बाइबल के अनुसार तलाक: क्या तलाक और पुनर्विवाह सही है
परिचय
रात के ग्यारह बज चुके हैं। बच्चे सो गए हैं, और वह फिर उसी कमरे में अकेली बैठी है, मोबाइल की नीली रोशनी में एक वकील का नंबर खुला हुआ। चौदह साल की शादी, तीन बार माफ़ी, दो बार पकड़ा गया झूठ, और अब वही पुराना सवाल जो मंडली में पूछने से डर लगता है: क्या परमेश्वर मुझसे यही चाहते हैं कि मैं इसी में मरती रहूँ? भारत की कलीसियाओं में यह सवाल फुसफुसाहट में पूछा जाता है, और अक्सर जवाब दो अतियों में मिलता है, या तो "तलाक तो बिलकुल पाप है, चुप रहो," या "परमेश्वर प्रेम हैं, जो दिल कहे वही करो।" बाइबल इन दोनों से गहरी बात करती है।
इस पृष्ठ पर आप देखेंगे कि पवित्रशास्त्र विवाह, तलाक और पुनर्विवाह के बारे में वास्तव में क्या कहता है, उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक; कौन-से अपवाद बाइबल देती है और कौन-से नहीं; और सबसे बढ़कर, टूटे हुए लोगों के लिए मसीह में कैसी आशा है।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
अधिकतर लेख तलाक को अदालत की कुर्सी से पढ़ते हैं: "कौन-सा कारण मुझे छूट देता है?" यह मार्गदर्शिका उसे दूसरी जगह से पढ़ती है, उस पति के हृदय से जिसके साथ विश्वासघात हुआ। क्योंकि बाइबल में परमेश्वर स्वयं को इस्राएल का पति कहते हैं, और इस्राएल उन्हें छोड़कर चली गई। जब परमेश्वर कहते हैं कि वे स्त्री-त्याग से घृणा करते हैं, तो यह किसी ठंडे नियम की घोषणा नहीं, बल्कि एक जख्मी वाचा-पालक का वचन है। इसलिए हम यहाँ "कितना बचकर निकल सकता हूँ" नहीं पूछेंगे, बल्कि "वाचा निभाने वाले परमेश्वर कैसे हैं, और वे टूटी वाचाओं के साथ क्या करते हैं" पूछेंगे। यह बदलाव सब कुछ बदल देता है।
बाइबल तलाक के बारे में क्या कहती है?
बाइबल तलाक की चर्चा कभी शून्य में नहीं करती। वह पहले विवाह की नींव रखती है, और तब बताती है कि उस नींव को तोड़ना क्या है। सबसे पहला वचन अदन की वाटिका से आता है: "इस कारण पुरुष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे" (उत्पत्ति 2:24)। ध्यान दीजिए, यहाँ तीन क्रियाएँ हैं: छोड़ना, मिले रहना, और एक तन होना। विवाह केवल भावना या सामाजिक व्यवस्था नहीं, यह एक सार्वजनिक वाचा है जिसमें दो जीवन एक नई इकाई बन जाते हैं। और जो चीज़ "एक तन" बन चुकी है, उसे अलग करना किसी समझौते को रद्द करना नहीं, शरीर को काटना है। इसीलिए तलाक में इतना खून बहता है।
पुराने नियम में परमेश्वर इस वाचा-तोड़ने पर अपनी घृणा खुलकर बोलते हैं। मलाकी के दिनों में पुरुष अपनी जवानी की पत्नियों को निकालकर दूसरी स्त्रियों से विवाह कर रहे थे और फिर मंदिर में आँसू बहाते हुए बलिदान चढ़ा रहे थे। परमेश्वर ने उनकी भक्ति ठुकरा दी और कहा, "मैं स्त्री-त्याग से घृणा करता हूँ," और उसी वचन में जोड़ा, "इसलिए अपनी आत्मा की चौकसी करो और विश्वासघात न करो" (मलाकी 2:16)। यहाँ तलाक को "कानूनी विकल्प" नहीं, "विश्वासघात" कहा गया है। परमेश्वर उस स्त्री के पक्ष में खड़े हैं जिसे छोड़ दिया गया, और उस पुरुष से जवाब माँगते हैं जिसने वाचा तोड़ी।
