परमेश्वर की देखभाल कभी नहीं चूकती
पिता की देखभाल
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए मत्ती 10:29,31, 1 राजा 19:4, मत्ती 20:13-14 and गिनती 17:8.
☀ सुबह का पल
क्या दो गौरैये एक पैसे में नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्छा बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिरती... इसलिये डरो मत; तुम तो बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।
मत्ती 10:29,31
बाज़ार की एक टोकरी में बंधी हुई छोटी भूरी चिड़ियाँ, पंख फड़फड़ाती, आपस में दबी हुई। गलील के बाज़ारों में ऐसी गौरैयाँ गरीब लोगों के भोजन के लिए सस्ते में बेची जाती थीं, इतनी सस्ते कि दो गौरैयों की कीमत एक छोटे ताँबे के सिक्के से ज़्यादा नहीं थी, जो एक मज़दूर की दिन भर की मजूरी से भी बहुत कम था। किसी व्यापारी ने उनकी गिनती तक नहीं रखी होगी, बेच दिया, भूल गया।
यीशु यही तस्वीर उठाते हैं जब वे अपने चेलों से डर की बात करते हैं। जो चीज़ मनुष्यों की नज़र में सबसे कम मोल की है, पिता की आँख उस पर से भी नहीं हटती। एक गौरैया ज़मीन पर गिरे, वह जानता है। यह किसी भावुक बात के लिए नहीं कहा गया, यह बताने के लिए कहा गया कि पिता का ध्यान उतना छोटा नहीं जितना बाज़ार का तराज़ू।
आज सुबह जो चिंता तुम्हारे मन में सबसे पहले आती है, वह शायद तुम्हें खुद भी छोटी लगे, ऐसी कि किसी को बताने लायक भी न हो। बस यही फर्क है, वह पिता की नज़र से बाहर नहीं है।
आज
आज सुबह घर से निकलने से पहले, एक छोटी सी बात जो तुम्हें परेशान कर रही है, उसे ज़ोर से बोल दो, और फिर कहो, 'परन्तु मैं गौरैयों से बढ़कर हूँ।'
✦ दोपहर का पल
परन्तु वह आप जंगल में एक दिन के मार्ग तक जाकर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, और यह कहकर अपने प्राण का अन्त चाहा, बस है; अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ।
1 राजा 19:4
क्या तुमने कभी किसी काम के ठीक बाद, जब सब ठीक से निपट गया हो, अचानक भीतर से टूट जाना चाहा है?
एलिय्याह अभी कर्मेल पर्वत पर बड़ी जीत देखकर आया था। आग आसमान से उतरी, लोग झुक गए, बाल के पुजारी हार गए। पर अगले ही दिन वह ईज़ेबेल की धमकी सुनकर भाग खड़ा हुआ, एक दिन के मार्ग तक जंगल में गया, और एक झाऊ के पेड़ के नीचे बैठ गया। यह पेड़ कोई बड़ा छायादार वृक्ष नहीं था, रेगिस्तान की एक कंटीली झाड़ी थी, थोड़ी सी छाया देने वाली, थके हुए यात्रियों के लिए जाना-पहचाना आसरा। वहीं उसने कहा, बस है, मेरा प्राण ले ले।
यह बात चौंकाती है कि इतना बड़ा नबी, जिसने अभी-अभी परमेश्वर की शक्ति देखी थी, अगले ही पल में टूट गया। सेवा करना किसी को थकान और डर से बचा नहीं लेता। बड़ी जीत के बाद भी भीतर खाली हो जाना मुमकिन है।
आज के काम के बीच कभी ऐसा पल आता है जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है पर भीतर कुछ बचा नहीं रहता। एलिय्याह की बात सुनना यह सिखाता है कि यह कहना गलत नहीं, बस है। इसे छुपाना ज़रूरी नहीं। परमेश्वर ने उसे वहीं डाँटा नहीं, पहले सोने दिया।
आज
आज दोपहर के भोजन में पाँच मिनट अकेले बैठो, फोन दूर रखो, और ज़ोर से एक वाक्य कहो, बस है, आज इतना ही मुझसे हो सकता है। फिर वापस काम पर लौटो।
◐ दोपहर का पल
उसने उनमें से एक को उत्तर दिया, ‘हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तूने मुझसे एक दीनार न ठहराया? जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूँ।
मत्ती 20:13-14
