समर्पण से मिलती नई शुरुआत
समर्पण और नई शुरुआत
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यहोशू 6:20, यूहन्ना 19:17, 2 राजा 2:13-14 and भजन संहिता 137:1-2.
☀ सुबह का पल
तब लोगों ने जयजयकार किया, और याजक नरसिंगे फूँकते रहे। और जब लोगों ने नरसिंगे का शब्द सुना तो फिर बड़ी ही ध्वनि से उन्होंने जयजयकार किया, तब शहरपनाह नींव से गिर पड़ी, और लोग अपने-अपने सामने से उस नगर में चढ़ गए, और नगर को ले लिया। (इब्रा. 11:30)
यहोशू 6:20
यरीहो की दीवारें तलवार से नहीं, खामोशी से गिरी थीं।
यरीहो एक पुराना, मजबूत किला-शहर था, यरदन नदी के पास खजूर के पेड़ों और खारे पानी के चश्मों के बीच बसा हुआ। इसकी मोटी मिट्टी की दीवारें उस समय की सबसे बड़ी सुरक्षा मानी जाती थीं। यह पहला शहर था जिसे इस्राएल को यरदन पार करने के बाद, प्रतिज्ञा के देश में घुसते ही, आमने-सामने मिलना था। यही वजह से यह जगह सिर्फ एक लड़ाई नहीं, एक शुरुआत थी।
छह दिन तक इस्राएल ने कुछ नहीं किया सिवाय चलने के। कोई युद्ध-नारा नहीं, कोई हथियार नहीं उठाया, सिर्फ याजकों के तुरहियों की आवाज़ और पाँवों की धूल। सातवें दिन सात बार शहर के चारों ओर घूमने के बाद ही आवाज़ आई, और दीवार गिर पड़ी।
यह जगह याद दिलाती है कि हर जीत शोर से नहीं आती। कभी-कभी परमेश्वर का काम खामोश आज्ञाकारिता में छिपा होता है, उस चलने में जिसका मतलब उस वक्त कुछ समझ नहीं आता। दीवार के गिरने से पहले चलना ही विश्वास का काम था।
आज सुबह जो दीवार तुझे बड़ी और अटूट दिख रही हो, हो सकता है उसके गिरने से पहले तुझसे सिर्फ चलना और भरोसा रखना ही माँगा जा रहा हो, शोर नहीं।
आज
घर से निकलने से पहले एक मिनट रुक, खामोशी में उस एक दीवार का नाम ज़ोर से बोल जो आज तुझे रोके हुए है, फिर बिना जल्दबाज़ी के अपना पहला कदम बढ़ा।
✦ दोपहर का पल
तब वे यीशु को ले गए। और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो ‘खोपड़ी का स्थान’ कहलाता है और इब्रानी में ‘गुलगुता’।
यूहन्ना 19:17
किसी जगह के नाम को हम अक्सर बस एक पहचान मानते हैं, नक्शे पर लगा एक ठप्पा, जिसका असली मतलब कभी का भुला दिया गया होता है। पर यूहन्ना उस पहाड़ी का नाम लिखते ही रुक जाता है, जैसे यह नाम खुद कुछ कहना चाहता है, अनुवाद माँगता है।
गुलगुता एक इब्रानी या अरामी शब्द था, जिसका सीधा अर्थ है खोपड़ी। शायद उस पहाड़ी का आकार खोपड़ी जैसा था, या शायद यह नाम इसलिए पड़ा कि वहाँ मृत्यु हमेशा मौजूद रहती थी, वह जगह फाँसी और क्रूस के लिए जानी जाती थी। यूहन्ना इस विदेशी शब्द का अनुवाद करता है, ताकि उसके यूनानी पाठक भी समझ सकें कि यह कोई साधारण नाम नहीं है।
इस जगह का नाम किसी ने मुलायम नहीं किया। इसे सुंदर नहीं बनाया गया, इसे कोई और नाम नहीं दिया गया जो सच्चाई को ढँक दे। वह जगह खोपड़ी की जगह कहलाती रही, क्योंकि वहाँ जो होता था वही होता था, मृत्यु।
यीशु अपना क्रूस उठाए हुए ठीक उस जगह गए, जिसका नाम मृत्यु के लिए ही रखा गया था। उन्होंने रास्ता नहीं बदला, नाम को नरम नहीं किया।
आज
आज के काम के बीच हम अक्सर कठिन बातों को हल्के शब्दों में लपेट देते हैं। आज एक ऐसी बात को कागज़ पर लिखो, जिसे तुम टाल रहे हो, और उसे उसके सही, सीधे नाम से लिखो, बिना मुलायम किए। फिर उसे भगवान के सामने उसी सीधे शब्द में कह दो।
◐ दोपहर का पल
He took up Elijah's mantle that fell from him, and went back, and stood by the bank of the Jordan. He took Elijah's mantle that fell from him, and struck the waters, and said, "Where is Yahweh, the God of Elijah?" When he had also struck the waters, they were divided apart, and Elisha went over.