फिर यीशु मसीह आते हैं, और उनके समय के धर्मगुरु उन्हें फँसाने के लिए व्यवस्थाविवरण 24:1 का सहारा लेते हैं, जहाँ मूसा ने त्यागपत्र की व्यवस्था दी थी। कुछ रब्बी सिखाते थे कि "कोई लज्जा की बात" का अर्थ कुछ भी हो सकता है, जली हुई रोटी तक। यीशु उनका ध्यान नियम से हटाकर सृष्टि पर ले जाते हैं और कहते हैं, "सो वे अब दो नहीं, परन्तु एक तन हैं; इसलिए जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे" (मत्ती 19:6)। विवाह को जोड़ने वाला तीसरा पक्ष परमेश्वर हैं, इसलिए उसे तोड़ने का अधिकार मनुष्य के हाथ में नहीं है। मूसा की व्यवस्था के बारे में प्रभु साफ़ कहते हैं कि वह आदर्श नहीं, मनुष्य के कठोर हृदय के कारण दी गई एक सीमा थी, और "आरम्भ में ऐसा न था" (मत्ती 19:8)।
तब यीशु एक अपवाद बोलते हैं: "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई अपनी पत्नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से त्यागे, तो वह उससे व्यभिचार कराता है; और जो कोई त्यागी हुई से विवाह करे, वह व्यभिचार करता है" (मत्ती 5:32)। यही बात मत्ती 19:9 में दोहराई जाती है। मरकुस में यह अपवाद दर्ज नहीं है, और वचन बिलकुल नंगा खड़ा है: "जो कोई अपनी पत्नी को त्यागकर दूसरी से ब्याह करे तो वह उस पहली के विरोध में व्यभिचार करता है" (मरकुस 10:11)। दोनों में विरोध नहीं है; मरकुस वह मूल सिद्धांत देता है जिसे यीशु ज़ोर देकर स्थापित कर रहे थे, और मत्ती उस एक स्थिति को जोड़ता है जिसमें वाचा पहले ही यौन विश्वासघात से तोड़ी जा चुकी है।
पौलुस कुरिन्थ की उलझी हुई कलीसिया को यही शिक्षा सौंपता है, पूरी विनम्रता के साथ यह मानते हुए कि यह आज्ञा उसकी अपनी नहीं है: "जिनका विवाह हो गया है, उनको मैं नहीं, वरन् प्रभु आज्ञा देता है, कि पत्नी अपने पति से अलग न हो" (1 कुरिन्थियों 7:10)। अगले ही वचन में वह जोड़ता है कि यदि अलग होना पड़े, तो लक्ष्य मेल-मिलाप हो; और आगे, जहाँ अविश्वासी जीवनसाथी स्वयं छोड़कर चला जाए, वहाँ वह कहता है, "ऐसी दशा में कोई भाई या बहन बन्धन में नहीं" (1 कुरिन्थियों 7:15)। इस प्रकार बाइबल का रुख स्पष्ट है: विवाह आजीवन है, तलाक विश्वासघात का फल है, और केवल वहाँ उसकी गुंजाइश है जहाँ वाचा पहले ही किसी ने तोड़ दी हो।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
जो सूत्र अदन में शुरू होता है, वह पूरी बाइबल से गुज़रकर मेम्ने के विवाह-भोज पर समाप्त होता है, और उसका नाम है वाचा।
उत्पत्ति में परमेश्वर स्वयं पहला विवाह रचते हैं और उसे "एक तन" कहते हैं। सीनै पर्वत पर वे इस्राएल के साथ वाचा बाँधते हैं, और भविष्यद्वक्ता उस वाचा को लगातार विवाह की भाषा में समझाते हैं। होशे को परमेश्वर एक चौंका देने वाली आज्ञा देते हैं: जाकर एक बेवफ़ा स्त्री से विवाह कर, और जब वह भाग जाए तो उसे दाम देकर वापस खरीद ले; क्योंकि इस्राएल के साथ परमेश्वर का यही अनुभव है। यिर्मयाह में परमेश्वर कहते हैं कि उन्होंने विश्वासघाती इस्राएल को त्यागपत्र देकर निकाल दिया, और फिर भी उसे लौट आने के लिए पुकारते रहे। यहेजकेल 16 में वही कहानी एक छोड़ी हुई बच्ची के रूप में आती है, जिसे परमेश्वर ने उठाया, सजाया, अपनी दुल्हन बनाया, और जिसने फिर भी हर मोड़ पर उन्हें धोखा दिया।
परमेश्वर तलाक के दर्द को सिद्धांत से नहीं, अनुभव से जानते हैं।
