सच्चाई से आनंद तक का सफर
सच्चाई और आनंद
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए लैव्यव्यवस्था 19:35-36, प्रेरितों के काम 16:33, नहेमायाह 2:5 and लूका 15:9.
☀ सुबह का पल
“तुम न्याय में, और परिमाण में, और तौल में, और नाप में, कुटिलता न करना। सच्चा तराजू, धर्म के बटखरे, सच्चा एपा, और धर्म का हीन तुम्हारे पास रहें; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ जो तुम को मिस्र देश से निकाल ले आया।
लैव्यव्यवस्था 19:35-36
बाज़ार की भीड़ में एक हाथ अपने थैले में टटोलता है, पत्थर के बटखरे खनकते हैं, धूल में तराजू का पलड़ा धीरे धीरे झूलता है। कोई ग्राहक पूछता नहीं कि बटखरा सही है या नहीं, वह बस भरोसा करता है।
यही वह जगह है जहाँ यह आज्ञा उतरती है। यह किसी बड़े युद्ध या मंदिर की भेंट की बात नहीं करती, यह एक थैले में रखे पत्थरों की बात करती है। कोई देख नहीं सकता था कि बटखरा हल्का है या भारी, इसलिए परमेश्वर ने कहा कि तराजू ठीक हों।
यह आज्ञा उस गरीब विधवा के लिए थी जो अनाज तौलवाने आई थी, उस परदेशी के लिए जो भाषा भी ठीक से नहीं जानता था। उनके पास जाँचने का कोई साधन नहीं था, उनकी रक्षा केवल दुकानदार की ईमानदारी में थी।
और परमेश्वर अपना नाम उसी ईमानदारी के साथ जोड़ता है, मैं वही यहोवा हूँ जो तुम्हें मिस्र से निकाल लाया। जिस परमेश्वर ने गुलामी से छुड़ाया, वह अब चाहता है कि कोई बाज़ार में छोटी सी गुलामी भी न सहे, कोई चुपचाप ठगा न जाए।
शनिवार को अक्सर हम दुकान जाते हैं, कुछ खरीदते हैं, पैसे गिनते हैं। यह आज्ञा बताती है कि परमेश्वर की नज़र उतनी ही गहरी है जितनी छोटी बात में, जितनी बड़ी।
आज
आज जब आप कहीं भी भुगतान करें या पैसे वापस लें, जानबूझकर पूरा और सही हिसाब दें, भले ही दूसरा पक्ष गिनती में चूक जाए।
✦ दोपहर का पल
और रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जाकर उनके घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्त बपतिस्मा लिया।
प्रेरितों के काम 16:33
शनिवार दोपहर, बगीचे में खेलते-खेलते बच्चे का घुटना छिल गया है। तुम उसे गोद में बिठाकर घुटना धोते हो, धीरे-धीरे, जैसे वह दर्द तुम्हारा अपना हो।
फिलिप्पी की जेल में एक दारोगा था, जिसकी नौकरी का मतलब था अपनी जान दांव पर रखना। रोमी कानून के अनुसार अगर कोई कैदी भाग जाता, तो पहरेदार को उसकी जगह सजा मिलती। उसी रात एक भूकंप आया, दरवाजे खुल गए, और उसने समझा सब कैदी भाग गए हैं। वह तलवार निकालकर अपने आप को मारने जा रहा था।
पौलुस और सीलास अब भी वहीं खड़े थे। उस रात दारोगा का जीवन बदल गया। और फिर एक अनोखी बात हुई, वही हाथ जिन्होंने दिन में उन दोनों को कोड़े लगवाए थे, अब रात में झुककर उनके घावों को धो रहे थे।
यही बदलाव सबसे छोटा नहीं, सबसे बड़ा है। विश्वास केवल शब्दों में नहीं रहा, वह हाथों में उतर आया। जिसने चोट दी थी, अब वही मरहम लगा रहा था। कभी-कभी परिवर्तन का सबूत यही होता है, जिस व्यक्ति को तुम नजरअंदाज या कठोरता से बरतते थे, उसके लिए अब कोई ठोस काम करने की इच्छा जाग उठे।
आज
आज दोपहर में किसी एक व्यक्ति के लिए अपने हाथों से एक ठोस काम करो, उसके बर्तन धो दो, उसका कोई अधूरा काम पूरा कर दो, या उसके लिए कुछ बना दो। शब्द मत कहो, सिर्फ करो।
◐ दोपहर का पल
“यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कब्रों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊँ।”
नहेमायाह 2:5
चाय का कप हाथ में है, पर घूंट अभी लिया नहीं गया। बीच का यही पल, जहाँ कुछ अभी हुआ नहीं और कुछ अभी कहा नहीं गया, वही पल है जिसमें आज की बात छिपी है।
नहेमायाह राजा अर्तक्षत्र का प्याला पकड़नेवाला था, एक ऐसा पद जहाँ चेहरे पर उदासी दिखना खतरनाक हो सकता था। फिर भी राजा ने उसका चेहरा पढ़ लिया और पूछ बैठा कि वह क्या चाहता है। यह सवाल बिना चेतावनी के आया था।
और यहीं कुछ अनोखा हुआ। राजा के सवाल और नहेमायाह के उत्तर के बीच, उसी सेकंड में, उसने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना की। न आँखें बंद करने का समय था, न हाथ जोड़ने का। यह प्रार्थना राजसभा के बीचोंबीच, एक सांस जितनी देर में हुई।
यह अचानक नहीं आया। इससे पहले कई रातें उसने उपवास और विलाप में बिताई थीं। वह पल की प्रार्थना उन हफ्तों की प्रार्थना से ही निकली थी। सवाल यह है कि क्या हमारे भीतर वैसी कोई तैयार परत है, जो अचानक पूछे गए सवाल के नीचे भी परमेश्वर की ओर मुड़ सके, या हमारी प्रार्थना सिर्फ तब आती है जब समय मिले।
आज
आज कोई समय निकालकर एक छोटा वाक्य कागज़ पर लिख लो, जैसे हे परमेश्वर, अभी बुद्धि दे, और उसे अपनी जेब या फोन में रख लो, ताकि आज जब कोई अचानक कठिन सवाल पूछे, तुम्हारे पास पहले से एक तैयार प्रार्थना हो।
☾ संध्या का क्षण
और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनों को इकट्ठा करके कहती है, कि ‘मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्का मिल गया है।’
लूका 15:9
वह औरत शायद रात के खाने की तैयारी बीच में छोड़कर घुटनों के बल फर्श पर बैठ गई होगी, हाथ में दीया लिए, हर कोने में झांकते हुए। दस सिक्कों में से एक गायब था, और उस समय ऐसे सिक्के अक्सर किसी महिला के विवाह के गहनों का हिस्सा होते थे, उसके सिर पर पहनी माला में जड़े हुए। एक सिक्का खोना मतलब सिर्फ पैसा नहीं, अपनी पहचान का एक टुकड़ा खोना था।
जो बात अक्सर छूट जाती है वह है उसकी मेहनत। वह सिर्फ प्रार्थना करके नहीं बैठी, उसने दीया जलाया, घर बुहारा, ध्यान से ढूंढा, जब तक मिल नहीं गया। एक छोटे से मिट्टी के घर में, जहां खिड़कियां न के बराबर होती थीं, दीये की रोशनी में हर कोना टटोलना आसान काम नहीं था।
और जब मिल गया, तो वह अकेली खुश नहीं हुई। उसने पड़ोसिनों को बुलाया, सबको साथ में आनन्द करने के लिए कहा। यही वह जगह है जहां यह कहानी आज भी हमें छूती है, परमेश्वर की खुशी अकेली नहीं रहती, वह बांटी जाती है।
आज शनिवार की शाम को यह सोचना अच्छा है, क्या कोई छोटी सी बात है जो आज मिली, सुलझी, या ठीक हुई, जिसे किसी के साथ बांटा जा सकता है।
आज
आज शाम घर में एक दीया या मोमबत्ती जलाएं, और किसी परिवार के सदस्य या दोस्त को फोन करके आज की एक छोटी सी अच्छी बात बताएं, और उनसे कहें, 'मेरे साथ आनन्द करो।'
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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35“तुम न्याय में, और परिमाण में, और तौल में, और नाप में, कुटिलता न करना।
36सच्चा तराजू, धर्म के बटखरे, सच्चा एपा, और धर्म का हीन तुम्हारे पास रहें; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ जो तुम को मिस्र देश से निकाल ले आया।
33और रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जाकर उनके घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्त बपतिस्मा लिया।
5“यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कब्रों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊँ।”
9और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनों को इकट्ठा करके कहती है, कि ‘मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्का मिल गया है।’
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