1 यूहन्ना 5
पाठ
यूहन्ना अपनी पत्री के अंत में तीन धागे एक साथ बाँधता है: विश्वास, प्रेम, और गवाही। जो मानता है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से जन्मा है, संसार पर जय पाता है, और अनन्त जीवन उसके पास है। पानी, लहू और आत्मा, ये तीनों एक ही बात की गवाही देते हैं, कि जीवन पुत्र में है, और पुत्र के बिना जीवन नहीं।
मूल बात
यह अध्याय एक साधारण, पर चौंकाने वाले समीकरण पर टिका है: "जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।" यूहन्ना यहाँ कोई धार्मिक विकल्प नहीं दे रहा; वह एक द्वार दिखा रहा है। जीवन कोई सामान्य आध्यात्मिक ऊर्जा नहीं है जो सब जगह बहती है, यह एक व्यक्ति में केंद्रित है, यीशु मसीह में। और परमेश्वर स्वयं इसकी गवाही देते हैं, इसलिए इसे अस्वीकार करना मानो परमेश्वर को झूठा ठहराना है। यह कठोर लगता है, पर यूहन्ना की भाषा जानबूझकर तेज़ है, क्योंकि वह ऐसी मंडली को लिख रहा है जहाँ लोग यीशु के बारे में सुविधाजनक, अधूरे विचारों की ओर खिसक रहे थे।
साझा धागा
पानी और लहू, ये दो शब्द पूरे बाइबल के इतिहास को समेट लेते हैं। पानी यीशु के बपतिस्मे की याद दिलाता है, जहाँ पिता ने उन्हें पुत्र घोषित किया; लहू क्रूस की, जहाँ उन्होंने अपना जीवन दिया। पर इसके पीछे और भी गहरी परछाइयाँ हैं, फसह के मेमने का लहू जो इस्राएल को मृत्यु से बचाता है, और लाल समुद्र का पानी जो दासता से पार ले जाता है। पूरे पुराने नियम में परमेश्वर संकेतों में कहते रहे कि छुटकारा लहू और पानी से होकर आएगा। यूहन्ना कहता है: अब वह छाया देह बन गई है। और आत्मा, जो सृष्टि के आरंभ में पानी पर मँडराता था, अब हर विश्वासी के भीतर गवाही देता है कि यह सब सच है। तीनों धागे यीशु में मिलते हैं।
दर्पण
यूहन्ना कहता है परमेश्वर की आज्ञाएँ "बोझदायक नहीं" हैं। यह पंक्ति चुभती है, क्योंकि हम में से बहुतों को विश्वास बोझ जैसा ही लगता है, एक और काम की सूची, एक और अपेक्षा। पर यूहन्ना का तर्क यह है: जो परमेश्वर से जन्मा है, वह संसार पर जय पाता है। यानी वे शक्तियाँ जो हमें अंदर से थकाती हैं, दूसरों की राय, पैसे का दबाव, अपनी छवि बचाने की मेहनत, इन पर विश्वास ने पहले ही जीत पा ली है। सवाल यह नहीं कि आप कितने अच्छे मसीही हैं; सवाल यह है कि क्या आप उस गवाही पर टिके हैं जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है, या आप चुपचाप उसे झुठला रहे हैं, यह मानकर कि आपको स्वयं को सिद्ध करना है। और अंतिम आयत, "अपने आपको मूरतों से बचाए रखो," हमारे युग में भी सटीक है। मूरतें अब लकड़ी की नहीं, स्क्रीन पर हैं।
पहला श्रोता
पहली सदी के अंत में यूहन्ना की मंडली टूट चुकी थी। कुछ शिक्षक निकल गए थे जो कहते थे कि यीशु सचमुच देह में नहीं आए, कि लहू और मृत्यु उनसे सम्बंधित नहीं थी, केवल एक आत्मिक "ख्रीस्त" उन पर उतरा और क्रूस से पहले चला गया। इसलिए यूहन्ना ज़ोर देता है: "न केवल पानी के द्वारा, वरन् पानी और लहू दोनों के द्वारा।" वह मंडली के सदस्यों को याद दिला रहा है, तुम्हें आधा यीशु नहीं चाहिए। और जब वे सुनते थे "सारा संसार उस दुष्ट के वश में पड़ा है," तो यह अतिशयोक्ति नहीं थी। रोमी शक्ति, सम्राट-पूजा, और बाज़ार की मूरतें उनके चारों ओर थीं। "मूरतों से बचाए रखो" कोई प्रतीकात्मक चेतावनी नहीं थी, यह जीवन-मरण का प्रश्न था।