इसीलिए मलाकी 2:16 का "मैं स्त्री-त्याग से घृणा करता हूँ" किसी नियम-पुस्तिका की धारा नहीं, एक जख्मी हृदय की गवाही है। परमेश्वर विश्वासघात से घृणा करते हैं क्योंकि वे स्वयं उसका निशाना बने हैं।
नए नियम में यह सूत्र मसीह में अपनी चोटी पर पहुँचता है। जब यीशु मत्ती 19:6 में सृष्टि की ओर लौटते हैं, वे केवल विवाह-कानून नहीं सुधार रहे; वे उस वाचा-विश्वासयोग्यता को दिखा रहे हैं जो वे स्वयं जीने आए हैं। जिस दुल्हन ने परमेश्वर को छोड़ा था, उसके लिए परमेश्वर का पुत्र क्रूस पर अपना शरीर दे देता है। पौलुस उत्पत्ति 2:24 को उद्धृत करके यही भेद खोलता है: "इस कारण मनुष्य अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। यह भेद तो बड़ा है; पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूँ" (इफिसियों 5:31-32)। मानव विवाह, अपनी सारी कमज़ोरी के साथ, उस बड़ी सच्चाई का चित्र है कि मसीह अपनी कलीसिया को कभी नहीं छोड़ते।
और कहानी का अंत तलाक से नहीं, विवाह से होता है। प्रकाशितवाक्य में स्वर्ग का जयघोष सुनाई देता है, "मेम्ने का विवाह आ गया, और उसकी पत्नी ने अपने आप को तैयार कर लिया है" (प्रकाशितवाक्य 19:7)। जो वाचा अदन में टूटी थी, वह मेम्ने के लहू से जोड़ी जाती है, और अब कभी नहीं टूटेगी। यही कारण है कि कलीसिया तलाक को हल्के में नहीं ले सकती: हमारा विवाह एक ऐसी सच्चाई का पोस्टर है जिसे परमेश्वर ने अपने पुत्र के खून से सच साबित किया है। और यही कारण है कि कलीसिया तलाक पाए हुए लोगों को ठुकरा भी नहीं सकती: वही लहू उन्हें भी धोने के लिए बहा है।
आम भ्रांतियाँ
पहली भ्रांति: तलाक अक्षम्य पाप है, तलाकशुदा व्यक्ति का कोई भविष्य नहीं। बाइबल कहीं तलाक को ऐसे अलग खाने में नहीं रखती। यीशु उस सामरी स्त्री से कुएँ पर बात करते हैं जिसके पाँच पति हो चुके थे, और उसे ठुकराने के बजाय जीवन का जल देते हैं और उसे अपनी पहली प्रचारक बना देते हैं (यूहन्ना 4)। व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री से वे कहते हैं, "मैं भी तुझ पर दण्ड की आज्ञा नहीं देता; जा, और अब से पाप न करना" (यूहन्ना 8:11)। पाप को गंभीरता से लेना और पापी को क्षमा करना, मसीह में ये दोनों साथ चलते हैं। तलाक पाप हो सकता है, परन्तु 1 कुरिन्थियों 6:9-11 की उस सूची के बाद पौलुस लिखता है कि तुम धो दिए गए, पवित्र किए गए, धर्मी ठहराए गए।
दूसरी भ्रांति: "मेरी शादी परमेश्वर की इच्छा में नहीं हुई थी, इसलिए वह गिनी नहीं जाएगी।" यह सुनने में आध्यात्मिक लगता है, पर पवित्रशास्त्र में इसका कोई आधार नहीं। मत्ती 19:6 के अनुसार जोड़ने वाले परमेश्वर हैं, और प्रभु ने तो उन विवाहों को भी असली माना जो मूर्तिपूजकों और अविश्वासियों के बीच हुए थे। 1 कुरिन्थियों 7 में पौलुस अविश्वासी जीवनसाथी वाले विश्वासियों से यही कहता है कि उस विवाह का आदर करो, क्योंकि वह असली विवाह है। बुरे चुनाव से बना विवाह भी वाचा है, और उसे निभाने में परमेश्वर की सहायता मिलती है।
