याकूब 3
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
याकूब अपने भाइयों से कहता है कि बहुत लोग उपदेशक न बनें, क्योंकि जो सिखाता है, उसका न्याय और भी कड़ाई से होगा। फिर वह कुछ बहुत साधारण चीज़ों की ओर इशारा करता है, घोड़े की लगाम और जहाज़ की पतवार। एक छोटी सी लगाम बड़े घोड़े को घुमा देती है, एक छोटी सी पतवार बड़े जहाज़ को तेज़ हवा में भी सही दिशा में ले जाती है। ऐसी ही एक छोटी चीज़ है हमारी जीभ। वह शरीर का सबसे छोटा अंग है, फिर भी बड़ी-बड़ी बातें बोलती है। याकूब कहता है कि थोड़ी सी आग बड़े जंगल को जला सकती है, और जीभ भी वैसी ही आग है। वह कहता है कि जंगली जानवर, पक्षी, यहाँ तक कि समुद्र के जीव भी मनुष्य के वश में आ गए हैं, पर जीभ को कोई वश में नहीं कर पाया। एक ही मुँह से हम परमेश्वर की स्तुति करते हैं और उन्हीं लोगों को श्राप देते हैं जो परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं। याकूब पूछता है, क्या एक ही सोते से मीठा और खारा पानी निकल सकता है? क्या अंजीर के पेड़ में जैतून लग सकता है? इसके बाद वह दो तरह के ज्ञान की बात करता है, एक सांसारिक ज्ञान जो ईर्ष्या और स्वार्थ से भरा है, और एक ज्ञान जो ऊपर से आता है, पवित्र, मिलनसार, कोमल और शांति फैलाने वाला।
इसका क्या अर्थ है?
याकूब यहाँ कोई हल्की सी सीख नहीं दे रहा। वह ईमानदारी से कहता है कि जीभ को कोई इंसान अपने आप वश में नहीं कर सकता। यह पढ़कर थोड़ा अजीब लगता है, क्योंकि हम सोचते हैं कि मेहनत करने से हम अपनी बातें सुधार सकते हैं। पर याकूब खुलकर मान लेता है कि यह मुश्किल है, बहुत मुश्किल। उसका मुद्दा यह है कि हमारे शब्द छोटी चीज़ नहीं हैं। जैसे छोटी सी चिंगारी पूरा जंगल जला सकती है, वैसे ही एक छोटा सा वाक्य किसी का दिन बना सकता है या तोड़ सकता है। और यह भी सच है कि एक ही मुँह से हम परमेश्वर की स्तुति कर सकते हैं और अगले ही पल किसी को नीचा दिखा सकते हैं। यह कैसे हो सकता है? याकूब इसका आसान जवाब नहीं देता, बस दिखाता है कि यह गलत है, जैसे एक ही सोते से मीठा और खारा पानी निकलना गलत लगता है।
बड़ी कहानी से जोड़
याकूब कहता है कि सच्चा ज्ञान ऊपर से आता है, यानी परमेश्वर से। यह ज्ञान पवित्र है, दयालु है, और शांति फैलाता है। यहीं पर हमें याद आता है कि प्रभु यीशु मसीह भी शांति बनाने वाले थे, उन्होंने कभी झूठ नहीं बोला, उनके मुँह से केवल सच्चाई और अनुग्रह निकला। याकूब लिखता है कि धार्मिकता का फल शांति के साथ बोया जाता है। यह एक वादा है, जो लोग मिलाप कराते हैं, जो शांति से चलते हैं, वे अच्छा फल पाएँगे। परमेश्वर हमें अपनी ओर से यह ज्ञान देने को तैयार हैं, हम पर छोड़ा नहीं गया कि हम खुद अपनी जीभ को ठीक करें।
तुम्हारे लिए
सोचो, आज तुमने अपने मुँह से क्या-क्या कहा? किसी को हँसाया, किसी को दुखाया, किसी की बात के पीछे बात की? याकूब हमें शर्मिंदा करने के लिए नहीं लिखता, बल्कि यह दिखाने के लिए कि हमें परमेश्वर की मदद चाहिए। जब तुम गुस्से में कुछ कहने वाले हो, या किसी के बारे में बुरी बात फैलाने का मन हो, वहीं रुककर परमेश्वर से पूछो, क्या यह शांति फैलाने वाला ज्ञान है, या ईर्ष्या से भरा है?
आपस में बात करें
क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारी जीभ पर लगाम लगाना सच में मुश्किल है? किसी उदाहरण के बारे में सोचो।
याकूब कहता है कि एक ही मुँह से स्तुति और श्राप नहीं निकलना चाहिए। इसका मतलब तुम्हारे रोज़मर्रा के शब्दों में क्या हो सकता है?
साथ में प्रार्थना करें
प्रभु, हमारी जीभ छोटी है पर बहुत कुछ कर सकती है। हमें ऊपर से आने वाला ज्ञान दीजिए, जो पवित्र, कोमल और शांति फैलाने वाला है। जब हमारे शब्द किसी को दुखा दें, हमें क्षमा कीजिए और हमारी मदद कीजिए। आमीन।
याकूब 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
याकूब 3 किस विषय में है?
याकूब 3 क्या कहता है?
याकूब 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे याकूब 3 से क्या सीख सकते हैं?
याकूब 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जब हम घोड़ों को अपने वश में करने के लिये उनके मुँह में लगाम लगाते हैं, तो हम उनकी सारी देह को भी फेर देते हैं।" लगाम छोटी होती है, घोड़ा बड़ा। याकूब कहता है, तेरी जीभ भी ऐसी ही है। आज जो एक वाक्य तू बोलने जा रहा है, वह पूरे रिश्ते की दिशा मोड़ सकता है। क्या तूने कभी सोचा कि उस लगाम को कौन थामे हुए है?
इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।"
एक ही जीभ, दो काम। रविवार को आराधना, सोमवार को वही होंठ किसी को नीचा दिखाते हैं। याकूब कहता है, जिस इंसान पर तू भड़का, वह परमेश्वर के स्वरूप में बना है। उसका अपमान ऊपर तक पहुँचता है। आज तेरे शब्द किसकी छवि पर गिरे?
जीभ भी आग है!" याकूब यह नहीं कहता कि जीभ आग लगाती है, वह कहता है कि जीभ खुद आग है। जो बात तूने पाँच सेकंड में कही, वह सालों तक किसी के भीतर सुलगती रह सकती है। घर की मेज़ पर, फोन पर, मज़ाक में कही गई बात भी। आज बोलने से पहले एक पल रुक जा, और पूछ, यह आग किसे जलाएगी?
हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत से उपदेशक न बनें, क्योंकि तुम जानते हो कि हम उपदेशकों का और भी कड़ा न्याय होगा।" याकूब सिखाने से मना नहीं करता, वह सिखाने के भार की याद दिलाता है। जिस मुँह से तुम दूसरों को परमेश्वर की बात बताते हो, उसी मुँह का हिसाब भी तुम्हें देना है। आज किसी को सुधारने से पहले एक पल रुको और पूछो, क्या यह बात प्रेम से निकल रही है या अपने बड़े दिखने की चाह से?
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