एक विवरण
आयत 10 में एक अद्भुत बात है: "जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है।" यूहन्ना यह नहीं कहता कि विश्वासी को बाहर से गवाही ढूँढ़नी है, किताबों में, चमत्कारों में, अन्य लोगों की कहानियों में। गवाही भीतर आ बसती है। आत्मा स्वयं भीतर से पुष्टि करता है कि यीशु के विषय में जो कहा गया है वह सच है। यह अनुभववाद नहीं है, भावनाओं पर विश्वास टिकाना नहीं है; यह पवित्र आत्मा की वह शांत, दृढ़ आवाज़ है जो कहती है, "हाँ, यह सच है, और तुम उसके हो।" जिनके पास यह भीतरी गवाही है, वे जानते हैं कि वे जानते हैं।
अंतर्पाठ
"जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है" (आयत 12) सीधे यूहन्ना 14:6 से गूँजती है, जहाँ यीशु कहते हैं, "मार्ग, और सत्य, और जीवन मैं ही हूँ।" यूहन्ना अपनी पत्री में वही बात दोहरा रहा है जो उसने वर्षों पहले प्रभु के मुख से सुनी थी। और आयत 3, "उसकी आज्ञाएँ बोझदायक नहीं," स्पष्ट रूप से मत्ती 11:30 की ओर इशारा करती है, जहाँ यीशु कहते हैं, "मेरा जूआ सहज है और मेरा बोझ हल्का है।" यूहन्ना अपने विचार नहीं गढ़ रहा; वह अपने प्रभु की शिक्षा को मंडली के हाथों में सौंप रहा है।
चिंतन
क्या मेरा विश्वास एक बाहरी सहमति है, या मुझमें भीतरी गवाही है कि यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं?
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1 John 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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1 John 5 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।" यूहन्ना यह नहीं कहता कि जिसके पास ज्ञान है, या जिसके पास अच्छे काम हैं। वह कहता है, जिसके पास पुत्र है। जीवन कोई चीज़ नहीं, एक व्यक्ति है। तो आज खुद से पूछ लो, मेरे पास मसीह के बारे में जानकारी है, या मसीह खुद?
पिता, आपने मुझे अपना बनाया, यह सोचकर ही मन भर आता है। जब मैं यीशु पर भरोसा करता हूँ, तो आपके परिवार का हिस्सा बन जाता हूँ। मुझे सिखाइए कि आपसे प्रेम करने का मतलब आपके बच्चों से भी प्रेम करना है, चाहे वे मुझसे कितने भी अलग हों।
और वह गवाही यह है कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है।" ध्यान दो, यूहन्ना यह नहीं कहता कि जीवन तुम्हारे प्रयासों में है, या तुम्हारी अच्छाई में। वह कहता है, यह जीवन पुत्र में है। यानी जहाँ मसीह है, वहीं जीवन है। तो सवाल यह नहीं कि तुमने कितना कमाया, बल्कि यह कि तुम उससे कितने जुड़े हो।
पिता, दुनिया की टूट और अंधेरा कभी कभी बहुत भारी लगता है। फिर भी मुझे याद रहे कि मैं तेरा हूँ, तेरे हाथ में सुरक्षित। जो बुराई चारों ओर दिखती है, वह मेरी पहचान नहीं बदल सकती। मुझे थामे रख, और मेरे भीतर आशा जगाए रख।
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