बाइबल व्याख्या

मत्ती 4:7

बाइबल
यह वचन Narayan द्वारा समर्पित है· Yes

पाठ

मन्दिर के कंगूरे पर खड़े यीशु के सामने शैतान ने पवित्रशास्त्र खोल दिया है, भजन संहिता 91 का वह वचन जो स्वर्गदूतों के हाथों की सुरक्षा का वादा करता है। कूद जाओ, वह कहता है, और परमेश्वर को अपना वचन निभाने पर मजबूर कर दो। यीशु इस पर कोई नया तर्क नहीं गढ़ते, न ही वे भजन को झुठलाते हैं। वे केवल इतना कहते हैं: "यह भी लिखा है, 'तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।'" एक वचन के सामने दूसरा वचन रखकर वे दिखाते हैं कि पवित्रशास्त्र का एक टुकड़ा उठाकर उसे परमेश्वर के विरुद्ध हथियार बनाना, चाहे वह शब्दशः सही ही क्यों न हो, शास्त्र को पढ़ना नहीं बल्कि उसे तोड़ना है। कंगूरे से छलांग नहीं लगती; बहस वहीं समाप्त हो जाती है।

मर्म

परमेश्वर की परीक्षा लेने का अर्थ है उनसे प्रमाण माँगना, जबकि उन्होंने पहले ही अपना वचन दे दिया है। यह अविश्वास का सबसे धार्मिक दिखने वाला रूप है, क्योंकि यह वादों की भाषा बोलता है। यीशु व्यवस्थाविवरण 6:16 उठाते हैं, जो मस्सा की ओर इशारा करता है, जहाँ प्यासे इस्राएल ने पूछा था कि क्या परमेश्वर सचमुच हमारे बीच है या नहीं। वहाँ प्रश्न पानी का नहीं था, भरोसे का था। यहाँ भी प्रश्न सुरक्षा का नहीं, पुत्रत्व का है। शैतान बार-बार "यदि तू परमेश्वर का पुत्र है" कहता है, मानो पुत्रत्व कोई ऐसी चीज़ हो जिसे चमत्कार से सिद्ध करना पड़े। यीशु उस चारे को नहीं लेते। वे पहले ही यरदन में पिता की आवाज़ सुन चुके हैं, और जिसे वचन मिल चुका हो उसे प्रमाण की भूख नहीं रहती। यही अनुग्रह पर जीने का अर्थ है: परमेश्वर की सच्चाई को परखना नहीं, उस पर टिक जाना।

एक ही धागा

व्यवस्थाविवरण 6 उस पीढ़ी को दिया गया उपदेश है जो जंगल से निकलकर देश में घुसने वाली थी, और मूसा उन्हें उनके माता-पिता की सबसे बड़ी भूल याद दिलाते हैं: मस्सा, जहाँ प्यास ने भरोसे को शर्त में बदल दिया था। इस्राएल चालीस वर्ष जंगल में रहा और परीक्षा में गिरा; यीशु चालीस दिन जंगल में रहते हैं और खड़े रहते हैं। मत्ती यह समानता संयोग से नहीं रचते। यीशु यहाँ सच्चे इस्राएल की तरह खड़े हैं, वह पुत्र जो वही करता है जो पहला पुत्र न कर सका। और यही धागा आगे क्रूस तक जाता है, जहाँ उन्हें फिर नीचे उतरने की चुनौती मिलेगी। छुटकारे की पूरी कहानी इसी एक बिंदु पर टिकी है: कोई एक ऐसा हो जो परमेश्वर से प्रमाण माँगे बिना उन पर भरोसा करे, हमारी जगह पर।

दर्पण

हम शायद ही कभी कंगूरे पर खड़े होते हैं, पर सौदेबाज़ी की भाषा हमें खूब आती है। "अगर परमेश्वर ने माँ को चंगा कर दिया, तो मैं मानूँगा।" "अगर यह नौकरी मिल गई, तो समझूँगा कि वे साथ हैं।" हम जानबूझकर मूर्खतापूर्ण आर्थिक जोखिम उठाते हैं और उसे विश्वास कहते हैं, या रिश्तों में ऐसी परीक्षाएँ रचते हैं जिनमें दूसरा हारे ही हारे। इन सबके पीछे वही पुराना सवाल सुगबुगाता है जो मस्सा में था: क्या परमेश्वर सचमुच मेरे बीच हैं? शैतान का चारा यही है कि वह हमें हमारी असुरक्षा को पवित्रशास्त्र की पोशाक पहनाना सिखा देता है। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक शर्त लिखिए जो आपने चुपचाप परमेश्वर के सामने रखी है, उसके नीचे लिखिए "मुझे प्रमाण नहीं, वचन मिला है," और वह कागज़ फाड़ दीजिए।

प्रश्न

पर फिर गिदोन का ऊन? आहाज़ को तो स्वयं परमेश्वर ने कहा था कि चिन्ह माँग ले, और मलाकी में वे दशमांश के विषय में कहते हैं कि मुझे परखकर देखो। तो परीक्षा कब मना है और कब आमंत्रण? सीधा उत्तर यह है कि पहल किसकी है। जहाँ परमेश्वर स्वयं द्वार खोलते हैं, वहाँ चिन्ह माँगना बच्चे का हाथ बढ़ाना है; जहाँ हम द्वार तोड़ते हैं, वहाँ वह मुकदमा है जिसमें हम परमेश्वर को कठघरे में खड़ा करते हैं। पर ईमानदारी से कहूँ तो यह रेखा हमेशा साफ़ नहीं दिखती, और अपने ही मन में डर और भरोसे को अलग-अलग छाँट पाना कठिन है। शायद यही कारण है कि यीशु बहस नहीं करते, वे बस कूदते नहीं। कभी-कभी विश्वास का प्रमाण यही होता है कि आपने कुछ नहीं किया।

मुख्य पात्र

चालीस दिन का भूखा आदमी, अचानक एक चक्कर खिला देने वाली ऊँचाई पर खड़ा, और नीचे यरूशलेम की भीड़। एक ही छलांग से पूरा प्रश्न हल हो सकता था: उनकी पहचान, लोगों की स्वीकृति, सेवकाई की शुरुआत, सब एक झटके में। यीशु का उत्तर आश्चर्यजनक रूप से छोटा है, और यही उसकी ताक़त है। वे अपने पुत्र होने का बचाव नहीं करते, क्योंकि जिसे यरदन में पिता की आवाज़ मिल चुकी हो उसे अपनी पहचान उधार नहीं लेनी पड़ती। ध्यान दीजिए कि यीशु अपनी सामर्थ्य कभी अपने लिए नहीं वापरते; रोटी बनानी थी तो पाँच हज़ार के लिए बनाई, अपने लिए नहीं। यह वह परमेश्वर है जो अपनी शक्ति को दूसरों की ओर मोड़ देता है, और अपने लिए खाली हाथ रहना चुनता है।

अंतर्पाठ

तीन गूँजें यहाँ एक साथ बजती हैं। पहली, निर्गमन 17 का मस्सा, जहाँ पानी की कमी ने इस्राएल के मुँह से वह सवाल निकलवाया कि क्या यहोवा हमारे बीच है; व्यवस्थाविवरण 6:16 उसी घाव का नाम है, और यीशु उसी नाम को ढाल बनाते हैं। दूसरी, स्वयं भजन 91, जिसका वादा उस व्यक्ति से है जो परमेश्वर की छाया में बना रहता है, न कि उससे जो जानबूझकर गिरकर उन्हें पकड़ने पर मजबूर करता है; शैतान वाक्य सही उद्धृत करता है और भजन का हृदय काट देता है। तीसरी, और सबसे चुभने वाली, क्रूस, जहाँ यही शब्द फिर लौटते हैं कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो उतर आ। यीशु फिर नहीं उतरे। मरुभूमि में स्वर्गदूत आकर सेवा करने लगे; गुलगुता पर कोई नहीं आया, और वहीं हमारा उद्धार हुआ।

चिंतन

आपने किन शर्तों को विश्वास का नाम दे रखा है, और अगर परमेश्वर उन्हें कभी पूरा न करें तो क्या आपका भरोसा टिकेगा?

पवित्रशास्त्र का कौन-सा वचन आप अपने पक्ष में उद्धृत करते हैं, जिसका संदर्भ आपने कभी ध्यान से नहीं पढ़ा?

Matthew में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Matthew For Everyone, Part 1

N.T. Wright

Short, fresh readings that make Matthew feel newly written.

The Message of Matthew

Michael Green

The King and his kingdom, traced through the whole Gospel.

Matthew: An Introduction and Commentary

R.T. France

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Matthew

Michael Wilkins

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

The Message of the Sermon on the Mount

John Stott

Stott's classic on Matthew 5-7, the charter of the kingdom.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Matthew 4:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

मत्ती 4:7 का क्या अर्थ है?
मन्दिर के कंगूरे पर खड़े यीशु के सामने शैतान ने पवित्रशास्त्र खोल दिया है, भजन संहिता 91 का वह वचन जो स्वर्गदूतों के हाथों की सुरक्षा का वादा करता है। कूद जाओ, वह कहता है, और परमेश्वर को अपना वचन निभाने पर मजबूर कर दो। यीशु इस पर कोई नया तर्क नहीं गढ़ते, न ही वे भजन को झुठलाते हैं। वे केवल इतना कहते हैं: "यह भी लिखा है, 'तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।'" एक वचन के सामने दूसरा वचन रखकर वे दिखाते हैं कि पवित्रशास्त्र का एक टुकड़ा उठाकर उसे परमेश्वर के विरुद्ध हथियार बनाना, चाहे वह शब्दशः सही ही क्यों न हो, शास्त्र को पढ़ना नहीं बल्कि उसे तोड़ना है। कंगूरे से छलांग नहीं लगती; बहस वहीं समाप्त हो जाती है।
मत्ती 4:7 किस विषय में है?
व्यवस्थाविवरण 6 उस पीढ़ी को दिया गया उपदेश है जो जंगल से निकलकर देश में घुसने वाली थी, और मूसा उन्हें उनके माता-पिता की सबसे बड़ी भूल याद दिलाते हैं: मस्सा, जहाँ प्यास ने भरोसे को शर्त में बदल दिया था। इस्राएल चालीस वर्ष जंगल में रहा और परीक्षा में गिरा; यीशु चालीस दिन जंगल में रहते हैं और खड़े रहते हैं। मत्ती यह समानता संयोग से नहीं रचते। यीशु यहाँ सच्चे इस्राएल की तरह खड़े हैं, वह पुत्र जो वही करता है जो पहला पुत्र न कर सका। और यही धागा आगे क्रूस तक जाता है, जहाँ उन्हें फिर नीचे उतरने की चुनौती मिलेगी। छुटकारे की पूरी कहानी इसी एक बिंदु पर टिकी है: कोई एक ऐसा हो जो परमेश्वर से प्रमाण माँगे बिना उन पर भरोसा करे, हमारी जगह पर।
मत्ती 4:7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पर फिर गिदोन का ऊन? आहाज़ को तो स्वयं परमेश्वर ने कहा था कि चिन्ह माँग ले, और मलाकी में वे दशमांश के विषय में कहते हैं कि मुझे परखकर देखो। तो परीक्षा कब मना है और कब आमंत्रण? सीधा उत्तर यह है कि पहल किसकी है। जहाँ परमेश्वर स्वयं द्वार खोलते हैं, वहाँ चिन्ह माँगना बच्चे का हाथ बढ़ाना है; जहाँ हम द्वार तोड़ते हैं, वहाँ वह मुकदमा है जिसमें हम परमेश्वर को कठघरे में खड़ा करते हैं। पर ईमानदारी से कहूँ तो यह रेखा हमेशा साफ़ नहीं दिखती, और अपने ही मन में डर और भरोसे को अलग-अलग छाँट पाना कठिन है। शायद यही कारण है कि यीशु बहस नहीं करते, वे बस कूदते नहीं। कभी-कभी विश्वास का प्रमाण यही होता है कि आपने कुछ नहीं किया।
मत्ती 4:7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
तीन गूँजें यहाँ एक साथ बजती हैं। पहली, निर्गमन 17 का मस्सा, जहाँ पानी की कमी ने इस्राएल के मुँह से वह सवाल निकलवाया कि क्या यहोवा हमारे बीच है; व्यवस्थाविवरण 6:16 उसी घाव का नाम है, और यीशु उसी नाम को ढाल बनाते हैं। दूसरी, स्वयं भजन 91, जिसका वादा उस व्यक्ति से है जो परमेश्वर की छाया में बना रहता है, न कि उससे जो जानबूझकर गिरकर उन्हें पकड़ने पर मजबूर करता है; शैतान वाक्य सही उद्धृत करता है और भजन का हृदय काट देता है। तीसरी, और सबसे चुभने वाली, क्रूस, जहाँ यही शब्द फिर लौटते हैं कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो उतर आ। यीशु फिर नहीं उतरे। मरुभूमि में स्वर्गदूत आकर सेवा करने लगे; गुलगुता पर कोई नहीं आया, और वहीं हमारा उद्धार हुआ।
मत्ती 4:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पवित्रशास्त्र का कौन-सा वचन आप अपने पक्ष में उद्धृत करते हैं, जिसका संदर्भ आपने कभी ध्यान से नहीं पढ़ा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Matthew 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 5

पिता, कई बार परीक्षा पवित्र जगहों में भी आ खड़ी होती है, ऊँचाई पर ले जाकर मुझसे कहती है कि खुद को साबित करो। मुझे थामे रखिए, ताकि मैं आपको आज़माने की जगह आप पर भरोसा करूँ और चुपचाप आपके वचन पर टिका रहूँ।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

कंपनी?