2 राजा 2:13-14
गिरा। यही शब्द ठहरने पर मजबूर करता है। कोई विदाई भाषण नहीं, कोई हाथ रखकर आशीष देने की रस्म नहीं, कोई अंतिम निर्देश नहीं। एलिय्याह बवंडर में उठा लिया गया, और उसका कपड़ा बस नीचे गिर गया। कोई इसे उठाकर देता नहीं, वह अपने आप गिरता है।
यह मोटा, बालों वाला ऊनी वस्त्र भविष्यवक्ता की रोज़ की पोशाक थी, धूप और सर्दी से बचाने वाला, कभी बिछौना, कभी ढाल। यही वह चादर थी जिसे एलिय्याह ने कुछ देर पहले यरदन के पानी पर मारा था, और पानी दो भाग हो गया था। एक साधारण, रोज़ इस्तेमाल होने वाली चीज़, जिसमें अचानक परमेश्वर की शक्ति दिखी।
एलीशा के सामने अब वही चादर पड़ी है, ज़मीन पर, बेजान। कोई प्रमाण नहीं कि उठाने से वही सामर्थ्य आएगी। फिर भी वह उठाता है, चलता है, पानी पर मारता है, और पूछता है, यहोवा, एलिय्याह का परमेश्वर कहाँ है। सवाल पूछते हुए ही वह आगे बढ़ता है, जवाब मिलने से पहले।
बुलाहट कभी पूरी समझ के साथ नहीं आती। जो हाथ में गिरा है उसे उठाना, बिना यकीन के, यही अक्सर विश्वास का पहला कदम है।
आज
आज कोई एक ज़िम्मेदारी या काम है जिसे तुम टालते रहे हो क्योंकि यकीन नहीं है कि तुम में वह सामर्थ्य है। उसे अभी अगले दस मिनट में शुरू करो, बिना यह जाने कि आगे क्या होगा।
☾ संध्या का क्षण
बाबेल की नदियों के किनारे हम लोग बैठ गए, और सिय्योन को स्मरण करके रो पड़े! उसके बीच के मजनू वृक्षों पर हमने अपनी वीणाओं को टाँग दिया;
भजन संहिता 137:1-2
बाबेल शहर के चारों ओर फरात नदी से खींची गई कृत्रिम नहरों का जाल फैला था, चौड़ी, धीमी बहती धाराएँ जो खेतों को सींचती और शहर को जिंदा रखती थीं। किनारों पर बेंत और मिट्टी की गंध थी, और घने बिरवे के पेड़ पानी पर झुके रहते थे। यही वह जगह थी जहाँ यरूशलेम से उठाए गए बंदी आकर बैठते थे।
यह नदी घर की नदी नहीं थी। यरदन नहीं, वह पहाड़ नहीं जिस पर मंदिर खड़ा था। यह पराए राज्य की समृद्ध, अजनबी धरती थी, जहाँ सब कुछ था, सिवाय उनके अपने घर के। और वहीं बैठकर उन्होंने अपने वादन के यंत्र उतार दिए। गाना नहीं आया, सिर्फ याद आई।
यह जगह इसलिए मायने रखती है क्योंकि वहाँ दुख को छिपाया नहीं गया। बहता पानी शायद उन्हें अपने घर की नदियों की याद दिलाता, और वही याद उनके आँसुओं में बदल गई। परमेश्वर के लोगों ने प्रार्थना के लिए मंदिर जाने का इंतजार नहीं किया, उन्होंने नहर के किनारे ही अपना दुख उंडाल दिया।
आज भी कोई शाम को किसी अजनबी जगह पर बैठा हो सकता है, दूर किसी घर से, किसी प्रिय व्यक्ति से, किसी पुराने जीवन से। इस स्थान की सच्चाई यही सिखाती है कि यहोवा के सामने रोना कमजोरी नहीं, वही जगह भी आराधना का हिस्सा बन सकती है।
आज
आज शाम कुछ मिनट किसी पानी के बहने की आवाज़ के पास बैठें, नल खोलें, किसी बर्तन में पानी डालें, या खिड़की से बूँदें देखें, और धीरे से उस एक बात या व्यक्ति का नाम यहोवा से कहें जिसे आज आप दूर महसूस करते हैं।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
20तब लोगों ने जयजयकार किया, और याजक नरसिंगे फूँकते रहे। और जब लोगों ने नरसिंगे का शब्द सुना तो फिर बड़ी ही ध्वनि से उन्होंने जयजयकार किया, तब शहरपनाह नींव से गिर पड़ी, और लोग अपने-अपने सामने से उस नगर में चढ़ गए, और नगर को ले लिया। (इब्रा. 11:30)
17तब वे यीशु को ले गए। और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो ‘खोपड़ी का स्थान’ कहलाता है और इब्रानी में ‘गुलगुता’।
1बाबेल की नदियों के किनारे हम लोग बैठ गए, और सिय्योन को स्मरण करके रो पड़े!
2उसके बीच के मजनू वृक्षों पर हमने अपनी वीणाओं को टाँग दिया;
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें