बाइबल व्याख्या

लूका 12:6

बाइबल
यह वचन Dunamis ministries द्वारा समर्पित है

पाठ

यीशु अपने चेलों से डर के विषय में बात कर रहे हैं, और अचानक वे बाज़ार की ओर इशारा करते हैं। वहाँ गौरैयाँ बिकती हैं, पाँच की कीमत दो पैसे, इतनी सस्ती कि कोई गिनने की परवाह नहीं करता। और ठीक उसी तुच्छ चिड़िया को सामने रखकर वे कहते हैं: "फिर भी परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता।" एक भी नहीं। न उस एक को जो पिंजरे में बची रह गई, न उस एक को जो बिककर किसी की थाली तक पहुँची। यह वाक्य सांत्वना देने के लिए नहीं, बल्कि डर को उसकी जड़ से उखाड़ने के लिए कहा गया है, उन लोगों से जिन्हें आगे चलकर अदालतों और आराधनालयों में घसीटा जाने वाला था।

मूल बात

यहाँ परमेश्वर की स्मृति का प्रश्न है, कीमत का नहीं। बाज़ार मूल्य तय करता है, और बाज़ार का फैसला साफ़ है: गौरैया लगभग मुफ़्त है। परमेश्वर उस फैसले को चुनौती नहीं देते, वे उसे अप्रासंगिक बना देते हैं। उनकी दृष्टि किसी चीज़ के दाम पर नहीं, उसके अस्तित्व पर टिकी है। बाइबल में "भूल जाना" केवल याददाश्त का कमज़ोर होना नहीं है; यह संबंध तोड़ देना है, मुँह फेर लेना है। तो यीशु यह नहीं कह रहे कि परमेश्वर के पास अच्छी स्मृति है, बल्कि यह कि उनका ध्यान किसी से हटता ही नहीं। और इसका सीधा परिणाम यह है: जिस सृष्टिकर्ता की नज़र सबसे सस्ते जीव से नहीं हटती, उससे आपकी पीड़ा कभी छूट नहीं सकती। डर का इलाज परिस्थिति बदलना नहीं, बल्कि यह जानना है कि आप किसकी स्मृति में हैं।

जोड़ने वाला सूत्र

गौरैया का यह वाक्य उसी परमेश्वर के मुँह से आता है जो आगे चलकर स्वयं बाज़ार भाव में तौला जाएगा, तीस चाँदी के सिक्कों में। यह संयोग नहीं है कि जो व्यक्ति कह रहा है "परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता," वही कुछ ही महीनों बाद क्रूस पर छोड़ दिया गया-सा दिखेगा। मसीह का पूरा जीवन इसी बात का प्रमाण है कि परमेश्वर ऊपर से सहानुभूति नहीं भेजते, वे नीचे उतरकर सबसे सस्ती जगह पर खड़े हो जाते हैं। पुराने नियम का वह परमेश्वर जो भजनों में कौवों के बच्चों को भोजन देता है, वही यहाँ देह में खड़ा होकर अपने डरे हुए चेलों से कह रहा है कि तुम गिनती में हो। छुटकारे की पूरी कहानी इसी एक दावे पर टिकी है: परमेश्वर भूलते नहीं, इसलिए वे बचाने आते हैं।

आईना

आपका डर शायद इतना नाटकीय नहीं है जितना चेलों का था। आपको अदालत में नहीं घसीटा जा रहा। पर एक चुपचाप डर है जो आपको रात में जगाता है: कि आप गिने नहीं जाते। दफ़्तर में आपका काम किसी और के नाम से ऊपर चला जाता है। घर में आपकी थकान किसी को दिखती नहीं। आपने सालों एक बीमार माँ-बाप की सेवा की, और किसी ने पूछा तक नहीं। या फिर उल्टा डर है: कि अगर आप दिखना बंद कर दें, अगर आप थोड़ा कम कमाएँ, थोड़ा कम चमकें, तो आपकी कीमत गिर जाएगी। यही आपको उस बाज़ार से बाँधे रखता है जिसकी गौरैया दो पैसे की है। यीशु यहाँ आपकी कीमत नहीं बढ़ाते, वे तराज़ू ही तोड़ देते हैं। आपका होना किसी के ध्यान पर टिका है, और वह ध्यान हटता नहीं।

आज बाहर जाइए, या खिड़की खोलिए, और जब तक कोई पक्षी दिखाई न दे तब तक खड़े रहिए। फिर ज़ोर से, आवाज़ में, वह एक बात कहिए जो आपको लगता है किसी ने नोट नहीं की, और उसके बाद कहिए: "परमेश्वर इसे नहीं भूलते।"

