भजन संहिता 126:5
पाठ
जो किसान रोते-रोते अपने बीज ज़मीन में डालते हैं, वे कटनी के दिन खुशी के नारे लगाते हुए फसल समेटेंगे। एक ही आदमी, एक ही खेत, दो बिलकुल उलटे मौसम: बोने का मौसम आँसुओं का, लवने का मौसम जयजयकार का। और ध्यान दीजिए कि यह वाक्य कहाँ रखा गया है। ठीक इससे पहले भजनकार पुकारता है, "हे यहोवा, दक्षिण देश के नालों के समान, हमारे बन्दियों को लौटा ले आ!" यानी यह किसी तृप्त, सुरक्षित आदमी का सुभाषित नहीं है। यह उन लोगों के मुँह से निकला है जिनकी बहाली शुरू हो चुकी है पर पूरी नहीं हुई; जो लौट आए हैं, मगर जिनका आधा परिवार अभी भी परदेश में है। बीच की जगह से बोला गया वादा।
मूल बात
यह पद कोई प्राकृतिक नियम नहीं बताता, जैसे कि दुःख अपने आप सुख में बदल जाता हो। खेती में भी बीज डालने से फसल की गारंटी नहीं मिलती; सूखा, टिड्डी और लूटपाट सब मुमकिन है। इस वादे की नींव खेत में नहीं, परमेश्वर के चरित्र में है, और भजनकार ने वह चरित्र अभी-अभी देखा है: "यहोवा ने हमारे साथ बड़े-बड़े काम किए हैं।" जिसने सिय्योन के लौटनेवालों को लौटा लाया, वही आँसुओं के साथ डाले गए बीज का हिसाब रखता है। यहाँ परमेश्वर की सामर्थ्य उलट-फेर करने की सामर्थ्य है: वे कुछ बरबाद नहीं होने देते, न मेहनत, न रोना। और अनुग्रह इसी में दिखता है कि फसल बीज से बहुत बड़ी होती है। आँसू नापे जाते हैं मुट्ठी भर, जयजयकार मिलता है पूलियों भर।
जोड़नेवाला धागा
बाइबल में आँसू और फसल का यह जोड़ा बार-बार लौटता है, और हर बार वह मसीह की ओर एक कदम और बढ़ जाता है। यिर्मयाह ने बंधुआई से लौटने को ठीक इसी तरह देखा था: लोग रोते हुए आएँगे, मगर परमेश्वर उन्हें सान्त्वना देते हुए ले चलेंगे। और यही ढाँचा यीशु अपने ऊपर लागू करते हैं जब वे गेहूँ के दाने की बात करते हैं: जब तक वह ज़मीन में गिरकर मर न जाए, अकेला रहता है; मरता है तो बहुत फल लाता है (यूहन्ना 12:24)। यह भजन 126 का किसान ही है, अब क्रूस पर खड़ा। मसीह वह बोनेवाला हैं जो रोते हुए निकले, गतसमनी के आँसू और सलीब का बीज लेकर, और पुनरुत्थान की सुबह पूलियाँ लेकर लौटे। इसलिए यह पद आशावाद नहीं है; यह खाली कब्र पर टिका हुआ गणित है।
दर्पण
आप जानते हैं वह खेत कौन सा है। वह बच्चा जिसके लिए आप पन्द्रह साल से प्रार्थना कर रहे हैं और जो अब फ़ोन नहीं उठाता। वह कक्षा जिसमें आप हर दिन ईमानदारी से पढ़ाते हैं और कोई नहीं देखता। वह विवाह जिसमें आप बिना जवाब पाए माफ़ करते चले जाते हैं। वह बीमार शरीर जिसके लिए आप दवा और विश्वास दोनों निगलते हैं। इस पद की चुभन यहाँ है: यह आपसे आँसू पोंछने को नहीं कहता, बोते रहने को कहता है। रोना मना नहीं है, रुक जाना मना है। और हमारा गर्व अक्सर यहीं पकड़ा जाता है, क्योंकि हम फसल अपनी आँखों से अपनी ही उम्र में देखना चाहते हैं। आज एक कागज़ पर उस एक चीज़ का नाम लिखिए जिसे आप रोते हुए बो रहे हैं, नीचे आज की तारीख डालिए, और वह कागज़ अपनी बाइबल में भजन 126 के पन्ने पर रख दीजिए।
संदर्भ
