सुंदर चीज़ होती है। परमेश्वर ने प्यार बनाया है, इसलिए प्यार गंदी बात नहीं, पवित्र बात है। और यह गीत हमें यह भी याद दिलाता है कि यीशु मसीह अपनी कलीसिया से, यानी अपने सब लोगों से, इतना प्यार करते हैं कि उन्होंने अपनी जान तक दे दी।"

छोटे बच्चों के लिए बाग़ का चित्र सबसे अच्छा काम करता है: फूल, खुशबू, फल, और दो लोग जो एक-दूसरे के साथ खुश हैं। थोड़े बड़े बच्चों से आप प्रेम और भरोसे की बात कर सकते हैं, और यह कि कुछ चीज़ें सही समय का इंतज़ार करती हैं, जैसे कच्चा फल तोड़ने पर मीठा नहीं लगता। किशोरों के साथ आप खुलकर श्रेष्ठगीत 8:6 और 8:7 पढ़ सकते हैं और बात कर सकते हैं कि आज की दुनिया में प्रेम को कितना सस्ता बना दिया गया है, जबकि परमेश्वर उसे मृत्यु के समान सामर्थी कहते हैं।

Faith.network पर इसी पुस्तक की अलग-अलग उम्र के अनुसार तैयार व्याख्याएँ उपलब्ध हैं: तीन से छह साल के छोटे बच्चों के लिए, सात से बारह साल के बच्चों के लिए, और बारह साल से ऊपर के किशोरों के लिए। अपने बच्चे की उम्र के अनुसार वह पन्ना खोलिए और परिवार के साथ पढ़िए, ताकि यह बातचीत आपके घर में शर्म से नहीं, आदर से हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रेष्ठगीत की पुस्तक किसने लिखी?

पुस्तक का पहला पद इसे सुलैमान से जोड़ता है, और यहूदी तथा मसीही परंपरा सदियों से सुलैमान को ही इसका रचयिता मानती आई है। 1 राजा 4 के अनुसार सुलैमान ने एक हज़ार पाँच गीत रचे थे, इसलिए उनका "गीतों का गीत" बच रहना स्वाभाविक लगता है। इब्रानी व्याकरण के कारण शीर्षक का अर्थ "सुलैमान का", "सुलैमान के लिए" या "सुलैमान की परंपरा में" भी हो सकता है, और कुछ विद्वान बाद के संपादन की बात करते हैं। लेखकत्व पर मतभेद के बावजूद कलीसिया ने इसे हमेशा परमेश्वर का प्रेरित वचन माना है।

श्रेष्ठगीत की पुस्तक बाइबल में क्यों है?

क्योंकि परमेश्वर केवल पाप और न्याय के बारे में नहीं, अपनी बनाई हुई अच्छी चीज़ों के बारे में भी बोलते हैं। विवाह, देह और प्रेम परमेश्वर की सृष्टि का हिस्सा हैं, और श्रेष्ठगीत उन्हें पवित्र सीमाओं के भीतर मनाता है। साथ ही यह पुस्तक बाइबल की उस बड़ी कहानी को आगे बढ़ाती है जिसमें परमेश्वर स्वयं को दूल्हा और अपने लोगों को दुल्हन कहते हैं। इसके बिना बाइबल में वह आवाज़ गायब रहती जो कहती है कि प्रेम केवल कर्तव्य नहीं, आनंद भी है।

क्या श्रेष्ठगीत केवल एक प्रेम कविता है या इसका आत्मिक अर्थ भी है?

दोनों सच हैं, पर क्रम ज़रूरी है। पहले यह सचमुच एक दूल्हे और दुल्हन का गीत है, और इसे आत्मिक बनाने की जल्दी में इसका यह अर्थ मिटाना ठीक नहीं। लेकिन चूँकि पूरी बाइबल विवाह को परमेश्वर और उनके लोगों के संबंध का चित्र बताती है, इसलिए इस गीत में मसीह और कलीसिया के प्रेम की झलक देखना पूरी तरह उचित है। इफिसियों 5:25 इसी सेतु को साफ़ करता है। संतुलन यही है: पहले पाठ, फिर प्रतिबिंब।

श्रेष्ठगीत में परमेश्वर का नाम क्यों नहीं आता?

पूरी पुस्तक में परमेश्वर का नाम सीधे नहीं आता, और यही बात एस्तेर की पुस्तक में भी है। पर श्रेष्ठगीत 8:6 में प्रेम की ज्वाला को "परमेश्वर ही की ज्वाला" कहा गया है, जो एक छिपा हुआ पर निर्णायक संकेत है। इसका संदेश यह है कि परमेश्वर केवल मंदिर और बलिदान में नहीं, जीवन की सामान्य सुंदरता में भी उपस्थित हैं। जहाँ सच्चा, वाचा-बद्ध प्रेम जलता है, वहाँ उसकी आग का स्रोत स्वर्ग में है, भले ही नाम न लिखा हो।

श्रेष्ठगीत 8:6 का क्या अर्थ है?

यह पद प्रेम को मृत्यु के समान सामर्थी और ईर्ष्या को कब्र के समान निर्दय कहता है। इसका अर्थ यह है कि सच्चा प्रेम कोई हल्की भावना नहीं, बल्कि एक अटल शक्ति है जो पकड़ ली गई चीज़ को छोड़ती नहीं, ठीक जैसे मृत्यु किसी को नहीं छोड़ती। "नगीने के समान हृदय पर लगाए रह" का मतलब है कि दुल्हन अपने प्रेमी के हृदय पर मुहर की तरह अंकित रहना चाहती है, यानी स्थायी और विशिष्ट दावे के साथ। और प्रेम की यह लौ अंततः परमेश्वर से आती है।

क्या अविवाहित लोगों को श्रेष्ठगीत पढ़ना चाहिए?

बिलकुल, और शायद उन्हें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है। यह पुस्तक सिखाती है कि प्रेम का एक सही समय होता है और उसे जल्दबाज़ी में जगाना उसे घायल करना है, जो आज के माहौल में बहुत ज़रूरी चेतावनी है। साथ ही श्रेष्ठगीत 8:7 अविवाहित हृदय को यह साहस देता है कि वह अपने आपको सस्ते में न दे। और जो विवाह की आशा छोड़ चुके हैं, उनके लिए यह याद दिलाता है कि मसीह का प्रेम किसी भी मानवीय रिश्ते से गहरा और स्थायी है।

"मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ" का मतलब क्या है?

श्रेष्ठगीत 2:16 का यह वाक्य पारस्परिक समर्पण की घोषणा है, जहाँ दोनों बराबर के साथी हैं और दोनों एक-दूसरे के हैं। इब्रानी बाइबल में यह भाषा वाचा से जुड़ी है, उसी तरह जैसे परमेश्वर कहते हैं कि मैं तुम्हारा परमेश्वर और तुम मेरी प्रजा। श्रेष्ठगीत 6:3 में यही वाक्य उलटे क्रम में आता है, पहले "मैं उसकी हूँ", जो परिपक्व होते प्रेम का चिह्न है। विश्वासी के लिए इसका अर्थ है कि मसीह के साथ हमारा संबंध भावनाओं पर नहीं, वाचा पर खड़ा है।

श्रेष्ठगीत और नीतिवचन की पुस्तक में क्या अंतर है?

दोनों ज्ञान-साहित्य का हिस्सा हैं और दोनों सुलैमान से जुड़े हैं, पर उनका स्वर अलग है। नीतिवचन व्यावहारिक सीख देता है और प्रेम तथा वासना के विषय में चेतावनी और अनुशासन सिखाता है, जैसे पराई स्त्री से बचने की बात। श्रेष्ठगीत उसी विषय को दूसरी तरफ़ से छूता है और दिखाता है कि अपनी सीमा के भीतर प्रेम कितना सुंदर और आनंदमय है। नीतिवचन कहता है कहाँ मत जाओ; श्रेष्ठगीत दिखाता है कि कहाँ जाना अच्छा है।

श्रेष्ठगीत में कितने अध्याय हैं और इसे पढ़ने में कितना समय लगता है?

श्रेष्ठगीत में आठ अध्याय और लगभग एक सौ सत्रह पद हैं, जो इसे बाइबल की छोटी पुस्तकों में रखता है। इसे आराम से, ज़ोर से पढ़ने में लगभग बीस से पच्चीस मिनट लगते हैं, इसलिए इसे एक ही बैठक में पढ़ना पूरी तरह संभव है और यही सबसे अच्छा तरीका भी है। चूँकि यह गीत है, एक ही प्रवाह में पढ़ने पर इसके दोहराव और इसकी बढ़ती हुई तीव्रता साफ़ सुनाई देती है, जो टुकड़ों में पढ़ने पर खो जाती है।

क्या यीशु मसीह या नए नियम में श्रेष्ठगीत का उल्लेख है?