मालिक उस शिकायत करने वाले मज़दूर को "मित्र" कहकर पुकारता है। यह शब्द अटपटा लगता है। जो झगड़ा कर रहा है, जो अन्याय का आरोप लगा रहा है, उसे "मित्र" कहना कोई साधारण बात नहीं। यह डांट नहीं, फिर भी इसमें एक सीधी बात है, जो टाली नहीं जा सकती।
एक दीनार उस समय एक दिन की मज़दूरी थी, बस उतनी जिससे एक मज़दूर अपने परिवार के लिए उस दिन की रोटी जुटा सके। न ज़्यादा, न कम। यह आंकड़ा जीवन और भूख के बीच की एक पतली रेखा थी। जिसने सुबह से काम किया और जिसे शाम को बुलाया गया, दोनों को वही एक दीनार मिला।
यह हिसाब बिगड़ता हुआ लगता है। घंटों की मेहनत का हिसाब, घंटों के पसीने का हिसाब, अचानक बेमानी हो जाता है। मालिक का तर्क यह नहीं कि मेहनत मायने नहीं रखती, बल्कि यह कि उसकी उदारता किसी तराजू से नहीं नापी जा सकती।
यह सवाल आज भी खुला रहता है, जब हम अपने घंटों को, अपने योगदान को दूसरों के सामने तौलते हैं। पाठ इसका जवाब तुरंत नहीं देता, बस इतना दिखाता है कि मालिक की नज़र अलग नाप से देखती है।
आज
आज किसी ऐसे व्यक्ति का नाम लिखें, जिसकी मेहनत या हिस्सेदारी आपको अपने से कम लगती है, और उसके लिए खुले दिल से प्रार्थना करें, उसका नाम बोलकर।
☾ संध्या का क्षण
दूसरे दिन मूसा साक्षीपत्र के तम्बू में गया; तो क्या देखा, कि हारून की छड़ी जो लेवी के घराने के लिये थी उसमें कलियाँ फूट निकली, उसमें कलियाँ लगीं, और फूल भी फूले, और पके बादाम भी लगे हैं।
गिनती 17:8
बादाम। इस्राएल में हर साल सबसे पहले खिलने वाला वृक्ष। जब बाकी पेड़ अब भी सर्दी की नींद में होते हैं, बादाम का पेड़ जाग उठता है, फूल दे देता है। यही वह शब्द है जो इस रात की छड़ी से उठता है।
वह छड़ी कोई अद्भुत चीज़ नहीं थी। एक कटा हुआ डंडा, सूखी लकड़ी, जैसी हर गोत्र के प्रधान के पास होती थी, चलने के लिए, भेड़ों को हांकने के लिए, अधिकार दिखाने के लिए। काटी हुई लकड़ी में जड़ नहीं होती, मिट्टी नहीं होती, जीवन का कोई स्रोत नहीं होता। वह बस औज़ार होती है।
मूसा ने बारह छड़ियां रातभर के लिए साक्षीपत्र के तम्बू में रख दीं। कोई हाथ नहीं लगा, कोई प्रयास नहीं हुआ, सिर्फ अंधेरा और प्रतीक्षा। और सुबह, हारून की सूखी छड़ी में कलियां, फूल, और पक्के बादाम थे, एक ही रात में, एक साथ, तीन अवस्थाएं जो स्वाभाविक रूप से कभी एक साथ नहीं आती।
आज का दिन भी एक छड़ी की तरह रहा होगा, थका देने वाला, सीधा, उपयोगी पर जीवनहीन लगने वाला। शाम का यह क्षण वैसा ही अंधेरा और प्रतीक्षा है। जो आज सूखा रहा, वह परमेश्वर के हाथ से बाहर नहीं है। रात में भी वह जीवन दे सकता है जहां हमें कुछ दिखता नहीं था।
आज
एक कागज़ पर आज के दिन की किसी एक सूखी, निर्जीव बात को लिख दो, जो काम बन नहीं पाया या जो रिश्ता थका हुआ लगा, और उस कागज़ को अपने बिस्तर के पास रातभर के लिए रख दो, जैसे वे छड़ियां साक्षीपत्र के आगे रखी गई थीं।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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13उसने उनमें से एक को उत्तर दिया, ‘हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तूने मुझसे एक दीनार न ठहराया?
14जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूँ।
8दूसरे दिन मूसा साक्षीपत्र के तम्बू में गया; तो क्या देखा, कि हारून की छड़ी जो लेवी के घराने के लिये थी उसमें कलियाँ फूट निकली, उसमें कलियाँ लगीं, और फूल भी फूले, और पके बादाम भी लगे हैं।
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