यह भजन उन "आरोहण के गीतों" में से एक है जो यात्री यरूशलेम चढ़ते हुए गाते थे। पृष्ठभूमि बेबीलोन से वापसी है, और वह वापसी सपने जैसी थी, पर सपना जल्दी टूट गया: शहर खंडहर, दीवार गिरी, पड़ोसी शत्रु, पहली फसलें छोटी। जो लौटे, वे मुट्ठी भर थे; बहुत से रिश्तेदार बेबीलोन में जमे रह गए, इसीलिए पद 4 की पुकार अब भी ज़रूरी है। यहूदिया की खेती बारिश पर निर्भर थी, और दक्षिण के नाले साल भर सूखे पड़े रहते हैं, फिर एक रात की बारिश में गरजते पानी से भर जाते हैं। यही उनकी आशा का नक्शा है। और अकाल के बाद बीज बोना एक जुआ था: वह अनाज आज खाया भी जा सकता था। भूखे बच्चे के सामने अनाज मिट्टी में डालना, यही आँसुओं के साथ बोना है।
अंतर्पाठ
आपकी बाइबल पद 6 के नीचे लूका 6:21 की ओर इशारा करती है, और ठीक करती है: यीशु धन्य कहते हैं उन्हें जो अब रोते हैं, क्योंकि वे हँसेंगे। वह पहाड़ी उपदेश में भजन 126 की आवाज़ है, बस अब वह वादा राज्य के आने से बँधा है, न कि किसी अगली फसल से। एक तनाव भी दर्ज करना चाहिए: गलातियों 6 में पौलुस कहते हैं कि मनुष्य जो बोता है वही काटता है, और वहाँ बोना-काटना नैतिक हिसाब है, जैसा काम वैसा फल। भजन 126 उस हिसाब से बड़ा है, क्योंकि यहाँ बीज और फसल बराबर नहीं हैं; आँसू मुट्ठी भर, पूलियाँ बाँहों भर। यही अनुग्रह का असमान अनुपात है। और प्रकाशितवाक्य की अंतिम फसल में परमेश्वर स्वयं आँसू पोंछते हैं, यानी बोनेवाला नहीं, बोने का कारण ही समाप्त होता है।
एक बारीकी
पूरे भजन में एक ही इब्रानी जड़ बार-बार गूँजती है: शूव (शׁוּב), "लौटना"। पद 1 में परमेश्वर लौटनेवालों को "लौटा ले आया"। पद 4 में प्रार्थना है, "हमारे बन्दियों को लौटा ले आ"। और पद 6 में वही शब्द किसान पर आ जाता है: वह "निश्चय लौट आएगा"। देखिए क्या हुआ। जो कार्य परमेश्वर करते हैं, वही अंत में बोनेवाले का अनुभव बन जाता है। बंधुआई से लौटना और खेत से पूलियाँ लेकर लौटना एक ही क्रिया के दो रूप हैं। इसलिए आपकी बोआई का घर वापसी परमेश्वर की बहाली में शामिल हो जाती है, अलग से नहीं चलती। और "निश्चय" शब्द ढीला वादा नहीं है; इब्रानी में क्रिया दोहराकर ज़ोर दिया गया है, जैसे कोई आपका हाथ पकड़कर कहे: लौटेगा, ज़रूर लौटेगा।
मनन
आप कौन सा बीज इसलिए मिट्टी में डालने से रोक रहे हैं क्योंकि फसल अपनी आँखों से देखने की कोई गारंटी नहीं मिल रही?
यदि आपकी बोआई परमेश्वर की बड़ी बहाली का हिस्सा है, तो किसकी फसल आपके आँसुओं से उग सकती है, चाहे वह आपके बाद आए?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।
Psalms 126:5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 126:5 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 126:5 किस विषय में है?
भजन संहिता 126:5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 126:5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 126:5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 126 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें