बाइबल व्याख्या

गलातियों 5:17

बाइबल

पाठ

पौलुस एक युद्ध की खबर देता है, और वह युद्धभूमि आपका अपना भीतर है। शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करता है, और आत्मा शरीर के विरोध में; ये दोनों आमने-सामने खड़े हैं, एक दूसरे के विरोधी। इसका नतीजा वह लिखता है ऐसे: "जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।" यानी विश्वासी के भीतर एक ऐसी खिंचातानी चलती है जिसमें आप हमेशा वह नहीं कर पाते जो आपका मन चाहता है। यह वाक्य पिछले पद से जुड़ा है, जहाँ पौलुस कहता है "आत्मा के अनुसार चलो", और अगले पद से भी, जहाँ वह कहता है कि आत्मा के चलाए चलनेवाले व्यवस्था के अधीन नहीं रहते। बीच में यह पद खड़ा है, एक ईमानदार, बिना सजावट के दिया गया विवरण: मसीही जीवन आसान सीधी रेखा नहीं, खिंचाव है।

मूल बात

ध्यान दीजिए कि पौलुस यह नहीं कहता कि आपके भीतर अच्छाई और बुराई बराबर की दो ताकतें हैं, जैसे तराजू के दो पलड़े। वह कहता है: आत्मा, यानी परमेश्वर का पवित्र आत्मा, आपके भीतर आ बसा है और उसने वहाँ अपना दावा ठोंक दिया है। जो पहले बिना विरोध के चलता था, अब उसका सामना करनेवाला कोई है। इसलिए यह भीतरी संघर्ष हार का चिह्न नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि परमेश्वर ने आप में काम शुरू कर दिया है। मुर्दे में खींचातानी नहीं होती। साथ ही पौलुस भ्रम भी नहीं पालता: उद्धार पाने का अर्थ यह नहीं कि इच्छाएँ चुप हो गईं। यहाँ मनुष्य की सच्ची तस्वीर है, जो न निराशावादी है न भोली; और उसका हल आपके संकल्प में नहीं, उस आत्मा में है जो मसीह ने भेजा।

साझा सूत्र

यह खिंचाव अपने आप में कोई हल नहीं देता; हल सात पद बाद आता है: "जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।" पौलुस भीतरी युद्ध की जड़ को क्रूस से जोड़ता है। पुराने नियम में परमेश्वर बार-बार वादा करते हैं कि वे पत्थर का हृदय निकालकर अपना आत्मा भीतर रखेंगे, क्योंकि व्यवस्था बाहर से आदेश दे सकती थी, भीतर से बदल नहीं सकती थी। मसीह ने वह वादा खोला: उसकी मृत्यु ने दोष हटाया, उसके जी उठने ने आत्मा भेजा। इसलिए पद 17 का संघर्ष निराशा की कहानी नहीं, बल्कि उस नई सृष्टि का शुरुआती दर्द है जिसे मसीह ने आरम्भ किया और जिसे वही पूरा करेगा।

दर्पण

यह पद उस झूठ को तोड़ता है जो हम चुपचाप पालते हैं: कि सच्चा विश्वासी वह है जिसे भीतर कोई खींच नहीं। इसलिए हम छिपाते हैं। वह गुस्सा जो घर पर ही फूटता है और दफ्तर में नहीं। पैसे के मामले में वह हिसाब जिसे आप किसी को दिखाना नहीं चाहेंगे। फोन पर वे दस मिनट जिन्हें आप हर बार माफ कर देते हैं। पौलुस कहता है, यह खींचातानी आपके मसीही होने का खंडन नहीं करती, पर वह इसे सामान्य भी नहीं बताता; अगले पदों में वह शरीर के कामों की सूची बड़ी साफगोई से गिनाता है। आज एक कागज़ लीजिए, उस एक लालसा को लिखिए जो इस हफ्ते आपको सबसे ज़्यादा खींचती रही, नीचे लिखिए "यह क्रूस पर चढ़ाई जा चुकी है", उसे ज़ोर से पढ़िए और कागज़ फाड़ दीजिए।