नया नियम श्रेष्ठगीत को सीधे उद्धृत नहीं करता, पर उसकी भाषा और चित्रावली नए नियम में बार-बार गूँजती है। यीशु अपने आपको दूल्हा कहते हैं, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला स्वयं को दूल्हे का मित्र बताता है, पौलुस इफिसियों 5:25 में मसीह और कलीसिया के विवाह-जैसे प्रेम की बात करता है, और प्रकाशितवाक्य मेम्ने के विवाह पर समाप्त होता है। इसलिए सीधे उद्धरण न होते हुए भी यह पुस्तक नए नियम के दूल्हा-दुल्हन वाले चित्र की गहरी पृष्ठभूमि बनाती है।

श्रेष्ठगीत को यहूदी परंपरा में कब पढ़ा जाता है?

यहूदी बाइबल में श्रेष्ठगीत "लेखों" के भाग में उन पाँच छोटी पुस्तकों में गिना जाता है जो विशेष पर्वों पर पढ़ी जाती हैं, और श्रेष्ठगीत फसह के पर्व पर पढ़ा जाता है। इसका कारण यह है कि परंपरा इसे परमेश्वर और इस्राएल के बीच के प्रेम का गीत मानती है, और फसह वही समय है जब परमेश्वर ने अपने लोगों को मिस्र से छुड़ाकर अपनी वाचा में लिया। एक प्रसिद्ध रब्बी ने तो इसे "पवित्र पुस्तकों का परम पवित्र स्थान" कहा था।

श्रेष्ठगीत 4:7 का अर्थ क्या है, क्या परमेश्वर सचमुच हमें निर्दोष देखते हैं?

श्रेष्ठगीत 4:7 में दूल्हा अपनी दुल्हन को सर्वांग सुंदरी और निर्दोष कहता है, जबकि वह स्वयं को धूप से झुलसी और उपेक्षित मानती थी। यह प्रेम की उस दृष्टि को दिखाता है जो कमियों के बावजूद अपनाती है। आत्मिक रूप से यह उस सच्चाई की ओर इशारा करता है जिसे नया नियम धर्मी ठहराया जाना कहता है: मसीह के बलिदान के कारण परमेश्वर विश्वासी को निर्दोष घोषित करते हैं। यह आपकी योग्यता का प्रमाणपत्र नहीं, अनुग्रह का उपहार है, और एक दिन यह पूरी तरह दिखाई भी देगा।

क्या श्रेष्ठगीत विवाह से पहले के शारीरिक संबंधों को सही ठहराता है?

नहीं। गीत में बार-बार यरूशलेम की पुत्रियों से विनती की जाती है कि प्रेम को समय से पहले न उकसाया और न जगाया जाए, जो स्पष्ट संयम की शिक्षा है। इसके अलावा दुल्हन को एक बंद बाग़ और मुहरबंद सोते के रूप में वर्णित किया गया है, यानी एक सुरक्षित और समर्पित स्थान। पुस्तक का सबसे खुला आनंद विवाह के जुलूस और मिलन के संदर्भ में आता है। श्रेष्ठगीत देह से नहीं डरता, पर वह देह को वाचा के बाहर कभी नहीं रखता।

अंत में

श्रेष्ठगीत बाइबल की वह पुस्तक है जिसे पाठक सबसे ज़्यादा छोड़ देते हैं और जिसकी उन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। यह हमें उस बाग़ में वापस ले जाती है जहाँ से हम निकाले गए थे, और कहती है कि परमेश्वर ने प्रेम को शर्म की चीज़ नहीं, महिमा की चीज़ बनाया था। यहाँ एक दुल्हन सुरक्षित है, क्योंकि उसके ऊपर का झण्डा प्रेम का है। यहाँ एक दूल्हा अपनी प्रिय को निर्दोष कहता है, इससे पहले कि वह अपने आपको सुंदर मान सके। और यहाँ प्रेम की वह ज्वाला जलती है जिसे न बाढ़ बुझा सकती है, न बाज़ार खरीद सकता है।

अब इसे खुद पढ़िए। आठ अध्याय, एक बैठक, और हो सके तो ज़ोर से। फिर उसी शाम इफिसियों 5 खोलकर देखिए कि वह झण्डा, वह निर्दोषता और वह न बुझने वाली आग किसमें पूरी होती है। जो प्रेम इस गीत में झलकता है, वह क्रूस पर खुलकर सामने आया, और वह मेम्ने के विवाह में अपनी पूर्णता पाएगा। जब तक वह दिन नहीं आता, यह गीत आपके हृदय पर एक मुहर की तरह लगा रहे।

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