तीसरी भ्रांति: "जब प्रेम खत्म हो गया, तो विवाह भी खत्म हो गया।" बाइबल में प्रेम वाचा की नींव पर खड़ा फल है, नींव नहीं। परमेश्वर का इस्राएल के साथ प्रेम तब भी बना रहा जब इस्राएल में कुछ भी प्रेमयोग्य न था। मरकुस 10:11 का कठोर वचन, "जो कोई अपनी पत्नी को त्यागकर दूसरी से ब्याह करे तो वह उस पहली के विरोध में व्यभिचार करता है," ठीक इस सोच पर प्रहार करता है कि नई भावना पुरानी वाचा को रद्द कर सकती है। भावनाएँ मर सकती हैं और पवित्र आत्मा के काम से फिर जी उठ सकती हैं; बहुत-से दम्पती इसकी गवाही देते हैं।
चौथी भ्रांति: "चूँकि तलाक पाप है, इसलिए पिटती हुई पत्नी को चुपचाप सहना चाहिए।" यह बाइबल नहीं, बाइबल का दुरुपयोग है। मलाकी 2:16 में परमेश्वर उसी वचन में हिंसा और विश्वासघात दोनों की निंदा करते हैं, और "अपनी आत्मा की चौकसी करो" की चेतावनी देते हैं। 1 कुरिन्थियों 7:10 में पौलुस "अलग न हो" कहता है, पर अगले वचन में अलग होने की वास्तविकता को स्वीकार भी करता है, जिसका अर्थ है कि सुरक्षा के लिए अलग रहना आज्ञा-उल्लंघन नहीं। जो व्यक्ति मार-पीट करता है, वही अपनी वाचा तोड़ रहा है, न कि वह जो जान बचाने के लिए घर से निकलती है। कलीसिया का काम चुप कराना नहीं, रक्षा करना है।
आज इसे जीवन में उतारना
यदि आपका विवाह थका हुआ है, पर टूटा नहीं, तो पहला कदम तलाक की चर्चा नहीं, मरम्मत की चर्चा है। वाचा-दृष्टि का सबसे व्यावहारिक फल यह है कि आप "क्या मैं इससे निकल सकता हूँ" पूछना बंद करके "मैं इसमें कैसे बना रह सकता हूँ" पूछने लगते हैं। इसका अर्थ है किसी परिपक्व जोड़े को अपने जीवन में झाँकने की अनुमति देना, पादरी या मसीही परामर्शदाता के पास साथ जाना, मोबाइल और पुराने रिश्तों पर पारदर्शिता, और पैसे के फ़ैसलों को अकेले करने की आदत छोड़ना। अनेक विवाह व्यभिचार से नहीं, वर्षों की छोटी-छोटी उपेक्षा से मरते हैं: देर रात तक काम, अलग-अलग कमरे, बिना बातचीत वाले महीने।
यदि वाचा वास्तव में तोड़ी जा चुकी है, तो जल्दबाज़ी में न चलिए। मत्ती 5:32 जो छूट देता है, उसे यीशु आज्ञा के रूप में नहीं, अनुमति के रूप में देते हैं। व्यभिचार के बाद क्षमा और पुनर्निर्माण का रास्ता बंद नहीं होता, और जब पश्चाताप सच्चा हो तो वही सबसे मसीह-समान रास्ता है। जहाँ पश्चाताप नहीं, जहाँ धोखा दोहराया जा रहा है, या जहाँ अविश्वासी जीवनसाथी स्वयं छोड़कर जा चुका है, वहाँ 1 कुरिन्थियों 7:15 का वचन कलीसिया के सामने खुला रखा जाना चाहिए, अकेले नहीं। यह निर्णय कभी व्यक्तिगत आवेश में नहीं, कलीसिया की जवाबदेही और प्रार्थना में लिया जाए।
जहाँ हिंसा है, वहाँ सुरक्षा पहला आध्यात्मिक कर्तव्य है। बच्चों को लेकर सुरक्षित जगह पर जाना परमेश्वर की अवज्ञा नहीं; मंडली के अगुवों को सूचित करना गवाही को नुकसान पहुँचाना नहीं। जो कलीसिया पीड़ित को शांत रखकर अपनी इज़्ज़त बचाती है, वह उस परमेश्वर का अपमान करती है जो विश्वासघात से घृणा करते हैं।
और यदि आपका तलाक हो चुका है, तो आपका काम अपने अतीत को सही ठहराना नहीं, और न ही उसमें सड़ते रहना है। जो आपका दोष है उसे नाम लेकर मान लीजिए, जो दूसरे का दोष था उसे परमेश्वर के हाथ में छोड़ दीजिए, अपने बच्चों के सामने दूसरे माता या पिता की निंदा मत कीजिए, और यदि पुनर्विवाह का विचार आए तो उसे हल्के मन से नहीं, पवित्रशास्त्र और परिपक्व सलाह के साथ तौलिए।
वाचा का परमेश्वर खंडहरों पर भी नई इमारत खड़ी करते हैं।
दर्पण