अंतर्पाठ

रोमियों 7 में पौलुस इसी अनुभव को पहले पुरुष में लिखता है: वह भला करना चाहता है पर पाता है कि बुराई पास ही खड़ी है, और वह चिल्ला उठता है कि उसे कौन छुड़ाएगा, और उत्तर मसीह में देता है। गलातियों 5:17 वही सच्चाई है, पर व्यक्तिगत कराह के बजाय कलीसिया को दी गई शिक्षा के रूप में। दूसरी ओर यहेजकेल 36 का वादा खड़ा है, जहाँ परमेश्वर कहते हैं कि वे अपना आत्मा अपने लोगों के भीतर रखेंगे ताकि वे चल सकें। दोनों मिलकर पद 17 को उसकी सही जगह देते हैं: कराह असली है, पर वह उस आत्मा की कराह है जिसे परमेश्वर ने वादे के मुताबिक भीतर बसाया है।

पहले श्रोता

गलातिया के ये पढ़नेवाले ज़्यादातर गैर-यहूदी थे, जिन्हें अब सिखाया जा रहा था कि मसीह पर विश्वास तो ठीक है, मगर पूरा बनने के लिये खतना और व्यवस्था भी चाहिए। उनके कानों में यह आकर्षक था, क्योंकि नियम स्पष्ट होते हैं और नापे जा सकते हैं। जब वे पद 17 सुनते, तो उन्हें यही लगता होगा कि उनकी भीतरी उलझन का इलाज और नियम हैं। पौलुस उलटा कहता है: तुम्हारे भीतर की यह लड़ाई इसलिए है कि आत्मा आ गया है, न इसलिए कि नियम कम हैं। उनके लिये यह राहत भी थी और चुनौती भी, क्योंकि अब पवित्रता चिह्नों से नहीं, आत्मा के साथ चलने से आती थी।

मुख्य पात्र

इस पद का असली पात्र पवित्र आत्मा है, और उसका चरित्र यहाँ अनोखे ढंग से दिखता है। वह भीतर आकर चुपचाप बैठ नहीं जाता; वह लालसा करता है, विरोध करता है, टकराता है। परमेश्वर हमारे भीतर उदासीन दर्शक नहीं हैं। वे उस चीज़ के सामने खड़े हो जाते हैं जो हमें नष्ट करती है, यहाँ तक कि हमारी मर्ज़ी के खिलाफ भी। यह प्रेम का ज़िद्दी रूप है: वे आपको आपके ही हाथों में नहीं छोड़ते। और यह वही आत्मा है जो पद 22 में फल पैदा करता है, प्रेम, आनन्द, शान्ति। जो आपके भीतर लड़ रहा है, वही आपके भीतर उगा रहा है।

चिंतन

आपके भीतर की कौन सी खिंचातानी आप हार का सबूत मानते रहे हैं, जबकि वह असल में आत्मा के काम का चिह्न हो सकती है?

यदि पवित्र आत्मा आपके भीतर सचमुच लालसा करता है, तो इस हफ्ते किस एक जगह पर आप उसका पक्ष लेकर, अपनी आदत के विरुद्ध, एक छोटा कदम उठा सकते हैं?

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Galatians 5:17 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