पहली सुननेवाली भीड़

जो लोग यह सुन रहे थे, वे गौरैया का दाम जानते थे, क्योंकि उन्होंने उसे खरीदा था। मंदिर में बलि के लिए सबसे गरीब लोग यही छोटी चिड़ियाँ लाते थे; यह गरीबों का मांस था, बाज़ार के कोने की सबसे सस्ती चीज़। उस दौर में रोमी सत्ता और धार्मिक अगुवों की नज़र में गलील का एक मछुआरा भी लगभग इतना ही तुच्छ था। और इन्हीं लोगों से यीशु कुछ ही वाक्य पहले कह चुके थे कि शरीर को मार डालने वालों से मत डरो। यानी वे यह मान रहे हैं कि उनके श्रोताओं में से कुछ मारे जाएँगे। गौरैया की यह बात भोली नहीं, खूनी वास्तविकता के बीच बोली गई है: तुम बिक सकते हो, तुम मारे जा सकते हो, पर तुम भुलाए नहीं जाओगे।

एक बारीकी

ध्यान दीजिए, यीशु यह नहीं कहते कि परमेश्वर गौरैयों को नहीं भूलते। वे कहते हैं, "उनमें से एक को भी नहीं।" बहुवचन से निकलकर वे एकवचन पर आ जाते हैं, झुंड से उस एक पर जो झुंड में खो जाती है। यही उनकी शैली है: सौ में से एक भेड़, दस में से एक सिक्का। गिनती परमेश्वर के लिए औसत नहीं, व्यक्ति है। अगले ही वाक्य में वे इसे और बारीक कर देते हैं, सिर के बाल तक गिने हुए। यह आँकड़ों का नहीं, प्रेम का ब्योरा है, वैसा ही जैसा माँ अपने बच्चे के चेहरे का हर तिल जानती है। और इसका कड़वा-मीठा अर्थ यह है कि आपकी ज़िंदगी का वह हिस्सा भी गिना हुआ है जिसे आप किसी को दिखाना नहीं चाहते।

शास्त्र की गूँज

इसी अध्याय में थोड़ी देर बाद यीशु फिर पक्षियों की ओर लौटते हैं: "कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उनके भण्डार और न खत्ता होता है; फिर भी परमेश्वर उन्हें खिलाता है।" पहली बार पक्षी डर का इलाज हैं, दूसरी बार चिंता का। डर और चिंता एक ही जड़ के दो तने हैं, और दोनों की दवा एक ही है: परमेश्वर का ध्यान। और इसी शृंखला का अंत वहाँ होता है जहाँ यीशु कहते हैं, "हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे।" गौरैया से शुरू होकर बात राज्य पर खत्म होती है। जिसे दो पैसे की चिड़िया याद रहती है, उसी ने अपना राज्य आपके नाम कर दिया है।

चिंतन

आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा है जिसके बारे में आप भीतर ही भीतर मानते हैं कि वह किसी के ध्यान देने लायक नहीं, और आज की यह आयत उस हिस्से से क्या कहती है?

जिस डर को आप "व्यावहारिक समझदारी" कहकर उचित ठहराते हैं, अगर आप सचमुच मान लें कि परमेश्वर आपको एक पल के लिए भी नहीं भूलते, तो वह डर कहाँ ढह जाएगा?

Luke में और गहराई से जानें

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Luke For Everyone

N.T. Wright

Warm, readable commentary on the Gospel for outsiders and doubters.

The Message of Luke

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Follows Luke's careful account of the Savior for all nations.

Luke: An Introduction and Commentary

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Luke 12:6 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