अब मैं सीधे आपसे बात करता हूँ। क्या आप इस पृष्ठ पर यह जानने आए थे कि बाइबल क्या कहती है, या यह कि कहीं कोई छेद मिल जाए जिसमें से आप निकल सकें? यह सवाल कठोर लगता है, पर आपके और परमेश्वर के बीच इसका जवाब आप जानते हैं। और यदि आपका जवाब "हाँ, मैं रास्ता ढूँढ़ रहा था" है, तो जान लीजिए कि यीशु ने उन धर्मगुरुओं को भी नहीं ठुकराया जो उन्हें फँसाने आए थे; उन्होंने उन्हें आरम्भ की ओर लौटाया।
वहीं कुछ पाठक दूसरी तरफ़ खड़े हैं। आपने नहीं छोड़ा, आपको छोड़ा गया। आप हर इतवार उस बेंच पर अकेले बैठते हैं जहाँ पहले दो लोग बैठते थे, और उपदेश में "मसीही परिवार" सुनते ही सीना जलने लगता है। लोग पूछते हैं, "कुछ गड़बड़ ज़रूर तुम्हारी तरफ़ से भी थी।" मैं चाहता हूँ आप यह सुनें: बाइबल का परमेश्वर वह पति है जिसे उसकी दुल्हन ने छोड़ दिया था। वे आपकी भाषा जानते हैं। जब मलाकी 2:16 में वे कहते हैं कि उन्हें स्त्री-त्याग से घृणा है, तो वे आपकी तरफ़ से बोल रहे हैं।
और कुछ पाठक वे हैं जिनका विवाह न टूटा है, न जीवित है। आप साथ रहते हैं, बिल भरते हैं, बच्चों के स्कूल जाते हैं, और दस साल से एक-दूसरे की आँखों में नहीं देखा। यह "सुरक्षित" ज़िंदगी भी उस वाचा का मज़ाक है जिसकी गवाही देने के लिए विवाह बनाया गया था। आज रात मोबाइल नीचे रखकर एक वाक्य कह देना शायद किसी भी कानूनी कागज़ से बड़ा कदम होगा: "मुझे माफ़ कर दो, और मुझे फिर से शुरू करना सिखाओ।" मसीह ऐसे प्रार्थनाओं के पास सबसे तेज़ी से आते हैं।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चे तलाक के बारे में हमसे बहुत पहले जान जाते हैं, क्योंकि वे अपने घर में, पड़ोस में या अपनी क्लास के किसी दोस्त के जीवन में उसे देख चुके होते हैं। उनसे छिपाने से भय बढ़ता है, स्पष्ट और कोमल बात करने से भरोसा बढ़ता है।
छोटे बच्चों के साथ विवाह के "वादे" की भाषा सबसे अच्छी चलती है। आप कह सकते हैं कि जब दो लोग शादी करते हैं तो वे परमेश्वर और लोगों के सामने एक बहुत बड़ा वादा करते हैं कि हम हमेशा साथ रहेंगे; परमेश्वर चाहते हैं कि यह वादा टूटे नहीं, क्योंकि वे अपने वादे कभी नहीं तोड़ते। कभी-कभी लोग यह वादा तोड़ देते हैं और इससे सबको बहुत दर्द होता है, परमेश्वर को भी। फिर यह ज़रूर जोड़िए, क्योंकि यही बच्चे का असली सवाल है: जब माँ-पापा का वादा टूट जाए, तब भी तुम्हारे लिए परमेश्वर का प्रेम नहीं टूटता, और यह तुम्हारी गलती नहीं है।
बड़े बच्चों के साथ आप मत्ती 19:6 खोल सकते हैं और समझा सकते हैं कि यीशु ने विवाह को इतना गंभीर क्यों माना, और यह भी कि यीशु ने टूटे जीवनों वाले लोगों से कैसा व्यवहार किया। किशोरों के साथ ईमानदारी सबसे ज़रूरी है; वे जानना चाहते हैं कि कलीसिया इस विषय में सच बोलती है या सिर्फ़ पर्दा डालती है।
हर उम्र की अपनी भाषा होती है, इसलिए Faith.network पर इस विषय की अलग-अलग व्याख्याएँ उपलब्ध हैं: छोटे बच्चों (3 से 6 वर्ष) के लिए सरल कहानी-रूप में, स्कूल जाने वाले बच्चों (7 से 12 वर्ष) के लिए बाइबल के वचनों के साथ, और किशोरों (12 वर्ष से ऊपर) के लिए उनके सवालों का सामना करने वाली गहरी बातचीत के रूप में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बाइबल के अनुसार तलाक लेना पाप है?