गलातियों 5:17 का क्या अर्थ है?
पौलुस एक युद्ध की खबर देता है, और वह युद्धभूमि आपका अपना भीतर है। शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करता है, और आत्मा शरीर के विरोध में; ये दोनों आमने-सामने खड़े हैं, एक दूसरे के विरोधी। इसका नतीजा वह लिखता है ऐसे: "जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।" यानी विश्वासी के भीतर एक ऐसी खिंचातानी चलती है जिसमें आप हमेशा वह नहीं कर पाते जो आपका मन चाहता है। यह वाक्य पिछले पद से जुड़ा है, जहाँ पौलुस कहता है "आत्मा के अनुसार चलो", और अगले पद से भी, जहाँ वह कहता है कि आत्मा के चलाए चलनेवाले व्यवस्था के अधीन नहीं रहते। बीच में यह पद खड़ा है, एक ईमानदार, बिना सजावट के दिया गया विवरण: मसीही जीवन आसान सीधी रेखा नहीं, खिंचाव है।
गलातियों 5:17 किस विषय में है?
यह खिंचाव अपने आप में कोई हल नहीं देता; हल सात पद बाद आता है: "जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।" पौलुस भीतरी युद्ध की जड़ को क्रूस से जोड़ता है। पुराने नियम में परमेश्वर बार-बार वादा करते हैं कि वे पत्थर का हृदय निकालकर अपना आत्मा भीतर रखेंगे, क्योंकि व्यवस्था बाहर से आदेश दे सकती थी, भीतर से बदल नहीं सकती थी। मसीह ने वह वादा खोला: उसकी मृत्यु ने दोष हटाया, उसके जी उठने ने आत्मा भेजा। इसलिए पद 17 का संघर्ष निराशा की कहानी नहीं, बल्कि उस नई सृष्टि का शुरुआती दर्द है जिसे मसीह ने आरम्भ किया और जिसे वही पूरा करेगा।
गलातियों 5:17 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
रोमियों 7 में पौलुस इसी अनुभव को पहले पुरुष में लिखता है: वह भला करना चाहता है पर पाता है कि बुराई पास ही खड़ी है, और वह चिल्ला उठता है कि उसे कौन छुड़ाएगा, और उत्तर मसीह में देता है। गलातियों 5:17 वही सच्चाई है, पर व्यक्तिगत कराह के बजाय कलीसिया को दी गई शिक्षा के रूप में। दूसरी ओर यहेजकेल 36 का वादा खड़ा है, जहाँ परमेश्वर कहते हैं कि वे अपना आत्मा अपने लोगों के भीतर रखेंगे ताकि वे चल सकें। दोनों मिलकर पद 17 को उसकी सही जगह देते हैं: कराह असली है, पर वह उस आत्मा की कराह है जिसे परमेश्वर ने वादे के मुताबिक भीतर बसाया है।
गलातियों 5:17 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस पद का असली पात्र पवित्र आत्मा है, और उसका चरित्र यहाँ अनोखे ढंग से दिखता है। वह भीतर आकर चुपचाप बैठ नहीं जाता; वह लालसा करता है, विरोध करता है, टकराता है। परमेश्वर हमारे भीतर उदासीन दर्शक नहीं हैं। वे उस चीज़ के सामने खड़े हो जाते हैं जो हमें नष्ट करती है, यहाँ तक कि हमारी मर्ज़ी के खिलाफ भी। यह प्रेम का ज़िद्दी रूप है: वे आपको आपके ही हाथों में नहीं छोड़ते। और यह वही आत्मा है जो पद 22 में फल पैदा करता है, प्रेम, आनन्द, शान्ति। जो आपके भीतर लड़ रहा है, वही आपके भीतर उगा रहा है।
गलातियों 5:17 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि पवित्र आत्मा आपके भीतर सचमुच लालसा करता है, तो इस हफ्ते किस एक जगह पर आप उसका पक्ष लेकर, अपनी आदत के विरुद्ध, एक छोटा कदम उठा सकते हैं?
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अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

पौलुस उन लोगों को लिख रहा है जो व्यवस्था के छोटे से छोटे नियम पर बहस कर रहे थे, और उसी बीच एक दूसरे को काट खा रहे थे। उनसे वह कहता है, "क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, 'तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।'" सोचो, जिस इंसान से तुम्हारी अनबन चल रही है, परमेश्वर की पूरी व्यवस्था उसी के साथ तुम्हारे बर्ताव में परखी जा रही है। सही होना काफी नहीं, प्रेम करना ज़रूरी है।

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