लूका 12:6 का क्या अर्थ है?
यीशु अपने चेलों से डर के विषय में बात कर रहे हैं, और अचानक वे बाज़ार की ओर इशारा करते हैं। वहाँ गौरैयाँ बिकती हैं, पाँच की कीमत दो पैसे, इतनी सस्ती कि कोई गिनने की परवाह नहीं करता। और ठीक उसी तुच्छ चिड़िया को सामने रखकर वे कहते हैं: "फिर भी परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता।" एक भी नहीं। न उस एक को जो पिंजरे में बची रह गई, न उस एक को जो बिककर किसी की थाली तक पहुँची। यह वाक्य सांत्वना देने के लिए नहीं, बल्कि डर को उसकी जड़ से उखाड़ने के लिए कहा गया है, उन लोगों से जिन्हें आगे चलकर अदालतों और आराधनालयों में घसीटा जाने वाला था।
लूका 12:6 किस विषय में है?
गौरैया का यह वाक्य उसी परमेश्वर के मुँह से आता है जो आगे चलकर स्वयं बाज़ार भाव में तौला जाएगा, तीस चाँदी के सिक्कों में। यह संयोग नहीं है कि जो व्यक्ति कह रहा है "परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता," वही कुछ ही महीनों बाद क्रूस पर छोड़ दिया गया-सा दिखेगा। मसीह का पूरा जीवन इसी बात का प्रमाण है कि परमेश्वर ऊपर से सहानुभूति नहीं भेजते, वे नीचे उतरकर सबसे सस्ती जगह पर खड़े हो जाते हैं। पुराने नियम का वह परमेश्वर जो भजनों में कौवों के बच्चों को भोजन देता है, वही यहाँ देह में खड़ा होकर अपने डरे हुए चेलों से कह रहा है कि तुम गिनती में हो। छुटकारे की पूरी कहानी इसी एक दावे पर टिकी है: परमेश्वर भूलते नहीं, इसलिए वे बचाने आते हैं।
लूका 12:6 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज बाहर जाइए, या खिड़की खोलिए, और जब तक कोई पक्षी दिखाई न दे तब तक खड़े रहिए। फिर ज़ोर से, आवाज़ में, वह एक बात कहिए जो आपको लगता है किसी ने नोट नहीं की, और उसके बाद कहिए: "परमेश्वर इसे नहीं भूलते।"
लूका 12:6 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
ध्यान दीजिए, यीशु यह नहीं कहते कि परमेश्वर गौरैयों को नहीं भूलते। वे कहते हैं, "उनमें से एक को भी नहीं।" बहुवचन से निकलकर वे एकवचन पर आ जाते हैं, झुंड से उस एक पर जो झुंड में खो जाती है। यही उनकी शैली है: सौ में से एक भेड़, दस में से एक सिक्का। गिनती परमेश्वर के लिए औसत नहीं, व्यक्ति है। अगले ही वाक्य में वे इसे और बारीक कर देते हैं, सिर के बाल तक गिने हुए। यह आँकड़ों का नहीं, प्रेम का ब्योरा है, वैसा ही जैसा माँ अपने बच्चे के चेहरे का हर तिल जानती है। और इसका कड़वा-मीठा अर्थ यह है कि आपकी ज़िंदगी का वह हिस्सा भी गिना हुआ है जिसे आप किसी को दिखाना नहीं चाहते।
लूका 12:6 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा है जिसके बारे में आप भीतर ही भीतर मानते हैं कि वह किसी के ध्यान देने लायक नहीं, और आज की यह आयत उस हिस्से से क्या कहती है?
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Luke 12 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 52

पिता, जब तुझे चुनने की कीमत मेरे अपने घर में चुकानी पड़ती है, तब मुझे थाम ले। जिनसे मेरा मन नहीं मिलता, उनके लिए भी मेरे दिल में कड़वाहट न आए। मुझे सच्चाई में दृढ़ रख, पर प्रेम में कोमल भी। तू ही मेरे रिश्तों को संभाल।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 23

पिता, मैं अक्सर छोटी-छोटी ज़रूरतों की चिंता में उलझ जाता हूँ, जैसे सब कुछ मेरे ही हाथ में हो। याद दिला कि मेरा जीवन खाने और कपड़े से कहीं बढ़कर है, और उसे थामने वाले आप हैं। मेरे मन को शांत कर, ताकि मैं भरोसे के साथ आज का दिन जी सकूँ।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 12

पिता, धन्यवाद कि जब शब्द नहीं मिलते और गला सूख जाता है, तब भी मैं अकेला नहीं। तेरा वादा है कि पवित्र आत्मा उसी घड़ी सिखा देगा कि क्या कहना चाहिए। धन्यवाद कि मुझे पहले से रटना नहीं पड़ता, बस तुझ पर भरोसा रखना है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 38

यीशु कहते हैं, "चाहे वह दूसरे या तीसरे पहर में आए, और उन्हें ऐसा ही पाए, तो वे दास धन्य हैं।"

रात का दूसरा और तीसरा पहर, यानी वो समय जब नींद सबसे गहरी होती है। जब आँखें बंद करना सबसे आसान है। प्रभु उसी घड़ी की बात करते हैं।

तेरी थकान की घड़ी में भी क्या तेरा दीपक जल रहा है? क्या तू अब भी उसकी बाट जोह रहा है, जब हर कोई सो गया है?

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