बाइबल तलाक को सामान्य रूप से विश्वासघात का फल मानती है, और परमेश्वर उसे घृणित कहते हैं: "मैं स्त्री-त्याग से घृणा करता हूँ" (मलाकी 2:16)। यीशु ने स्पष्ट किया कि विवाह परमेश्वर का जोड़ा हुआ बंधन है और मनुष्य को उसे अलग करने का अधिकार नहीं (मत्ती 19:6)। फिर भी पवित्रशास्त्र दो स्थितियों को पहचानता है जिनमें वाचा पहले ही तोड़ी जा चुकी है, यौन विश्वासघात (मत्ती 5:32) और अविश्वासी जीवनसाथी द्वारा छोड़ दिया जाना (1 कुरिन्थियों 7:15)। ऐसे मामलों में तलाक पाप का परिणाम है, परन्तु पीड़ित व्यक्ति पर दोष नहीं डाला जाता।
क्या तलाक के बाद पुनर्विवाह करना व्यभिचार है?
यीशु ने कहा, "जो कोई अपनी पत्नी को त्यागकर दूसरी से ब्याह करे तो वह उस पहली के विरोध में व्यभिचार करता है" (मरकुस 10:11)। यह चेतावनी उस व्यक्ति के लिए है जो बिना बाइबलीय आधार के वाचा तोड़कर दूसरा विवाह करता है। जहाँ विवाह यौन विश्वासघात या जीवनसाथी के त्याग से टूटा है, वहाँ प्रोटेस्टेंट परंपरा सामान्यतः निर्दोष पक्ष के पुनर्विवाह को अनुमति देती है, क्योंकि 1 कुरिन्थियों 7:15 कहता है "ऐसी दशा में कोई भाई या बहन बन्धन में नहीं।" ऐसा निर्णय अकेले नहीं, कलीसिया के अगुवों की सलाह और प्रार्थना में लिया जाना चाहिए।
मत्ती 5:32 में "व्यभिचार के सिवा" का अर्थ क्या है?
यूनानी शब्द जो यहाँ प्रयोग हुआ है, वह हर प्रकार की यौन अपवित्रता को समेटता है, केवल एक बार की चूक नहीं बल्कि वाचा को तोड़ देने वाली यौन विश्वासघात की स्थिति। यीशु अपने समय के उस सोच का खंडन कर रहे थे कि कोई भी छोटी नाराज़गी तलाक का आधार बन सकती है। वे कहते हैं कि जहाँ ऐसी यौन विश्वासघात नहीं है, वहाँ तलाक देने वाला पति अपनी पत्नी को ही पाप में धकेलता है। यह अपवाद आज्ञा नहीं, अनुमति है; क्षमा और पुनर्निर्माण का रास्ता पहले खुला रहता है।
क्या मारपीट करने वाले जीवनसाथी को छोड़ना बाइबल के विरुद्ध है?
नहीं। परमेश्वर उसी वचन में हिंसा और विश्वासघात दोनों की निंदा करते हैं और कहते हैं, "अपनी आत्मा की चौकसी करो और विश्वासघात न करो" (मलाकी 2:16)। 1 कुरिन्थियों 7:10 में "अलग न हो" की आज्ञा के ठीक बाद पौलुस अलग रहने की वास्तविकता को स्वीकार करता है, जिसका अर्थ है कि सुरक्षा के लिए अलग होना अवज्ञा नहीं। जो मार-पीट करता है, वही वाचा तोड़ रहा है। ऐसी स्थिति में पहला कदम सुरक्षित जगह पर जाना, कलीसिया के अगुवों को बताना, और जहाँ आवश्यक हो वहाँ कानूनी सहायता लेना है।
यदि मेरा जीवनसाथी अविश्वासी है, तो क्या मुझे तलाक ले लेना चाहिए?
नहीं। पौलुस कहता है कि विश्वासी को अविश्वासी जीवनसाथी के साथ बना रहना चाहिए, क्योंकि विश्वासी के द्वारा घर पर परमेश्वर की आशीष और गवाही आती है (1 कुरिन्थियों 7:12-14)। कई लोग अपने जीवनसाथी के शांत, स्थिर प्रेम के कारण मसीह के पास आए हैं। केवल तब स्थिति बदलती है जब अविश्वासी स्वयं साथ नहीं रहना चाहता और छोड़कर चला जाता है; उस दशा में पौलुस लिखता है, "यदि अविश्वासी अलग हो, तो अलग होने दो; ऐसी दशा में कोई भाई या बहन बन्धन में नहीं" (1 कुरिन्थियों 7:15)।
क्या परमेश्वर तलाक के पाप को क्षमा करते हैं?
हाँ। बाइबल में तलाक को कहीं अक्षम्य पाप नहीं कहा गया। यीशु ने उस सामरी स्त्री से, जिसके पाँच पति हो चुके थे, कुएँ पर जीवन के जल की बात की और उसे अपने गाँव में पहला गवाह बनाया। जो पश्चाताप करता है, वह मसीह के लहू से धुल जाता है; पौलुस कुरिन्थ के विश्वासियों को लिखता है कि वे धोए गए, पवित्र किए गए और धर्मी ठहराए गए। क्षमा का अर्थ परिणामों का मिट जाना नहीं, परन्तु दोष के बोझ और परमेश्वर से दूरी का मिट जाना है।
क्या मरकुस 10:11 और मत्ती 19:9 एक-दूसरे का खंडन करते हैं?
नहीं। मरकुस यीशु के मूल सिद्धांत को उसकी सबसे तीखी रूप में दर्ज करता है, कि विवाह आजीवन है और बिना आधार तलाक देकर दूसरा विवाह करना व्यभिचार है। मत्ती, जो यहूदी पाठकों के लिए लिख रहा था और जिन्हें रब्बियों की बहसें मालूम थीं, उस एक अपवाद को भी जोड़ता है जो यीशु ने बोला, यौन विश्वासघात की स्थिति। एक लेखक संक्षेप में सार देता है, दूसरा विवरण जोड़ता है। दोनों मिलकर एक ही शिक्षा बनाते हैं: विवाह पवित्र है, और तलाक किसी इच्छा से नहीं, केवल टूटी वाचा से जुड़ा है।
व्यवस्थाविवरण 24:1 में मूसा ने तलाक की अनुमति क्यों दी?
यीशु ने स्वयं इसका उत्तर दिया: "मूसा ने तुम्हारे मन की कठोरता के कारण तुम्हें अपनी पत्नियों को त्यागने की अनुमति दी, परन्तु आरम्भ में ऐसा न था" (मत्ती 19:8)। व्यवस्थाविवरण 24 तलाक को प्रोत्साहित नहीं करता, बल्कि उस समय की क्रूर वास्तविकता को सीमित करता है। त्यागपत्र लिखना स्त्री की रक्षा के लिए था, ताकि वह बिना कागज़ के बेसहारा न छोड़ी जाए और उस पर व्यभिचार का आरोप न लगे। परमेश्वर की व्यवस्था यहाँ मनुष्य के पाप के बीच कमज़ोर की ढाल बनकर खड़ी होती है।
क्या मंडली में तलाकशुदा व्यक्ति सेवा कर सकता है?
हाँ, और अनेक मंडलियों में ऐसे भाई-बहन सबसे कोमल सेवा करते हैं, क्योंकि वे दर्द की भाषा जानते हैं। अगुवों के लिए पौलुस "एक ही पत्नी का पति" और "घर को अच्छी रीति से संभालने वाला" जैसी शर्तें रखता है (1 तीमुथियुस 3), इसलिए अगुवाई के पदों पर प्रत्येक स्थिति को कलीसिया के अगुवे प्रार्थनापूर्वक और व्यक्तिगत रूप से तौलते हैं, यह देखकर कि व्यक्ति के जीवन में अब क्या चरित्र दिखता है। परन्तु सामान्य सेवा, आराधना, संगति और प्रभु-भोज से किसी पश्चातापी विश्वासी को दूर रखना सुसमाचार के विरुद्ध है।
अलग रहना (सेपरेशन) और तलाक में क्या अंतर है?
तलाक वाचा को कानूनी रूप से समाप्त कर देता है; अलग रहना एक अस्थायी दूरी है जिसका लक्ष्य, बाइबल के अनुसार, मेल-मिलाप होना चाहिए। पौलुस कहता है कि पत्नी अपने पति से अलग न हो, और यदि अलग भी हो जाए तो वह दूसरा विवाह न करे, बल्कि मेल कर ले (1 कुरिन्थियों 7:10-11)। इसलिए जहाँ हिंसा, नशा या लगातार धोखा है, वहाँ सुरक्षित दूरी बनाना एक सही और ज़िम्मेदार कदम हो सकता है, बशर्ते उसका उद्देश्य बदला लेना न हो बल्कि सुरक्षा, पश्चाताप और संभव हो तो पुनर्निर्माण हो।
"जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे" का व्यावहारिक अर्थ क्या है?
मत्ती 19:6 का यह वाक्य याद दिलाता है कि विवाह में तीन पक्ष हैं, पति, पत्नी और वह परमेश्वर जिसने उन्हें जोड़ा। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि विवाह हमारी संपत्ति नहीं जिसे हम जब चाहें रद्द कर दें। यह आज्ञा केवल दम्पती के लिए नहीं, आसपास के लोगों के लिए भी है: वे रिश्तेदार जो शादी तुड़वाने पर तुले हैं, वे दोस्त जो "छोड़ ही दो" कहकर जलती आग में घी डालते हैं, और वे तीसरे व्यक्ति जो किसी के घर में दरार बनाते हैं। परमेश्वर के जोड़े को तोड़ने में सहायक बनना भी गंभीर पाप है।
उत्पत्ति 2:24 का "एक तन" होना तलाक के विषय में क्या सिखाता है?
"इस कारण पुरुष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे" (उत्पत्ति 2:24) बताता है कि विवाह एक नई, अविभाज्य इकाई बनाता है, केवल एक अनुबंध नहीं। इसीलिए तलाक किसी कागज़ के फटने जैसा नहीं, शरीर के चिरने जैसा अनुभव होता है, और उसका दर्द वर्षों तक बच्चों, पैसे, मित्रता और आत्मा में बहता रहता है। यही वचन पौलुस इफिसियों 5:31-32 में मसीह और कलीसिया पर लागू करता है, यह दिखाने के लिए कि हमारा विवाह मसीह की अटूट विश्वासयोग्यता का चित्र है।
अंत में
तलाक का सवाल आखिर में कानून का सवाल नहीं, वाचा का सवाल है, और वाचा का सवाल हमें हमेशा परमेश्वर के चरित्र तक ले जाता है। बाइबल इस विषय पर चुप नहीं है और लापरवाह भी नहीं: वह विवाह को परमेश्वर का जोड़ा हुआ बंधन कहती है, तलाक को विश्वासघात कहती है, और केवल वहाँ राह खोलती है जहाँ वाचा पहले ही तोड़ी जा चुकी है। परन्तु वही बाइबल हमें उस परमेश्वर के पास भी लाती है जो एक छोड़े गए पति की तरह बोलते हैं और फिर अपनी बेवफ़ा दुल्हन को वापस खरीदने के लिए अपना पुत्र दे देते हैं।
इसलिए यदि आपका विवाह जीवित है, तो इसे सँभालिए जैसे किसी कीमती अमानत को सँभाला जाता है। यदि वह थका है, तो आज ही सहायता माँगिए और अकेले मत लड़िए। और यदि वह टूट चुका है, तो अपने खंडहर पर बैठे रहने की ज़रूरत नहीं; वाचा का परमेश्वर खंडहरों में काम करना जानते हैं।
आगे के मनन के लिए इफिसियों 5, होशे की पुस्तक और 1 कुरिन्थियों 7 को धीरे-धीरे पढ़िए, और हर पढ़ाई को इस प्रार्थना के साथ शुरू कीजिए: प्रभु, मुझे अपनी विश्वासयोग्यता सिखाइए।
